• Nov 26, 2025

गुजरात दिसम्बर में सर्दियों के शानदार मौसम के साथ पर्यटन के लिए भी आदर्श समय है। कच्छ के रण से लेकर प्रभास पाटन क्षेत्र की अनोखी छटा देखते बनती है। द्वारका के मंदिरों की आध्यात्मिकता से लेकर समुद्र किनारे बसे सोमनाथ के पवित्र तीर्थस्थलो की शोभा तब और ज्यादा बढ जाती है जब ऐतिहासिक विरासत और मान्यताएं दिसम्बर में अपनी दिव्यता बिखेरती हुई श्रद्धालुओ को आमंत्रित करती हैं। गुजरात अध्यात्म, ऐतिहासिक विरासत, प्रकृति जीवन और समुद्री तटों की शांतिमय आनंद का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है। 

यहा हम आपको दिसम्बर में गुजरात पर्यटन के लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका प्रस्तुत करने जा रहे हैं, आशा है कि गुजरात घूमने के लिए यह यात्रा गाइड आपके बहुत काम आएगी। 

गुजरात का संक्षिप्त इतिहास

गुजरात पश्चिमी भारत का एक राज्य है जो पाकिस्तान से लगी अंतरराष्ट्रीय और प्रमुख राज्यों महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के साथ भी सीमा साझा करता है। गुजरात की राजधानी गांधीनगर है और प्रमुख वाणिज्यिक केंद्र अहमदाबाद है। अरब सागर के साथ गुजरात की दक्षिणी सीमा पर दादर नागर हवेली है। 

प्राचीन समय मे गुजरात को गुर्जरत्रा प्रदेश के नाम से जानते थे, इसके सांस्कृतिक अंग कच्छ, सौराष्ट्र, काठियावाड़, हालार, पांचाल, गोहिलवाड़ और झालावाड़ हैं। 

गुजरात में प्राचीन सभ्यताओ के अवशेष भी देखने को मिलते हैं। पाषाण युग से लेकर चोलकोथिक और कांस्ययुगीन सभ्यताओं जैसे सिंधु काल से भी यह संबंधित है। गुजरात का इतिहास तकरीबन 2,000 साल पुराना है जब भगवान श्री कृष्ण ने द्वारका नगरी को बसाया था। यहां मौर्य, गुप्त और चालुक्य राजवंशों ने शासन किया। स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले गुजरात मुख्य रूप से दो क्षेत्रों मे ंविभक्ता हो गया था- एक ब्रिटिश क्षेत्र और देसी रियासतें। 1 मई 1960 को भारत की आजादी के बाद गुजरात राज्य अस्तित्व में आया था। 

दिसम्बर के समय गुजरात विशेष क्यों?

दिसम्बर के समय गुजरात अपनी अनोखी और अद्वितीय विशेषताओं की वजह से पर्यटको के बीच काफी लोकप्रिय रहता है। विभिन्न भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की भिन्नताओं की खासियत हर किसी को कुछ न कुछ यादगार यात्रा का लुत्फ मिलता है। कच्छ के रन और उत्तरी गुजरात मे दिसम्बर में तापमान, द्वारका, सोमनाथ, दीव से कम होता है, अगर देखा जाए तो सबसे ज्यादा तापमान दक्षिण गुजरात यानी सूरत, सापूतारा में रहता है। 

दिसम्बर के दौरान गुजरात का मौसम काफी सुहावना रहता है और पर्याप्त धूप भी रहती है। गुजरात के ऊंचाई वाले भाग पर मौसम सर्द हो जाता है। वैसे दोपहर का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है और रात के समय तापमान इससे ज्यादा ठंडा होता है जो कि 10 डिग्री सेल्सियस तक जाता है। वैसे देखा जाए तो यहां मौसम न बहुत ज्यादा गर्म होता है, और बहुत ज्यादा ठंडा होता ह इसलिए यहां यात्रा करना गुजरात के विभिन्न आकर्षणों से रूबरू होने का सबसे परफेक्ट समय है। स्वादिष्ट भोजन का स्वाद लेने के साथ ही इस महीने विभिन्न पर्यावरण प्रकृति की खूबसूरती के साथ बिना किसी झंझट के घूम सकते हैं। कुल मिलाकर दिसम्बर के समय गुजरात करिश्माई रूप से स्वर्ग में बदल जाता है। 

