- Nov 15, 2025
दिसम्बर में दिल्ली का मौसम ठंड और कोहरे से ढकी सर्दियों की सौगात प्रदान करता है। आप इतिहास प्रेमी हों या स्वाद के शौकीन दिल्ली शहर एक से बढकर एक आश्चर्यों की श्रृंखलाओं को संजोए हुए है। दिसम्बर का स्वागत करती हुई दिल्ली सर्द मौसम और धुंध की चादर ओढे सभी के लिए कुछ न कुछ विशेष लाती है। भंयकर गर्मी और भारी मानसून की विदाई के बाद दिसम्बर का महीना दिल्ली शहर मे ठंडी हवाओं के सर्द एहसास और दोपहर की सुहानी धूप का खूबसूरत नजराना पेश करता है।
धुंध भरी सुबहें, हल्की धूप लिए दिन और सर्द रातों का मौसम दिसम्बर में दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों, आध्यात्मिक दर्शन और लजीज स्वाद के लिए बुलाता है। दिसम्बर में दिल्ली की खूबसूरती को और करीब से समझने के लिए हम यहां लाए है संपूर्ण यात्रा गाइड, जो दिल्ली भ्रमण में और भी ज्यादा आनंद प्रदान करता है।
दिल्ली का संक्षिप्त इतिहास
भारत का महत्वपूर्ण शहर दिल्ली आज ही नहीं वरन् सदियों से कई साम्राज्यों की मुख्य राजधानी रहा है। दिल्ली के लिखित इतिहास के बारें में 8वीं शताब्दी से पता चलता है जब यहां तोमर राजवंश का शासन हुआ करता था। यह कई बार बनने, नष्ट होने और पुनः निर्माण होने वाले शहरों में शुमार रखता है। भारतीय उपमहाद्वीप पर हमला करने वाले लोग दिल्ली में जब बस जाते तो इस शहर की विशेषताओं के कारण इसे पसंद करते और दोबारा इसे अपने तरीके से बसाने के लिए पुनर्निर्माण करते थे। प्राचीन काल से मध्यकाल तक तोमर, चौहान, गौतम जैसे राजपूत राजवंशों का शासन रहा। इसके बाद सल्तनत काल और फिर मुगलो ने यहां तीन सौ सालों तक शासन किया। इसके बाद कंपनी शासन ब्रिटिशर्स द्वारा किया गया। सन् 1947 में भारत की आजादी के होने के बाद इसे भारत की राजधानी बनाया गया।
दिल्ली का जिक्र प्रागैतिहासिक काल जब चित्रित धूसर मृदभांड संस्कृति के लोग रहते थे और इंद्रप्रस्थ नाम से भी होता है। जिसकी निशानियां आज भी पुरानी दिल्ली किले के भीतर मौजूद है।
दिसम्बर में दिल्ली क्यों हो जाता है खास?
दिसम्बर मेंं दिल्ली की धुंध भरी सुबहें, ऊनी कपड़े, गर्म मूंगफली की महक और हर ओर उत्सवी माहौल की रौनक बिखरी होती है। दिसम्बर में दिल्ली में ऐतिहासिक पर्यटन स्मारक, रंगीन जीवंत सांस्कृतिक उत्सव और हस्त शिल्प से लेकर लाजवाब स्वाद तक, जोश उल्लास से परिपूर्ण चहल पहल करते शीतकालीन बाजार और क्रिसमस के उत्सवी मेलों के साथ ही सूफियाना संगीत संध्याओं के मधुर रस आनंदित अनुभव कराते हैं। दिल्ली में दिसम्बर की सर्दियां गर्मजोशी और पारंपरिक अंदाज़ का सुंदर सम्मिश्रण प्रस्तुत करती हैं।
दिसम्बर में दिल्ली का मौसम अपडेट
दिसम्बर में दिल्ली का मौसम यहां घूमने की योजना तैयार किए जाने के सर्वश्रेष्ठ कारणों में से एक है।
- तापमानः सुबह में 7 डिग्री सेल्सियस से लेकर दोपहर तक लगभग 20 डिग्री सेल्सियस
- दिनः पर्याप्त दृश्यता और शानदार मौसम के साथ दिल्ली की दोपहर का तापमान 21-22 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच जाता है।
