- Nov 24, 2025
सर्दियों में कूर्ग का और सुहावना हो जाता है। हरी भरी हरियाली के बीच शांति और सुकून की अनुभूति प्रदान करता यह पर्यटन स्थल कर्नाटक के दक्षिणी राज्य में स्थित है जो ग्रामीण जीवनशैली अपनाता है। मंत्रमुग्ध करते परिदृश्य और और कॉफी बागानों की खुशबू से सराबोर वातावरण शहरी जीवन की हलचल से सुकून की ठंडी छांव प्रदान करता है। पश्चिमी घाटों में बसा यह स्थान अत्यधिक सुंदर और शांत है जहां झूमती हवाएं और प्रकृति की नजदीकी हर किसी के मन को आकर्षित करती है।
यदि आप भी दिसम्बर के शीतकालीन अवकाश की तलाश में प्रकृति, संस्कृति, रोमांच, रोमांस और भागती दौड़ती जिंदगी से थोड़ा ब्रेक लेना चाहते हैं तो कूर्ग आपके लिए बहुत सटीक जगह है। उत्तर भारत या विदेशों से आने वाले पर्यटकों के लिए यह जगह भयंकर सर्दी के प्रकोप से बचाता हुआ सुहावने मौसम की सौगात प्रदान करता
कूर्ग का संक्षिप्त इतिहास
कूर्ग का इतिहास वास्तविक रूप से पौराणिक कहानियों से जुड़ा हुआ है। नौंवी और दसवीं शताब्दी के शिलालेखों से अस्पष्ट रूप से मिलता है, इनके अनुसार यहां पर गंग, पांड्य, चोल, कदंब, चांगलव और होयसल जैसे दक्षिण राजवंशों का शासन हुआ करता था। 14वीं शताब्दी में होयसल शासन के बाद कूर्ग विजयनगर साम्राज्य के अधीन आ गया था। लिंगायत राजाओं के शासनकाल के पहले यहां स्थानीय सरदारों की सत्ता रही। बाद में हैदर अली, टीपू सुल्तान और हलेरी वंश ने कूर्ग की बागडोर संभाली।
सन् 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार कूर्ग को तत्कालीन राज्य मैसूर (सन् 1973 से कर्नाटक) में शामिल कर दिया गया।
दिसम्बर में कूर्ग का मौसम
दिसम्बर के समय कूर्ग सर्दियों के असर को बिखेरना शुरू कर देता है। दोपहर का समय लुभावना रहता है, जबकि भोर और रात्रिकालीन समय में थोड़ी ठंड बढ जाती है। तापमान की बात करें तो कूर्ग के जमीनी भागों का औसत अधिकतम तापमान करीब 26 से 28 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। वहीं ऊंचाई वाले स्थानों पर न्यूनतम तापमान करीब 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है।
दिसम्बर की विशेषताएं
वर्षा ऋतु के बाद बारिश बहुत कम हो जाती है, इस वजह से वातावरण में नमी की मात्रा कम हो गई है जिससे बाहर जाने और पर्यटन स्थलांं को घूमना सरल हो गया है।
साफ स्वच्छ सुबह में पहाड़ियों की ठंडक और कोहरे जैसे बादल प्रफुल्लित करने के साथ ही फोटोग्राफी के लिए बेहद उपयुक्त हैं।
दिसम्बर में दिन में भी मौसम ज्यादा गर्म नहीं होता और रात में थोड़ी बढी हुई ठंडक के साथ घूमना आरामदायक अनुभव प्रदान करता है।
मानसूनी महीनों की अपेक्षा इस समय आर्द्रता में गिरावट और घनी झाड़ियों की उपलब्धता के कारण वन्यजीवों और नैसर्गिकह सुंदरता को देखना आसान हो जाता है।
दिसम्बर में कूर्ग में करने योग्य गतिविधियां
1. ट्रेकिंग और प्रकृति भ्रमणः इस समय आप यहां ट्रेकिंग जैसी गतिविधियो का आनंद ले सकते हैं जहां ऊंची चोटियो के मनमोहक नजारें और जंगलों के रास्ते आपके शौक को साहस प्रदान करते हैं। पश्चिमी घाटों पर लंबी पैदल यात्रा जहां ताडियामोल, कोडाचाद्री, कुमार पर्वत और अन्य जगहें भी शामिल हैं। सर्दियों में इन रास्तों की मोहकता और भी ज्यादा मोहित करती है।
