- May 12, 2026
उत्तराखंड का नैनीताल पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है, जहां खूबसूरत वादियां और सर्द हवाओं की शीतल बयार तन मन को प्रफुल्लित करती है। अगर आप भी लंबी छुट्टियों के बजाए वीकेंड में यहां घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो यह आर्टिकल आपके बेहद काम का है जहां आप दो दिनों में भी यहां काफी कुछ एक्सप्लोर कर सकते हैं, जरूरत है बस यात्रा की योजनाबद्ध तैयारी की। इससे आप यहां कम समय में भरपूर मनोरंजन करने के साथ ही यादगार अनुभवों को सहेज सकते हैं। आइए जानते हैं- नैनीताल की दो दिन की यात्रा किस तरह सर्वोत्तम यात्राओं में शुमार हो सकती है।
कैसे पहुंचे नैनीताल
पर्यटन दृष्टि से लोकप्रिय नैनीताल पहुंचने के लिए सड़क मार्ग के अलावा अन्य भी कई विकल्प है जहां आप वायुमार्ग और रेलमार्ग के माध्यम से भी नैनीताल से पहुंच सकते हैं। यद्यपि नैनीताल पहाड़ी इलाका होने के कारण हवाई अड्डे और रेल मार्ग से थोड़ी दूरी पर है। इसके अलावा नैनीताल सड़क माध्यम से भली भांति जुड़ा हुआ है, आइए जानते हैं नैनीताल पहुंचने के लिए क्या क्या विकल्प है।
हवाई मार्ग से
नैनीताल के सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पंतनगर है जहां से नैनीताल की दूरी करीब 70 किमी है। लेकिन यहां से अधिकतर चार्टड उड़ाने ही संचालित होती हैं। दिल्ली एयरपोर्ट से पंतनगर हवाई अड्डे तक सीधी उड़ान सेवा मिल जाती है। अगर आप दिल्ली के अलावा किसी और शहर से नैनीताल की यात्रा हवाई मार्ग से करना चाहते हैं तो सबसे पहले उक्त शहर जैसे मुंबई, कोलकाता, जयपुर से दिल्ली एयरपोर्ट तक आ सकते हैं और फिर यहां से पंतनगर एयरपोर्ट तक पहुंच सकते हैं या फिर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचकर सड़क मार्ग से भी नैनीताल तक का सफर तय कर सकते हैं।
रेल मार्ग से
नैनीताल पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है जहां से नैनीताल की दूरी 34 किमी है। काठगोदाम स्टेशन के लिए देहरादून और दिल्ली से सीधी ट्रेन है जो लगभग 6-7 घंटे के समय अन्तराल पर काठगोदाम पहुंचा देती है लेकिन कई जगहों से काठगोदाम के लिए सीधी ट्रेन नहीं है इसके लिए आपको पहले दिल्ली या देहरादून आना होगा, जहां से आप काठगोदाम के लिए रेल सुविधा प्राप्त कर सकते है। काठगोदाम पहुंचकर नैनीताल पहुंचने के लिए कैब या बस की सेवा आसानी से मिल जाती है।
सड़क मार्ग से
नैनीताल पहुंचने का एकमात्र विकल्प सड़क मार्ग सीधे आपको नैनीताल से जोड़ता है। यहां पहुंचने के लिए देश के प्रमुख शहरों से बस या कैब के माध्यम से नैनीताल पहुंच सकते हैं। दिल्ली से नैनीताल जाने का सड़क मार्ग बेहतर विकल्प है जहां सड़क दूरी लगभग 320 किमी है, इसे सड़क मार्ग से तय करने में 8-9 घंटे लग सकते हैं। नैनीताल नेशनल हाईवे 87 के जरिए पूरे देश से कहीं से भी जाया जा सकता है।
नैनीताल में 2 दिनों में घूमने के लिए सर्वश्रेष्ठ यात्रा कार्यक्रम
नैनीताल प्रसिद्ध पर्यटन आकर्षण है जहां आप नैनीताल की सुखद यात्रा कर सकते हैं
यात्रा शुरूआती बिन्दु : नैनीताल बस स्टेशन
यात्रा की अवधि : 2 दिन
⇒ दिन 1 : नैनी झील - नैना देवी मंदिर - स्नो व्यू पॉइंट - नैनीताल चिड़ियाघर - मॉल रोड
