- Jul 14, 2026
भारत के आंध्रप्रदेश में राजमुंदरी के पास गोदावरी नदी के तट पर स्थित है, इसे गोदावरी तीर, राकिनी, विश्वमतुका, विश्वेश्वरी या सर्वशैल शक्तिपीठ नाम से भी जाना जाता है। माता सती का यह शक्तिपीठ देवी सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है, इसकी उपस्थिति कोटिलिंगश्वेर मंदिर में है, जहां भगवान शिव दंडपाणि रूप में और देवी सती विश्व की माता के रूप में भक्तों का कल्याण करती हैं। प्रभावशाली तांत्रिक शक्तियां और स्त्री की दिव्य ऊर्जा का यह स्थल, गोदावरी नदी की उपस्थिति से पवित्र और पावनमय होते हुए कई तीर्थों का स्थान है, जहां सुहावने नदी के परिदृश्य, पत्थरों की छिपी हुईं गुफाएं और सांस्कृतिक नजारें जिनसे जुड़ी ऐतिहासिक कहानियां बेहद रोचक हैं। सर्वशैल गोदावरी तीर शक्तिपीठ के बारें में और गहराई से बात करते हैं इस आर्टिकल में।
समस्त शक्तिपीठों से जुड़ा पौराणिक इतिहास
देवी सती राजा दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी थीं। राजा दक्ष भगवान शिव को उनके बैरागी रहन सहन की वजह से पसंद नहीं करते थे। एक बार राजा दक्ष द्वारा जानबूझकर यज्ञ समारोह में भगवान शिव और देवी सती को नहीं बुलाया गया जबकि संसार के समस्त देवी देवताओं को आमंत्रित किया गया। ऐसे में दुखी सती जी जब इस बात का पता लगाने बिना बुलाए ही यज्ञ समारोह में पहुंची तब उन्हें भगवान शिव के प्रति अपमान व तिरस्कार झेलना पड़ा जो उनके लिए असहनीय था, तब उन्होंने यज्ञ समारोह की हवन कुंड में अपने प्राणों की आहुति देकर जीवनलीला समाप्त कर ली।
इस दुखद घटना की जानकारी जब भगवान शिव को हुई तब अत्यधिक रौद्र रूप में उन्होंने देवी सती के शव को लेकर समस्त लोकों में तांडवीय नृत्य शुरू कर दिया। इससे सृष्टि का संतुलन डांवाडोल होने लगा। उपायस्वरूप भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के मृत शरीर को विभाजित कर धरती पर बिखेरना शुरू कर दिया। ऐसे में जहां भी देवी सती के अंग, आभूषण या वस्त्र गिरे वहां पर इनके दिव्य शक्तिशाली शक्तिपीठों की स्थापना हुई। प्रत्येक शक्तिपीठ में भगवान शिव की उपस्थिति उनके भैरव अवतार में देखने को मिलती है।
राकिनी गोदावरी सर्वशैल शक्तिपीठ की उत्पत्ति से जुड़ा इतिहास व कहानी
राजमुंदरी की कब्बूर नामक जगह पर बना यह शक्तिपीठ बेहद विशेष है, ऐसी मान्यता है कि यहां देवी सती का बायां गाल गिरा था, कुछ लोगों का मानना है कि बायां टखना गिरा था। यहां देवी मां की पूजनीय मूर्तियां स्थापित है जिन्हें राकिनी, विश्वेश्वरी या विश्वमतुका यानी विश्व की माता कहकर पुकारा जाता है।
देवी का राकिनी रूप यहा तंत्र शक्तियों के रहस्यमयी अनुष्ठानों और संसार की समस्त ऊर्जा के स्त्रोत का प्रतिनिधित्व करता है और भगवान शिव का दंडपाणि स्वरूप इसको और भी ज्यादा बल प्रदान करता है।
गोदावरी नदी को दक्षिण की गंगा भी कहा जाता है जिसकी पवित्रता मां गंगा की तरह मानी जाती है, श्रद्धालुगण इस नदी में स्नान कर पापों से मुक्ति पा जाते हैं। गोदावरी नदी की उत्पत्ति और इससे जुड़ी ऋषि गौतम से जुड़ी है।
गोदावरी नदी की उत्पत्ति और महत्व से जुड़ी पौराणिक कथा
ऋषि गौतम त्रयम्बेकश्वर में ब्रहमगिरी पर्वत पर अपनी पत्नी अहल्या के साथ रहा करते थे। एक बार ऋषि गौतम ने एक गाय को भगाने का प्रयास किया जो अन्न भंडार में से सारा चावल खा गई थी। ऋषि गौतम गाय के पीछे दूर्वा लेकर जा रहे थे, तब वह गाय मर गई इसलिए उन पर गौ हत्या का आरोप लग गया। ऋषि गौतम ने भगवान शिव की अटूट तपस्या की और आश्रम को पवित्र करने के लिए मां गंगा को वहां लाने की इच्छा प्रकट की। भगवान शिव ऋषि गौतम की तपस्या से प्रसन्न होकर त्रयम्बक रूप में स्थापित हुए और गंगा नदी को वहां प्रकट किया। जिसका एक नाम गौतमी भी है क्योंकि यह ऋषि गौतम की तपस्या का सुखद परिणाम था। ऋषि गौतम से ही जुड़ा गोदावरी नाम कालांतर में प्रसिद्ध हुआ।
