- Nov 15, 2025
दिसम्बर में अमृतसर का आकर्षण चरम पर रहता है। सर्दी के इस समय में यह शानदार शहर बन जाता है, मौसम में ठंडक, कोहरे से ढकी सुबहे और प्रेमपूर्ण आतिथ्य इन सबका मिश्रण इसे एक बेहतर पर्यटन स्थल बनाते हैं। सर्दियों में स्वर्ण मंदिर का उजाला और सुनहरी चमक सी शांति और धार्मिकता के परिदृश्य विश्व भर के श्रद्धालुओं के लिए खूबसूरत आश्रय स्थल है। सर्दियों के समय गुरूद्वारे परिसर में भ्रमण करना स्फूर्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। अरदास की गूंज, लंगर की ताजी खुशबू और पवित्र कुंड के पास थोड़ा समय बिताने से मानसिक शांति और सुकून का अनुभव होता है।
दिसम्बर में अमृतसर का अनोखा आकर्षण और यहां के खास लज़ीज व्यंजनों की श्रृंखला आपके पर्यटन की खूबसूरती को और भी ज्यादा बढा देती हैं। आइए, दिसम्बर के महीने में अमृतसर शहर की क्या क्या विशेषताएं हैं? जानते हैं यहां
अमृतसर इतिहास का संक्षिप्त परिचय
अमृतसर का पुराना नाम रामदासपुर था जिसे बोलचाल की भाषा में अम्बरसर कहते थे। पंजाब के दूसरे बड़े शहर की श्रेणी मे आने वाला यह इलाका पंजाब के माझा क्षेत्र का सांस्कृतिक, धार्मिक, यातायात और आर्थिक केंद्र है। सिख धर्म के पवित्र केंद्रों में से एक यह शहर विश्व के सबसे महत्वपूर्ण और बड़े गुरूद्वारे के कारण बहुत प्रसिद्ध है। स्वर्ण मंदिर अमृतसर की शान और ह्नदय माने जाने वाला यह स्थान चौथे सिख गुरू रामदास का आश्रय स्थल हुआ करता था, जिन्होंने 16वीं शताब्दी के आखिर में अमृतसर अमृत सरोवर यानी अमृत के पवित्र तालाब के चारों ओर विकसित हुआ। यह सिख धर्म का केंद्र और गुरू अर्जन देव जी द्वारा पूरे कराए गए पवित्र स्थान हरमिंदर साहिब का गढ बन गया है।
अमृतसर का ऐतिहासिक विवेचन बेहद मार्मिक है जिसने सन् 1919 का जालियांवाला बाग हत्याकांड का दंश सहा और देश के स्वतंत्रता संग्राम में इस जगह की गहरी छाप रही है
आज का अमृतसर अपनी जीवंत ऊर्जा और आध्यात्मिकता का सुखद सम्मिश्रण हैं जहां प्रत्येक दिशा प्रेम दया और करूण स्मृतियों की निशानी है और चहल पहल के नजारें उमंगों और तरंगों के बेमिसाल स्वाद से भरे हुए हैं।
दिसम्बर के समय अमृतसर का मौसम
दिसम्बर तक सर्दी का आगाज़ बेहतर तरीके से हो चुका होता है जहां मौसम बेहद प्यारा लेकिन सर्द मौसम रहता है, जहां एक्सप्लोर करने का यह शानदार समय होता है।
इस समय तापमान, कुहासा, दिन और रात के समय मोसम इस प्रकार रहता है।
- अनुमानित तापमानः न्यूनतम 8 डिग्री सेल्सियस से लेकर अधिकतम 22 डिग्री सेल्सियस
- सुबह का कुहासाः धुंध भरे आवरण में लपेटे हुए रहस्यमयी आकर्षण उत्पन्न करता है।
- दिन का तापमानः खिली हुई सुनहरी धूप, दर्शनीय स्थलो को घूमने के लिए बेहतर
- रातः सर्द और तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे
दोपहर के समय हल्के वूलन कपड़े और रात के समय भारी गर्म कपड़े पहनना ठीक रहता है। मौसम में हल्की सर्दी होने के कारण दर्शनीय स्थलों की यात्रा बिना पसीना बहाए ही हो जाती है।
हरमिंदर साहिब स्वर्ण मंदिर : गहन आत्मिक शांति