2. कैंपिगः दिसम्बर के समय यहां कैपिंग भी एक शानदार और प्रसिद्ध गतिविधि है जिसका आनंद यहां साहसिक गतिविधियों के शौकीन लोग बहुत ही जोश व उत्साह के साथ लेते हैं। आप यहां टेंट लगाकर तारों भरी रात को निहारते हुए कॉफी के ताजे गर्म कप के साथ कूर्ग की रात्रिकालीन खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं जहां आप प्रकृति के साथ कुछ समय अकेले और शांति के साथ बिता सकते हैं। कैंपसाइट की यहां अच्छी खासी उपलब्धता देखने को मिलती है।
3. जंगल सफारी और वन्य जीव दर्शनः कूर्ग में कई उद्यान है जहां जीप सफारी का रोमांचक अनुभव लिया जा सकता है। प्रातः पक्षियों की चहचहाहट और भिन्न भिन्न तरह के जीवों को देखने का अनोखा आनंद कूर्ग के राष्ट्रीय उद्यानों में आसानी से देखा जा सकता है। यहां की प्रमुख पहाड़ियों पर भी विशेष प्रकार के पक्षियों की विविध श्रृंंखला को देखने का आनंद ले सकते हैं।
4. होम स्टेः कूर्ग में होम स्टे आवासीय विकल्प के माध्यम से आप इनकी संस्कृति, रीति रिवाजों और पंरपराओं से भली भांति परिचित हो सकते हैं। यहां की पौराणिक कहानियां और मान्यताएं कौतूहल और जिज्ञासा को बढाते हुए हर्ष की अनुभूति कराती हैं।
दिसम्बर में कूर्ग में घूमने योग्य आकर्षण स्थल
1. एबी फॉल्सः कूर्ग हिल स्टेशन में एबी फॉल्स झरने की शोभा देखते बनती है जो मेदिकेरी शहर से लगभग 10 किमी की दूरी पर स्थित है। एबी झरने को अब्बी फॉल्स भी कहते हैं। करीब 70 फीट की ऊंचाई से गिरते हुए यह झरना बहुत शानदार आकर्षण उत्पन्न करता है। कूर्ग के इस झरने के मनोरम दृश्य और सुहावने मौसम की खूबसूरती के कारण यह चारों ओर हरियाली से घिरा हुआ शानदार आकर्षण देता है। एक साथ कई धाराओ के संयोजन के परिणामस्वरूप बहता यह झरना जलकुंड में गिरता है और बाद में कावेरी नदी में जाकर मिल जाता है। सर्दियों के दिनों में चारों ओर फैली धुंध और तेजी से गिरती जल की ठंडी धारा और भी ज्यादा आकर्षक प्रतीत होती है। इस झरने के आसपास कॉफी और मसाला बागानों की उपस्थिति है। यहा के सर्वश्रेष्ठ नजारों में से एक, लटकते पुल से दिखने वाला नजारा श्रेष्ठ है। मसालों और कॉफी की मनमोहक खुशबू हवा की ताजगी से और भी ज्यादा शीतलता प्रदान करती है। ट्रेकिंग और हाइकिंग के लिए यह जगह उपयुक्त है साथ ही यहां मौजूद देवी काली को समर्पित छोटा सा मंदिर बहुत पुराना है जहां भक्त मां की आशीर्वाद प्रसाद जरूर लेते हैं।
2. राजा की सीटः कूर्ग में स्थित राजा की यह सीट, जिसे कई सारे राजाओं की सीट भी कहा गया है। पर्यावरणीय और पर्वतीय क्षेत्र में बने इस पर्यटक स्थल की शोभा देखते बनती है। यह जगह कूर्ग के राजाओं द्वारा प्रयोग में आती थी इसलिए इसे राजा की सीट कहा जाता है। यहां से दिखने वावले सूर्योदय और सूर्यास्त के परिदृश्य आंखों को सुकून और मन को गहरी शांति प्रदान करता है। यहां घूमने के लिए दिसम्बर महीना एकदम उपयुक्त बताया जाता है। सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक चलने वाला यह स्थान संगीतमय फव्वारा की मनमोहक प्रस्तुति से सभी को आकर्षित करता है। यहां जाने के लिए साधारण से प्रवेश शुल्क देना होता है। आप यहां बगीचे में टहल सकते हैं इसके अलावा टॉय ट्रेन की सवारी का आनंद ले सकते हैं। घाटियो की खूबसूरती, पुष्पों की विविध सुगंध और कोहरे से ढकी पर्वत श्रृंखलाएं स्पेशल आकर्षण उत्पन्न करती हैं।