- रातः दिन की अपेक्षा रात का तापमान कुछ और गिर जाता है, जिससे वातावरण में सर्दी और ठंड का असर कुछ बढ जाता है।
- प्रकाशः दिन में लगभग 10 घंटे सूरज की रोशनी रहती है, इस वजह से दर्शनीय स्थलों की यात्रा करना सुगम और सहज हो जाता है।
- धुंधः सुबह के समय बहुत आम बात है, जब भ्रमण विरासत स्मारको और स्थलों पर कोहरे की सफेद चादर रहस्यमयी ढंग से उन्हें ढक देती है।
पैकिंग टिप्स
- दिन के समय हल्के गर्म या ऊनी कपड़े पहनें।
- शाम या रात के समय ठंड से बचने के लिए जैकेट, मफलर और दस्ताने पहनने चाहिए।
- सैर या भ्रमण के लिए आरामदायक फुटवियर पहनें और यात्रा सुबह जल्दी शुरू करना समझदारी।
- सर्दियांं के दिनों में दिल्ली व आसपास के इलाकों में फैले कोहरे के प्रति सजग और संवेदनशील हैं तो मास्क जरूर पहनें।
दिसम्बर में घूमने के लिए दिल्ली के मुख्य ऐतिहासिक आकर्षण
लाल किलाः दिल्ली में प्रसिद्ध लाल किला मूल रूप से किला ए मुबारक नाम से जाना जाता था जिसे राजसी परिवार के निवास के लिए बनाया गया था। खूबसूरत नक्काशी, फूलों की आकृतियां, दोहरे गुंबद और लगभग 2.5 किमी लंबी शाही दीवार जो किले की रक्षा करती हुई शानदार और भव्य आकर्षण प्रदान करती हैं। कई इमारतो के संग्रह से बना यह किला लगभग 255 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इस किले को शाहजंहा ने बनवाया था, जिसके निर्माण में लाल बलुआ पत्थरों का निर्माण हुआ था। लाल रंग की विशेषता के कारण ही इसे लाल किला नाम से पुकारा गया। इस संरचना को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया है। 1639 में जब आगरा से दिल्ली राजधानी स्थानांतरित होने को थी तब उस्ताद अहमद लाहौरी को लाल किले निर्माण का काम सौंपा गया था, इसे बनने में करीब 10 साल लगे थे। लाल किला सलीमगढ नामक किले से सटा हुआ बना है जो 1546 मे इस्लाम शाह सूरी द्वारा बनवाया गया था। भारतीय प्रधानमंत्री लाल किले से हर साल स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। इस किले में दीवान ए आम, दीवान ए खास, तस्बीह खाना, नहर ए बिहिश्त, दिल्ली किला संग्रहालय, मुमताज महल, जफर मह, रंग महल आदि को देख सकते हैं।
कुतुब मीनारः यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल यह धरोहर दिल्ली का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है जो करीब 72.5 मीटर ऊंचाई के साथ दुनिया की सबसे ऊंची मीनार है। कुतुबद्दीन ऐबक द्वारा 1192 में बनवाई गई यह इमारत अपनी वास्तुकला के लिए पर्यटकों के लिए शानदार आकर्षण हैं। इस्लामी विजय के उपलक्ष्य में कुतुबद्दीन ऐबक ने इस इमारत की नींव रखी थीं और तहखाना बनने के बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद उनके उत्तराधिकारी इल्तुतमिश ने इसमें तीन और मंजिले जोड़ीं। सबसे आखिरी मंजिल का निर्माण फिरोजशाह तुगलक ने करवाया था। मीनार पर अरबी भाषा में शिलालेख बतातें है कि सिंकदर लोदी ने इसका जीर्णोद्धार भी कराया था।