सुबह शाम का नज़ारा
सर्दियो के समय स्वर्ण मंदिर का मर्मस्पर्शी अनुभव और गहरा हो जाता है। सर्द और कुहासे से भरा माहौल यहां और भी अधिक गहन शांति और सुकून का अनुभव कराता है। प्रातःकाल के समय मध्धम उजाले से मंदिर की छटा अलौकिक रंगों की चमक बिखेरती है। बेहद शांत वातावरण और धीमे स्वर की प्रार्थनाएं दिव्यता प्रदान करती हैं।
स्वर्ण मंदिर की शामें भी आकर्षक रूप से उतनी ही करिश्माई प्रतीत होती हैं। जब सरोवर पर पड़ती स्वर्ण मंदिर की परछाई की झलक अपनी भव्य वास्तुकला को प्रदर्शित करती हुई मन मोह लेती है। शाम के समय चलने वाली सर्द हवाएं आध्यात्मिक स्पर्श को और भी ज्यादा मजबूती प्रदान करती हैं।
पवित्र तालाब की महत्ता
स्वर्ण मंदिर की रौनक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हुआ यह पवित्र सरोवर बेहद खास है। सर्द दिनों में भी लोग इसके जल में स्नान कर खुद को शुद्ध और आत्मिक रूप से पवित्र करते हैं। शारीरिक स्फूर्ति के साथ ही मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। सर्दियों की सुबहें कुछ ज्यादा ही सर्द हो जाती है जब श्रद्धालु इसके जल में उतरते हैं, ऐसे में यहां का खूबसूरत नज़ारा और भी आकर्षक हो जाता है। दुनिया भर से तीर्थयात्री यहां दर्शन करने हेतु आते हैं और आध्यात्मिक अनुष्ठानों की नींव रखते हैं।
लंगर का स्वादिष्ट अनुभव
स्वर्ण मंदिर में लंगर का गरमागरम स्वाद सभी के लिए हमेशा खुला रहता है। सेवादारों द्वारा दिन भर स्वादिष्ट भोजन की व्यवस्था की जाती है। कई सैंकड़ों लोग एक साथ विस्तृत हॉल में बैठकर प्रसाद पाते हैं। यहां भोजन की समग्र व्यवस्था जैसे रोटी, दाल अन्य व्यंजनों के साथ मीठें में खीर की व्यवस्था रहती है। मंदिर भ्रमण और लंगर का स्वाद अमृतसर की स्वर्ण मंदिर की यात्रा को और भी ज्यादा यादगार बना देती है।
रात्रिकालीन सुंदरता
स्वर्ण मंदिर की जगमगाती शामें और रातें अपने खूबसूरत परिदृश्यों की वजह से और भी ज्यादा सुंदर दिखाई पड़ती हैं। सर्दियों में शामें हल्की धुंध भरे नज़ारें आध्यात्मिक और धार्मिक शांति को तरजीह देते हुए विशेष प्रतिविबिंत श्रृंखलाओं का निर्माण करती हैं।
सर्दियों की शामें स्वर्ण मंदिर के प्रति और भी ज्यादा आकर्षित करती है क्योंकि तारों भरी शामें और रातों की चमक मंदिर की भव्यता को अनोखापन प्रदान करते हैं।
अमृतसर की धरती पर अन्य पर्यटक स्थल
वाघा बॉर्डर
वाघा बॉर्डर पर होने वाला फ्लैग सेरेमनी समारोह देशभक्ति से ओतप्रोत और रोमांचकारी यादगार अनुभव प्रदान करता है। यहां भारतीय और पाकिस्तानी दोनों देश के सैनिक एक साथ संयोजित परेड करते हैं ऐसे में यहां होने वाली सर्दी का असर लहराते तिरंगे की भव्यता को और भी ज्यादा आकर्षक बनाती है। दोनों देशों के राष्ट्रीय एक साथ झुकाए जाते हैं। वातावरण में देशभक्ति नारों और गीतों की गूंज पूरे माहौल में स्फूर्ति का संचार करती हुई नवचेतना भरती है। अमृतसर से लगभग 30 किमी की दूरी पर स्थित यह स्थान सैन्य नियमों का शानदार प्रदर्शन करते हुए वंदे मातरम् के नारों से जुड़ने का मौका प्रदान करते हैं। यहां वातावरण की सकारात्मक वाइब्रेशन्स और एनर्जी का लेवल बहुत ज्यादा होता है। वाघा बॉर्डर परेड को अटारी बॉर्डर परेड के नाम से भी जानते हैं। भारत पाकिस्तान की सीमा पर होती यह बीटिंग रिट्रीट ड्रिल विश्व भर से पर्यटकों को आकर्षित करती है।
