- Apr 09, 2026
भारत का पड़ोसी देश भूटान थंडर ड्रैगन की भूमि कहलाती है जो भारत और चीन के बीच बसा हुआ दक्षिण एशिया के शानदार देशों में से एक है और अपने मंत्रमुग्ध करते प्राकृतिक दृश्यों, आध्यात्मिक मठों और बौद्धिक संपदा राष्ट्रीय सुख समृद्धि को प्रदान करने के लिए जाना जाता है। अगर आप भी पर्यटन की विविध पहलूओं का अनुभव लेना चाहते हैं तो धार्मिकता, पारंपरिक रीति रिवाज और कुदरती खूबसूरती सभी को एक ही यात्रा में समाहित कर लें तो भूटान आपके यात्रा कार्यक्रम को एकरूपता प्रदान करता है, इसलिए भूटान की यात्रा आकर्षणों को आज हम अपने इस आर्टिकल में समाहित कर रहे हैं।
भूटान के बारें में आश्चर्यजनक तथ्य
भूटान को खुशियों की भूमि कहते हैं जो सिर्फ एक उपाधि नहीं बल्कि एक पैमाना है जहां अपने नागरिकों की देखभाल भलाई, उनके प्रति करूणा को प्राथमिकता देने के अनोखे दृष्टिकोण की झलक है, इसे खुशियों का देश कहने के कई सारे तथ्य हैं।
भूटान, हिमालय के पूर्वी भाग में बसा है जहां यह छोटा सा देश सिर्फ मंत्रमुग्ध करते नजारों का ही नहीं बल्कि प्राकृतिक समृद्धि, संपन्न सांस्कृतिक विरासत और अनोखे सम्मान के लिए भी प्रसिद्ध है। सकल राष्ट्रीय खुशी का मूल भूटान की समृद्धि का संकेतक है जहां सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी मनोवैज्ञानिक कल्याण, स्वास्थ्य, शिक्षा, समय का सदुपयोग, सांस्कृतिक विविधता और लचीलापन, सुशासन, सामुदायिक जीवंतता, पारिस्थितिक विविधता व लचीलापन और जीवन स्तर, इन सभी मापदंडो पर राष्ट्र की सकल खुशी मापी जाती है।
भूटान की सामाजिक समरसता और प्रकृति के साथ इसका सामंजस्य इसकी सुरक्षा और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है। भूटानी समाज की संस्कृति और रहन सहन सामाजिक एकजुटता की नींव पर आधारित है। परंपरावादी त्यौहारों, धार्मिक रीति रिवाजों और सामुदायिक गतिविधियों से जीवंत और परिपूर्ण है। सामाजिक मुद्दे और एक दूसरे के प्रति सहयोग की भावनाएं अपनेपन और पारस्परिक प्रेम को बढाते हैं। भूटान ने आधुनिक जीवन शैली को बहुत सहज तरीके से अपनाया है जहां उन्होंने दैनिक दिनचर्या पर वैश्वीकरण के प्रभाव को सीमित रखा है, जिसका उद्देश्य भूटानी आबादी की संपन्नता और संपूर्ण खुशहाली में योगदान देने वाली अनोखी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों को संभालकर रखना है।
भूटान के आकर्षक पर्यटन स्थल
1. बुमथांग घाटीः भूटान का यह क्षेत्र 20 जोंगखांग जिलों मे ंसे एक है जहां कई मंदिर और बौद्ध पवित्र स्थल हैं। जिले को चार गांवो मे बांटा गया है जो प्रत्येक प्रसिद्ध हिमनद घाटी से संबंधित है- चोएकोर, तांग, उरा और छुमे। बाद वाली घाटी को बुमथांग कहते हैं, इसी के नाम से पूरे जिले का नाम जाना जाता है। बुमथांग का हिन्दी अनुवाद सुंदर मैदान होता है जिसमें थांग मैदान व बुम पवित्र अथवा लड़की है, इसलिए इसे सुंदर लड़कियों की घाटी भी कहते हैं। यह जगह भूटान के आध्यात्मिक हृदय के रूप में प्रसिद्ध है जहां प्रसिद्ध मठ मंदिर और सांस्कृतिक स्थल पाए जाते हैं। बुमथांग में जकर डजोंग, ऐतिहासिक स्थल 1667 में बनाया गया जहां एक सफेद पक्षी बैठा था, भूटान में इसे सकारात्मक शगुन का प्रतीक मानते हैं, शुरूआत में यहां एक छोटा मंदिर था। इसकी अनोखी जल आपूर्ति प्रणाली आज भी बरकरार है जो अद्भुत है।