इसी पवित्र स्थान की महिमा तब और ज्यादा बढ गई जब यहां देवी सती का पवित्र अंग गिरा इससे यहां की आध्यात्मिकता को देवी का भी आशीर्वाद मिल गया। इस मंदिर को कब और किसने बनवाया यह अभी तक ज्ञात नहीं है। पौराणिक ग्रंथों में यहां देवी सती के अंग गिरने का वर्णन मिलता है।
राकिनी गोदावरी सर्वशैल शक्तिपीठ की वास्तुकला एवं संस्कृति
सर्वशैल शक्तिपीठ दक्षिण भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता हुआ उत्कृष्ट वास्तुकला का नमूना है, जहां विशाल प्रवेश द्वार गोपुरम् की भव्यता देखने में आकर्षक प्रतीत होती है। मूर्तियों और भवनों की जटिल नक्काशी और उत्कृष्ट चित्रण मंदिर की छटा को और भी ज्यादा प्रभावशाली बनाता है।
भव्य वास्तुकला और अत्यधिक ऊंचाई पर बना गोपुरम इसकी दिव्यता का परिचायक है, यहां सभी देवी देवताओं की विशाल मूर्तियां प्रतिष्ठित हैं।
राकिनी गोदावरी सर्वशैल शक्तिपीठ का दर्शन समय
मंदिर खुलने का समयः सुबह 6.00 बजे से
मंदिर बंद होने का समयः शाम 7ः30 बजे
राकिनी गोदावरी सर्वशैल शक्तिपीठ में मनाए जाने वाले अनुष्ठान, उत्सव और त्यौहार
नवरात्रिः मार्च या अप्रैल में आने वाली नवरात्रि जो चैत्र माह में मनाइ्र जाती है। देवी दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित नौ दिनों का मुख्य त्यौहार होता है। इस समय सर्वशैल शक्तिपीठ में देवी का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।
पुष्करम् मेलाः सर्वशैल शक्तिपीठ और आसपास पुष्करम मेला अत्यधिक पवित्र पर्व है जो प्रत्येक बारह सालों में एक बार मनाया जाता है। गोदावरी नदी के तट पर श्रद्धालु पूजा अर्चना और आस्था की डुबकी लगाने के लिए एकत्र होते हैं। इस दौरान मंदिरों की शानदार सजावट और विशेष आकर्षण भक्तो को यहां आमंत्रित करता है। पुष्पों और दीपमालाओं की श्रृंखलाओं से प्रज्ज्वलित होते मंदिर और मन के कोने विशेष हो जाते हैं।
महाशिवरात्रिः भगवान शिव का मुख्य त्यौहार जो देवी पार्वती और उनके विवाह का प्रतीक है। इस दिन देवालयों में बोल बम के जयकारों से पूरा वातावरण गुजाएमान होता रहता है। सर्वशैल शक्तिपीठ में दंडपाणि नाम से प्रतिष्ठित भैरव भगवान की पूजा अर्चना और आराधना की जाती है। मंदिर परिसर में विशाल मेले का आयोजन किया जाता है।
दुर्गा पूजाः आश्विन मास यानी सितम्बर अक्टूबर में होने वाला नवरात्रि पर्व दुर्गा पूजा के नाम से जाना जाता है। पंचमी से लेकर नवमी तिथि तक मंदिर में तरह तरह की पूजा अनुष्ठान आदि कार्य संपन्न किये जाते हैं जिसमें भक्त बेहद श्रद्धा भक्ति के साथ मां राकिनी की पूजा पाठ आदि करते हैं।
राकिनी गोदावरी सर्वशैल शक्तिपीठ से जुड़े रोचक तथ्य
गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह शक्तिपीठ तंत्र पूजाओं के लिए भी जाना जाता है जो अत्यंत रहस्यमयी और गूढ़ता का प्रतीक है।
भगवान शिव को भैरव रूप में दंडपाणि या वत्सनाभ नाम से जाना जाता है।
सर्वशैल शक्तिपीठ में लोग संतान प्राप्ति में आई समस्याओं और विवाह संबंधी मन्नतों के लिए प्रमुखतः आते है। इसके अलावा यहां गोदावरी नदी में स्नान करना और मंदिर दर्शन करने से करोड़ों यज्ञों का पुण्यफल प्राप्त होता है।
राकिनी गोदावरी सर्वशैल शक्तिपीठ के आसपास घूमने योग्य स्थान