इंडिया गेट व कर्तव्य पथः नई दिल्ली के केंद्र में बनी यह इमारत तकरीबन 42 मीटर ऊंची है, जो प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए 70,000 भारतीय सैनिकों की शहादत को सलामी देने के लिए बनवाई गई थी। एक चौराहे के बीचों बीच आर्क डी ट्रायम्फ जैसा मेहराब है जिसकी तुलना फ्रांसीसी समकक्ष के समान की जाती है। इंडिया गेट की नींव 1921 में ड्यूक ऑफ कनॉट ने रखी थी, डिजाइन एडविन लुटियंस द्वारा तैयार किया गया था। यहीं पर अमर जवान ज्योति स्मारक भारत की आजादी के बाद में बनवाया गया था। स्वतंत्रता सैनिकों की शहादत की याद में यह ज्योति दिन रात अनवरत जलती रहती है। इंडिया गेट राजपथ यानी कर्तव्यपथ के एक छोर पर स्थित है। इंडिया गेट के आसपास क्षेत्र में हरी भरी हरियाली के साथ लॉन बने हैं जिनमें सुंदर झरनों की शोभा आकर्षक लगती है और पिकनिक स्थल के रूप में यह जगह पर्यटको को बहुत पसंद आती है।
हुमायूं का मकबराः वास्तुकला का शानदार नमूना यह मकबरा भारत का पहला उद्यान मकबरा माना जाता है जो लाल बलुआ पत्थरों से बना हुआ शानदार लगता है। मुगल वास्तुकला शैली में बनी यह पहली संरचना है, इसे सन् 1993 में यूनेस्को वैश्विक धरोहर स्थल में शामिल किया गया है। इस मकबरे का निर्माण हुमायूं की पत्नी बेगा बेगम ने कराया था। मीराक मिर्जा ग्रियास ने इसकी डिजाइन तैयार की थी। 1565 में बना यह मकबरा 1572 में पूरा हुआ जो हुमांयू की मृत्यु के 9 वर्ष बाद बनना शुरू हुआ था। उद्यान परिसर के बीचों बीच करीब 7 मीटर की ऊंचाई पर यह मकबरा बना हुआ है, जो विशिष्ट फारसी शैली डिजाइन का है और स्वर्ग के बगीचे का प्रतीक है।
महरौली पुरातत्व पार्कः दक्षिण दिल्ली में बसा यह पार्क 200 ओकरा का खजाना है। कुतुबमीनार के पास स्थित इस पार्क के आसपास 50 से अधिक ऐतिहासिक स्मारकें हैं। दिल्ली के प्रमुख प्राचीन राजवंशों की पहचान और छाप यहां देखने को मिलती है। यह दिल्ली का ऐसा क्षेत्र है जो लगातार एक हजार साल तक बसाया गया है। इस पार्क से आप इतिहास की समृद्ध झलक आराम से देख सकते हैं।
सफदरजंग मकबराः दिल्ली के जोर बाग इलाके में स्थित सफदरजंग मकबरा भव्य स्मारको में से एक है। जहां वास्तुशिल्प का अनोखा चमत्कार देखने को मिलता है। मुगलकालीन वैभव और हरियाली के बीच बना यह मकबरा संगमरमर और बलुआ पत्थरों से बना हुआ है जिसका निर्माण 18वीं शताब्दी में नवाब शुजाउद्दौला द्वारा बनवाया गया था जिसे मुगल वास्तुकला को प्रदर्शित करने वाले आखिरी बाग मकबरा भी बताया जाता है। यह मकबरा मिर्जा मुकीम अबुल मंसूर खान जिन्हे सफदरजंग नाम से जाना जाता है, इन्हीं की याद में बनवाया गया मकबरा है।
दिसम्बर में घूमने के लिए दिल्ली के मुख्य प्रकृति व पार्क
लोधी गार्डनः करीब 90 एकड़ विशाल क्षेत्रफल पर फैला यह पार्क समृद्ध इतिहास के साथ ही भारतीय वनस्पतियों, जीवों और आधुनिक वास्तुकला को भी दर्शाता है। इसका निर्माण 15वीं से 16वीं शताब्दी के बीच सल्तनत काल में हुआ था। आज भी यह पार्क स्वास्थ्य प्रेमी, फोटोग्राफर्स और सैलानियों को बेहद पसंद है। इंडो इस्लामिक वास्तुकला का शानदार आकर्षण झलकाता यह पार्क ऐतिहासिक रत्न की उपाधि से नवाजा जाता है। इस गार्डन में सिकंदर लोधी, मोहम्मद शाह के मकबरों के साथ शीशा गुंबद और अथपुला पुल बने हुए हैं।