बुमथांग मे जंबे लखाग, तिब्बती राजा सोंगत्सेन गम्पो द्वारा 659 ई. में बनाया गया। यह पवित्र मंदिर ऐतिहासिक कहानियों से भरा हुआ है। बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार मे ंबाधा डालने वाली राक्षसी को वश में करने के लिए इस संरचना को एक ही दिन में बनाया गया था। उसके शरीर के अंगो पर इस मंदिर को बनाया गया है। बाएं घुटने पर इस मंदिर को बनाया गया है। यह मंदिर गुरू रिनपोछे से संबंधित है जिन्होंने बुमथांग के राजा को ठीक किया था। यहां भगवान बुद्ध की मैत्रेय प्रतिमा और 100 से ज्यादा कालचक्र प्रतिमाएं स्थापित हैं। इस मंदिर में जम्बे लखांग द्रुप उत्सव के लिए जाना जाता है जो बुरी शक्तियों को भगाने के लिए तेरछम यानी नग्न नृत्य किया जाता है।
प्रमुख आकर्षणः तमशिंग लखांग, वांगडुएछोएलिंग पैलेस संग्रहालय और सांस्कृतिक केंद्र देखने के अलावा बुमथांग में पनीर बनाने की कला एक सच्ची कला है जहां अच्छी क्वालिटी के स्विस शैली का पनीर तैयार किया जाता है। जैविक गेंहू से बनी रेड पांडा बियर की ताजी चुस्की के साथ मेवेदार पनीर का स्वाद भी ले सकते हैं। भेड़ प्रजनन केंद्र और हथकरघा केंद्र मे ंहाथ से बुनाई किये जाने वाले वस्त्रों को देख सकते हैं। शिल्पकला के बेहद खास नमूनों को देख सकते हैं।
2. फोबजीखा घाटीः मंत्रमुग्ध करते नजारों और वन्यजीवों से मुखातिब होने के लिए आप यहां आ सकते हैं। जहां लोग स्थानीय परंपराओं और संस्कृति का जीवंत उत्सव है। इस घाटी को गंगटे घाटी कहा जाता है जो आध्यात्मिक विरासत से सराबोर है। भूटानी संस्कृति, रीति रिवाजों और आश्चर्यजनक इतिहास से भरपूर है। यहां आकर आपको 17वीं सदी में जाने का एहसास हो सकता है, यहां भूटान के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानित व्यक्ति पेमा लिंगपा ने अपनी शानदार उपस्थिति को साकार किया है। इन्हीं के वंशजों ने आज इस विरासत को इस पटल पर आगे बढाया है, जहां घाटी के धर्म और सांस्कृतिक विरासत का मान और ज्यादा बढा है। पेमा लिंगपा के पोते ग्यालसे रिगडजिन पेमा थिनले द्वारा 1613 में गंगटे मठ की स्थापना की गई। मठ परिसर में बौद्ध भिक्षुओं के लिए आवास और ध्यान केंद्र बने है। यहां की वास्तुकला पारंपरिक भूटानी वास्तुकला को दर्शाती है।
प्रमुख आकर्षणः गंगटे हॉट स्टोन बाथ का आनंद ले सकते हैं, गंगटे नेचर ट्रेल में देवदार के वनों, खेतों और पारंपरिक गांवो से होकर गुजरता है। यह ट्रेल स्टोन वॉल से शुरू होकर खेवांग लवांग पर समाप्त होता है। यहा ग्रामीण जीवन और जैव विविधता का नजदीकी दर्शन करने को मिलता है। खेवांग लवांग 15वीं सदी का मंदिर है जहां तीन मंजिला इमारत में भगवान बुद्ध की भव्य मूर्ति और बौद्ध शिक्षाओ का प्रदर्शन करते प्राचीन भित्तियो का दर्शन मिलता है। नयेलुंग डेचेनलिंग प्रसिद्ध बौद्ध संत से जुड़ी जगह है जहां पेमा लिंगपा ने विश्व के इन आध्यात्मिक स्थलों की खोज की थी। फोबजीखा घाटी संरक्षण केंद्र, क्रेन महोत्सव, पेले ला दर्रा जहां आप 3390 मीटर की ऊंचाई पर पर्वतीय दर्रा है जो फोबजिखा घाटी को मध्य भूटान से जोड़ता है। दामचेन लखांग फोबजीखा घाटी का सबसे पुराना मंदिर है, फोबजीखा घाटी में बहुत सारे मठ और मंदिर है जो ऐतिहासिक और भव्य वास्तुकला के परिचायक हैं।