वाघा बॉर्डर का समय
परेड का आयोजन रोज होता है लेकिन इसकी शुरूआत तत्कालीन मौसम पर निर्भर करता हे।
| मौसम | समय | परेड शुरू | अवधि |
| ग्रीष्मकाल अप्रैल-सितम्बर | दोपहर 3 बजे से शाम 4ः00 बजे | शाम 5ः15 बजे | 45 मिनट |
| शीतकाल अक्टूबर-मार्च | दोपहर 2ः30 बजे से शाम 4ः00 बजे | शाम 4ः15 बजे | 45 मिनट |
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- वाघा बॉर्डर पर प्रवेश निःशुल्क है।
- अंदर बैग ले जाने की अनुमति नहीं है, आप उन्हें 50 रूपये प्रति बैग की दर से उसे वहीं एंट्री गेट पर जमा कर सकते हैं।
- केवल फोन और कैमरे को ले जाना अनुमन्य है।
- पावर बैंक व अन्य एसेसरीज ले जाना मना है।
- प्रवेश के लिए सरकारी वैध आई डी कार्ड होना जरूरी है।
वाघा बॉर्डर पहली बार आ रहे हों या बार बार, परेड और बीटिंग रिट्रीट में शामिल होना यादगार अनुभव प्रदान करता है।
जालियांवाला बाग
दिसम्बर के महीने में जालियांवाला बाग की सैर ऐतिहासिक और विरासत की गहरी मौन शांति की ओर ले जाती है। सर्द हवाएं और उन शहीदों की मर्मस्पर्शी यादें जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अपनी और अपनों की आहुति दे दी। अमृतसर का यह बाग लगभग 6.5 एकड़ भूमि में फैला हुआ है जो अमृतसर रेलवे स्टेशन से करीब 4 किमी की दूरी पर है। ब्रिटिश शासन के दौरान वैशाखी पूर्णिमा के दिन यहां हजारों की संख्या में बच्चे, बुजुर्ग, नौजवान और महिलाएं एकत्र हुए थे, इन पर जनरल डायर ने बिना कुछ सोचे समझे अंधाधुध फायरिंग का आदेश दे दिया।
यह बाग चारों ओर से ऊंची दीवारों से घिरा हुआ था जिसे एकदम फाँद कर जाना मुश्किल था, ऐसे में कई हजारों की भीड़ बाग के बीच बने कुएं में कूद गईं और बाहर नहीं निकल पाए। ऐसे में कुछ लोग अंग्रेजों की गोलियों से और कुछ हजारों लोग कुएं में कूदकर मर गए।
आज भी दीवारों पर गोलियों के चिन्ह और कई ऐसे निशान मौजूद हैं जो इस घटना को मस्तिष्क में तरोताजा कर देते हैं।
इस दुखद घटना का इतिहास बयां करता अमृतसर का यह स्थान सरकारी संरक्षण और देखरेख में दर्शनीय है। 13 अप्रैल 1919 को यह घटना हुई थी और 13 अप्रैल 1961 पहली बार डॉ राजेंद्र प्रसाद ने इस बाग का उद्घाटन किया था। दिसम्बर के समय इस राष्ट्रीय स्थल में धुंध के वातावरण में घूमना और संग्रहालय में उन यादों को ताजा करना उन शहीदों के प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करना है।
पुराने शहर के बाज़ार
अमृतसर के बाजारों की रौनक देखते बनती है जहां पुराने शहर की तंग गलियां और हथकरघों से बनी तमाम सारी कीमती चीजों की खरीदारी तन मन को प्रफुल्लित कर देती है। यहां की चटक और फुलकारी कढाई वाले दुपट्टे खरीद सकते हैं। सर्दियों के समय यहां ऊनी शॉल और स्वेटर की क्वालिटी पर्यटकों को बहुत पसंद आती है। आप चाहें तो अपनी जरूरत या किसी को तोहफे रूप में देने के लिए इन चीजों की खरीदारी कर सकते हैं।
