- Dec 08, 2025
दिसम्बर में भारत का उत्तर पूर्वी भाग पर स्थित अरूणाचल प्रदेश बेहद खूबसूरत राज्य है जो दिसम्बर महीने में और भी ज्यादा अद्भुत हो जाता है। भौगोलिक विशेषताएं और बर्फ से ढके पर्वतीय क्षेत्र और घाटियों के आकर्षण इस समय प्राकृतिक सुंदरता के साथ एडवेंचर स्पेशल और कल्चरल टूरिज़्म दोनों प्रदान करता है। भारत का आर्किड राज्य अरूणाचल प्रदेश, उगते हुए सूर्य की भूमि है जो गांवो की संस्कृति और वन्यजीव अभयारण्यों से लेकर दर्रों की ऊंचाईयों और उत्सवो की रौनक की चमक प्रदान करता है।
आइए, पूर्वोत्तर भारत के इस अनोखे राज्य अरूणाचल प्रदेश की यात्रा की संपूर्ण मार्गदर्शिका के बारें में विस्तार से जानते हैं।
अरूणाचल प्रदेश सांस्कृतिक पृष्ठभूमिः संक्षिप्त परिचय
भारत का ऐसा राज्य है जहां सूर्योदय सबसे पहले होता है, क्योंकि इसका शाब्दिक अर्थ अरूण $ अचल यानी उगते सूरज की धरती। इस राज्य को पहले नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी-नेफा के नाम से जाना जाता था। इस राज्य की सीमा उत्तर, पूर्व और पश्चिम में क्रमशः तिब्बत, चीन, म्यांमार और भूटान देशों से साझा होती है। भारत मे यह राज्य नागालैंड और असम को स्पर्श करता है। वहीं कामेंग, सुबनसिरी, सिआंग, लोहित और तिरप नदियां इन्हें अलग अलग घाटियों में विभाजित कर देती हैं। साल 1962 से यह जगह अरूणाचल प्रदेश नाम से जानी गई जो असम के अर्न्तगत आती थी। साल 1965 से असम से इस हिस्से की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय के अन्तर्गत आती है और 1972 में अरूणाचल प्रदेश केंद्र शासित राज्य बना दिया गया जिसे 20 फरवरी 1987 को भारतीय संघ का 24वां राज्य बना दिया गया।
अरूणाचल प्रदेश 25 जिलों का एक राज्य है जहां मुख्यतः 25 से ज्यादा प्रमुख जनजातियां और कई उप जनजातियां भी है जो इसे भारत के संपन्न राज्यों में से एक मानते हैं। विरासत का जीवंत मिश्रण और आध्यात्मिक पवित्रता दर्शाते मठों के धार्मिक वातावरण सभी के मन मस्तिष्क को आकर्षित करते हैं।
दिसम्बर में अरूणाचल प्रदेश के 10 शीर्ष पर्यटन स्थल
1. बोमडिला
दिसम्बर के समय यह जगह अपने मौसम के सादगी भरे अंदाज के लिए जानी जाती है जहां दिन की तेज धूप मे यात्रियो ंका स्वागत करेन के लिए तैयार रहती हैं। साफ आसमान और सर्द रातों की ठंडक पर्यटन को और ज्यादा विशेष बनाता है। यहां बना बोमडिला मठ तिब्बत के त्सोना गोम्पा मठ की डिजाइन की कॉपी करता हुआ सर्दियों के मौसम में प्रार्थना और गर्म केंद्र बन जाता है। पर्यटक व्यू पॉइंट तक पैदल जा सकते हैं। क्षितिज पर फैली पूर्वी हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों के आकर्षण जिनमें कांग्टो और गोरीचेन चोटियों की शोभा शामिल है। हरी भरी हरियाली और विभिन्न शिल्पों से संपन्न संस्कृति और जीवन शैली का शानदार प्रदर्शन करती है।
बोमडिला मठ की स्थापना साल 1965 में हुई थी जो बौद्ध धर्म का प्रतिनिधित्व करता है और कामेंग जिले के टिपी आर्किड अनुसंधान केंद्र के पास ही स्थित है। पहाड़ी पर स्थित यह मठ बोद्ध भिक्षुओं को प्रशिक्षित भी करता है। शिल्प केंद्र और नृवंशविज्ञान संग्रहालय शानदार जगह है जहां कालीन, पारंपरिक मुखौटे और दीवारों पर लटकने वाली चीजें अद्वितीय तरीके से डिजाइन की गईं है। बोमडिला सेब के बागों के लिए मशहूर जगह है जो यहां की जमीन के बड़े भू भाग पर फैले हैं। दिसम्बर में यहा ंका मौसम किसी दावत से कम नहीं होता जहां कम दामों में सेब खरीदने का आनंद आकर्षित करता है।