3. थिम्पूः भूटान की राजधानी थिम्पू समुद्री तल से करीब 2334 मीटर ऊपर एक शांत घाटी में बसा सुरम्य स्थान है जो भूटान का मुख्य और सबसे बड़ा शहर है। यहां की शांति का मेल एक शांत गांव से करा सकते है। यहां पर लहराते झंडो और लाल वस्त्र पहने बौद्ध भिक्षु युवा पेशवरों के साथ प्राचीन और आधुनिक का अद्भुत मेल का संगम प्रदान करते हैं। थिम्फू, एशिया की किसी अन्य राजधानी की अपेक्षा अद्वितीय है। चीड़ के वृक्षों से ढकी वादियां और वांग छू नदी की शीतलता इस राजधानी शहर को दो भांगों मं बांटती है, जिसका शांत और सुकून भरा माहौल आत्मीय और भव्य लगता है। अपने किलों और मठों से लेकर संग्रहालयों और मनमोहक पैदल यात्राओं तक आध्यात्मिकता, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ने के लिए प्रेरित करता है। थिम्फू को 1961 में पुनाखा की जगह यहां की राजधानी बनाया गया जिसे देश के प्रशासनिक और राजसी केंद्र के रूप में जाना गया। 12वीं सदी में यहा चांगगखा लखांग मंदिर की स्थापना की। थिम्फू शहर राजा जिग्मे दोर जी वांगचुक के शानदार नेतृत्व में थिम्फू साधारण बस्ती से आज के मॉडर्न शहर के रूप मे स्थापित हुआ, जिसमें बौद्ध संस्कृति की मिठास वैसे ही बरकरार है।
प्रमुख आकर्षणः ताशिचो द्जोंग गौरवशाली किले का प्रमाण देता है। इस घाटी के रक्षक रूप में बुद्ध की दोर्डेन्मा प्रतिमा का अवलोकन करें। भूटान के सबसे पुराने किले सिम्टोखा द्जोंग को देखें। मोतीथांग ताकिन संरक्षित क्षेत्र में भूटान के राष्ट्रीय पशु का घर निहारें, जहां वन्य जीव संरक्षण केंद्र भी है। भूटान की राष्ट्रीय स्मारक चोर्टेन आध्यात्मिक जीवन को निखारती है। राष्ट्रीय लोक विरासत संग्रहालय 19वीं सदी मे ंदोबारा बनाया हुआ संग्रहालय है जहां ग्रामीण जीवन शैली का जीवंत चित्रण देखने का मौका मिलता है।
4. पुनाखाः हरी भरी वादियों और दो पवित्र नदियों के संगम पर बसा पुनाखा, भूटान के शानदार स्थलों में से एक है जो धार्मिक रूप से संपन्न स्थलों में से एक है। भूटान की राजधानी रहा यह शहर शांत, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक खोज है। यहां के व्यवस्थित जोंग, मंत्रमुग्ध करते दृश्य, रोमांचक गतिविधियां और ग्रामीण सभ्यता मोहित करती है। आप इतिहास में रूचि रखते हों या प्रकृति में पुनाखा हर किसी के लिए कुछ न कुछ शानदार अनुभव प्रदान करते हैं। पुनाखा का मुख्य आकर्षण पुनाखा द्जोंग भूटान का सबसे प्रतिष्ठित और शानदार किला माना जाता है। फो छू पिता नदी और मो छू माता नदी के संगम पर स्थित 17वीं शताब्दी का किला मठ पारंपरिक भूटानी वास्तुकला का अनुपम उदाहरण है। यहां भूटान के संस्थापक पिता झाबद्रुंग न्गवांग नामग्याल के पवित्र अवशेषों का निवास स्थान भी है।