ओखला बर्ड सैंक्चुअरीः दिल्ली और नोएडा में मिलने वाली यह शांत जगह पक्षियों और फोटोज के शौकीन लोगों के लिए स्वर्ग है। यह अभयारण्य 4 वर्ग किमी क्षेत्र के दलदली इलाके, घास के मैदान और कंटीली झाड़ियों में फैला हुआ है। विभिन्न तरह की वनस्पतियों के आकर्षणों के साथ सर्दियों के समय यहां प्रवासी पक्षियों के नजारें भी एन्जॉए कर सकते हैं।
नेहरू पार्कः नई दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में स्थित यह पार्क शांत और हरी भरी हरियाली प्रदान करते आरामदायक स्थानों में से एक है। यह पार्क करीब 80 एकड़ में फैला हुआ है जिसकी स्थापना सन् 1969 में की गई थी। प्रकृति के नजारों के बीच यह जगह सांस्कृतिक, संगीत और हेल्थ फिटनेस के लिए भी जानी जाती है। यहां आप सुबह और शाम के राग संगीत कार्यक्रम, स्पिक मैके प्रोग्राम, भक्ति महोत्सव, कला वर्कशॉप, योग क्लासेज के साथ ही पिकनिक और सैर का लुत्फ ले सकते हैं।
बुद्धा जयंती पार्कः भगवान बुद्ध की 2500वीं जयंती के उपलक्ष्य में इस पार्क की नींव रखी गई, जहां सरदार पटेल मार्ग से पहुंचा जा सकता है। यहां भगवान बुद्ध की प्रतिमा विराजमान है जो तिब्बती लोगो का भगवान बुद्ध के प्रति आभार व्यक्त करने का तरीका है। जलमार्ग प्रणाली पर एक द्वीप पर स्थापित चौकोर मंच पर रखी गई है। इसके चारों तरफ पत्थर की बाड़ और एक परिक्रमा रास्ता है।
दिसम्बर में दिल्ली के प्रमुख आध्यात्मिक स्थल
गुरूद्वारा बंगला साहिबः सिक्खों के महत्वपूर्ण तीर्थस्थल गुरूद्वारा बंगला साहिब पटेल नगर मेट्रो स्टेशन के पास स्थित है, जो सिखों के आठवें गुरू हरकिशन साहिब के नाम पर स्थापित है। बहुत छोटी सी उम्र में बाबा हरकिशन ने जादुई चमत्कारों से सबको हैरान कर दिया था। मुगलों के निमंत्रण पर बाबा हरकिशन यहां आए थे जिन्होने अपना जीवन चेचक महामारी से पीड़ित लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया था। इस गुरूद्वारें में दिन रात लंगर चलता रहता है और यहां बना दिव्य कुंड के बारे में मान्यता है कि इस कुंड के जल को स्पर्श करने से रोग शोक दूर हो जाते हैं।
जामा मस्जिदः पुरानी दिल्ली में बनी यह विशाल मस्जिद करीब 25000 दर्शनार्थियांं को बैठाने की क्षमता रखती है जो भारत की सबसे विशाल मस्जिद है। इसका निर्माण 1644 में हुआ था जिसे शाहजंहा ने बनवाया था। इस सजावटी मस्जिद मे तीन बड़े द्वार, चार मीनारे और दो 40 मीटर ऊंची मीनारें है जो लाल बलुआ पत्थरों से बनी है।
अक्षरधाम मंदिरः अक्षरधाम मंदिर स्वामीनारायण को समर्पित मदिर है जिसे ईश्वर का निवास स्थान माना जाता है। सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परिसर के रूप में प्रसिद्ध यह मदिर अपनी अद्भुत वास्तु और शिल्पकला के लिए लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। शाम में यहां ध्वनि एवं प्रकाश शो आयोजित किया जाता है, जिसे देखने के लिए दर्शकों की अच्छी खासी संख्या यहां देखने को मिलती है।