नैनी झीलः नैनीताल का मुख्य आकर्षण नैनी झील मीठे पानी की प्राकृतिक झील है जो नैनीताल के मुख्य पर्यटन स्थलों में गिनी जाती है। शहर के मध्य में स्थित इस झील को खोजने का श्रेय सबसे पहले 1839 में पी. बैरन को जाता है, जिन्हें नैनीताल आने वाला पहला व्यक्ति माना जाता है। समुद्र तल से करीब 2,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह झील कुमाऊं पहाड़ियों में स्थित चार झीलों में प्रमुख है। नैनीताल के बाकी तीन झील सातताल झील, भीमताल झील और नौकुचियाताल झील है। चंद्रमा के आकार में बनी नैनी झील यहां की तीसरी सबसे बड़ी झील है। नैनी झील के दक्षिण पूर्वी सिरे पर मौजूद बहाव कुमांउ की अन्य झीलों के साथ कनेक्ट है। इस झील के उत्तरी किनारे पर मल्लीताल और दक्षिणी छोर पर तल्लीताल है, झील का क्षेत्रफल लगभग 48 एकड़ है।
इस झील से जुड़ी मान्यता है कि इस झील को तीन ऋषियो अत्रि, पुलस्त्य और पुलह द्वारा बनाया गया था जो यहां तपस्या करने के उद्देश्य से आए थे तब यहां पहुंचकर उन्हें प्यास लगी इसलिए उन्होनें यहां गहरा गड्ढा खोदा और इसमें मानसरोवर से लाए गए जल को भर दिया। इस झील का जिक्र स्कंद पुराण में भी मिलता है, जिसे त्रिशूल सरोवर नाम से भी जाना जाता है। यहां आप नौका विहार और नौकायन का आनंद ले सकते हैं। पेडल और रोइंग दोनो तरह की नाव यहां मिलती है।
- यात्रा अवधिः 1-2 घंटे
- समयः सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्कः कुछ नहीं, नौकायन शुल्क लगता है।
- नैनीताल बस स्टैंड से दूरी : लगभग 1.5 किमी है।
नैना देवी मंदिरः नैनीताल बस स्टैड से करीब 2 किमी की दूरी पर स्थित नैना देवी मंदिर प्रतिष्ठित शक्तिपीठ है जहां माना जाता है कि यहां देवी सती का एक नेत्र गिरा था। नैनी झील के उत्तरी छोर पर स्थित यह मंदिर नैनी झील की यात्रा करने के बाद या पहले इस मंदिर में दर्शन के लिए आया जा सकता है। मंदिर निर्माण के बारें में बताया जाता है कि इस मंदिर को 15वीं शताब्दी में तैयार किया गया था जो एक भूस्खलन की वजह से 1880 में दोबारा बनवाया गया था, जिसका वर्तमान स्वरूप 1883 में बनवाया गया था।
मंदिर के अंदर तीन देवताओं के दर्शन प्राप्त होते हैं। सबसे बाईं ओर माता काली देवी विराजमान हे जिन्हें नैना देवी की दो आंखों का मध्य भाग है। दाईं ओर भगवान हनुमान की प्रतिमा स्थापित है। मुख्य मंदिर दो शेरों की मूर्तियों से और भी ज्यादा भव्यता प्रस्तुत करता है। नैना देवी मंदिर में नंदा अष्ठमी, नवरात्रियो ंमें भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। नंदा अष्टमी नंदा देवी को समर्पित है जो नैना देवी की बहन कहलाती हैं।
- यात्रा अवधिः 30 मिनट से 1 घंटा
- समयः सुबह 6 बजे से रात 9ः30 मिनट तक
- प्रवेश शुल्कः कोई नहीं
- नैनीताल बस स्टैंड से दूरी : लगभग 2 किमी है।