प्रमुख आकर्षणः पुनाखा द्जोंग के जटिल नक्काशीदार लकड़ी के कामो और सफेदी लिए दीवारों का अवलोकन करे, जहां तक पहुंचने के लिए कैंटलीवर पुल को पार करें। वसंत ऋतु में यहां आसपास जैकरांडा वृक्षों को खिलता हुआ देखें। नदी, चावल के खेतो को निहारने के साथ ही भूटान के सबसे लंबे सस्पेंशन ब्रिज पर पैदल भ्रमण करने का अनुभव लें। खमसुम युल्ली नामग्याल चोर्टेन तक चलते हुए जाएं, जिसकी वास्तुकला पवित्र तांत्रिक पर आधारित है। प्रजनन मंदिर जो चिमी लंखांग दिव्य पागल लामा द्रुकपा कुनले को समर्पित है, ये अपनी अपंरापरागत शिक्षण प्रणालियों और प्रजनन क्षमता व धार्मिक मुक्ति से जुड़े हुए हैं। नदियों में रिवर राफि्ंटग का आनंद सहेजें।
5. पारोः भूटान का अति मंत्रमुग्ध करता यह शहर सास्ंकृतिक मंदिर मठों और गहरी शांति के लिए प्रसिद्ध घाटी है। प्रकृति, इतिहास और धार्मिकता का अद्भुत मिश्रण यह जगह भूटान यात्रा में विशेष जगह लिए है। यहां मौजूद पारो घाटी में बना टाइगर्स नेस्ट मठ समुद्री तल से लगभग 3000 फीट ऊपर एक चट्टान पर स्थित है जो 17वीं शताब्दी मे निर्मित गुरू पद्मसंभव के ध्यान स्थल के रूप में जानी जाती है, इन्होंने ही यहा बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया था। कहते हैं कि वे बाघिन की पीठ पर सवार होकर यहा पधारे थे इस कारण इस मठ को यह उपनाम मिला हुआ है। यहां तक पैदल भ्रमण करते हुए पहुंचना मंत्रमुग्ध करते दृश्यों, प्रार्थना झंडों और रास्ते में देवदार के जंगलों से सराबोर खूबसूरत आकर्षण प्रदान करता है। यहां मौजूद प्राचीन मंदिर, भित्ति चित्र शांति प्रदान करते हैं। पारो मे कई सारे अद्भुत आकर्षण हैं जहां मठ, मंदिर और आकर्षक किले हैं।
प्रमुख आकर्षणः 17वीं शताब्दी में बना रिनपुंग द्जोंग भूटानी वास्तुकला का प्रस्तुतीकरण करता है। क्यिचु लखांग 7वीं सदी में बना था जो एक राक्षसी को वश मे ंकरने के लिए बनवाया गया, ऐसे 108 मंदिरों का निर्माण कराया गया था। भूटान का राष्ट्रीय संग्रहालय देश की समृद्धि और संपन्नता का द्योतक है। प्राचीन कलाकृतियां, थांगका पेंटिग्स, आध्यात्मिक अवशेष और पारंपरिक जीवन शैली से जुड़ी चीजों का अवलोकन कर सकते हैं। डुकग्येल द्जोंग जिसमे किले के खंडहर मौजूद है विजय उपलक्ष्य में बनवाया गया था। चेले ला दर्रा जो करीब 3988 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जो भूटान का सबसे ऊंचा मोटर योग्य स्थान है। प्रकृति की चाह रखने वालों के साथ ही यह स्थान एडवेंचर और फोटोग्राफी का शौक रखने वालों के लिए भी सर्वोत्तम स्थान है।