3. मेदिकरी किलाः कूर्ग के दर्शनीय स्थलों में से एक यह किला 17वीं शताब्दी में महाराजा मुद्दुराजा ने कराया था जहां इस किले के अंदर भी महल बना हुआ है। टीपू सुल्तान द्वारा इस किले का निर्माण पत्थर ईंटो द्वारा करवाया गया था जिसे जाफराबाद नाम दिया गया था। बाद में लिंगराजेंद्र वोडेयार द्वितीय ने ईंट और गारे से किले का निर्माण कराया था। ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस किले में कई तरह की विशेषताएं हैं, इस स्थान पर कई सारे युद्ध हुए, जिस वजह से ऐतिहासिक कहानियों के लिए यह किला बहुत प्रसिद्ध है। इस किले का रखरखाव अंग्रेजो द्वारा भी किया गया है। 1933 में यहां एक घंटाघर बनाया गया है। प्रवेश द्वार पर दो गारे से बनी आदमकद मूर्तियांं देखने को मिलती है। भगवान शिव के स्वरूप वीरभद्र को समर्पित मंदिर अंग्रजो द्वारा चर्च से प्रतिस्थापित कर दिया गया। वर्तमान में यहां संग्रहालय, पुस्तकालय और महा गणपति मंदिर जिनका दशहरा उत्सव देखने लायक होता है।
4. इरुप्पु झरनाः इरूप्पु जलप्रपात कर्नाटक के कूर्ग में स्थित है लेकिन यह केरल के वायनाड जिले की सीमा पर स्थित है। श्री मंगला और कुट्टा के बीच ब्रह्मगिरी पर्वत श्रृंखला में स्थित यह जलप्रपात लक्ष्मण तीर्थ जलप्रपात के नाम से भी जाना जाता है। जो लक्ष्मण तीर्थ नदी के नाम से जाना जाता है जो कावेरी नदी की सहायक नदी है। पहाड़ियों से बहती मनमोहक जलधाराएं और पश्चिमी घाटों के सदाबहार जंगलों का संयोजन शानदार आकर्षण प्रदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओ के अनुसार भी इरूप्पु जलप्रपात महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां मौजूद प्राचीन शिव मंदिर जिसके दर्शनों के लिए दूर दूर से तीर्थयात्री आते है। करीब 170 फीट से नीचे गिरता यह जलप्रपात अपनी सुंदरता और गर्जना करती हुए स्वर से सभी को अपनी भव्यता के करीब ले आता है। पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण मां सीता की खोज में जब ब्रह्मगिरी पर्वतमाला पार कर रहे थे तब भगवान राम ने लक्ष्मण को पीने के पानी के लिए भेजा था। तब अपने बड़े भाई भगवान श्री राम की प्यास बुझाने के लिए लक्ष्मण जी ने एक तीर चलाया, जिससे लक्ष्मण तीर्थ नदी का उद्गम हुआ था। जलधारा के पास स्थित शिव मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान श्री राम ने की थी, जहा पूजा अर्चना करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है। मंदिर में भगवान गणेश, भैरव, गंधर्व और पार्वती मां की स्थापना है।