स्नो व्यू पॉइंटः करीब 2270 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह व्यू पॉइंट नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा कोट जैसे बर्फीले पहाड़ों के शानदार परिदृश्यों की श्रृंखला प्रस्तुत करता है। यहां से नैनी झील और पूरे नैनीताल शहर का भी अद्भुत नजारा दिखता है। स्नो व्यू पॉइंट रोड से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। जहां मल्लीताल से रोपवे की सवारी कर इस स्थान तक पहुंचने का बेस्ट मीडियम है। यहां विशाल दूरबीन की जोड़ी भी स्थापित की गई है, यहां भगवान राम, लक्ष्मण, हनुमान जी, भगवान शिव और देवी दुर्गा का छोटा सा मंदिर बना हुआ है। बच्चों के लिए यहां मनोरंजन पार्क भी स्थापित है जो ओपेन है। स्नो व्यू पॉइंट में चाय और नाश्ते के कुछ स्टॉल भी हैं।
- यात्रा अवधिः लगभग 1 घंटा
- समयः सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक, शनिवार को बंद रहता है।
- प्रवेश शुल्कः निःशुल्क, रोपवे सवारी में निर्धारित शुल्क लगता है।
- नैनीताल बस स्टैंड से दूरीः लगभग 3 किमी दूरी है।
नैनीताल उच्च ऊंचाई चिड़ियाघरः जी बी पंत हाई एल्टीट्यूड चिड़ियाघर नैनीताल में स्थित उच्च ऊंचाई वाला घर है जो अपनी तरह के तीन हाई एल्टीट्यूड चिड़ियाघरो में से एक है, अन्य दो दार्जिलिंग और सिक्किम में है। 1984 में स्थापित यह पार्क लगभग 11 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है जो करीब 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। 1995 से यह पार्क पर्यटको के लिए खोला गया है। इस चिड़ियाघर में कई दुर्लभप्राय जो लुप्त होने की कगार पर है ऐसे जानवरों की प्रजातियों को देखने का मौका मिलता है। हिम तेंदुआ, तिब्बती भेड़िया, जापानी मकाक, सांभर, हिमालयन सिवेट, हिमालयन मार्टिन, बार्किंग डियर, रॉयल बंगाल टाइगर और हिमालयन भालू जैसे जानवर शामिल है। यहां आप ऊंचाई पर रहने वाले पक्षियों के शानदार संग्रह को भी देख सकते हैं।
- यात्रा अवधिः 1-2 घंटा
- समयः सुबह 9ः30 से शाम 4ः30 बजे तक
- प्रवेश शुल्कः व्यस्कों के लिए 50 रूपये और बच्चों के लिए 25 रूपये, इसके अलावा कैमरा और वीडियो कैमरे के चार्जेस लगभग 200 रूपये हैं
- नैनीताल बस स्टैंड से दूरी : लगभग 1.5 किमी दूरी है।
मॉल रोडः नैनीताल घूमने में पर्यटन की खूबसूरती को बढाने के लिए खरीदारी करना भी आकर्षित करता है जहां आप नैनीताल बस स्टैंड से तकरीबन 1 किमी की दूरी पर हस्तशिल्प वस्तुएं, क्राफ्ट संग्रह और ऊनी वस्त्रों को खरीद सकते हैं। मॉल रोड में ऐतिहासिक विरासतो को निहारने के साथ ही यहां रोजमर्रा की जिं़दगी से जुड़े सामानों से लेकर स्पेशल आकर्षक वस्तुओं को भी खरीद सकते है। यह जगह अब गोविंद वल्लभ पंत मार्ग के नाम से मशहूर है, शाम के समय सुहाने वातावरण में सैर का आनंद लेना और झील के किनारे पर चलने वाली सड़क की रौनक यहां लगने वाली बाजारों और रंगबिरंगी रोशनियो से और भी ज्यादा प्रिय लगती है। मल्लीताल और तल्लीताल जो नैनी झील के उत्तर और दक्षिण पश्चिम कोने को जोड़ता हुआ यह रोड नैनीताल की प्रसिद्ध जगहों में से एक है।
- यात्रा अवधिः लगभग 1 घंटा
- समयः सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक
- प्रवेश शुल्कः निःशुल्क
- नैनीताल बस स्टैंड से दूरीः लगभग 1 किमी है।
⇒नैनीताल में रात्रि विश्राम
⇒ दिन 2 : पाषाण देवी मंदिर- टिफिन टॉप - कैंची धाम
दर्शनीय स्थलों की यात्रा फिर से प्रारंभ करें।
यात्रा करने का समयः सुबह 8 बजे