2. तवांग
अरूणाचल प्रदेश की धरती पर बसा खूबसूरत पर्यटन स्थल तवांग अपने पहाड़ी दृश्यों, प्राचीन ऐतिहासिक और स्थापत्य कला के नमूनों के कारण आकर्षक अनुभव प्रदान करता है। शीतकालीन वंडरलैण्ड के रूप मे यहां का नजारा देखने लायक होता है। तवांग के प्रसिद्ध मठों जिसमें तवांग और उर्गेलिग मठ शामिल हैं, जो शरद ऋतु में अपने सुदंरतम रूप में सामने आते हैं। शांत प्रकृति, बर्फीला माहौल और एकांतिक खूबसूरती इस मठ की आध्यात्मिकता को उच्च आयाम तक ले जाते हैं। दिसम्बर के समय साहसिक गतिविधियों के शौकीन लोग ट्रेंकंग और हाइकिंग गतिविधि का आनंद ले सकते हैं। यहां रास्तों की सुरम्य और बर्फीले पहाड़ों और वनो, वन्य प्राणियों की भव्य झलक प्रदान करते हैं।
तवांग मठ तिब्बती भाषा में गादेन नामग्याल ल्हात्से के नाम से जानते है जिसका अर्थ पूर्ण विजय का दिव्य स्वर्ग होता है, इसकी स्थापना 5वें ंदलाई लामा न्गवांग लोबसांग ग्यात्सों की इच्छा से लोद्रे ग्यात्सों ने की थी। मठ, वज्रयान बौद्ध धर्म के गेलुंग संप्रदाय से संबंधित है। तीन मंजिला मठ करीब 282 मीटर लंबी दीवार से घिरा हुआ है, जिसमें 65 आवासीय भवन है। बौद्ध धर्म से संबंधित बहुमूल्य प्राचीन ग्रंथ है जो मुख्यतः कांग्यूर और तेंग्यूर ग्रंथ है।
3. ईटानगर
अरूणाचल प्रदेश की राजधानी और प्राकृतिक खूबसूरती का निमंत्रण देती यह धरा पर्यटको को बहुत आकर्षित करती है। कोहरे में लिपटी सुबहो के आकर्षण और सिंदूरी शामों के मंजर मंत्रमुग्ध करते परिदृश्यो ंके साथ खूबसूरत यादगार सफर प्रदान करते है। ईटानगर आदिवासी विरासत, सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य और ऐतिहासिक पक्ष के साथ ही कुदरत की अद्वितीय खूबसूरती को पेश करता है। हिमालय की तलहटी में बसा यह शहर अपने मोड़दार रास्तों, घने हरे जंगलों और उबड़ खाबड पहाडियों के दीदार को कराता हुआ मनमोहक सुंदरता का प्रमाण देता है।
ईटानगर का प्रतिष्ठित ईटा किला, की ईटानगर नाम का केंद्र बिन्दु है, जो 15वीं शताब्दी में बना हुआ था। विशेष तरह की ईटों का प्रयोग से बना यह किला अपनी समृद्ध और संपन्न परंपरा का द्योतक है जिसे देखने के लिए पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या देखी जाती है। इसी किले के पास जवाहरलाल नेहरू संग्रहालय अवस्थित है जिसमें पारंपरिक वस्तुएं, हस्तशिल्प और पुरातात्विक खोजों के बेहतरीन आकर्षण हर राज्य की जातीय विरासत का दीदार कराते हैं। संग्रहालय के अलावा यहां स्थित गंगा झील जिसे यहां ग्याकर सिनी कहते हैं। नौका विहार हो या झील के चारों ओर भ्रमण करना हो यह सुकून और शांति प्रदान करने वाला होता है। ईटानगर वन्यजीव अभयारणय में विभिन्न जीव जंतुओ और पक्षियों की खूबसूरती को निहारें।
4. दिरांग