5. नीलकंडी झरनाः शानदार घनी झाड़ियों बीच बहता अद्भुत जल प्रपात जिसकी शोभा अपने विहंगम दृश्यों और मनमोहक छवि के लिए यादगार रूप से जानी जाती है। हनी वैली क्षेत्र में स्थित यह झरना तकरीबन 56 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। जहां चारों ओर कॉफी, इलायची और मसालों के बागानों की मोहकता और भी ज्यादा खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। नीलकंडी जलप्रपात के स्त्रोत नदी की दूरी 4 किमी है जिसे आप पैदल दूरी तय कर जा सकते हैं। कूर्ग से लगभग 48 किमी दूरी पर स्थित नीलकंडी जलप्रपात कूर्ग घूमने के लिए आप स्थानीय वाहनों की मदद से जा सकते हैं।
6. ताडियनडामन पीकः समुद्री तल से करीब 1746 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद तांडियामोल कूर्ग जिले की सबसे ऊंची चोटी है, जो पूरे कर्नाटक राज्य में दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत है। यह पर्वत साहसिक गतिविधि ट्रेकिंग के लिए उपयुक्त स्थान है। जहां जाने के लिए दिसम्बर से लेकर मई तक का समय सही रहता है। चोटी के शीर्ष पर पहुंचकर आसपास का भव्य नजारा और विंहगम परिदृश्य विशेष रूप से गहरी शांति और चिंतन प्रदान करते हैं। जहां मानसिक शांति का अभूतपूर्व एहसास होता है। तांडियामोल की एक तिहाई दूरी को जीप या निजी वाहन से भी पूरा कर सकते हैं इसके बाद ट्रेकर्स नलकनाद पैलेस में रूक सकते है जो रात के समय बेस कैंप है। ताडिंयामोल से पाडी इथगुप्पा मंदिर भी जा सकते है। कूर्ग वासियों के लिए इस मंदिर की बहुत मान्यता है।
7. ओंकारेश्वर मंदिरः कूर्ग में बना यह मंदिर राजा लिंगराजेंद्र द्वितीय द्वारा सन् 1820 में बनाया गया था, जहां अद्भुत वास्तुकला की झलक हर समुदाय के भक्तों को आकर्षित करती है। गोथिक और इस्लामी वास्तुकला के संयोजन से बना यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मुहम्मदी शैली और मध्य में एक गुंबद लिए यह मंदिर चारों कोनों पर चार बुर्जों से घिरा हुआ है। मंदिर के प्रवेश द्वार के पास ही शिवलिंग स्थापित है। मंदिर परिसर में विशेष जलकुंड बना हुआ है जिसमें विशेष तरह की मछलियां पाली जाती हैं। इस मंदिर के निर्माण के पीछे एक कहानी प्रचलित है कहते हैं कि राजा लिंगराजेंद्र द्वितीय ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए एक ब्राह्मण की हत्या कर दी थी क्योंकि वो उनके काले कारनामों को जान गया था।
बाद में ब्राह्मण की आत्मा ने ब्रहमराक्षस का रूप धारण कर लिया और राजा को त्रस्त कर दिया। बुरे स्वप्न अत्यधिक दिखने लगे, इससे परेशान होकर राजा ने उपायस्वरूप मंदिर का निर्माण कराया और भगवान शिव की शरण ली। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग काशी से लाया गया है, इसलिए इसे ओंकारेश्वर नाम से जाना गया।
8. ब्रह्मगिरी वन्यजीव अभयारण्यः अगर आप प्रकृति और वन्य जीवों के लिए प्रेम रखते हैं तो यह स्थान आपके लिए सर्वोत्तम है। करीब 181 वर्ग किमी क्षेत्रफल मे फैला यह अभयारण्य कॉफी और इलायची के बागानों की खूबसूरती से घिरा हुआ है। अभयारण्य में सदाबहार वनों की कई सारी विविधताएं देखने को मिलती है। इसके अलावा वन्य प्रजातियों के कई आकर्षण यहां विभिन्न प्रजातियों में देखने को मिलते हैं। मालाबार विशाल गिलहरी, माउस हिरण बार्किंग हिरण, जंगली बिल्ली, सुस्त भालू, जंगली सुअर, उड़ने वाली गिलहरी और कई सारे प्रजातियों के जानवर पशु पक्षी देखने को मिलते हैं। आप यहां ट्रेकिंग, वन्यजीव सफारी और फोटोग्राफी का आनंद ले सकते हैं। यहां जीप सफारी पूर्णतया निःशुल्क है।
