• Feb 02, 2026

हो......ली! जिसका अर्थ ही है रंगों की धूम में ऐसे रंग जाना कि कहीं कोई अंतर ही न रह जाए। भारत के सबसे उल्लसित त्यौहारों में से एक यह पर्व पूरे वातावरण को अबीर, गुलाल, रंग और खुशबूओं में ऐसे सराबोर कर देता है कि हर्ष उत्साह और जश्न की खूबियों से प्रकृति का कण कण खिल उठता है। साल 2026 में होली 4 मार्च को मनाई जाने वाली है लेकिन इसकी रौनक बसंत पंचमी से ही नज़र आने लगती है। पिचकारियों, गुलाबी हरे पीले रंगों, फूलों और स्वादिष्ट गुझिया, मिठाईयों से गुलज़ार बाज़ार, गली मोहल्लों व खुले आकाश तक हंसी ठहाकों के स्वर और डीजे बीट पर बजते लयबद्ध गीतों की श्रृंखला भारत के हर कोने में होली का उत्सव देखते बनता है, पर कुछ खास जगहों पर इसका आनंद कुछ ज्यादा ही मिलता है, तो ऐसे में मस्ती और होली के रंग में रंगने को तैयार, हुलियारों की टोली कहां मचाती है सबसे ज्यादा धमाल, आइए विस्तार से जानते हैं इन जगहों के बारें में

1. बरसाना व नंदगांव उत्तर प्रदेश

ब्रज क्षेत्र की होली दुनिया भर में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है, यहां देश विदेश से लोग होली मनाने के लिए शामिल होते हैं। त्योहार का उत्सव रंग अबीर गुलाल से भी कहीं अधिक लट्ठमार होली के लिए जाना जाता है। बरसाना और नंदगांव की लट्ठमार होली का अंदाज़ कुछ ऐसा है कि महिलाएं पुरूषों पर लाठियों से वार करती हैं और पुरूष प्रसन्नता के साथ लाठियों की मार को सहन करते हैं। तकरीबन एक सप्ताह तक चलने वाला यह उत्सव बेहद उल्लास, उत्साह और अपनेपन के साथ मनाया जाता है। इस प्रथा को लेकर किंवदंती है कि भगवान श्रीकृष्ण जब अपने सखाओं संग बरसाना व नंदगांव होली खेलने आते थे तब अठखेली करते हुए बरसाना में राधा जी और गोपियां इन पर डंडे से प्रहार करती थीं तभी से यह चलन आज होली की एक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।

बरसाना से लोग अगले दिन नंदगांव के नंदभवन में जाकर होली खेलते हैं जहां वहां की महिलाएं उन्हें लाठियों से मारती हैं।

प्रसिद्ध आकर्षण

  • बरसाना के प्रमुख श्री लाडली सरकार श्री राधा रानी जी मंदिर में लट्ठमार होली से एक दिन पहले ‘‘लड्डू होली’’ खेली जाती है जहां दर्शनार्थी और पुजारी एक दूसरे पर लड्डू फेंकते हैं और होली के गीतों का आनंद लेते हैं।
  • बरसाना की रंगीली गली रंगोत्सव और ब्रज के होली पारंपरिक गीत फाग से गुजाएंमान होती है।
  • प्रमुख मंदिर श्री राधा रानी, कीर्ति मंदिर, मान मंदिर, कुशल बिहारी, अष्टसखी, रंगीली महल, मोर कुटी और सांखरी खोर इत्यादि जगहों का दर्शन करें।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग से

  • बरसाना पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, नई दिल्ली है जिसकी दूरी लगभग 150 किमी है। इसे तय करने के लिए आप बस, टैक्सी और ट्रेन की सुविधा उपलब्ध है। आप चाहें तो सड़क रास्ते से या नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से मथुरा जंक्शन या कोसी कलां रेलवे स्टेशन उतरकर ट्रेन द्वारा बरसाना, नंदगांव पहुंच सकते हैं। 

रेल मार्ग से 

  • बरसाना, नंदगांव का नजदीकी रेलवे स्टेशन कोसी कलां और मथुरा जंक्शन है जिसकी दूरी क्रमशः 23 किमी व 45 किमी है। इसे आप सड़क मार्ग से तय कर बरसाना नंदगांव पहुंच सकते है। 