इसके अलावा यहां की पंजाबी जूतियाँ खरीद सकते हैं, जिनमें विविध तरह की कलात्मक कढाई देखने में सुंदर प्रतीत होती हैं। अमृतसर की गर्मजोशी भरे माहौल और जीवंत ऊर्जा का संचार करते यह बाज़ार रोमांचक अनुभव प्रदान करते हैं।
पार्टीशन म्यूजियम
स्वंतत्रता संग्राम की लड़ाई में अमृतसर की भूमिका कभी नकारी नही जा सकती है। ऐसे ही यहां पार्टीशन म्यूजियम की मौजूदगी पर्यटको को आकर्षित करता है। इस म्यूजियम में वीडियोग्राफी के माध्यम से अंग्रेजो और भारतीयों के बीच हुई दुख भरी कहानी को प्रदर्शित किया जाता है। अंग्रेजो के द्वारा भारतीयों को दी गई प्रताड़ना और उनके दर्द की दास्तां को बयां करता यह म्यूजियम विस्तार से सारी कहानियों का दीदार कराता है। जहां पर्यटक देश की आजादी मिलने में मिली मुसीबतों का आकलन कर पाते हैं और देशप्रेम की भावना को फील करते हैं।
यहां ब्रिटिश काल मे संपादित मुद्रित और प्रचारित न्यूज पेपर्स के अंश और लेखों को भी देख सकते हैं। अमृतसर के इस म्यूजियम में पर्यटकों को अवश्य आना चाहिए।
साड्डा पिंड
पंजाबी जीवनशैली का दर्शन कराती यह जगह उनकी संस्कृति, रहन सहन, वेशभूषा और माहौल को समझाती है। अमृतसर का यह पर्यटन स्थल साड्डा पिंड पंजाबी गांव नाम से भी जाना जाता है। यह एक गांव है जहां पंजाबियों के रहने खाने पीने और परंपराआेंं को विस्तार से देखा जा सकता है। अमृतशहर से करीब 8 किमी दूरी पर स्थित यह जगह हर उम्र के लोगों को उनके शौक के अनुसार आकर्षित करती है। आप यहां ऊंट या घोड़ों की सवारी का आनंद भी ले सकते हैं। इसके अलावा यहां लगने वाली बाजार से आप बढिया सी खरीदारी भी कर सकते हैं।
खालसा कॉलेज
अमृतसर का यह कॉलेज करीब 300 एकड़ क्षेत्रफल में बना हुआ शानदार शिक्षण संस्थान है जिसकी नींव करीब 125 साल पुरानी है। यह संस्थान विश्व के सर्वोच्च सिख संस्थानों में से एक है जहां एक से बढकर एक रिकॉर्ड इस कॉलेज के नाम हैं। इस कॉलेज को आप पर्यटक की तरह घूम भी सकते हैं जिसे देखने का कोई शुल्क भी नहीं है।
अकाल तख्त
स्वर्ण मंदिर के पास ही स्थित अकाल तख्त अमृतसर के प्रसिद्ध स्थानों में से एक है जहां इसे सिख धर्मों के पांच तख्तों में से एक माना जाता है। यह तख्त सिख गुरूओं का पवित्र स्थान है जहां वे न्याय देने के रूप में काम करते हैं। इस जगह सिख धर्म से जुड़ी कुछ प्राचीन और पवित्र पुस्तकें और लिपियां रखी हुई हैं, जिन्हें आप स्वयं देख सकते हैं। यहां प्रवेश करने पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता है। सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक यहां दर्शनों का दिव्य लाभ ले सकते हैं।
हरिके वेटलैंड और बर्ड सैंचुरी