6. हा वैलीः भूटान की पश्चिमी दिशा में बसी यह घाटी एक शानदार और गहन खूबसूरती लिए हुए स्थान है जो अपने प्राकृतिक दृश्यों, संपन्न सांस्कृतिक विरासतों और शांत वातावरण पर्यटको को मनमोहित करता है। हा घाटी भूटान के रीति रिवाजों और नैसर्गिक सुंदरता को प्रमाणित करता है। एकांत और शांतिप्रिय लोगों के लिए यह जन्नत जैसी है, जहां राजसी पहाड़ों की शोभा करीब 2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और ऊंचे नीचे इलाकों के साथ मोड़दार पहाड़ियों और वृहद घास के मैदानों से सजा हुआ है। यहां से माउंट जोमोलहारी सहित बर्फ से ढकी चोटियों को निहारने का अवसर प्रदान करता है। हा घाटी में नदियों, जंगलों और विभिन्न तरह के जीवो को निहारने का अवसर प्राप्त होता है।
प्रमुख आकर्षणः हा घाटी में काफी सारे शीर्ष आकर्षण हैं जहां लखांग कार्पो और लखांग नागपो महत्वपूर्ण मंदिर हैं जिनके उपनाम सफेद और काले मंदिर हैं। सातवी शताब्दी में बने ये प्राचीन मठ पौराणिक कथाओं से सराबोर है जिनके बारे में बताया जाता है कि ये एक दिन में ही बनाए गए हैं। लखांग कार्पो सफेद दीवारों की तरह शांति प्रदान करते हैं और काले मंदिर का काला रंग बुरी शक्तियों के नाश का प्रतीक है। हा घाटी में पारंपरिक गावों और मठों का दीदार कर सकते हैं, जहां कात्शो, डुमचो जैसे पारंपरिक गांव में ग्रामीण जीवन का आनंद ले सकते हैं। चट्टानों पर बने शेल्कड्रॉ मठ धार्मिक शांति और आकर्षक दृश्य प्रदान करते हैं। यहां आप ट्रेकिंग और प्रकृति की सैर कर सकते हैं, इसके लिए अल्पाइन घास के मैदान और दूरदराज के गांवो ंसे होकर कुदरत के साथ गहरा अनुभव प्रदान करते हैं। फोटोग्राफी और पक्षियो की विविध श्रृंखला को देखने के लिए अवसर प्रदान करती हुई यह घाटी सैटायर ट्रैगोपेन और रूफस नेक्ड हॉर्नबिल जैसी दुर्लभ प्रजातियों के दर्शन भी कराती है।
भूटान में मौसम : ऋतु अनुसार
सर्दियों में भूटान का मौसम ( नंवबर से मार्च ) : सर्दी यहां नवंबर के आखिर से शुरू होती है जो मार्च की शुरूआत तक रहती है। 3,000 मीटर से ज्यादा ऊंचाई पर बर्फबारी होती है, जहां पाला देखने को मिलता है। सर्दियों में पर्वतीय दर्रो से तेज तूफानी हवाएं चलती है जिससे बहुत ज्यादा शोर होता है। इन्हीं भयानक हवाओं के चलने की वजह से ही भूटान को थंडर ड्रैगन की भूमि नाम से जाना जाता है। बहुत दूर के गांव, मंदिर, मठ व सड़के विशेष रूप से और भी ज्यादा खूबसूरत हो जाते हैं। वही मध्यभूमि और दक्षिणी पैदल चलने लायक जगहों के लिए गर्म रहता है। दोपहर के समय आमतौर पर धूप रहती है लेकिन कभी तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है।
गर्मियों व बारिश में भूटान का मौसम ( अप्रैल से अगस्त ) : भूटान में गर्मियों का मौसम अप्रैल के मध्य से शुरू हो जाता है जहां गर्मी की अधिकता के कारण जून में बारिश बहुत होती है इस वजह से यहां बाढ का खतरा भी बन जाता है। नमी अधिक होती है लेकिन रात होते ही तापमान में गिरावट आ जाती है। गर्मियों के दिन बहुत ज्यादा गर्म नहीं होते है। भूटान में जुलाई साल का सबसे गर्म महीना होता है जब यहां के पूर्वी हिस्से का तापमान 31 डिग्री सेल्सियस तक रहता है और राजधानी थिम्पू मे 25 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता है।