लोटस टेम्पलः दुनिया भर मे प्रसिद्ध यह मंदिर बहाई धर्म के लोगो से जुड़ा तीर्थ स्थल है जो सर्व धर्म समभाव की भावना में विश्वास रखते हैं। यहां तकरीबन एक साथ हजारों लोग प्रार्थना कर सकते हैं, इसकी वास्तु डिजाइन फरीबुर्ज सभा द्वारा बनाई गई है। एकता, शांति, समरसता का संदेश प्रदान करता यह मदिर 1986 में बनाया गया था। कमल के फूल के डिजाइन पर यहां मंदिर 27 पंखुड़ियों और 9 समूहों वाली आकर्षक संरचना है जहां सारे समूहों के दरवाजे एक संयुक्त प्रार्थना सभागार की ओर खुलते हैं। यहां किसी की मूर्ति वगैरह स्थापित नहीं है बल्कि अच्छी पुस्तके रखी हैं जिन्हें आप पढ सकते हैं।
कालकाजी मंदिरः दिल्ली के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक यह मंदिर हिदूं देवी काली जी को समर्पित है जो दक्षिण दिल्ली में है। इन्हीं देवी के नाम पर पूरे स्थान का नाम कालका जी है। बताया जाता है कि यह मदिर त्रेता युग से संबंधित है जो आज भी प्रांसगिक है। यहां मा कालका जी की बेहद प्राचीन मूर्ति के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
दिसम्बर में दिल्ली के प्रमुख बाज़ार आकर्षण
चांदनी चौकः पुरानी दिल्ली के प्रमुख बाजारों में से एक चांदनी चौक जीवंत चहल पहल और स्वाद की गलियों के साथ ही विरासत को प्रदर्शित करता विशेष स्थान है। चांदनी चौक में गुरूद्वारा सीस गंज साहिब, गौरी शंकर मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं।
कनॉट प्लेसः दिल्ली के राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास मौजूद यह स्थान अपनी खूबसूरत बनावट और व्यवस्था की वजह से दिल्ली के प्रमुख शॉपिंग प्लेसस में से एक माना जाता है।
दिल्ली हाटः यह वह जगह है जो अपने हस्तशिल्प वस्तुओं के लिए जाना जाता है। कुशल कारीगरांं और शानदार शिल्पकारों के हाथ से बनाई गई वस्तुओं को यहां निश्चित दाम पर खरीदा जा सकता है। इस बाजार की संकल्पना भारतीय संस्कृति को संजोने, संरक्षित और प्रदर्शित करने के उद्देश्य से बनाया गया है। इस बाजार में एक ही छत के नीचे 29 राज्यों की झलक देखने को मिलती है।
दिसम्बर में दिल्ली का स्वादः भोजन विशेष स्थल
स्ट्रीट फूड्स और हब्स
कुलिया चाटः यह स्नैक न सिर्फ चटपटा है बल्कि स्वाद के साथ ही सेहतमंद भी है। इसमें मौसमी फलों के ताजा टुकड़ों को काला नमक, जीरा, नींबू का रस, काबुली चना और अनार के दानों के मसालेदार मिश्रण से तैयार किया जाता है। इस रेसिपी का स्वाद लेने के लिए आप पुरानी दिल्ली का रूख कर सकते हैं और यहां के चाट कॉर्नस पर चख सकते हैं।
बटर चिकनः दुनिया भर मे मशहूर बटर चिकन दिल्ली का प्रसिद्ध व्यंजन है जिसमें मक्खन और क्रीम से बनी गाढी टमाटर की चटनी में तंदूरी चिकन के मुलायम टुकड़े, राइस या नान के साथ खाने में स्वादिष्ट लगता है। इस डिश की शुरूआत की कहानी भी मजेदार है। फिलहाल तो इसका लाजवाब स्वाद चखने के लिए आप दक्षिण दिल्ली के पंडारा रोड बाजार जा सकते हैं।