सड़क मार्ग से 

  • बरसाना व नंदगांव दिल्ली आगरा नेशनल हाईवे एनएच 19 के रास्ते छाता कस्बे से होते हुए बस या टैक्सी से आराम से पहुंच सकते हैं। 

2. मथुरा व वृन्दावन, उत्तर प्रदेश 

मथुरा वृन्दावन में होली की शुरूआत 40 दिन पहले बसंत पंचमी से ही हो जाती है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर बने विशाल मंदिर में रंगभरी एकादशी पर भक्तों और दर्शकों की भारी भीड़ देखने को मिलती हैं जहां मंदिर परिसर की शोभा देखते बनती है। पुष्प, लताएं और हानिरहित रंगों से होली की शुरूआत के साथ स्थानीय परंपराओं और कलाकारों द्वारा नृत्य प्रस्तुतियां लुभाती हैं। इसके अलावा वृंदावन की बिहारी जी मंदिर की फूलों वाली होली विश्व प्रसिद्ध है। भगवान का मंदिर बेहतरीन फूलों की लड़ियों से सजाया जाता है, इसके अलावा पूरे वृंदावन का वातावरण होली की निराली छटा में अद्भुत रंग बिखेरता है। वृंदावन की गलियों में बहुत जोरों शोरो से होली उत्सव मनाया जाता है जहां बच्चे, बड़े सभी होली के आनंद में डूब जाते हैं। 

प्रसिद्ध आकर्षण 

  • मथुरा दाऊजी मंदिर हुरंगा में होली के अगले दिन विशेष रूप से हुरंगा मनाया जाता है जिसमें भाभियां अपने देवरों को गीले कपड़ों से मारती हैं। 
  • मथुरा गोकुल में छड़ी मार होली खेली जाती है जहां यह अनोखी परंपरा निभाई जाती है। 
  • पागल बाबा आश्रम में विधवा महिलाएं आमतौर पर फूलों से होली खेलते हुए उत्सव मनाती हैं, जिसकी झलक पागल बाबा आश्रम तक जुलूस में दिखाई देती है। 

होली से दो तीन दिन पहले वृंदावन स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर से होली गेट तक विशाल और भव्य जुलूस यात्रा निकलती है जिसमें विशाल संख्या में लोग नाचते झूमते हुए भाग लेते हैं जिन पर स्थानीय लोग अपनी छतों और चौबारों से पानी के गुब्बारे औैर रंग फेकते हैं। 

कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग से 

  • नजदीकी हवाई अड्डा नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जिसकी मथुरा से दूरी लगभग 150 किमी है। मथुरा से वृंदावन करीब 15 किमी की दूरी पर स्थित है जिसे स्थानीय बस, टैक्सी या ऑटो रिक्शा से तय कर सकते हैं। 

रेल मार्ग से 

  • मथुरा रेलवे स्टेशन की कनेक्टिविटी देश के सभी प्रमुख शहरों से बेहतर है जहां आप रेल मार्ग माध्यम से मथुरा पहुंच सकते हैं। 

सड़क मार्ग से 

  • मथुरा राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य राजमार्गों से बेहतरी से जुड़ा हुआ हैं। जहां आप स्वयं की कार या सार्वजनिक वाहन से तय कर मथुरा व वृंदावन घूमने पहुंच सकते हैं। 

3. द्वारका, गुजरात 

श्रीकृष्ण द्वारा बसाई गई द्वारका नगरी में होली का रंग बेहद गहरा और उत्सवमय होता है। सिर्फ मथुरा या वृंदावन में ही नहीं बल्कि गुजरात का द्वारका शहर भी होली के लिए अति लोकप्रिय और प्रसिद्ध शहर है। द्वारकाधीश मंदिर में भगवान की प्रतिमा को चांदी की पिचकारी से प्राकृतिक तरह से बनाए गए रंग, अबीर, गुलाल और सुगंधित जल अर्पित किया जाता है। होली के दौरान यहां करीब 8 से 10 लाख लोग दर्शन के लिए आते हैं। गोमती नदी और अरब सागर के मिलन बिन्दु पर बसा द्वारकाधीश मंदिर पारंपरिक रास की धुन पर नृत्य करते भक्तो की उपस्थिति से सुशोभित होता है। रंग, संगीत और नृत्य का मंत्रमुग्ध करते आकर्षण की छटा पूरे वातावरण को रमणीक बना देती है। 

