- Feb 07, 2026
भारत में ग्रीष्म ऋतु पर्यटन के लिहाज से सबसे अच्छा समय माना जाता है। छुट्टियों के समय में विभिन्न जगहों पर घूमने की इच्छा और भी ज्यादा बढ जाती है ऐसे में भारतीय जगहों के कई सारे आकर्षक विकल्पों की श्रृंखलाएं रिझाती हैं चाहे लेह लद्दाख की बाइक राइडिंग का आनंद लें या दार्जिलिंग के चाय बागानों की महक लें, शिमला, मनाली में शीत अनुभव लेना चाहें, या कूर्ग, मुन्नार की हरियाली और मोड़दार रास्तो का अवलोकन करें, भारत में मंत्रमुग्ध करती पर्यटन जगहों की कमी नहीं है। अगर आप भी साल 2026 की गर्मियों में शानदार और खुशनुमा बनाना चाहते हैं तो यह ब्लॉग आपको भारत के 10 स्थानों और उनकी विशेषताओं से रूबरू कराने के साथ ही कैसे पहुंच सकते हैं, ये सारी जानकारी बहुत ही आसान भाषा में समझाने के लिए तैयार है, इसको पढकर आप सुव्यवस्थित और नियोजित यात्रा की प्लानिंग कर सकते हैं।
1. कश्मीर
धरती पर स्वर्ग के रूप में प्रसिद्ध कश्मीर प्राकृतिक और नैसर्गिक सुदंरता का पर्याय है, जहां तपिश और चिलचिलाती गर्मी से राहत मिलती है। श्वेत बर्फीली पर्वतीय चोटियां, हरी भरी हरियाली से परिपूर्ण बाग बगीचों की शोभा, मंत्रमुग्ध करते जल निकायों की खूबसूरती और वातावरण में फैली शांति की झलक हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। कश्मीर की खूबसूरती देखने से भी कहीं अधिक महसूस करती शानदार अनुभूति प्रदान करती है। कश्मीर में कई सारी खूबसूरत जगहें आकर्षित करती है जहां श्रीनगर, में मौजूद डल झील, शालीमार बाग, गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग युसमर्ग और वूलर झील का दीदार कर सकते हैं।
प्रमुख बिन्दु
- गर्मियों में डल झील में शिकारा नाव की सवारी का आनंद लें और तैरती हुई दुनिया के विभिन्न अंदाजों का मनोरंजन करें साथ ही हाउसबोट में ठहरने का अनुभव लें।
- कश्मीरी उद्यानों की हरियाली और तरह तरह के फूलों के आकर्षण के साथ सीढीदार लॉन, वृहद फव्वारे और फारसी शैली में बने उत्कृष्ट नमूनों का मज़ा लें।
- गर्मियों के समय पहलगाम की लिद्दर नदी में राफ्टिंग और गुलमर्ग में गोल्फ खेलें।
- गुरेज घाटी, लोलाब और अरू घाटी के अनोखे अंदाज़ को स्पर्श करें और पारंपरिक जीवन शैली व हस्तशिल्प उत्पादों को निहारें व खरीदें।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- हवाई रास्ते से कश्मीर पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा श्रीनगर का शेख उल आलम इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जहां देश विदेश की प्रमुख उड़ानों के माध्यम से पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- कश्मीर तक पहुंचने के लिए रेल का सफर तय कर भी पहुंच सकते हैं। कश्मीर का नजदीकी रेलवे स्टेशन जम्मूतवी है जिसकी दूरी लगभग 300 किमी है, इसे तय करने के रेलवे स्टेशन के बाहर से श्रीनगर तक के लिए टैक्सी या बस की सहायता ले सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- कश्मीर की राजधानी श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग 44 पर स्थित है, देश के प्रमुख शहरों से चलने वाली सीधी बसों या टैक्सी/कैब की मदद से सड़क रास्ते से श्रीनगर घूमने पहुंच सकते हैं।
2. शिमला