डोलेश्वरम बैराजः राजमुंदरी के रेलवे स्टेशन से करीब 10 किमी की दूरी पर यह स्थान एक सिंचाई संरचना है जिसका निर्माण ब्रिटिशकाल में किया गया था। यह बैराज 15 फीट ऊंचा और 3.5 किमी लंबा है। इसमें बाढ को पार करने के लिए 175 शिखर द्वार हैं। बैराज का पूर्ण जलाशय स्तर 14 मीटर एमएसएल है। सर आर्थर कॉटन द्वारा इस बैराज को सन् 1850 में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य यहां बाढ से सुरक्षा और पानी की आपूर्ति करना था लेकिन आज यह बेहद आकर्षक ऐतिहासिक स्थल है।
गांधी पार्क राजमुदंरीः यह सिर्फ एक पार्क नही ंबल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को समर्पित श्रद्धांजलि है। स्वाधीनता संग्राम में गांधी जी की महत्वपूर्ण भूमिका और उनकी याद दिलाता यह स्थान प्रकृति, हरियाली और सुरम्य वातावरण का संकलन करता है। यहां अवस्थित गांधी जी की प्रतिमा और पार्क का मनोरम परिदृश्य राजमुदरी मे इसे शानदार घूमने योग्य स्थानों में एक बनाता है।
श्री आंजनेयस्वामी मंदिर, द्वारकापुरीः आध्यात्मिक शक्तियों से संपन्न यह मंदिर श्री हनुमान जी को समर्पित है। शांति और ऊर्जा से सराबोर वातावरण और भक्त हनुमान जी की अनोखी और अद्वितीय प्रतिमा आकर्षण का केंद्र है। राम नाम संकीर्तन और भजनों से गुंजाएमान परिसर भक्त और भगवान दोनों का ही मन मोह लेते हैं। यहां हनुमान जी की आदमकद मूर्ति और मंदिर का कलात्मक प्रवेश द्वार प्रमुख आकर्षण के रूप में जाने जाते हैं।
गोदावरी नदीः गंगा नदी के बाद भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी के रूप मे जानी जाती है जिसकी पवित्रता गंगा नदी के समान ही है। पौराणिक दृष्टि से उच्च स्थान पर निहित यह नदी राजमुंदरी के सर्वश्रेष्ठ आकर्षणों मे से एक है। जहां भक्त मां गोदावरी के दर्शन कर उनमें स्नान कर परम पवित्र महसूस करता है।
पुष्कर घाटः राजमुंदरी का यह प्रमुख घाट अपनी पवित्रता और ऐतिहासिकता के लिए जाना जाता है। बारह वर्षों में लगने वाला पुष्करम मेला इस घाट की विशेष पहचान कराता है। यह आस्था, संस्कृति और नैसर्गिक सुंदरता का अनूठा संयोग प्रस्तुत करता है। घाट के पास मंदिरों में दर्शन करने के साथ ही नाव की सवारी का आनंद भी ले सकते हैं।
श्री भद्राचल रामदासु तीर्थः अद्भुत वास्तुकला और भगवान श्री राम की कथा को जीवंत करने वाला यह स्थान राजमुंदरी का आकर्षक स्थल है। यहां गूंजते भजन कीर्तन की धुने और कलात्मक वास्तुकला की झलक दक्षिण शैली की स्पष्ट झलक प्रदान करता है। विशाल गोपुरम और सभा मंडपम की उपस्थिति प्रकृति की गोद में शांति और सुकून प्रदान करता है।
राकिनी गोदावरी सर्वशैल शक्तिपीठ कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- सर्वशैल शक्तिपीठ पहुंचने के लिए नजदीक में राजमुंदरी एयरपोर्ट है जो करीब 12 किमी है। यहां से स्थानीय टैक्सी या कैब की मदद से मंदिर पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- सर्वशैल शक्तिपीठ से निकटतम रेलवे स्टेशन राजमुंदरी जंक्शन करीब 3 किमी ही दूर है, जहां से शक्तिपीठ जाना बेहद आसान है।
सड़क मार्ग से
- आंध्रप्रदेश आसपास के राज्यों से अच्छी तरह सड़क माध्यम से जुड़ा हुआ है। यहां पहुंचने के लिए आप विजयवाड़ा रास्ते से होते हुए एनएच 16 के माध्यम से पहुंच सकते हैं। विजयवाड़ा से इसकी दूरी लगभग 200 किमी है।
निष्कर्ष
मां दुर्गा के प्रतिष्ठित शक्तिपीठों मे से एक राकिनी गोदावरी सर्वशैल शक्तिपीठ अपनी दिव्यता और स्त्रीत्व शक्तियों से इस समस्त क्षेत्र को दीप्तिमान कर रहा है। लाखों करोड़ों भक्तों की आस्था और विश्वास के केंद्र के रूप में स्थापित अनोखे रोचक तथ्यों और परम पुनीत गोदावरी नदी के तट पर बसा हुआ शानदार तीर्थस्थल है। प्रकृति की गोद में बसा यह स्थल हर क्षण कण कण में अपनी दैवीय सत्ता की झलक और दिव्य आशीर्वाद प्रदान करता हुआ भक्तों के लिए सुरम्य आश्रय स्थल है।
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