प्रसिद्ध आकर्षण 

  • द्वारिकाधीश मंदिर में मनाया जाने वाला फुलडोल महोत्सव होली का प्रसिद्ध और पारंपरिक उत्सव है। मेढ समुदाय के स्त्री पुरूष पारंपरिक और शानदार नृत्य प्रस्तुत करते हैं। होली समारोह के दौरान मंदिर की ध्वजा दिन में पांच बार बदली जाती है। 
  • अरब सागर के तट पर शांति और उल्लास के साथ बेहतर समय बिता सकते हैं। समुद्री टापू पर बसी बेट द्वारका के दर्शन व सैर कर सकते हैं। 
  • द्वारका से लगभग 200 किमी की दूरी पर सोमनाथ है जहां आप मंदिर दर्शन और कई सारे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों की सैर कर सकते हैं।
  • सोमनाथ में त्रिवेणी संगम, भालका तीर्थ, गीता मंदिर, देवी शक्तिपीठ, राम मंदिर और अन्य महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों के दर्शन कर सकते हैं। 

कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग से 

  • द्वारका पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा जामनगर है जिसकी द्वारका से दूरी लगभग 120 किमी है, इसे आप बस, टैक्सी से तय कर पहुंच सकते हैं। 

रेल मार्ग से 

  • द्वारका में द्वारका रेलवे स्टेशन है जहां ंसे मंदिर की दूरी लगभग 3-4 किमी है। ऑटो रिक्शा, कैब से जा सकते हैं। 

सड़क मार्ग से 

  • गुजरात और आसपास के राज्यों के प्रमुख शहरों से द्वारका पहुंचने के लिए आप सीधी बस या कैब वगैरह बुक कर पहुंच सकते हैं। इसकी दूरी राजकोट से 220 किमी, अहमदाबाद से 450 किमी और सोमनाथ से करीब 200 किमी है। इन्हें आसानी से तय कर सकते हैं। 

4. वाराणसी, उत्तर प्रदेश 

घाटों के शहर के रूप में प्रसिद्ध बनारस शहर अपनी जीवंत संस्कृति और उत्साहमय वातावरण के लिए जाना जाता है। वाराणसी की होली अन्य जगहो से एकदम विलग है। मुक्ति के शहर बनारस में होली के रंग के साथ डमरू की गड़गड़ाहट और चिता भस्म की चमक से पूरा वातावरण विशेष हो जाता है। बनारस में रंगभरी एकादशी के अगले दिन चिता भस्म यानी मसान की होली मनाई जाती है, इस रस्म के पीछे मान्यता है कि स्वयं महादेव भगवान अपने गणो के साथ बनारस के मणिकर्णिका घाट पर होली खेलने आते हैं। मान्यता है कि भस्म होली खेलने से भगवान शिव जी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ के मंदिर में अबीर गुलाल की होली खेली जाती है, कहते हैं इस दिन भगवान शिव देवी पार्वती का गौना कराकर वाराणसी लाते हैं। 

प्रसिद्ध आकर्षण 

  • होली के दिन बाबा विश्वनाथ के दरबार और पूरे बनारस में बहुत हर्षोल्लास और जोश के साथ हर हर महादेव के नारे लगाते हुए एक दूसरे को अबीर गुलाल लगाते हैं। 
  • दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती की दिव्यता आकर्षित करती है। इसके अलावा नाव की सवारी, प्रमुख घाटों के दर्शन और बनारस के प्रमुख बाजारों की सैर कर सकते हैं। 

कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग से 

  • वाराणसी हवाई मार्ग से पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डा, वाराणसी है। यहां से आप टैक्सी/कैब वगैरह से वाराणसी शहरी केंद्र पर पहुंच सकते हैं। 

रेल मार्ग से 

  • वाराणसी शहर में वाराणसी रेलवे स्टेशन है जहां देश के प्रमुख शहरों से रेलों का आवागमन देखने को मिलता है। रेलवे स्टेशन से टैक्सी, कैब या ऑटो रिक्शा माध्यम से बनारस घूम सकते हैं। 

सड़क मार्ग से

  • वाराणसी पहुंचने के लिए सड़क मार्ग की सुविधा बेहतर उपलब्ध है जहां आप आसपास के प्रमुख शहरों से चलने वाली सीधी बसों के माध्यम से वाराणसी घूमने जा सकते हैं। 