पहाड़ियों की रानी के नाम से मशहूर राजधानी शिमला गर्मियों के समय किसी जन्नत से कम आकर्षक नहीं लगती है। तकरीब 8000 फीट की ऊंचाई पर बसा शिमला अपनी औपनिवेशिक वास्तुकला, हैरतगेंज प्राकृतिक सुंदरता और प्रसिद्ध आकर्षणों के कारण पर्यटकों के लिए लोकप्रिय स्थान रखता है। द रिज, माल रोड, जाखू मंदिर अन्य कई आकर्षक स्थल और भव्य नजारे आकर्षित करते हैं। हरियाली से सराबोर पहाड़ जहां सूर्योदय की पहली किरण से लेकर सूर्यास्त के शानदार नजारें प्रकृति के अद्भुत परिदृश्यों को देखने सिर्फ देश ही नहीं वरन् विदेशो से भी लोग घूमने आते हैं।
प्रमुख बिन्दु
- यूनेस्को वैश्विक धरोहरों में शामिल कालका-शिमला टॉय ट्रेन में सवारी करते हुए प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लें।
- शिमला में सबसे ऊंचाई पर स्थित जाखू मंदिर में भक्त शिरोमणि श्री हनुमान जी की विशाल भव्य प्रतिमा के दर्शन करें।
- कुफरी फन वर्ल्ड में ऊंचे गो कार्ट ट्रेक और घुड़सवारी के साथ महासू पीक तक भ्रमण करें।
- ग्रीष्म ऋतु के दौरान होने वाले उत्सवों में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, फैशनेबल इवेंट और पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकते हैं।
- ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में शिमला की औपनिवेशिक आकर्षणों की झलक देख सकते हैं जहां संग्रहालय, सड़कें और अन्य इमारतें प्रमुख हैं।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- शिमला पहुंचने के लिए हवाई मार्ग का चयन भी कर सकते हैं। प्रमुख नजदीकी हवाई अड्डा चंडीगढ एयरपोर्ट है, जहां से लगभग 120 किमी दूरी को स्थानीय बस या टैक्सी के माध्यम से तय कर शिमला पहुंच सकते हैं। शिमला की जुब्बरहट्टी में एक छोटा हवाई अड्डा भी है जिसकी शहर से दूरी लगभग 23 किमी है।
रेल मार्ग से
- कालका शिमला रेलवे मार्ग के जरिए रेल द्वारा शिमला पहुंच सकते हैं जहां कालका से शिमला पहुंचने में लगभग 5-6 घंटे लगते हैं। कालका शिमला के मध्य तकरीबन 5 से 6 रेलगाड़ियों का संचालन होता है। प्रमुख ट्रेनों के माध्यम से कालका पहुंचकर वहां से शिमला के लिए जाने वाली रेल के माध्यम से सफर कर सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- शिमला पहुंचने के लिए सड़क रास्ते के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं जहां चंडीगढ, अमृतसर, जयपुर, हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शहरों, लखनऊ व अन्य प्रमुख शहरों से चलने वाली सीधी बसों या टैक्सियों के माध्यम से शिमला की यात्रा कर सकते हैं। कालका से शिमला की दूरी 80 किमी है जिसे सड़क रास्ते से तय करने में 3 घंटे के आसपास समय लगता है।
3. मनाली
ग्रीष्म ऋतु के गर्म वातावरण से राहत प्रदान करता मनाली बर्फीले पहाड़ों और धाराप्रवाह बहती स्वच्छ निर्मल नदियों की जलधाराओं का शानदार दीदार प्रस्तुत करता है। चाहें परिवार के साथ छुट्टियों का आनंद ले रहें हों या अकेले घूमने निकले हों, दोनों ही परिस्थितियों में पर्यटक मनाली को कई तरह से एक्सप्लोर कर सकते हैं। प्राचीन मंदिरों की झलक, तेज बहते झरने और यूनेस्को वैश्विक धरोहरों में शामिल प्रमुख जैव विविध क्षेत्रों मे मौजूद जीव प्रजातियों को निहार सकते हैं। मनाली के साफ स्वच्छ परिवेश में ग्रीष्म ऋतु बेहद शानदार आकर्षण प्रदान करती है, जिसकी झलक और शांति पर्यटन के आकर्षण को और भी ज्यादा खास बना देती है।
प्रमुख बिन्दु