9. भगामंडला त्रिवेणी संगमः भागामंडल तीन नदियो के मिलन का प्रतीक है जहां कावेरी, कनिके और सुज्योति नदी मिलती है। सुज्योति नदी को लेकर पुराणांं में बताया जाता है कि यह जमीन के भीतर से बहती है और संगम में इन दोनों नदियो के साथ मिल जाती है और आगे बहती है। तालाकावेरी की तलहटी में स्थित यह स्थान हिंदू धर्म के लिए अत्यधिक पवित्र स्थल है। इस स्थान का पौराणिक इतिहास है कि कावेरी नदी की उत्पत्ति किंवदतियां के अनुसार कावेरी, महर्षि कावेरा की दत्तक पुत्री थीं। जो उन्हें भगवान ब्रहमा की आराधना से प्राप्त हुई थीं। इनका पूर्व नाम लोपामुद्रा था जो भगवान ब्रहमा की दत्तक पुत्री थीं और उन्हें भगवान विष्णु ने ब्रहमा जी को प्रदान किया था। इन्हीं लोपामुद्रा का महर्षि कावेरा ने बड़े हर्ष और स्नेह के साथ लालन पालन किया। लोपामुद्रा को वरदान था कि वो जब चाहे नदी रूप में परिवर्तित हो सकती हैं। एक दिन महर्षि अगस्त्य आए और उन्होंने लोपामुद्रा यानी श्री कावेरी के दर्शन किए। इन्ही के साथ इनका विवाह हुआ। मानव कल्याण के उद्देश्य से मा कावेरी नदी रूप में परिवर्तित हुईं और इस स्थान पर अन्य दो नदियों से मिलीं, मां कावेरी को दक्षिण की गंगा और कूर्ग यानी कोडागु की कुलदेवी भी कहा जाता है।
10. नामड्रोलिंग मठः इस मठ को स्वर्ण मंदिर नाम से भी जाना जाता है। जो भारत में सबसे बड़ी तिब्बत बस्तियों मे से एक है। कोडागु के कुशलनगर जगह में यह स्थान करीब 16,000 शरणार्थियांं और 600 बौद्ध भिक्षुओं के निवास स्थान के रूप मे प्रसिद्ध है। इस मठ का मुख्य प्रवेश द्वार चार मंजिला मीनार है जो देखने में बहुत ज्यादा विशेष और आकर्षित करती है। मंदिर में भगवान बुद्ध की मूर्तियां हैं, जिनकी दोनो तरफ प्रभु अमितायुस और प्रभु पद्मसंभव की प्रतिमाएं विराजित हैं। यहां ध्यान, साधना प्रार्थना और मणि प्रार्थना नगाड़े घुमा सकते हैं। कहते हैं कि इन नगाड़ो को घुमाने से बौद्ध प्रार्थना के जाप के समान लाभ मिलता है। कूर्ग के इस मंदिर में मानसिक शांति और सहज ध्यान प्राप्त होता है।
दिसम्बर में कूर्ग का स्थानीय स्वाद और व्यंजन
कूर्ग में सर्दियां सिर्फ बाहरी आकर्षणों या रोचक गतिविधियों के लिए ही नहीं बल्कि स्वादिष्ट भोजन, ताजा व लाजवाब स्वाद का आनंद भी ले सकते हैं। सुबह और शाम के आनंदित अनुभवों को महसूस करने के लिए आप यहां खाने के स्वाद को बेहतर ढंग से एन्जॉए कर सकते हैं।
पांडी करीः कोडवा पोर्क करी जो खानें में गाढी और शरीर को गर्माहट प्रदान करती है। सर्दियों के दिनों मे यह करी विशेष तौर पर बहुत पसंद की जाती है।
कदमबुट्टूः करी के साथ खाए जाने वाले चावल के पकौड़े ही कदमबुट्टू कहलाते हैं जिनका लजीज स्वाद कूर्ग की बेमिसाल विशेषताओं को संजोए रहता है।