दिसम्बर में गुजरात का मौसम अपडेट

गुजरात दिशाओ के हिसाब से अलग अलग मौसम जोन में आता है इस वजह से यहां उत्तर, मध्य, पश्चिम और दक्षिण गुजरात के तापमान में कुछ कुछ अंतर देखने को मिलता है। लेकिन सभी जगह मौसम अपने जादुई कलेवर में दिखाई देता है। 

क्षेत्र तापमान रेंज डिग्री सेल्सियस दिसम्बर में विशेष 
कच्छ का रण और उत्तरी गुजरात   तकरीबन 10-25 रातें सर्द और दिन में धूप 
सौराष्ट्र द्वारका, सोमनाथ और दीव करीब 15-28 शानदार हवाएं और शांत मौसम 
मध्य गुजारत वडोदरा, पाटन 13-26 मौसम में हल्कापन 
दक्षिण गुजरात सूरत, सापूतारा 18-30 गर्म और शुष्क मौसम

दिसम्बर में घूमने के लिए सर्वश्रेष्ठ 10 आकर्षक पर्यटन स्थल

1. द्वारका: भारत के सौराष्ट्र प्रायद्वीप के सबसे पश्चिमी छोर पर जहां अरब सागर से धरती का मिलन होता है, यहीं पर द्वारका नगरी बसी है। यह कहावतों, कहानियों और भव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से जगमगाती नगरी है। भगवान श्री कृष्ण की नगरी के रूप में बसी द्वारका देवभूमि कहलाती है जो समुद्र के किनारे बसा बेहद शांत और सुकून प्रदान करने वाला शहर है। इस नगरी पर भगवान श्रीकृष्ण ने शासन किया था जिसे 8वीं शताब्दी के दार्शनिक संत आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार धामों में से एक माना जाता है। कहते हैं कि भगवान विष्णु पुरी में भोजन, बद्रीनाथ में ध्यान, रामेश्वरम में स्नान और द्वारका में विश्राम करते हैं। इसके अलावा द्वारका को पौराणिक धर्मग्रंथों के अनुसार बताई गए सात स्थानों में सबसे प्राचीन और पवित्र जगहो यानी सप्त पुरियों में से एक माना जाता है। द्वारका का शाब्दिक अर्थ ही मोक्ष का द्वार है। प्राचीन अवशेषों के आधार पर द्वारका को बंदरगाह शहर की संज्ञा दी जाती है, जहां समुचित व्यवस्थाएं और कुशल उन्नत व्यवस्था लागू थी। यहां आप द्वारकाधीश मंदिर, रूक्मिणी मंदिर, नागेश्वर, गोपियों की बावड़ी अन्य तीर्थ मंदिरों के दर्शन करने के साथ ही बेट द्वारका की सैर कर सकते हैं। 