अरूणाचल प्रदेश के शांतिपूर्ण पश्चिमी जिला कामेंग में बसा यह शांत हिल स्टेशन दिरांग अपनी खूबसूरत वादियों, हरी भरी घाटियों और यहां मौजूद मोनपा गांव के गर्मजोशी से भरे आतिथ्य के लिए जाना जाता है। लगभग 4900 फीट की ऊंचाई पर स्थित दिरांग घाटी, नामेरी और तवांग के मध्य आदर्श पड़ाव है। कुदरती सुंदरता, संस्कृति और आनंददायक अनुभवों का शानदार मिश्रण प्रस्तुत करता है। गर्म झरने, मठों की शांति, सेब के फले फूले बाग और हरे भरे घास के मैदानों की शोभा पर्यटकों को आकर्षित करती है।
यहा होती सीढीदार खेती का आकर्षण, दिसम्बर मे कोहरे से ढकी पहाड़ियां और कलकल करती दिरांग चू नदी से सजा हुआ है जहां मोनपा जनजातियो के निवास देखने में पांरपरिक रीति रिवाजों और संस्कृतियों का आिंलंगन करते बौद्ध धर्म मठ अपनी आध्यात्मिक आभा और सदियों से बने पत्थर के घरों और मुस्कान की खुशबू के साथ भाव विव्हल करती है। थुपसंग धारग्ये मठ, राष्ट्रीय याक अनुसंधान केंद्र, मंडला टॉप, चुग घाटी के साथ ही अन्य प्रसिद्ध आकर्षणों को निहार सकते हैं।
5. भालुकपोंगः
हिमालय की दक्षिणी सीमा पर स्थित यह छोटा सा शहर करीब 213 मीटर की ऊंचाई पर बोमडिला से करीब 100 किमी दूरी पर स्थित है। कामेंग नदी के किनारे बसा यह स्थल पखुई जेम सैंक्चुरी के घने जंगलों से घिरा है। इसका अपना विशेष आकर्षण है, पर्यटकों को यहां पिकनिक मनाने और एडवेंचर गतिविधियों का मनोरंजन अत्यधिक आकर्षित करता हैं। फिशिंग और रिवर राफि्ंटग पर्यटकों को लुभाती है। भालुकपोंग में पखुई गेम सैंक्चुअरी और टिपी आर्किडेरियम 80 विभिन्न प्रजातियों के 2600 से अधिक उगाए गए आर्किड है।
भालुकपोंग किला के निर्माण दसवी शताब्दी के आसपास हुआ था, आज यहां खंडहर अवशेष इस स्थान के गौरवमयी इतिहास पारंपरिक भव्यता को दर्शाता है। किला निर्माण राजा भालुक ने भराली नदी के तट पर कराया था। आज यहा राजा भालुक के पोते बाना के महत्वपूर्ण अवशेष सुरक्षित है जहां किले के अवशेष भराली नदी के तट पर पहाड़ी की ढलान पर कुछ पत्थर और ईटों के अवशेष बचे हुए है। इस किले मे एक तालाब और एक ईंट का कुआं भी पाया जाता है। राजा भालुक के पोते और महाभारत के पराक्रमी पात्र बाना के ऐतिहासिक अवशेषो को देखने का मौका मिलता है। भालुकपोंग में अका जनजाति रहती है।
6. मेचुकाः
दिसम्बर या सर्दियो में मेचुका जाने का मजा ही अलग है जो शीतकालीन वंडरलैण्ड में बदल जाता है। सुदंरता, शांति और प्रकृति को उज्जवलित करता मेचुका अरूणाचल प्रदेश के शांत सुदूर कोने में बसी फॉरबिडन वैली के नाम से भी जानी जाती है। बर्फ से ढके चीड़ के पेड़, बर्फ बनी नदियां और गांवों की मनमोहक शांति शीतकालीन रोमांचक के रूप में मशहूर है जहां आप एडवेंचर और विंटर का अनोखा मेल एन्जॉए कर सकते हैं। बर्फबारी का भव्य दीदार मेचुका की कोमल भरे स्पर्श को और भी ज्यादा सुंदरता प्रदान करता है। मेचुका शहर 1829 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है जहां दर्शनीय स्थलों की दूरी भी ऊंचाई की खूबसूरती को निखार देती है।
मेचुका अत्यंत पंसदीदा और प्रसिद्ध घाटी है जहां पर्यटक घूमना पसंद करते हैं, फोटोग्राफी, शांत सर्द वातावरण , जमें हुए जलाशयों की बर्फीली स्थिर आकृतियां और देवदार, चीड़ के घने जंगलो, घास के मैदानो और जनजातीय गांवो पर दिखाई देती श्वेत बर्फ की चादर हर किसी को उमंग और जोश से सराबोर करती हुई शानदार दिखती है।
7. पासीघाट
अरूणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले का मुख्यालय है जो करीब 155 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां लटकते पुलों की खूबसरती और विशाल सियांग के प्राकृतिक नजारे- जिसमें गोल बेंत के छल्ले, हैंगिग तार, विशाल सियांग के ऊपरी तरफ लटकते हुए लकड़ी के फुटपाथ रोमांचक के आदर्श पल बनाते हैं। पासीघाट की चट्टानों पर बहता सुहाना झरना यहा सर्द एहसास को और भी ज्यादा बढाता है। जल की संगीतमय ध्वनि, शीतल हवाएं और पक्षियों की चहचहाहट, बारिश के बाद जंगल की भीनी खुशबू मंत्रमुग्ध करती है।
पासीघाट मे डेयिंग एरिंग मेमोरियल वन्यजीव अभयारण्य मे वन्य प्रजातियों का दीदार कर सकते हैं। सिरकी झरना, डंगोरिया बाबा मंदिर, डोनयी पोलो गैंगिक देखने के साथ ही राणेघाट कोमलीघाट मेबो की खूबसूरती को निहार सकते हैं। पासीघाट का पोंगिंग हैंगिग ब्रिज दर्शकों द्वारा खूब पंसद किया जाता है।
8. संगति वैली
अरूणाचल प्रदेश में यह घाटी दिरांग घाटी में स्थित है, जो प्रकृति प्रेमियों, जीव जंतु के शानदार परिदृश्य और पक्षियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति की गोद में मानसिक शांति और सुकून की खोज पूरी होती है। सुहाना मौसम, नदी का स्वच्छ जल, सेब के बागों की खुशबू, परिदृश्यों में बिखरे मठों की शांति और भी बहुत कुछ प्रदान करता है। दिरांग शहर के पास स्थित यह घाटी हरियाली भरे खेतों, झिलमिलाती नदियों और सजीव बागों की प्रसिद्धि के लिए जानती है। दिसम्बर के समय आप यहां विलुप्त प्राय काले गर्दन वाले सारसों का भी आगमन देख सकते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह स्थान बेहद रोचक है जहां आप तरह तरह के पक्षियो ंकी श्रृंखला को निहार सकते हैं।
संगति घाटी होमस्टे एन्जॉए करें, नेचर कैंप, थेम्बांग हेरिटेज विलेज, दिरांग बुटीक कॉटेज, संगति नदी, संगति मठ, भेड़ प्रजनन फार्म देखने के साथ ही गावं की सैर भी कर सकते हैं।
9. जीरो वैली
अरूणाचल प्रदेश की जीरों घाटी अपनी कुदरती सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि से सराबोर मंत्रमुग्ध करते नजारों की श्रृंखला प्रस्तुत करती है। जैव विविधता का समर्थन करती यह घाटी ऐतिहासिक स्थलों, दर्शनीय मठों, मंदिरों और सांस्कृतिक उत्सवों के लिए जानी जाती है। एडवेचंर शौकीन हों या प्रकृति प्रेमी, आध्यात्मिक आकर्षण पसंद हो या ऐतहासिक विरासतें, सभी तरह के लिए जीरों वैली शानदार आकर्षण उत्पन्न करती है। जीरो घाटी ट्रेकिंग के लिए कई सारे अनुभवों का मौका प्रदान करती है जिसमें से एक है डोलो मंडो की ट्रेकिंग। जैविक खेती, आपतानी जनजाति की परंपराएं और रीति रिवाज, सांस्कृतिक सौदर्यता दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करती है। जीरो घाटी का जीरो घाटी महोत्सव पर्यटकों के मध्य बेहद लोकप्रिय है।