अमृतसर के इस अभयारण्य में प्रकृति और जंगल प्रेमियों के लिए बहुत कुछ आकर्षण हैं। यह उत्तर भारत का दूसरा सबसे बड़ा वेटलैंड है साथ ही पक्षी अभयारण्य के रूप में यहां विभिन्न प्रजातियों के पंछियो को देखने का सुनहरा मौका मिलता है। हरिके वेटलैंड और पक्षी अभयारण्य सर्दियों यानी दिसम्बर के समय और भी ज्यादा स्पेशल लगता है क्योंकि इस समय प्रवासी पक्षियों की विस्तृत श्रृंखला यहां देखने को मिलती है, जहां रंग बिरंगे नज़ारों की श्रृंखलाएं आकर्षित करती हैं। विशेष रूप से इस अभयारण्य में सात प्रकार के कछुए की प्रजातियां और अन्य प्रकार के जीव जंतुओं की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। मानव निर्मित अभयारण्य की पहुंच फिरोजपुर और कपूरथला तक हैं।
फनलैंड कंपनी बाग
दिसम्बर के मौसम में फनलैंड कंपनी बाग में अमृतसर की खास खूबियां देखने को मिलती है। बच्चों के साथ बेहतर समय बिताना चाहते हैं तो फनलैंड कंपनी बाग का स्पेशल दौरा जरूर करें। बच्चों के लिए कई प्रकार के झूलें और जीव जंतुओं की आकर्षक मौजूदगी अमृतसर की ट्रिप को बेहतर बनाएगी। यहां पर कृत्रिम जानवर और पंछियों की झलक देखने में आकर्षक लगती है। साथ ही यहां पर आप नौकायन और अन्य कई सारी एडवेंचर एक्टीविटीज का आनंद भी ले सकते हैं जिसमें बच्चे बड़े सभी शामिल हो सकते हैं।
गोविंदगढ किला
अमृतसर की ऐतिहासिक धरोहरों में से एक यह किला इतिहास प्रेमियों के लिए स्वर्ग से कम नहीं है। प्राचीन समय के राजा रानी और उनकी जीवन शैली से जुड़े कई सारे पहलूओं को यहां देख सकते हैं। इसके अलावा युद्ध समय में प्रयुक्त होने वाले अस्त्र शस्त्रों को देख सकते हैं। वेशभूषा और अन्य सजावटी वस्तुओं के भव्य दीदार कर सकते हैं। यहां उस समय युद्धों में प्रयुक्त होने वाली तोपों के लिए भी इस जगह को जाना जाता है। किले का निर्माण करीब 1760 में गुज्जर सिंह द्वारा भईज दा किला की तरह किया गया, जहां चारो ओर हरियाली से युक्त पार्क भी है। किले को घूमने के बाद थोड़ी देर के लिए इस पार्क में बैठना सुकून भरा एहसास देता है।
रामतीर्थ मंदिर
अमृतसर की धार्मिक यात्रा करने के सिलसिले में यह जगह अपनी भव्यता और शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है। यह मंदिर रामायण में वर्णित वाल्मीकि जी को समर्पित है। चहुं दिशाओं से अपनी दिव्यता बिखेरता यह स्थल अपनी अलौकिता और उपस्थिति से त्रेता युग के समय में ले जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कहते हैं इसी स्थान पर वाल्मीकि जी ने सीता माता को आश्रय दिया था। यहीं पर उनके दोनो पुत्र लव और कुश का जन्म हुआ और वाल्मीकि जी द्वारा इन्हें लव कुश को शिक्षा दी गई थी।
यह मंदिर अमृतसर से करीब 11 किमी दूरी पर है जहां चारों ओर दैवीय छटा बिखरी हुई प्रतीत होती है। इसके अलावा यहा पर शानदार सा सुंदर सरोवर भी मौजूद है जहां कहते हैं कि इस स्थान की खुदाई स्वयं हनुमान जी द्वारा की गई थी। दिसम्बर में यहां जाना और दर्शन प्राप्त करना आनंददायक अनुभूति देता है।
दुर्गयाना मंदिर
अमृतसर का यह मंदिर अपनी अनोखी मौजूदगी के लिए पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है। इस मंदिर को अन्य नामों जैसे सिल्वर मंदिर और शीतला माता मंदिर नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यहां श्री राम द्वारा अश्वमेध यज्ञ के घोड़े को लव कुश ने यहीं बांधा था। फिर बाद में इनका सामना लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न से हुआ था। इस मंदिर की बनावट और भव्य नक्काशी स्वर्ण मंदिर की तरह ही है। इसे भारत के दूसरे स्वर्ण मंदिर के नाम से भी पुकारते हैं।