नजदीकी एयरपोर्टः जामनगर हवाई अड्डा जो द्वारका से करीब 127 किमी दूरी पर है। 

नजदीकी रेलवे स्टेशनः द्वारका रेलवे स्टेशन 

2. गिर राष्ट्रीय उद्यानः गिर राष्ट्रीय उद्यान में उपोष्णकटिबंधीय मैदानी जलवायु पाई जाती है जो जूनागढ जिले में स्थित है। साल भर गर्म और शीत ऋतु के दौरान यहां मौसम करवट लेता रहता है। यहां घूमने का सबसे शानदार समय सर्दियों का ही होता है जिसमें दिसम्बर पर्यटन की दृष्टि से कुछ ज्यादा ही लोकप्रिय श्रेणी में आता है। यह वह समय होता है जब गर्मी बिल्कुल नहीं होती और सर्दी काफी होने से यह पर्यटकों को उतना ही ज्यादा आकर्षित करता है। अगर आप स्वर्ग के आनंद को प्रकृति की गोद में स्पर्श करना चाहते हैं तो यहां आपको शेरों को उनके प्राकृतिक आवास में आज़ादी से घूमते हुए देख सकते हैं। अफ्रीका के बाद विश्व का दूसरा ऐसा स्थान है जहां आप शेरों को खुलेआम घूमते हुए देख सकते हैं। तलाला गिर कि पास स्थित यह क्षेत्र 1424 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर फैला हुआ है। सन 1969 में राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिलने वाले इस उद्यान का इतिहास लगभग 100 सालों से भी ज्यादा प्राचीन है। सिर्फ शेर ही नहीं बल्कि कई तरह के जंगली जानवर और पक्षी यहां देखने को मिलते हैं। विंग कोबरा, रसेल वाइपर, सॉ स्केल्ड वाइपर और करैत के अलावा पक्षियो की 200 से अधिक प्रजातियां और सरीसृपों व उभयचरों की 40 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। 

नजदीकी एयरपोर्टः दीव एयरपोर्ट जिसकी दूरी यहां से करीब 69 किमी है। 

नजदीकी रेलवे स्टेशनः सोमनाथ रेलवे स्टेशन जिसकी दूरी लगभग 56 किमी है। 

3. कच्छ का रनः विशाल रेगिस्तान है जहां हर साल नवंबर से फरवरी के बीच रण उत्सव का आयोजन होता है जिसकी शुरूआत साल 2005 में हुई थी। सफेद नमक के रेगिस्तान पर जब चंद्रमा की रोशनी पड़ती है तब यहां का नजारा देखने लायक होता है। कच्छ का रण टेंट सिटी के लिए बेहद प्रसिद्ध है, यहां आप इस अनोखे कैंप का आनंद ले सकते हैं। कच्छ का रण उत्सव में आप काला डूंगर यानी काला पहाड़ जैसी सबसे ऊंची जगह से सूर्यास्त के शानदार नजारें मनमोहक होते हैं। होडको विलेज में आप पांरपरिकता का अनुभव कर सकते है, यहां के शानदार और कुशल कारीगर और शिल्पकार मिट्टी के बर्तन और कढाई का काम करते हैं जिन्हें आप यादगार तौर पर खरीद सकते हैं। कच्छ में अवस्थित संग्रहालय में आप सांस्कृतिक धरोहरों और ऐतिहासिक दर्शन भी कर सकते हैं जहां आप स्थानीय कला, शिल्प और ऐतिहासिक वस्तुओं को देख सकते हैं। यहां होने वाले लोकनृत्य और संगीत प्रदर्शन का आनंद लेने के साथ ही फोटोग्राफी और साहसिक गतिविधियो को भी एन्जॉए कर सकते हैं। 

नजदीकी एयरपोर्टः भुज हवाई अड्डा जिसकी कच्छ के रण से दूरी लगभग 75 किमी है। 

नजदीकी रेलवे स्टेशनः भुज रेलवे स्टेशन जिसकी दूरी लगभग 80 किमी है। 

4. सोमनाथः यह जगह प्रसिद्ध और प्रथम ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाती है जहां भगवान शिव का यह प्रतिष्ठित मंदिर स्थित है। इस मंदिर की संपन्नता और समृद्धि से चकाचौंध होकर मोहम्मद गजनी से इस पर सत्रह बार आक्रमण कर लूटपाट की है। यह स्थान तीन नदियों कपिला, हिरण और सरस्वती नदी के मिलन का भी स्थान है जिसे संगम कहा जाता है। कहते हैं यहां चंद्रदेव ने स्नान कर अपनी चमक वापिस पाई थी। अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ अति दुर्लभ जगहों में सें एक है। यहां आप भालका तीर्थ, गीता मंदिर और अन्य संग्रहालयों की झलक भी देख सकते हैं। दिसम्बर के समय यहां मौसम लुभावना और सुहावना हो जाता है। दर्शनीय और तीर्थस्थलो की यात्रा के लिए यह समय अतिउत्तम बताया जाता है। 