पतझड़ के मौसम में भूटान का मिज़ाज ( सितम्बर-अक्टूबर ) : वर्षा ऋतु के बाद पतझड़ का मौसम शुरू हो जाता है जो सितम्बर के आखिर या अक्टूबर की शुरूआत में होता है। यह मौसम कड़ाके की सर्दी, चमकीला और धूप वाला मौसम होता है। साल में इस समय यहां के नजारें बेहद खूबसूरत और शानदार प्रतीत होते हैं। पतझड़ के महीनों के साथ उत्तरी क्षेत्रों में शीघ्र ही बर्फबारी शुरू हो जाती है।
भूटान के व्यंजन : स्वादिष्ट स्वाद
भूटान अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही अपने स्वाद के लिए भी मशहूर है, यहां खाने पीने के लिए संपन्न उन्नतशाली परंपरा है।
1. ईमा दातशीः इसे भूटान का राष्ट्रीय और पांरपरिक व्यंजन माना जाता है। ताजी और सूखी मिर्च को स्थानीय चीज यानी दातशी के साथ पकाया जाता है, इसे अक्सर लाल चावल के साथ परोसा जाता हैं। इसका स्वाद बेहद तीखा होता है जो भूटान की मिर्च के स्वाद की असली पहचान है।
2. फक्शा पाः नॉन वेज खाने वालों के लिए यह बहुत स्वादिष्ट डिश है जिसे मीट स्लाइस के साथ बनाया जाता है। दरअसल मीट स्लाइस में सूखी लाल मिर्च, मूली साग और कुछ विशेष मसालो के साथ हल्का फ्राई किया जाता है। यह व्यंजन भी लाल चावल के साथ शानदार लगता है।
3. हॉन्तेः भूटान की हॉ वैली में बनाया जाने वाला यह व्यंजन कुटू के आटे के बने मोमोज जैसे पकवान हैं, इसे आप शाकाहरी या मांसाहारी दोनो तरह से खा सकते हैं। वेज बनाने के लिए इसमें पालक चीज मसाले ंभरे जाते हैं। मोमोज की तरह ये भी स्टीम या फ्राई दोनों तरह से बना सकते हैं।
4. लॉमः भूटान की यह खास डिश शाकाहारी लोगों को बहुत पसंद है जबकि भूटान में सर्दियों के समय सब्जियों की पैदावार कम होती है। इसलिए शलजम के पत्तों से बनी यह डिश मसालों और सरसों के तेल में बनाई जाती है।
5. जाशा मारूः नॉन वेजीटेरियन लोगों के लिए यह डिश बहुत मायने रखती है। चिकन के छोटे छोटे टुकड़ों से बनी यह डिश प्याज, अदरक, हरी मिर्च, टमाटर और धनिया पत्ती के साथ पकाया जाता है। चावल के साथ या सूप की तरह इसका सेवन किया जाता है।
भूटान के लिए यात्रा नियम
- भारतीयों के लिए भूटान सरकार ने कुछ रूल्स रेगुलेशन्स बनाए हैं जिनका पालन करना बहुत जरूरी है। इनके बारें में आइए जानते हैं।
- भारतीय नागरिक बगैर पासपोर्ट और वीजा के भूटान में प्रवेश कर सकते हैं, भारतीयों को यहां जाने के लिए सिर्फ परमिट बनवाने की आवश्यकता होती है।
- भूटान में प्रवेश कराने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर लिंक से क्लिक कर भूटान के लिए पंजीकरण करवा सकते हैं, जिसकी वैधता सिर्फ पैडस्ट्रेन टर्मिनल जयगांव फुटशोलिंग बॉर्डर से एंट्री करने पर ही है। पंजीकरण कराने पर क्यूआर कोड मिलता है जिसे इमिग्रेशन काउंटर पर दिखाना अनिवार्य होता है। पंजीकरण की आवश्यकता सिर्फ एक ही बार कराने की होती है। यहां से एंट्री करने पर भूटान सरकार आपको यही पर परमिट प्रदान कर देती है।
- भूटान जाने के लिए आपके पास अपना सरकारी पहचान प्रमाण पत्र जैसे पासपोर्ट या वोटर आई डी कार्ड होना जरूरी है। इसके अलावा अन्य कोई आई डी स्वीकार नही की जाती है।
- 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बर्थ सर्टिफिकेट या स्कूली पहचान प्रमाण पत्र होना जरूरी है और बच्चों के साथ किसी व्यस्क का होना जरूरी है।