5. उदयपुर, राजस्थान 

रंग बिरंगे उत्सव की धूम और होली त्यौहार की रौनक झीलों के शहर उदयपुर में देखते बनती है। राजसी अंदाज़, शान शौकत और जीवंत परम्पराओं के लिए प्रसिद्ध उदयपुर अपने भव्य मंदिरों और झीलो के किनारे अद्भुत आकर्षण बिखेरता है। राजस्थानी संगीत पर झूमना हो या होली के शाही रूतबे को महसूस करना हो, इन भावनाओं के लिए उदयपुर सर्वोत्तम जगह है। गंगौर घाट, पिछोला झील व अन्य सार्वजनिक समारोहो में रंगों की जीवंतता को जिएं और महसूस करें। राजस्थानी लोक प्रदर्शनों का अनुभव सहेजें। 

प्रसिद्ध आकर्षण 

  • होलिका पूजन की पारंपरिक और प्रमुख रीति रिवाजो का अवलोकन करें। 
  • राजस्थानी और बॉलीवुड संगीत की जुगलबंदी लाइव परफॉरमेंस का आनंद लें। 
  • जगमंदिर की भव्यता और होली उत्सव की रौनक निहारें। 
  • बोट राइडिंग और अन्य गतिविधियो के साथ द्वीपों की सैर करें। 

कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग से 

  • उदयपुर से नजदीकी हवाई अड्डा महाराणा प्रताप हवाई अड्डा है जहां से भारत के प्रमुख शहरों के लिए सीधी फ्लाइट आराम से मिल जाती है। हवाई अड्डे से उदयपुर की दूरी लगभग 24 किमी है। 

रेल मार्ग से

  • उदयपुर का अपना रेलवे स्टेशन उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन है जहां से उदयपुर शहरी केंद्र की दूरी लगभग 3 किमी है। 

सड़क मार्ग से 

  • दिल्ली मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग 8 और एनएच 76 उदयपुर से कनेक्टड है जहां आप स्वयं ड्राइविंग या सीधी बस के माध्यम से उदयपुर पहुंच सकते हैं। 

6. पुष्कर, राजस्थान 

राजस्थान के आध्यात्मिक और पवित्र शहर के रूप में प्रसिद्ध पुष्कर होली उत्सव और जीवंत माहौल के लिए हमेशा से ही प्रसिद्ध शहर रहा है। पुष्कर की होली प्रमुख रूप से दीवानगी और जुनून का पर्याय है। यहां कपड़ा फाड़ होली का चलन मौजमस्ती और अल्हड़पन के लिए मशहूर है जो सिर्फ एक दिन नहीं वरन् 12 दिनों तक चलने वाला महा उत्सव है जिसमें सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, रंगों के कार्यक्रम और गायन रंग राजस्थानी लोकसंस्कृति की छाप छोड़ते हुए पुष्कर को होली स्पेशल डेस्टिनेशन बना देते हैं। 

प्रसिद्ध आकर्षण 

  • पुष्कर के वराह घाट पर होली की धूम सुबह से ही दिखने लगती है, जहां पुष्कर घाट पर लोग पवित्र डुबकी लगाकर होली की धूम और मंदिर दर्शन करते हैं।
  • ढोल ताशों की धुन पर होली के जश्न की शुरूआत आकर्षित करती है, जहां स्थानीय और सैलानी सभी मस्ती में सराबोर होकर झूमते हैं। 
  • पुष्कर के प्रमुख मंदिर और घाटों पर होली की सजावट के साथ ही यहां की हस्तशिल्प स्थानीय कलाकृतियों को देखें और खरीदें। 

कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग से 

  • हवाई रास्ते से पुष्कर पहुंचने के लिए किशनगढ घरेलू हवाई अड्डा सबसे नजदीक है जिसकी दूरी लगभग 40 किमी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट हैं जहां आप टैक्सी/कैब या बस के माध्यम से पुष्कर पहुंच सकते हैं। 

रेल मार्ग से 

  • रेल मार्ग से पुष्कर पहुंचने के लिए अजमेर जंक्शन सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन है जहां से देश के प्रमुख शहरो से आराम से अजमेर पहुंच सकते हैं, अजमेर जंक्शन की पुष्कर से दूरी लगभग 15 किमी है ंजहां से आप स्थानीय वाहनों के जरिए पुष्कर पहुंच सकते हैं। 