राज कचौरीः कचौरियों के राजा के रूप में लोकप्रिय यह व्यंजन कुरकुरी गोल परत कचौरी है जिसमें आलू, छोले और दाल का मिश्रण भरा होता है। जिस पर ईमली और धनिए की चटनी के साथ खाने पर आनंद कई गुना बढ जाता है। दिल्ली में किसी भी प्रसिद्ध रेस्टोरेंट में इसके स्वादिष्ट स्वाद का आनंद ले सकते हैं।
राम लड्डूः मूंग दाल और चना दाल से बने छोटे छोटे कुरकुरे पकौड़े जो तले हुए होते हैं। कद्दूकस की हुई मूली और हरी चटनी के स्वाद से इसे खाना बेहद अच्छा लगता है। यह डिश नुकसानदेह नहीं है। दिल्ली और आसपास की जगहो पर स्ट्रीट फूड डिश के रूप मे इसे खूब एन्जॉए कर सकते हैं।
परांठेः सर्दियो में दिल्ली के मशहूर पराठें जिसमें आलू, गोभी, पनीर और प्याज या इन तीनों के मिश्रण से बनते है। परांठो में आप अपनी मनपसंद कोई भी चीज भर कर उन्हें बना सकते हैं। पराठों के बेमिसाल स्वाद के लिए आप चांदनी चौक की पराठें वाली गली में भी जा सकते हैं।
दिसम्बर में दिल्ली में मनाए जाने वाले प्रमुख इवेंट, त्यौहार व उत्सव
मौसमी खाद्य उत्सवः दिसम्बर के समय फूड फेस्टिवल और फूड कार्निवाल मे ंमनपसंद स्वाद का अनुभव लेने के साथ ही इन दिनों सड़क के किनारे मिलने वाली भुनी मूंगफली, चिक्की गाजर हलवा और समोसों का आनंद ले सकते हैं।
शीतकालीन मेले और बाजारः सर्दियों के समय दिल्ली में कई सारे शिल्प मेले और शीतकालीन व्यंजनों से संबंधित बाजारों का जीवंत अनुभव ले सकते हैं, इसके लिए आप दिल्ली हाट जा सकते हैं। प्र्र्रगति मैदान में इस समय अक्सर व्यापार मेले और पुस्तक मेले आयोजित होते हैं। शिल्प मेला में लोक शिल्प और प्रदर्शन का लुत्फ लें।
इवेंट्सः दिल्ली मे इस समय अलग अलग जगहों पर कॉमिक इवेंट्स, स्टैंड अप कॉमेडी शोज या म्यूजिक शोज़ होते रहते हैं। फिल्म प्रदर्शनी और अन्य लाइव कन्सर्ट को दिसम्बर के महीनों मे एन्जॉए कर सकते हैं।
दिसम्बर में दिल्ली में यात्रा करने हेतु सुझाव
दिल्ली, हमेशा ही व्यस्त शहरों में से एक है ऐसे में आप भी अगर दिल्ली घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो कुछ यात्रा सुझावों के साथ आप अपनी दिल्ली यात्रा को बेहतर और यादगार तरीके से संपन्न कर सकते हैं।
पूर्व बुकिंग करेंः सर्दियो में दिल्ली का नजारा खुशनुमा और उत्सवी वाइब्स से सराबोर हो जाता है। भीड़भाड़ की दिक्कत से बचना चाहते हैं तो होटल वगैरह की बुकिंग पहले से ही करके रखें। क्रिसमस और नए साल की जश्न की तैयारियों को एन्जॉए करने के लिए यात्रा संबंधी टिकट्स भी पहले से ही कर लें क्योंकि इस समय भीड़भाड़ ज्यादा हो जाती है।
लेयर कपड़ों को वरीयता देंः दिल्ली में सुबह और शाम ठंड का असर तेज होता है और दिन में हल्की धूप से ठंड कुछ कम लग सकती है।
परिवहन विकल्पः दिल्ली घूमने के लिए मेट्रो का उपयोग समय और पैसा दोनों बचाता है साथ ही यह तेज और सर्दियों में गर्म रहता है।
प्रदूषणः दिल्ली में अक्सर कोहरा या धुंध समस्या का रूप ले लेती है। बेहतर है कि मास्क पहने और सुबह की व्यायाम से परहेज करें।