- भूटान की यात्रा करते समय अपनी दो पासपोर्ट साइज फोटो भी अवश्य साथ में रखें।
- पर्यटको के पास यात्रा की अवधि के दौरान यात्रा बीमा होना जरूरी है जिसे भूटान की ंकंपनी से ही खरीदना अनिवार्य होता है। भूटान ट्रिप पर ले जाने वाली कंपनी आपको वहां पर यह बीमा उपलब्ध करा देती है। यदि कोई कंपनी नहीं है तो आप सीधे आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से यात्रा बीमा को खरीद सकते हैं।
भूटान कैसे पहुंचे
अगर आप विदेश यात्रा का प्लान बना रहे हैं तो पर्यटन की खासियत लिए भूटान देश की यात्रा कर सकते हैं, जहां आप एक सप्ताह में घूमकर वापिस भी आ सकते हैं। अन्य जगहों से भूटान घूमने का खर्च भी काफी कम है, जहां आप रोमांचक, प्राकृतिक परिदृश्य और सांस्कृतिक पक्ष को भी निहार सकते हैं।
भूटान जाने के लिए आप हवाई या सड़क रास्ते से पहुंच सकते हैं, दोनो ही रास्ते सुविधा और आरामदायक है।
हवाई मार्ग से
- अगर आप हवाई मार्ग से भूटान की सैर करना चाहते हैं तो किसी भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से भूटान के पारो इंटरनेशनल एयरपोर्ट जा सकते हैं। आप चाहे तो नई दिल्ली, कोलकाता, गुवाहाटी, बोधगया और बागडोगरा कहीं से भी भूटान जा सकते हैं
सड़क मार्ग से
- सिलीगुडी से भूटान की यात्रा : भूटान जाने के लिए सड़क मार्ग की सुविधा भी बेहतर है जहां आपको सबसे पहले असम के सिलीगुड़ी जाना होगा। सिलीगुड़ी बस टर्मिनल से भूटान के लिए सीधे बस जाती है, जहां आप कुछ ही घंटों मे किफायती दाम पर भूटान जा सकते है।
- प्राइवेट कार के माध्यम से भूटानः अगर आप अपनी निजी गाड़ी से भूटान जाना चाहते हैं तो आपको पश्चिम बंगाल के जयगांव से होकर जाना पड़ेगा। भूटान और भारत की साझा सीमा है जहां आप जयगांव के माध्यम से भूटान में प्रवेश कर सकते हैं। भारत का जयगावं और भूटान का फुटशोलिंग शहर सीमा पर है। इस तरह से आप स्वयं अपनी गाड़ी द्वारा भूटान की यात्रा कर सकते हैं। अपनी गाड़ी ले जाने के लिए आपके पास वैध इंडियन ड्राइंविंग लाइसेंस होना जरूरी है। वाहन 10 साल से ज्यादा पुराना नही होना चाहिए और वाहन का इंश्योरेंस भी जरूरी है। यदि आप ड्राइवर हैं और कार मालिक अलग हैं तो ऐसी स्थिति में ड्राइवर के पास एक अथॉरिटी लेटर होना जरूरी है, जिसमें कार मालिक की सहमति आवश्यक है, इसे आप तहसील से बनवा सकते हैं।
निष्कर्ष
भूटान अपनी संपन्न सांस्कृतिक विरासत की शानदार परिप्रेक्ष्य और खूबसूरती के संरक्षण को अत्यधिक महत्व देता है, जहां इन रीति रिवाजो और अनोखी परंपराओं पर बेहद गर्व किया जाता है। पर्यावरण प्रेम के साथ भूटान इसकी सुरक्षा और खुशहाली गुणांक के लिए भी प्रमुख है जहा कार्बन उत्सर्जन बेहद कम है और इसका बहुत बडा भाग प्रकृति को समर्पित है। हरियाली भरे परिदृश्य, शांत और सुकून प्रदान करती हवा और जीवों की विविध श्रृंखला, इन सबके साथ अनुपम और अद्वितीय छवि का दर्शन कराता है, जहां पर्यटक खुशी आनंद और सुकून की अनुभूति करतें हैं।
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