सड़क मार्ग से 

  • अजमेर के रास्ते पुष्कर पहुंचने के लिए सड़क मार्ग बेहतर है। आप स्वयं की कार, टैक्सी/कैब या बस से पुष्कर पहुंच सकते हैं। 

7. पुरी, ओडिशा

ओडिशा में होली उत्सव डोल पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है जहां भगवान जगन्नाथ को खास तरह के झूले पर सवार कर पालकी यात्रा का आयोजन किया जाता है। पूरे शहर के प्रमुख चौराहो से निकलते हुए भगवान जगन्नाथ को भ्रमण कराया जाता है। इस पालकी को भक्त बारंबार निहारते और बारी बारी उसे झुलाते हैं। उड़ता हुआ अबीर गुलाल और चारों और नृत्य करती प्रस्तुतियों के आकर्षण होली त्यौहार को विशेष रूप से और भी ज्यादा खास बना देते हैं। भगवान जगन्नाथ की पालकी को अपने कंधे पर ग्वालों द्वारा संभाला जाता है जिसके पीछे मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का एक रूप ग्वाला भी है। होली के एक दिन पहले ही भगवान को बैठाने के लिए झूलन मंडप नाम से विशेष संरचना बनाई जाती है। सुबह अबीर गुलाल अर्पित करने के साथ ही विभिन्न तरह की मिठाई जैसे पेठा, मुरमुरे तिल से बने लड्डूओं का भोग लगाया जाता है। शाम को भगवान को तालाब में स्नान कर वापस मंदिर ले जाते हैं। ओडिशा की होली अन्य जगहों से बेहद अद्वितीय और आनंदित अनुभव प्रदान करने वाली है। 

प्रसिद्ध आकर्षण 

  • जगन्नाथ मंदिर के झांकी दर्शन के साथ ही ओडिशा के अन्य मंदिरों में दर्शन करें। 
  • ब्रहमगिरी के पास अलारनाथ मंदिर में होली उत्सव की विशेष झलक देखने के लिए जाएं। 
  • समुद्री किनारे की शांति और रेतीले तट पर भ्रमण कर समय बिताएं। 
  • पारंपरिक छड़ी के खेल ‘‘डंडी खेला’’ का आनंद लें। 

कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग से 

  • हवाई रास्ते से पुरी पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर का बिजू पटनायक इंटरनेशनल हवाई अड्डा है जिसकी पुरी से दूरी लगभग 60 किमी है। प्रीपेड टैक्सी या ऐप टैक्सी/कैब, बस के माध्यम से आप एयरपोर्ट से पुरी पहुंच सकते हैं। 

रेल मार्ग से

  • पुरी रेलवे स्टेशन, पुरी के शहरी केंद्र से लगभग 3 किमी की ही दूरी पर है। जहां आप देशभर के प्रमुख शहरो से उपलब्ध रेल सेवा के माध्यम से पुरी पहुंच सकते हैं। 

सड़क मार्ग से 

  • पुरी पहुंचने के लिए ओडिशा और आसपास के प्रमुख शहरों से सीधी बसों का संचालन किया जाता है जहां आप भुवनेश्वर, कटक और कोलकाता से चलने वाली सीधी बस के माध्यम से पुरी पहुंच सकते हैं। 

निष्कर्ष

होली सिर्फ किसी विशेष धर्म का त्यौहार नहीं अपितु सामाजिक समरसता, सौहार्द, समर्पण और भक्ति का प्रतीक है। फिज़ाओं में घुलते रंगों की मौजूदगी और पानी की बौछार से गीली हुई मिट्टी की भीनी भीनी खुशबू हर किसी को होली के उत्सव में शामिल होने का खुला निमंत्रण देती है। ब्रज क्षेत्र की लठमार होली हो या फूलों की बहार, राजस्थानी रंग में सराबोर शाही झलक हो या ओडिशा की डोला यात्रा......और भी बहुत कुछ विशेष जिसे देखकर तन मन उमंग, जोश और प्रेममय रंग में डुबकी लगाने से स्वयं को रोक नहीं पाता और इस धूमधाम से प्रकृति भी झंकृत हो उठती है। 

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