- मनाली की प्रमुख सोलंग घाटी में पैराग्लाइडिंग, स्कीइंग, जोर्बिंग, साइक्लिंग, बाइकिंग और जिपलाइनिंग साहसिक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।
- मई जून के समय रोहतांग दर्रे में मनाली से लेह को जोड़ने वाली लगभग 3,978 मीटर की ऊचांई पर स्थित ऊंची सड़क का भ्रमण करें जहां बर्फ के भव्य नजारों की शोभा हमेशा ही आकर्षित करती है।
- व्हाइट रिवर राफ्टिंग के रोमांचक अवसर का फायदा उठाएं।
- मनाली के प्रमुख वन्य विहारों और दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करें।
- हिडिम्बा देवी मंदिर की अनोखी वास्तुकला और दिव्य आध्यात्मिक वातावरण का आनंद लें।
- मनाली में स्थित प्रमुख गांव और झरनों की शोभा को निहारने के साथ ही ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का आनंद लें।
- गर्मियों में मनाली का तापमान लगभग 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर 25 डिग्री सेल्सियस रहता है, ऐसे में यहां घूमने का आनंद और भी ज्यादा आता है।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- मनाली का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा कुल्लू में स्थित भुंतर हवाई अड्डा है जिसकी मनाली से दूरी लगभग 50 किमी है। यहां से मनाली पहुंचने के लिए आप प्रीपेड टैक्सी या बस के जरिए पहुंच सकते हैं। यदि आप चाहें तो चंडीगढ हवाई अड्डे तक पहुंचकर वहां से टैक्सी/बस के माध्यम से भी मनाली पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- रेल के माध्यम से मनाली पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन अंबाला कैंट है जिसकी मनाली से दूरी लगभग 200 किमी है। इसके अलावा चंडीगढ रेलवे स्टेशन से मनाली की दूरी लगभग 249 किमी है, यहां से आगे की यात्रा सड़क माध्यम से कर मनाली पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- मनाली पहुंचने के विकल्पों में सड़क मार्ग भी बेहतर है जहां दिल्ली से मनाली की दूरी 570 किमी है जहां यात्रा करने में लगभग 14 घंटों का समय लगता है। अंबाला से मनाली की यात्रा मे तकरीबन 10 घंटें व कुल्लू से मनाली की यात्रा करने में लगभग 8 घंटे का समय लगता है।
4. लेह, लद्दाख
लद्दाख भारत के सबसे अधिक करीब 9,800 फीट की औसत ऊंचाई पर मौजूद शीत रेगिस्तानी स्थान हैं जिसकी आकर्षक छवि ग्रीष्म ऋतु के दौरान पर्यटकों को आमंत्रित करती है। पहाड़ों की ऊंचाईयां, तेज हवाओं के झोंके और सुखद तापमान के साथ साफ स्वच्छ वातावरण लेह लद्दाख में पर्यटकों को कई गतिविधियों की सौगात प्रदान करता है। हरे नीले रंग की झलक देती झीलें, सफेद रेतीले टीले, ऊंट की सवारी और प्राचीन मंदिरों के आकर्षण गर्मियों की छुट्टियों के समय और भी ज्यादा मंत्रमुग्ध करते हैं।
प्रमुख बिन्दु
- कराकोरम और हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसे इस क्षेत्र में कई सारे बौद्ध मठों में दर्शन करें जैसे थिकसे, हेमिस, अलची, लामयुरू और स्पितुक।
- पैंगोंग झील, नुब्रा घाटी का दीदार करें और इसके आसपास बसे गांवों स्पैंगमिक और लुकुंग गांव में भ्रमण करें। पैंगोंग झील और आसपास के हिस्सों को कई बॉलीवुड मूवीज़ में भी दर्शाया जा चुका है।
- त्सो मोरारी झील जो भारत की सबसे ऊंची झीलों में से एक है, यहां पक्षियों को निहारना, स्वच्छ जल को देखना और रात के समय कैपिंग करना आकर्षित करता है।