पाषाण देवी मंदिरः यह मंदिर नैनीताल की ठंडी सड़क पर है जो नैनीताल के प्राचीन मंदिरो में से एक है। माल रोड के दूसरी तरफ स्थित यह मंदिर मां दुर्गा का प्रसिद्ध मंदिर है जहां देवी को पत्थरबाजों की देवी माना जाता है। लोग इन्हें देवी नवदुर्गा की तरह भी मानते हैं। देवी मां की प्रतिमा सहित पूरा मंदिर पत्थरों से बना है, जहां पाषाण देवी मंदिर भव्य वृहद चट्टान पर बना मां के नौ रूपों की झलक प्रदान करता हैं। यह तीर्थस्थल देवी की साधना करने वालों के लिए उपयुक्त स्थान है जहां वे दुर्गा मां की भक्ति करते हैं। इस मंदिर का प्रसिद्ध आकर्षण यहां प्रज्वलित अंखड ज्योति है जो मंदिर बनने के समय से ही यहां अनवरत जोत रूप में जल रही है। देवी दुर्गा को समर्पित इस स्थान पर मां के भक्तों द्वारा सिंदूर, श्रृंगार का सामान और वस्त्र चुनरी चढाई जाती है। कहते हैं यहां जो जल देवी के चरणों मे चढाया जाता है वही जल बहकर झील में प्रवाहित होता हैं।
- यात्रा अवधिः लगभग 1 घंटा
- समयः सुबह 6 बजे से शाम 7ः30 बजे तक
- प्रवेश शुल्कः निःशुल्क
- नैनीताल बस स्टैंड से दूरीः लगभग 1 किमी दूरी पर है।
टिफिन टॉपः इसे डोरोथी सीट के नाम से भी जाना जाता है जो नैनीताल के अयारपाटा में अवस्थित है। नैना या चाइना पीक के बाद नैनीताल की दूसरी सबसे ऊंची चोटी है। लगभग 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित टिफिन टॉप नैनीताल का शानदार दृश्य प्रस्तुत करती है, जो नैनीताल के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में से एक है। ट्रेकिंग शौकीन लोग यहां छोटी पैदल यात्रा पर भी निकल सकते है। टिफिन टॉप अपनी खूबसूरती और पहले समय में यहां टिफिन लेकर जाने के लिए आज इस नाम से जानी जाती है। इसके अलावा डोरोथी सीट की कहानी अंग्रेज डोरोथी कैलेट से जुड़ी है जिन्होने यहां बेंच लगवाई। कहते हैं कि डोरोथी सीट इन्होंने अपनी पत्नी के मरणोपरांत उसकी याद मे लगवाई थी, जिसे प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट और नैसर्गिक सुंदरता को प्रदर्शित करता यह स्थान हिमालय के खूबसूरत परिदृश्यों को दिखाता हुआ शानदार लगता है जहां आसपास के ग्रामीण इलाके और यहां पड़ने वाली धूप की किरणें मन को शांति और सुकून प्रदान करने के साथ ही भाव विव्हल कर देती है। यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 4 किमी तक पैदल चलना पड़ता है जिसे आप टट्टू या घोड़े की सवारी का विकल्प भी चुन सकते हैं।
- यात्रा अवधिः लगभग 3 घंटे
- समयः सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक
- प्रवेश शुल्कः निःशुल्क, टट्टू किराए पर लेने का शुल्क लगभग 500 से 700 रूपये है।
- नैनीताल बस स्टैंड से दूरीः लगभग 5 किमी है।
कैंची धामः नैनीताल - अल्मोड़ा रोड पर स्थित कैंची धाम अपने खास तीर्थस्थल के कारण श्रद्धालुओ के बीच खासा प्रसिद्ध है। कैंची की तरह बना यह इलाका दो तीखे हेयरपिन मोड़ की तरह है, इसलिए इसका नाम कैंची पड़ा है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक यह धाम बाबा नीमकरोली की वजह से प्रसिद्ध है जो इनका आश्रम भी है। यह स्थान समुद्री तल से करीब 1400 मीटर की ऊंचाई पर है। साल 1962 में बाबा नीम करोली ने एक जगह के चारों ओर मंच बनाया क्योंकि इस स्थान पर दो प्रसिद्ध और आध्यात्मिक संत गुरू साधु प्रेमी बाबा और सोमबारी महाराज ने कैंची गांव में यज्ञ किया था। इस