कूर्ग संतरेः कूर्ग में उगाए जाने वाले संतरे इतने प्रसिद्ध है कि इन्हें जी आई टैग से भी नवाजा गया है। दिसम्बर के दिनों में इनकी ताजी पैदावार देखने को मिलती है। संतरों का खट्टा मीठा स्वाद इनकी प्रसिद्धि को देश विदेशों तक में फैलाते हैं।
ताजा कॉफी और होम मेड चॉकलेटः यहां बनी ताजी कॉफी और घर पर बनी चॉकलेट की महक और टेस्ट बहुत लुभाता है।
सूपः काली मिर्च के स्पेशल टेस्ट से सराबोर विभिन्न फ्लेवर के बने स्वादिष्ट सूप सर्दियों के दिनों में कूर्ग में पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं। नारियल व मांस के मिश्रण से बने खास तरह के सूप बेहद डिमान्ड में रहते हैं।
भोजन संबंधी सुझाव
- रहने के लिए ऐसी जगह का चुनाव करें जहां खुले में आग के पास बैठकर भोजन की इंतजाम रहता हो क्योंकि दिसम्बर की सर्दियों में इस तरह की जगह पर अधिक एन्जॉए होता है।
- सूर्योदय के दृश्य या सुबह के भ्रमण का आनंद लेना हो तो किसी छोटे कैफे या बागानों में बने कैफों पर इनका लुत्फ लेना आकर्षित करता है।
- अगर आप ज्यादा तेल मसालेदार खाना पसंद नही करता है तो स्थानीय गांवों के रसोईघरों में सादे खाने के लिए प्रयास कर सकते हैं लेकिन गर्म पानी और हीटिंग सुविधाओं की जांच करना भी जरूरी है।
- दिन के आखिरी पड़ाव पर अलाव या अपने नियत स्थान पर गर्मपेय पी सकते है। जैसे कॉफी या कोई स्थानीय पेय के स्वाद के साथ यादगार पलो को सहेज कर रख सकते हैं।
कूर्ग घूमने का सबसे अच्छा समय
कूर्ग साल भर घूमने वाले स्थानों में से एक है जहां हर ऋतु अपना विशेष अंदाज बयां करती हैं। लेकिन अक्टूबर से मार्च तक का समय यहां सबसे व्यस्त रहता है। मौसम के जानकारों का कहना है कि सर्दियो के दिनों में बाहरी गतिविधियां और पर्यटन स्थल देखने के लिए यह समय सुगम रहता है।
दिसम्बर क्यों है खास?
- मध्यम तापमान और बारिश नहीं होने के कारण इस समय बाहरी गतिविधियां और पर्यटन स्थल घूमना आसान हो जाता है।
- मौसम सुहावना और सर्द लेकिन ठंड सहनीय रहती है। जहां अन्य जगहो की अपेक्षा तापमान बहुत ज्यादा नीचे नही जाता ओर बर्फबारी भी नहीं होती है। ऐसे में नियमित सर्द वातावरण में पहाड़ी स्थान को घूमने के लिए परफेक्ट जगह है।
- इस समय रूकने की व्यवस्था, सर्दियों में दी जाने विशेष सुविधाओं और विकल्पों के साथ युक्त होने की वजह से पर्यटकों के लिए सहज और सुगम्य रहता है।
दिसम्बर में कूर्ग घूमने के लिए यात्रा सुझाव
पीक सीजन से बचेंः दिसम्बर के सीजन में कूर्ग में पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है। इसलिए ठहरने वगैरह संबंधी बुकिंग कार्यों को पहले से ही करा लेना चाहिए जिससे कि ऐन समय पर किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सुबह की खास शुरूआतः कूर्ग के विशेष दृश्यों को देखना चाहते हैं तो कुहासे भरी घाटियों के नजारे और विशेष तापमान को महसूस करने के लिए भोर में जल्दी ही सैर की योजना बनाना उचित रहता है। इससे पूरे दिन कूर्ग को घूमने के लिए समय अच्छे से व्यवस्थित हो जाता है।
वस्त्रः सुबह और शाम की ठंड में कई परतो में कपड़े पहनना फायदेमंद रहता है। दिन के समय तापमान ज्यादा नीचे नहीं जाता है।