- ग्रीष्म ऋतु के समय रंगीन लद्दाखी त्यौहार मनाए जाते हैं, जहां तिब्बती बौद्ध धर्म के संस्थापक गुरु पद्मसंभव की जयंती जून/जुलाई में मनाई जाती है। जून में साका दावा, सिंधु दर्शन और कई तरह के त्यौहार जिनमें संगीत, नृत्य, फैशन व शिल्प की झलक स्थानीय कलाओं और रीति रिवाजों से परिचित कराती है। गर्मियों में आप युरु काबग्यात, हेमिस त्से चू, स्टोंगडे गुस्टोर, फ्यांग त्सेडुप, कर्शा गुस्तोर और कोरज़ोक गुस्टोर इत्यादि त्यौहारों का आनंद ले सकते हैं।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- लेह लद्दाख पहुंचने के लिए हवाई अड्डा लेह में ही स्थित कुशोक बकुला रिम्पोछे हवाई अड्डा है, इसके माध्यम से हवाई रास्ते से लेह लद्दाख पहुंच सकते हैं। यहां पहुंचने के लिए सर्वोत्तम माध्यम है, जो दुनिया के सबसे ऊंचे हवाई अड्डों में से एक है।
रेल मार्ग से
- निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मूतवी है जिसकी लेह लद्दाख से दूरी लगभग 660 किमी है। जम्मू से श्रीनगर होते हुए लेह जाने के लिए टैक्सी या जम्मू कश्मीर राज्य स्तरीय परिवहन की बसों के माध्यम से पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- लेह लद्दाख पहुंचने के लिए मनाली लेह मार्ग या श्रीनगर लेह मार्ग के माध्यम से पहुंच सकते है, इनकी दूरी क्रमशः 473 किमी व 434 किमी है। तमाम दर्रों को पार करते हुए प्रमुख जगहों से बस व टैक्सी के माध्यम से पहुंच सकते हैं।
5. कूर्ग
ग्रीष्म ऋतु में दक्षिण भारत का प्रमुख हिल स्टेशन कूर्ग कई सारी प्रमुख विशेषताओं के कारण जाना जाता है, इसे भारत का स्कॉटलैण्ड और दक्षिण का कश्मीर भी कहते हैं। कूर्ग में स्थित कॉफी बागानों की सैर, ट्रेकिंग स्थलों का भ्रमण, मठों मंदिरों में दर्शन करना और जलप्रपातों को निहारने के साथ ही वन्य जीवो की झलक और प्राकृतिक दृश्यों की सुंदर श्रृंखला आकर्षित करती है। ग्रीष्म ऋतु में यहां दिन गर्म और कोहरे से ढके वातावरण की शीत झलक का समागम शानदार वातावरण का तोहफा प्रदान करती है।
प्रमुख बिन्दु
- एबी जलप्रपात की प्राकृतिक सुंदरता को निहारें और पिकनिक का लुत्फ उठाएं।
- कावेरी नदी की सहायक नदी पर स्थित चिकली होले जलाशय के पास एकांत और निजी क्षणों का आनंद लें, पास में ही स्थित दुबारे हाथी शिविर में हाथियों की झलक देंखें।
- हरंगी बांध के शांत वातावरण और पानी की तेज वेगधाराओं के भव्य नजारों को देखें।
- मल्लाली जलप्रपात, होन्नामाना केरे झील, ओंकारेश्वर मंदिर, तालकोवरी मंदिर, कोटेबेटा पीक ट्रेकिंग और मदिकेरी किला घूमें।
- राजा की सीट, सुतिकोप्पा, तांडियामोल चोटी पर ट्रेकिंग कर जाएं और सूर्योदय व सूर्यास्त के परिदृश्यों का आनंद लें।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- कूर्ग पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा मैंगलोर है जहां से कूर्ग की दूरी लगभग 145 किमी है। हवाई अड्डे से कूर्ग तक पहुंचने के लिए बस या टैक्सी सेवा उपलब्ध है।
रेल मार्ग से
- कूर्ग पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन मैसूर रेलवे स्टेशन है जिसकी दूरी लगभग 115 किमी है। मैसूर से सड़क मार्ग से कूर्ग पहुंचने में लगभग 4 घंटे लगते हैं।
सड़क मार्ग से
- राष्ट्रीय राजमार्ग 44 के रास्ते से आप देशभर के प्रमुख शहरों से कूर्ग तक ड्राइव या बस, टैक्सी के माध्यम से पहुंच सकते हैं।