अमृतसर में दिसम्बर के समय सबसे विशेष और लज़ीज व्यंजन
अमृतसर शहर सिर्फ दर्शनीय स्थलों की वजह से ही नहीं बल्कि खाने पीने में विशेष है। दिसम्बर सर्दियो की शुरूआत से ही यहां कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजनों की श्रृंखला चखने को मिलती है। यहां की गलियों में बनी ताजी रेसिपीज की खुशबू और अंतर्मन को प्रसन्न करतीं इनकी झलक सर्दियों की खूबसूरती को और ज्यादा बढा देती है। शानदार गरमागरम व्यंजन अमृतसर घूमने का मज़ा और भी ज्यादा बढा देते हैं।
मक्के दी रोटी व सरसों दा साग
इस व्यंजन का नाम आते ही जेहन में पंजाबी छवि की छाप बन जाती है। प्रसिद्ध पंजाबी व्यंजन जिसका स्वाद सर्दियों में और भी ज्यादा सटीक हो जाता है। मक्के की रोटी के साथ सरसों का साग हरे रंग की गाढी तरकारी की तरह बनी होती है और मक्के की रोटी मक्के से बनाई गई हाथ की रोटियां होती है। इन पर लगा हुआ ताजा मक्खन इसके स्वाद को और भी ज्यादा बढा देता है। इसके साथ गुड़ और छाछ के साथ भी खा सकते हैं जो ज्यादातर लोगों को पसंद आता है।
अमृतसरी कुल्चे और छोले
अमृतसर की कुल्चे को लेकर यह खास रेसिपी है जो इसकी पहचान अमृतसरी नाम से कराती है। दरअसल भरवां रोटी की तरह बना यह कुल्चा तंदूर में पकाया जाता है। छोले की सब्जी और हरी खट्टी चटनी के साथ इस कुल्चे का स्वाद बेहद स्वादिष्ट लगता है। कुल्चे की कुरकुरी बनावट और अंदर भरा हुआ मसाला खाने की इच्छा को और भी ज्यादा बढा देता है।
गुड़ वाली चाय और जलेबी
दिसम्बर की सर्दियों में गुड़ की चाय को खासतौर पर पसंद किया जाता है। गुड़ से बनी चाय और इसकी मिठास आनंददायक होती है। विशेष तौर पर इस चाय और क्रिस्पी जलेबियों का साथ बहुत स्वादिष्ट लगता है। शक्कर की चाशनी में डूबी गरमागरम जलेबियों की महक और गुड़ की चाय का आनंद अमृतसर के गज़ब स्वाद का आनंद और भी ज्यादा बढा देता है।
अमृतसरी फिश फ्राई
अगर आप नॉनवेज के शौकीन है तो अमृतसर की यह रेसिपी ट्राई करना न भूलें, मैरीनेट की ताजी मछली को विभिन्न मसालों और बेसन में लपेटकर डीप फ्राई कर बनाया जाता है। जिसकी क्रिस्पी और लजीज स्वाद पर्यटकों को बेहद पसंद आता है।
पिन्नी और रेवड़ी
अमृतसर में सर्दियों से देखभाल के लिए यह गेहूं के आटे, मेवों और देशी घी से बनी स्वादिष्ट मिठाई है। यह एक तरह की स्पेशल मिठाई है जो शरीर में गर्मी और ऊर्जा का संचार करते हुए सर्दी से बचाती है। गुड़ और तिल से बनी यह प्रसिद्ध मिठाई लोगों को सर्दियों के दिनों में खासतौर पर पसंद होती है। अमृतसर का बेमिसाल स्वाद और इसकी महक पर्यटकों को और भी ज्यादा यहां घूमने के प्रति आकर्षित करती है।
दिसम्बर के समय अमृतसर यात्रा करते समय बरतने वाली सावधानियां
पैकिंग संबंधी सुझाव