जीरो घाटी में तारिन मछली फॉर्म है जहां आप खेती के साथ ही मछली पालन की कला का लुत्फ भी निहार सकते हैं। बुल्ला गांव मे फसल उगाने और मछली पालन की अनोखी तरकीब आकर्षण का केंद्र है। जहां धान की खेती के साथ ही मछली पालन का काम भी बेहतरी से किया जाता है। अपातानी जनजातियों की प्राकृतिक सुंदरता और प्राकृतिक सुंदरता में भ्रमण करना पर्यटकों को पसंद आता है। जीरो वैली में किले पाखों की अद्भुत सैर कर सकते हैं जहां बर्फ से ढकी हिमालयी पर्वतों की श्रृंखला ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए शानदार गंतव्य है। फोटोग्राफरों के लिए भी यह स्थान बेहद खास और रोचक है जहां ऋतुएं अपनी कला का बिखेरती हैं। टैली वन्य जीव अभयारणय के आकर्षणों को भी जीरों वैली की यात्रा के दौरान निहार सकते हैं। शानदार नैसर्गिक सुंदरता का पर्याय मेघना गुफा मंदिर करीब पांच हजार साल से भी अधिक पुराना है जिसकी खोज 1962 मे हुई थी। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जिसकी प्राचीन वास्तुकला में शास्त्रों की नक्काशी का अवलोकन करने को मिलता है।
10. नामदफा नेशनल पार्क
भारत का तीसरा सबसे बड़ा उद्यान नामदफा अरूणाचल के पूर्वी भाग के मियाओ के पास स्थित है। दिसम्बर का समय यहां के लिए बेहतरीन समय होता है जहां लोकप्रिय जानवर बाघ, तेंदुआ, धूमिल तेंदुआ और हिम तेंदुआ देखने का मौका मिलता है। यहां आप हॉर्नबिल, तीतर और प्रवासी पक्षियों को निहार सकते हैं। सर्दियो के समय यहां मौसम साफ स्वच्छ होता है जिससे वन्यजीवों को देखने का यह सबसे उपयुक्त समय होता है।
दिसम्बर में अरूणाचल प्रदेश क्यों जाएं
दिसम्बर में अरूणाचल प्रदेश का मौसम ज्यादातर स्थिर ही रहता है जहां आसमान साफ और साफ दिखती पर्वत घाटियों के नजारे आकर्षित करते हैं। यह मौसम ट्रेकिंग और अन्य साहासिक गतिविधियों के लिए उत्कृष्ट समय होता है जहां ठंडी हवाओ और मौसम में नर्माहट आकर्षित करती है। अधिक ऊंचाई वाले स्थान जम जाते हैं और बर्फबारी की चमक पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है। इस समय कम बारिश और शानदार मौसम के कारण यह समय पैदल घूमने , वन्य जीवन को निहारने और उत्सवी रौनक जश्न के लिए उपयुक्त होता है।
दिसम्बर मे अरूणाचल प्रदेश का मौसम व जलवायु
दिसम्बर के समय पर अरूणाचल प्रदेश का मौसम यहां स्थित भू भाग क्षेत्रो की ऊंचाई पर निर्भर करता है।
पश्चिमी अरूणाचल (तवांग, बोमडिला ) : 0 डिग्री सेल्सियस से लेकर 8 डिग्री सेल्सियस जहां ऊंचाई वाले दर्रो में बर्फबारी की संभावना, शीतकालीन वंडरलैण्ड बन जाता है। । अत्यधिक ठंडा मौसम जो रात में कुछ ज्यादा ही सर्द हो जाता है। बर्फबारी अधिकतर बढ जाती है जहा आप स्कीइंग गतिविधि का आनंद ले सकते हैं।
मध्य अरूणाचल ( जीरो, अलोंग, ईटानगर ) : न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 15 डिग्री सेल्सियस तक, दोपहर सुहानी और रातें सर्द। साल मे बस कुछ समय के लिए ही बर्फबारी होती है जहां सर्दियों की छुट्टियां बिताना मजेदार अनुभव देता है।
पूर्वी क्षेत्र ( मेचुका, पासीघाट ) : सर्द किन्तु प्रंबधित तापमान 8 से 12 डिग्री सेल्सियस तक मौसमीय मिजाज आनंददायक लुत्फ और पर्यटन के लिए उत्तम।
साफ स्वच्छ आसमान और शानदार पहाड़ी सुंदरता साहसिक और रोमांचक गतिविधियो के साथ ही फोटोग्राफी के शौकीन लोगो के लिए आदर्श समय और जगह है। घूमने फिरने स्थानीय विशेषताएं और रीति रिवाजों का आनंद लेने के लिए खास मौसम होता है।
दिसम्बर में अरूणाचल प्रदेश के मुख्य व्यंजन