नजदीकी एयरपोर्टः दीव हवाई अड्डा, दूरी करीब 63 किमी है और केशोद एयरपोर्ट से दूरी करीब 49 किमी है। 

नजदीकी रेलवे स्टेशनः सोमनाथ रेलवे स्टेशन और वेरावल रेलवे स्टेशन। 

5. अहमदाबादः गुजरात के प्रमुख वाणिज्यिक शहर के रूप में इस स्थान को जाना जाता है जो बहुत विकसित और प्रसिद्ध शहर है। इसे भारत के मैनचेस्टर की संज्ञा भी दी जाती है इसके अलावा यहां पर्यटन की दृष्टि से कई बेहतरीन उदाहरण हैं जहां साबरमती आश्रम, अक्षरधाम मंदिर, अडालज बावड़ी, जामा मस्जिद, कांकरिया झील, साबरमती रिवरफ्रंट, भद्रा किला, कालूपुर स्वामीनारायण मंदिर हैं। साबरमती नदी के तट पर बसा यह आश्रम महात्मा गांधी द्वारा बनाया गया था जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले कई आदोंलन और मिशनों की नींव रखी। दांडी यात्रा साबरमती के इसी आश्रम से शुरू की गई थी जो आज अहमदाबाद जंक्शन से करीब 8 किमी की दूरी पर ही स्थित है। गांधी जी यहां बेसहारों और निसहायो की सहायता और आसरा प्रदान करते थे। अहमदाबाद मे बनी अडालज बावड़ी करीब 1499 में बनाई गई थी जिसे वाघेला प्रमुख वीर सिंह की पत्नी रानी रूद्राबाई ने करवाया था। इस्लामी प्रभाव वाली यह बावड़ी सोलंकी वास्तुकला शैली में बनी है। जिसमें तीन प्रवेश सीढियां और शीर्ष पर अष्टकोणीय द्वार है। 

नजदीकी एयरपोर्टः अहमदाबाद एयरपोर्ट 

नजदीकी रेलवे स्टेशनः अहमदाबाद जंक्शन 

6 भुजः भुज कच्छ जिले की राजधानी के रूप में जानी जाती है जहा कई सारे आकर्षणों की श्रृंखला पर्यटकों को मोहित करती हैं जैसे आईना महल की स्थापत्य कला, पिरोटन द्वीप एक समुद्री राष्ट्रीय उद्यान, मांडवी बीच जहां आप समुद्री तटों की शांति और वहां करने वाली गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। इसके अलावा हमीरसर झील में दिसम्बर के महीने मे प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक यादगार अनुभवों का आनंद उठाएं। 