तरह से साल 1964 में 15 जून के दिन बाबा नीम करोली ने ही इस मंदिर की स्थापना व उद्घाटन किया था। बाबा नीम करोली का देहांत 10 सितम्बर 1973 को हुआ , जिसके बाद आश्रम में उनका एक और मंदिर बनाया गया जिसकी प्राण प्रतिष्ठा भी 15 जून 1976 में की गई। इस मंदिर में महानतम हस्तियां दर्शन करने के लिए पहुंचती है- जहां फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग, एप्पल के नियंता स्टीव जॉबस भी दर्शन करने के लिए आए है। जो अपने जिक्र में बाबा की महिमा का साक्षात गुणगान करते हैं। मशहूर क्रिकेटर विराट कोहली भी अपनी सफलता का श्रेय इस मंदिर को देते हैं, इन हस्तियों का मानना है कि यहा से दर्शन करने के बाद ही वे जिंदगी में इतने सफल मुकामों पर पहुंचे हैं।
बाबा नीमकरोली को भगवान हनुमान जी का अवतार माना जाता है जिसकी अनुभूति समय समय पर यहां होने वाली चमत्कारिक घटनाओं से साक्षात रूप में हुआ है। यहां हनुमान जी और बाबा नीम करोली का मंदिर व आश्रम है। हर साल यहां स्थापना दिवस 15 जून को मनाया जाता है जिसकी धूम और उल्लास देखते बनता है।
- यात्रा अवधिः 2 घंटे
- समयः सुबह 6ः45 बजे से शाम 8 बजे तक
- प्रवेश शुल्कः निःशुल्क
- नैनीताल बस स्टैंड से दूरीः 17 किमी
नैनीताल यात्रा पर जाने से पहले पैकिंग टिप्स
- मौसम अनुरूप कपड़ों का चुनाव जरूरी है जिसमें गर्मियो मे हल्के ऊनी व सूती कपड़े, सर्दियों में भारी गर्म वस्त्र, थर्मल कपड़े पैक करें, तो वही मानसूनी दिनो में वाटरप्रूफ जूते, रेनकोट और छाता अवश्य रखें।
- नैनीताल की सैर पर है तो आरामदायक फुटवियर्स कैरी करें।
- धूप और बर्फ की चमक से बचने के लिए सनग्लासेज और सनस्क्रीन रखें।
- फर्स्ट एड किट और ऊंचाई पर होने वाली समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक दवाई भी साथ रखें।
- नकदी साथ रखें क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में सिग्नल और नेटवर्क की समस्या के साथ ही एटीएम उपलब्धता सीमित होती है।
यात्रा सुझाव
- अधिक ऊंचाई पर प्यास कम लगती है इसलिए डिहाइड्रेशन की समस्या से निजात पाने के लिए पानी पीते रहें।
- पहले दिन पहुंचने के बाद नैनीताल के मौसम अनुकूल होने के लिए आराम से यात्रा करें।
- अगर ट्रेकिंग पर जा रहे हैं तो किसी न किसी को बताकर ही जाए
- घूमने से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर चेक कर लें।
- पहाड़ी स्थानों पर समय बिताएं लेकिन कहीं कचरा न फैलाएं।
निष्कर्ष
नैनीताल, दिल्ली के नजदीक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है जो हर मौसम में कुछ नये रंगो की छटा को बिखेरता है। आप चाहें वीकेंड पर जा रहे हों या लंबी छुट्टियों की प्लानिंग कर रहे हों, उत्तराखंड की यह जगह हर किसी को स्पेशल वाइब्स देती है। झीलों से घिरा यह घाटी शहर कुमाऊं पहाड़ियों की तलहटी में बसा फेवरेट टूरिस्ट गंतव्य है। ऊंचे ऊंचे पहाड़ियों से दिखने वाले दुर्गम नजारें हो या झीलों के स्वच्छ पानी में प्रतिबिंबित छवियां, मनमोहक परिदृश्य और औपनिवेशिक वास्तुकला की शानदार पृष्ठभूमि पर अवस्थित नैनीताल प्रकृति, अध्यात्म और रोमांच के चाहने वालों के लिए सर्वोत्तम गंतव्य है।
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