हाइड्रेटेड रहें और आराम करेंः ठंड के मौसम में प्यास के संकेत स्पष्ट समझ नही आते इसलिए थोड़ी थोड़ी देर में डिहाइड्रेशन से बचने के लिए पानी वगैरह पीते रहना जरूरी हो जाता है खासकर जब आप लंबी दूरी के भ्रमण या सैर पर पैदल निकले हों।
स्वास्थ्यः यदि आपको सर्दी ज्यादा लगती है तो ऐसी स्थिति में आपको खुद के प्रति संवेदनशील होना जरूरी है। कपड़ों की अतिरिक्त और हीटिंग की उचित व्यवस्था पर ध्यान देना आवश्यक है।
स्थानीय संस्कृति और सम्मानः कूर्ग की स्थानीय संस्कृति और रीति रिवाज परंपराएं बेहद अद्वितीय है जिन्हें आप होम स्टे के दौरान और बेहतर तरह से समझ सकते हैं। यहां के रीति रिवाजों, परंपराओं और संस्कृति को उचित सम्मान और व्यवहार दें।
फोटोग्राफीः मोबाइल या डिजिटल कैमरा साथ रखें। सीनरी परिदृश्यों जैसी सुंदर छवियों को सहेजें। सूर्योदय और सूर्यास्त के दिव्य नजारों को महसूस करें और गैलरी में सेव करें।
टिकाऊ यात्राः पर्यावरण अनुकूल यानी इको फ्रेंडली यात्रा का पालन करें क्योंकि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत रखने के लिए आवश्यक है।
पैकिंग टिप्स
- दिन के समय हल्के ऊनी कपड़े पहनें या कई लेयर्स में कपड़े पहनें। सुबह या शाम के लिए गर्म जैकेट आदि पहनें।
- बागानों और जंगल के रास्तों पर घूमने की योजना है तो जूते या बूट पहने जो पूरी तरह से ढके हुए हों।
- भोर के समय या सूर्यास्त के समय सर्दी में कुछ इजाफा महसूस हो तो शॉल या स्कार्फ का प्रयोग भी जरूरी है।
- वैसे तो दिसंबर के महीने में बारिश की संभावना नहीं होती लेकिन अप्रत्याशित स्थिति से बचने के लिए एक छतरी या रेन कोट ले जाना समझदारी है।
कूर्ग कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग द्वारा
- कूर्ग के नजदीकी हवाई अड्डों में बेंगलुरू, मैंगलौर या कुन्नूर में है जहां से सड़क माध्यम से होते हुए कूर्ग की यात्रा संपन्न कर सकते हैं।
रेल मार्ग द्वारा
- कूर्ग के नजदीकी रेलवे स्टेशन बेंगलुरू या मैंगलोर है जहां से आप कूर्ग के लिए स्थानीय वाहनो के माध्यम से पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग द्वारा
- बेंगलुरू से कूर्ग तक रास्ता करीब 250 किमी है। जहां से आप सार्वजनिक वाहन या निजी कार के माध्यम से कूर्ग तक का सफर तय कर सकते हैं।
निष्कर्ष
कूर्ग या कोडागु कर्नाटक राज्य का अनोखा गंतव्य है जहां पर्यटकों के लिए हमेशा ही विशेष आकर्षण और सुहावने मौसम की जुगलबंदी अपनी ओर बुलाती है। भारत का स्कॉटलैंड या भारत का कॉफी कप नाम से मशहूर यह जगह अपनी मोड़दार पहाड़ियों और समृद्ध बागानों के साथ ही ऐतिहासिक, पौराणिक और स्वदेशी विरासत के लिए जाना जाता है। दिसम्बर में यहां पर्यटन के कई अनोखे अद्वितीय आकर्षण हैं जहां यहां की वास्तुकला, स्वाद और प्रकृति से जुड़े रीति रिवाज कई मायनों में बेहद खास हैं। आज भी यहां औपनिवेशिक काल की झलक के साथ ही ऐतिहासिक समय की दिव्यता महसूस होती है। दिसम्बर, कूर्ग पर्यटन की आकर्षकता हरियाली, शीतल हवा और प्राकृतिक सुदंरता के लिहाज से अनोखा समय है जब अद्वितीय विशेषताआेंं मेंं परमानंद की अनुभूति होती है।
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