6. दार्जिलिंग
पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध पर्यटन हिल स्टेशन दार्जिलिंग अपने भव्य सूर्योदय व सूर्यास्त के नजारों के लिए जाना जाता है जहां कई सारे मठ, उद्यान, कॉफी चाय के बागान, पर्वतीय नजारें आकर्षित करते हैं। दार्जिलिंग ग्रीष्म ऋतु मेंं घूमने के लिए बेहतरीन जगह है जहां यूनेस्को वैश्विक धरोहर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे टॉय ट्रेन की सवारी का आनंद ले सकते हैं। दार्जिलिंग को पूर्वी भारत की क्वीन ऑफ हिल्स कहते हैं, जहां हरे भरे बागानों की छवि, टॉय ट्रेन के मोड़दार रास्ते और आकर्षक वन्य जीवो रेड पांडा व स्नो लियोपोर्ड को भी देख सकते हैं। ग्रीष्म ऋतु में दार्जिलिंग का तापमान सुकून भरा और आरामदायक होता है।
प्रमुख बिन्दु
- टाइगर हिल से माउंट कंचनजंगा और माउंट एवरेस्ट के दुर्लभतम नजारें देखें। बतासिया लूप जो 360 डिग्री पर घूमता हुआ रेलवे ट्रैक है और लगभग 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और पास में ही स्थित शिल्प बाजार से खरीदारी कर सकते हैं।
- हैप्पी वैली टी एस्टेट में दुनिया की सबसे ऊंची चाय फैक्ट्री का दीदार करें व शानदार चुस्की का आनंद लें।
- दुनिया भर में प्रसिद्ध पीस पैगोडा 30 समान संरचनाओं का विशाल स्वरूप है जहां सफेद रंग की इमारत में स्वर्ण आवरण से सजी संवरी मूर्तियां महात्मा बुद्ध के चार अवतारों को प्रदर्शित करती हैं जो पूरे पैगोडा का प्रमुख आकर्षण हैं, इन सभी में मैत्रेय बुद्ध की प्रतिमा सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं।
- दार्जिलिंग की मॉल रोड पर खरीदारी करते हुए सुहानी शाम का आनंद लें।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- दार्जिलिंग पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा बागडोगरा है जहां से बस या टैक्सी के माध्यम से 3-4 घंटे में दार्जिलिंग पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- दार्जिलिंग पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी रेलवे स्टेशन हैं जहां से दार्जिलिंग के लिए आराम से बस या टैक्सी की सुविधा मिलती है। सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग तक आप टॉय ट्रेन के माध्यम से भी जा सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- दार्जिलिंग पहुंचने के लिए शानदार माध्यम सड़क मार्ग ही है जहां आप सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग के लिए बसें व शेयर्ड वाहन आसानी से उपलब्ध है। सिलीगुड़ी से दार्जिलिंग की दूरी लगभग 65 किमी हैं।
7. मुन्नार
केरल का प्रमुख हिल स्टेशन अपनी खूबसूरत हरी भरी वादियों, चाय बागानों और घुमावदार रास्तों की वजह से दक्षिण भारत का कश्मीर कहलाता है। मुन्नार हिल स्टेशन में कई सारे पर्यटक आकर्षण हैं जो ग्रीष्म ऋतु में विशेषतः इसे घूमने लायक स्थलों में सर्वश्रेष्ठ बनाते हैं। समुद्री सीमा से करीब 1600 मीटर ऊंचाई पर बसा यह स्थान पर्वतीय दृश्यों, झीलों, नदियों, झरनों, उद्यानों और कई सारे अन्य स्थलों की वजह से खास बनता है। अनैमुडी पीक दक्षिण भारत की सबसे ऊंची चोटी पीक है जहां ट्रेकिंग करना लुभाता है।
प्रमुख बिन्दु
- मुन्नार के चाय बागानों में भ्रमण करें और महक का आनंद लें।