अरूणाचल प्रदेश पारंपरिक, सांस्कृतिक और प्रामाणिक व्यंजनों का पूरा खजाना है जहां यहां का भोजन एक जनजाति से दूसरी जनजाति में भिन्न होता है। इसलिए व्यजनों की यहां अनगिनत वैराइटीज देखने को मिल जाती है। अरूणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग में बांस और उबली हुई पत्तेदार सब्जियां स्पेशल हैं। पश्चिमी अरूणाचल यानी तवांग और आसपास के स्थानों पर डेयरी उत्पादो पर निर्भरता ज्यादा रहती है। यह प्रदेश उबले या स्मोक्ड भोजन के लिए ज्यादा प्रसिद्ध है। अरूणाचल प्रदेश में डिशेज की बात करें तो तेल कम और ज्यादातर उबलला हुआ खाते हैं। अरूणाचल प्रदेश के कुछ व्यंजनों के नाम इस प्रकार है।
बैम्बू शूटः मीठे और खट्टे स्वाद के साथ यह डिश सरसो और लहसुन का इस्तेमाल कर बनाई जाती है। जो अरूणाचल प्रदेश के व्ंयजनो में विशेषता जाना जाता है।
पिका पिलाः आपातानी जनजाति की यह मुख्य डिश बांस की गोली, सुअर की चर्बी, सुंगधित मसाले और ढेर सारी मिर्ची का उपयोग कर बनाई जाती है। इसे चावल के साथ खाया जाता है।
लुक्टरः भुना हुआ मांस का टुकड़ा होता है जिस पर सूखी लाल मिर्च के बीज छिड़क कर दिसम्बर में नए साल की पार्टी में बहुत शौक से खाया जाता है। जो चावल के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है।
पहलूः मसालेदार और स्वादिष्ट व्यंजनों में से एक यह डिश किण्वित सोयाबीन और गर्म मिर्च भूत जोलोकिया से तैयार किया जाता है। जिसका चटपटा स्वाद बहुत लजीज है।
अपोंगः अरूणाचल प्रदेश का पारंपरिक पेय है जो चावल की बनी बियर होती है जो बिना किसी केमिकल के बनाई जाती है। अरूणाचल का प्रसिद्ध पेय और व्यंजनांं का महत्वपूर्ण भाग है।
मारूआः बाजरे की बनी हुई शराब जिसका निर्माण घर में ही होता है, पार्टी, जश्न विशेष अवसरों पर इसे पिया जाता है जो अरूणाचल प्रदेश का प्रमुख पेय है।
चुरा सब्जीः याक या गाय के दूध से बनी यह सब्जी किण्वित पनीर की मसालेदार और स्थानीय जड़ी बूटियों वाली सब्जी है जो पनीर और मसालों का बेहतरीन सम्मिश्रण हैं।
थुपकाः तिब्बती लोगो द्वारा बनाया गया नूडल सूप जिसमें गाजर, शिमला मिर्च, पालक, फूलगोभी और अजवाइन की सब्जियों के साथ ही चिकन का इस्तेमाल कर बनाया जाता है।
पो चाः याक के दूध, मक्खन और नमक से तैयार किया गया यह आईटम बटर टी कहलाता है जो एक तरह का चाय या सूप है, इसे कोट पिठा या आईते साथ सर्व किया जाता है।
दिसम्बर में अरूणाचल प्रदेश यात्रा करते समय अपनाने वाली सावधानियां
अरूणाचल प्रदेश की यात्रा करने के लिए इनर लाइन परमिट की आवश्यकता की होती है जिसे आईएलपी नाम से जानते हैं। विदेशी नागरिकों को संरक्षित क्षेत्र परमिट पीएपी की जरूरत होती है। इसको प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन या पर्यटन कार्यालयों के माध्यम से आवेदन करते हैं।
- भारी वस्त्र ऊनी कपडे, थर्मल और जलरोधी जूते रखें।
- ऊंचाइयों पर होने वाली समस्याओं से बचने के लिए आवश्यक दवाईयां साथ रखें।
- परमिट प्रतियां संभाल कर रखें, बार बार चेकिंग हो सकती है।
- पहाड़ी क्षेत्रो ंमें सड़के ऊंची नीची होती है इसलिए अनुभवी ड्राइवरों के साथ यात्रा करें।
- नेट कनेक्टिविटीः सुस्त और धीमी हो सकती है इसलिए अपने प्रिय जनों को सूचित कर दें।
- नकदी साथ जरूरी है क्योंकि एटीएम उपलब्धता सीमित और इंटरनेट धीमा हो सकता है।