दिसम्बर में अमृतसर की यात्रा करते समय सर्दी अधिक होती है इसलिए ऊनी कपड़े और जैकेट वैगेरह कपड़े साथ रखें, साथ ही प्रातःकाल और शाम मे ंसैर करने के लिए टोपी मफलर और दस्ताने पहनकर रखने से सर्दी से बचाव रहता है। घूमने के उद्ेदश्य से जूते पहनना आरामदायक अनुभव देता है।
दर्शनीय स्थलों को घूमने का सही समय और भीड़
अमृतसर के दर्शनीय स्थलों की सैर करते समय वहां के उपयुक्त समय की बेहतर जानकारी यात्रा को सुखद बनाता है। स्वर्ण मंदिर में सुबह के समय शांति और लोगों की कम भीड़ देखने को मिलती है। वाघा बॉर्डर समय से पहले ही पहुंच जाएं जिससे की उपयुक्त सीट मिलने में दिक्कत न हो। मंदिरों की सैर करते समय सुबह शाम का समय आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत विशेष भावनाओं का द्योतक है।
स्थानीय आवागमन व ठहरने की सुविधा
अमृतसर जाने से पहले ही दिसम्बर के समय ठहरने के लिए आवास विकल्पों की बुकिंग पहले ही करा लें। अमृतसर घूमते समय एक स्थान से दूसरी जगह जाने के लिए अगर दूरी कम है तो ऑटो रिक्शा और साइकिल रिक्शा सर्वोत्तम साधन हैं। लंबी दूरी के लिए कैब सर्विस बुक कर सकते हैं।
निष्कर्ष
अमृतसर भारत का बेहद शानदार शहर है जो धार्मिकता और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए जाना जाता है। ऐतिहासिक औपनिवेशिक काल से लेकर आधुनिक समय तक अमृतसर की बात निराली है। स्वर्ण मंदिर की चमक हो या आजादी की याद दिलाता जालियावाला बाग हो हर भावना में अमृतसर अपने अनोखे अंदाज के लिए जाना जाता है। पार्टीशन म्यूजियम में दिखती विजय गौरवगाथा और उससे जुड़ी कहानियां आज भी उतनी ही सजीव और ज्वलंत लगती हैं। दुर्गायाना मंदिर में मां शीतला के दर्शन और मां सीता से संबंधित वाल्मीकि आश्रम की मान्यता आज भी प्रासंगिक है।
अमृतसर का स्वाद भी लाजवाब है- अमृतसरी कुल्चे छोले की खुशबू और गुड़ की चाय के साथ जलेबियों का अनोखा स्वाद, हर तरह से अमृतसर अद्वितीय है। स्थानीय बाजारों में खरीदारी का विशेष अनुभव सहेंजे और अमृतसर यात्रा को यादगार बनाएं
अमृतसर यात्रा करते समय अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नोत्तर
प्रश्नः अमृतसर में स्वर्ण मंदिर दर्शन का सबसे उपयुक्त समय कौन सा है?
उत्तरः स्वर्ण मंदिर दर्शन करने के लिए आप कभी भी जा सकते हैं लेकिन भीड़भाड़ से बचना चाहते हैं तो प्रातःकाल का समय दर्शनों के लिए उपयुक्त है।
प्रश्नः स्वर्ण मंदिर की तरह अमृतसर में दूसरा कौन सा मंदिर है?
उत्तरः दुर्गायाना मंदिर जिसे शीतला माता मंदिर भी कहते हैं, इसकी बनावट स्वर्ण मंदिर से मिलती जुलती है इसलिए इसे दूसरा स्वर्ण मंदिर कहते हैं।
प्रश्नः दिसम्बर में अमृतसर का मौसम कैसा रहता है?
उत्तरः दिसम्बर में अमृतसर का मौसम दिन में हल्की ठंड और रात के समय ज्यादा सर्द होता है।
प्रश्नः अमृतसर की स्थापना का श्रेय किसे जाता है?
उत्तरः अमृतसर की स्थापना का श्रेय सिखों के चौथे गुरू रामदास जी को जाता है।
प्रश्नः अमृतसर से वाघा बॉर्डर लगभग कितनी दूरी पर है?
उत्तरः अमृतसर से वाघा बॉर्डर लगभग 30 किमी दूरी पर स्थित है।
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