- इको पॉइंट और कुंडला झील में कई सारी रोमांचक गतिविधियों का आनंद लें, यहां आप नाव की सवारी करने के साथ ही अन्य मनोरंजक गतिविधियों को एन्जॉए कर सकते हैं।
- ग्रीष्म ऋतु में मुन्नार का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से लेकर 25 डिग्री सेल्सियस तक रहता है इसलिए घूमने के लिहाज से उपयुक्त समय है जब दिन में औसत गर्म और सुबह शाम हल्की ठंड सुखद वातावरण प्रदान करती है।
- मुन्नार में एराविकुलम नेशनल पार्क में विभिन्न जीव जंतुओं को देखने के अलावा यहां के शानदार आकर्षण लुप्तप्राय जीव नीलगिरी तहर को देखें।
- अट्टुकड़ वॉटरफॉल के सुंदरतम नजारों का अनुभव लें।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- मुन्नार का नजदीकी हवाई अड्डा कोच्चि है जो मुन्नार से तकरीबन 120 किमी की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग से
- मुन्नार पहुंचने के लिए रेल के माध्यम से भी पहुंच सकते हैं जहां निकटतम रेलवे स्टेशन अलुवा और एर्नाकुलम है जिसकी दूरी क्रमशः 120 किमी व 135 किमी है।
सड़क मार्ग से
- केरल और आसपास के राज्यों के प्रमुख शहरों से मुन्नार के लिए सीधी बसों का संचालन होता है जहां राष्ट्रीय राजमार्ग 85 के माध्यम से मुन्नार पहुंच सकते हैं।
8. ऊटी
ऊटी या उधगमंडलम तमिनलाडु का प्रसिद्ध हिल स्टेशन है जहां प्रकृति के शोभामय नज़ारें और अद्भुत श्रृंखलाएं तन मन को ग्रीष्म ऋतु से राहत प्रदान करती हैं। मंत्रमुग्ध करते नजारों, लुभावने मौसम, विशेष वातावरण के साथ प्राकृतिक खूबसूरती को दर्शाता यह हिल स्टेशन आमंत्रण देता है। पर्वतीय घाटियों, झीलों, हरी भरी वादियों और वनस्पति उद्यानों के शानदार आकर्षण प्रस्तुत करता है। ग्रीष्म ऋतु में ऊटी में पुष्प प्रदर्शनी उत्सव मनाया जाता है, जहां सबसे मुख्य आकर्षण जीवाश्म वृक्ष का तना है जिसकी विशेषता है कि वह लगभग 2 करोड़ वर्ष पुराना है।
प्रमुख बिन्दु
- ऊटी गुलाब उद्यान की खूबसूरती को निहारें जिसे दक्षिण एशिया के लिए गार्डन ऑफ एक्सीलेंस से भी नवाजा गया है।
- डोडाबेट्टा शिखर करीब 2623 मीटर की ऊंचाईयों पर नीलगिरी क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटी है जहां आप ट्रेकिंग का अनुभव ले सकते हैं। इसकी चोटी पर लगा टेलिस्कोप हाउस आसपास के परिदृश्यों की शानदार झलक प्रदान करता है।
- पायकारा जलप्रपात की खूबसूरती और हरियाली का आनंद लें जहां आप परिवार के साथ पिकनिक का मज़ा भी ले सकते हैं।
- ऊटी झील में बोट हाउस में ठहरने और आसपास के वातावरण का आनंद लें।
- एवलांचे झील, एमराल्ड लेक, वेनलॉक डाउन्स का दीदार करें।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- ऊटी का प्रमुख नजदीकी हवाई अड्डा कोयंबटूर इंटरनेशनल हवाई अड्डा है जहां से आप तकरीबन 85 किमी दूरी तय कर आराम से 2.5-3 घंटे में ऊटी घूमने पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- ऊटी का निकटतम रेलवे स्टेशन मेट्टूपलयम है जिसकी दूरी लगभग 40 किमी है। देश के प्रमुख शहरों जैसे चेन्नई, मैसूर, बेंगलुरू सहित और भी रेलवे स्टेशनों से यहां रेलों का आवागमन रहता है। रेलवे स्टेशन से टैक्सी/कैब या बस के अलावा नीलगिरी पर्वतीय टॉय ट्रेन के माध्यम से भी ऊटी घूमने जा सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- तमिलनाडु में स्थित प्रमुख हिल स्टेशन ऊटी सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है जहां आप राज्य परिवहन या निजी वाहनों के माध्यम से ऊटी पहुंच सकते हैं।