- सांस्कृतिक स्थलो, गतिविधियों में शामिल होते समय उनकी मर्यादा, परंपराओे की गरिमा और सम्मान बनाएं रखें।
दिसम्बर में अरूणाचल प्रदेश में करने योग्य चीजें
माउंटेन बाइकिंगः पहाड़ी इलाके की यात्रा करने के लिए तवांग व बोमडिला जैसी जगहों पर मांउटेन बाइक चलाने का आनंद ले सकते हैं, यहां करीब 5000 मीटर तक ऊंचे दुर्गम रास्ते और हिमालय पर्वत श्रेणियों के शानदार नजारें देखने को मिलते हैं।
गर्म पानी के झरनेः शानदार परिवेश और अरूणाचल प्रदेश की शानदार घाटियों जैसे दिरांग, तवांग में गर्म पानी के झरनों में कुछ आरामदायक समय बिताएं। गर्म पानी के इन झरनो में विशेष उपचारात्मक गुणों का संग्रह देखने को मिलता है जो अपने सुंदर दृश्यों और गुणों के कारण आकर्षित करते हैं।
ट्रेकिंग और लबी पैदल यात्राः दिसम्बर में सर्दियो के समय ट्रेकिंग और पैदल यात्रा का लुत्फ ले सकते हैं जो बर्फीली चोटियों और घने आकर्षणों के कारण प्रिय अनुभव देता है। गोरीचेन बेस कैंप ट्रेक और ईगल्स नेस्ट ट्रेक की यात्रा पर जा सकते हैं जहां कुदरत की अनमोल तोहफों का दीदार करना अच्छा लगता है।
कैपिंगः ट्रेकिंग के दौरान या वैसे भी संगति घाटी, मेचुका और नामदफा नेशनल पार्क में प्रकृति की सैर कर सकते हैं और कैपिंग का यादगार अनुभव ले सकते हैं।
उत्सव
हॉर्नबिल उत्सवः अरूणाचल प्रदेश से सीमा साझा करता असम और नागालैण्ड में हॉर्नबिल उत्सव की धूम देखने लायक होती है। हॉर्नबिल उत्सव बेहद हर्ष उल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है।
बास्कॉनः अरूणाचल प्रदेश की जनजातीय प्रतिभाओं का नृत्य प्रदर्शन और संगीत का आनंद लें।
दिसम्बर में अरूणाचल प्रदेश कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- अरूणाचल प्रदेश पहुंचने के लिए अभी हाल ही में नव निर्मित हवाई अड्डा डोनयी पोलो एयरपोर्ट, ईटानगर मे है, जो गुवाहाटी और कोलकाता से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। लीलाबाड़ी एयरपोर्ट असम उत्तरी अरूणाचल हिस्से को कवर करता है और गुवाहाटी एयरपोर्ट पश्चिमी अरूणाचल से सड़क रास्ते से होते हुए अरूणाचल प्रदेश की सैर कराने वाला प्रसिद्ध प्रवेश स्थान है।
रेल मार्ग से
- अरूणाचल प्रदेश पहुंचने के लिए नाहरलागुन रेलवे स्टेशन है जो ईटानगर के पास और दिल्ली और गुवाहाटी से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा हरमुती रेलवे स्टेशन असम में है जहां से आप उत्तर पूर्व अरूणाचल प्रदेश की यात्रा संपन्न कर सकते है।
सड़क मार्ग से
- असम के रास्ते अरूणाचल प्रदेश पहुचना सहज है जहां से सरकारी या प्राइवेट वाहन आसानी से उपलब्ध हैं। वैसे दिसम्बर के महीने में आरामदायक टैक्सियां बुक करके पहुंच सकते हैं।
निष्कर्ष
दिसम्बर में अरूणाचल प्रदेश कई सारी विविधताओें का प्रदर्शन करता है जिसमें बफीले दर्रे और गर्म झरनों की खासियत, मंदिर मठों की पवित्र ध्वनि और नदियों की मधुर आवाजें, आदिवासी संस्कृतियां और घाटियों की शांति आकर्षित करती है। मठों की भव्य वास्तुकला से लेकर ऑफबीट स्थानों की खूबसूरती तक, साहसिक गतिविधियों और शांत ध्यान की खूबियों को प्रदान करता अरूणाचल प्रदेश अविस्मरणीय अनुभव सहेजता है।
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