शिष्टाचारः आध्यात्मिक जगहो पर वेशभूषा शालीन और सभ्य पहनें। गुरूद्वारें में प्रवेश करने से पहले सर को ढकें और जूते बाहर ही उतारें।
खरीदारी शिष्टाचारः बाजारों को घूमते समय धैर्य और नम्रता बनाएं रखें। सरोजिनी और स्थानीय मार्केट में मोलभाव की कला आजमाएं और तय कीमतो की निश्चितता के लिए दिल्ली हाट का चुनाव कर सकते हैं।
दिसम्बर में दिल्ली के आसपास घूमने वाले स्थान
दिल्ली देश का हृदय है जहा से कई और शानदार शहरो की दूरी कुछ ज्यादा नहीं है आप चाहें तो वीकेंड पर दिल्ली के आसपास घूमने की प्लानिंग भी कर सकते हैं।
ऋषिकेश-हरिद्वारः दिल्ली से लगभग 3-4 घंटे का सफर तय कर आप हिमालयी स्पर्श का अवलोकन करने जा सकते हैं। शहरी हलचल से आध्यात्मिक शांति के लिए हरिद्वार और ऋषिकेश जा सकते हैं। जिसके लिए रेल, सड़क या हवाई जहाज विकल्प भी है।
जयपुरः राजस्थान की राजधानी गुलाबी शहर के नाम से मशहूर यह जगह दिल्ली से तकरीबन 270 किमी की दूरी पर है। यहां से आप रेल या प्लेन के अलावा बस या कार से आसानी से पहुंच सकते है।
नीमराणाः दिल्ली से करीब 2-2.5 घंटे का सफर तय कर आप ऐतिहासिक नीमराणा फोर्ट पैलेस को एन्जॉए करने जा सकते हैं।
आगरा-मथुराः दिल्ली आगरा की दूरी यमुना एक्सप्रेस वे के माध्यम से करीब 3 घंटे की है जहां आप ऐतिहासिक विरासतों और आश्चर्यों को देखने जा सकते हैं। मथुरा में कृष्ण भगवान की जन्मभूमि और अन्य लीलाओं के दर्शनों हेतु जा सकते हैं।
अमृतसरः स्वर्ण मंदिर की यात्रा के लिए दिल्ली से अमृतसर की यात्रा पर निकलें जो बहुत ज्यादा दूर नहीं है।
दिल्ली कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से आप हवाई रास्ते के जरिए देश विदेश कहीं से भी दिल्ली पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- दिल्ली में कई प्रमुख रेलवे स्टेशन है जहां से आप रेल मार्ग के जरिए दिल्ली घूमने आ सकते हैं। जैसे आनंद विहार, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, निजामुद्दीन, सराय रोहिल्ला और भी रेलवे स्टेशन है जो देश के विभिन्न भागों से दिल्ली पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- नई दिल्ली, भारत का प्रमुख शहर और राजधानी है जहां पहुंचने के लिए देश के किसी भी कोने से सड़क सुविधा बेहतरी के साथ उपलब्ध है। आप चाहें तो किसी सार्वजनिक वाहन या स्वयं की कार से ड्राइविंग कर भी दिल्ली यात्रा के लिए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
दिल्ली, भारत का ऐतिहासिक, आधुनिक और जीवंत आईना है, यहां की संस्कृति सदियों से आकर्षण का केंद्र रही है। चहल पहल भरे बाजारों की रौनक और सजीव वातावरण की पहचान कराता यह शहर आधुनिक समय में भी अपनी आकर्षक खासियतों की वजह से जाना जाता है। दिसम्बर में दिल्ली यादगार अनुभव प्रदान करता शहर है जहां हवाओं की शीतलता, स्मारकों पर गिरता कोहरा और औपनिवेशिक खूबियों को खुद में सहेजता आनंदमय शहर है। तो फिर इस दिसम्बर के महीने में दिल्ली जैसे राजसी शहर को एन्जॉए करते हैं।
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