9. पंचमढी
सतपुड़ा की रानी नाम से प्रसिद्ध यह हिल स्टेशन मध्य प्रदेश मे सतपुड़ा पर्वतमाला के मध्य बसा अद्भुत स्थान है। यहां की प्रकृति, पौराणिक मान्यताएं, साहस और शांति का अनोखा मिश्रण प्रस्तुत करता है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ ब्रेक लेने का मूड बना रहें है तो पंचमढी बेहतरीन विकल्प है। इस स्थान का संबंध महाभारत काल से बताया जाता है, जहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर की स्थापना पांडवो द्वारा की गई है। घनी हरियाली, धुंध भरी वादियां और दूर दूर तक साफ स्वच्छ आसमान पर्यटकों को ग्रीष्म ऋतु में राहत प्रदान करने के साथ ही यादगार अनुभव भी प्रदान करता है। आप यहां कई तरह की रोमांचक गतिविधियों का मज़ा लेने के अलावा एकांत और शांति का चयन भी कर सकते हैं।
प्रमुख बिन्दु
- हरी भरी हरियाली के रास्तों पर पैदल भ्रमण करें।
- पंचमढी के बी फॉल्स झरने, अप्सरा विहार, रजत प्रपात, डचेस फॉल्स को निहारने के साथ ही कई अन्य अद्भुत आकर्षणों को निहारें।
- स्थानीय जनजातियों की जीवन शैली और हस्तशिल्प प्रदर्शन कला को सराहें और खरीदारी का अनुभव लें।
- साहसिक गतिविधियों के शौकीन है तो मोड़दार रास्तों पर साइक्लिंग करें, पैराग्लाइडिंग कर घाटियों को ऊपरी तरफ से देखें।
- पर्वतीय चट्टानों को करीब से देखने के शौकीन पर्यटक रॉक क्लाइम्बिंग का आनंद भी ले सकते हैं इसके अलावा जिप लाइनिंग करते समय हवाओं की शीतलता महसूस करें।
- पंचमढी विभिन्न पक्षियों का निवास स्थान है जहां आप कई प्रजाति के अनोखे पक्षियों का दीदार कर सकते हैं, इसके अलावा अद्वितीय वन्य प्राणियों और दुर्लभ वृक्षों की उपस्थिति उत्कृष्ट अनुभव प्रदान करती है।
- ग्रीष्म ऋतु में पंचमढी अपने आदर्श वातावरण और तापमान के साथ पर्यटकों को शीतल और शानदार अनुभव प्रदान करती है।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- हवाई रास्ते से पंचमढी जाने के लिए निकटतम हवाई अड््डा राजा भोज एयरपोर्ट, भोपाल है जहां से पंचमढी की दूरी लगभग 250 किमी है। भोपाल से पंचमढी जाने के लिए कैब/टैक्सी या बस सुविधा उपलब्ध है।
रेल मार्ग से
- पंचमढी का नजदीकी रेलवे स्टेशन पिपरिया है जहां से पंचमढी की दूरी लगभग 150 किमी है। बस या टैक्सी से तय कर पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- पंचमढी जाने के लिए एकमात्र पहुंच सड़क मार्ग की है जो वाया रोड बेहतरी से कनेक्ट है। मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरो ंसे आप सीधी बस सेवा या स्वंय ड्राइव कर पंचमढी घूमने जा सकते हैं।
निष्कर्ष
भारत में ग्रीष्म ऋतु छुट्टियो का आनंद प्रदान करने के साथ ही तेज गर्मी और धूप की सौगात भी ले आती हैं ऐसे में प्रमुख भारतीय पर्यटन जगहों की सैर ढेर सारा सुकून और शांति प्रदान करती हुई तन मन को नई ऊर्जा और स्फूर्ति प्रदान करते हैं। अगर आप भी पर्यटन और छुट्टियों के भरपूर अवसर का लाभ लेना चाहते हैं तो एडवांस में ही इस ग्रीष्म ऋतु में घूमने की तैयारी बना लीजिए जिससे यात्रा योजना के अंतिम क्षणों में आने वाली परेशानियों और बाधाओं से दो चार न होना पड़े।
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