नजदीकी एयरपोर्टः भुज एयरपोर्ट 

नजदीकी रेलवे स्टेशनः भुज रेलवे स्टेशन 

7 जूनागढः जूनागढ का नाम अक्सर महत्वपूर्ण कहानियो से जुड़े ऐतिहासिक किस्सों के लिए जानते हैं। साथ ही यह अपनी प्राकृतिक शोभा और इतिहास के साथ ही अध्यात्म के लिए भी जाना जाता है। यह क्षेत्र मंदिरो, पुराने किलों और हरी भरी हरियाली के जाना जाता है। यहां के ऊपरकोट किले में आप युद्धों, रणनीतियों और घेरेबंदी की कहानियों को सुन सकते हैं। यहां मौजूद पवित्र पहाड़ियों के आकर्षण जिसमें प्राचीन जैन और हिंदू मंदिरों की मौजूदगी शांति और सुकून प्रदान करती है, साथ ही प्राकृतिक आकर्षण भी उत्पन्न करती है। दामोदर कुंड की पवित्रता से श्रद्धालुओ के मन को आध्यात्मिक शांति और आत्मा को मुक्ति का आभास होता है। गिर राष्ट्रीय उद्यान की भव्यता और प्राचीन शिलालेखों की उपस्थिति सम्राटअ अशोक के काल की अनुभूति कराती है। यहां आप दातार पहाड़ी पर जमीयल शाह दातार के प्रसिद्ध पवित्र स्थल की सैर का आनंद भी ले सकते हैं जहां भक्ति और समरसता की भावना को बल मिलता है। 

नजदीकी एयरपोर्टः राजकोट एयरपोर्ट, दूरी लगभग 100 किमी है। 

नजदीकी रेलवे स्टेशनः जूनागढ जंक्शन 

दिसम्बर में गुजरात के स्वादिष्ट स्वाद

गुजरात के स्वाद मे अलग ही मिठास देखने को मिलती है। यहां की कई लोकप्रिय डिश ऐसी हैं जो पहले सिर्फ गुजरात मे ही खाई जाती थीं लेकिन उनके स्वाद और लोकप्रियता की वजह से पूरे विश्व में पसंद किया जाता है। गुजराती स्वाद की खासियत और अंदाज सिर्फ स्वाद की दृष्टि से ही नहीं बल्कि सेहतमंद होते हैं। गुजरात स्वादों की परिपूर्णता, विविध रंगो से सजे और मिठास से भरपूर होते हैं। यहां की खासियत होती है कि यहां खाए जाने वाले हर भोजन में कम से कम थोड़ी बहुत मिठास चखने को जरूर मिलती है। 

हांडवोः गुजराती स्टाईल में बना मीठा और नमकीन केक है जो गुजराती व्यंजनों की खूबी को और भी ज्यादा बढाता है। हांडवो एक तरह की गुजराती मिठाई है जो तेल, जीरा, सरसों और करी पत्ते का तड़का लगाने के बाद अलग तरह के कुकर में बनाया जाता है। बनावट में यह केक ढोकला जैसा ही माना जाता है लेकिन इसके स्वाद में अंतर देखने को मिलता है। नमकीन मीठे केक के रूप में यह लौकी, कुटी हुई मूंगफली और अन्य स्वादनुसार सब्जियों की फिलिंग के साथ बनाया जाता है। स्वादिष्ट गुजराती व्यंजनो मे हांडवों सबसे जरूरी मिठाई की तरह मानी जाती है। 

खांडवीः यह बेसन, नमक और चीनी से बने घोल के साथ बना पंसदीदा गुजराती नाश्ता है जिसका मीठा और नमकीन स्वाद इसे लोकप्रिय बनाता है। महाराष्ट्रियन लोग इसे सुरालिच्य वाद्य भी कहते हैं और यह उनकी भी पसंदीदा डिश है। मुलायम, हल्की और स्वादिष्ट डिश जिसका स्वाद बेमिसाल है।

ढोकलाः गुजराती व्यंजनों में सर्वाधिक लोकप्रिय स्नैक्स डिश जिसे भारत के कई हिस्सो मे अपनाया गया है। गुजरातियों को इस डिश को खाने के लिए किसी विशेष समय अवधि की जरूरत नही होती है। ढोकले का स्वाद हरी चटनी और राई के तड़के साथ और भी ज्यादा स्वादिष्ट लगता है। 

खमनः ढोकला की तरह दिखता यह व्यंजन पिसी हुई चना दाल या चने के आटे से बना एक स्पंजी व्यंजन है जिसमें सोडा की मात्रा अधिक होने की वजह से यह ढोकले से भी ज्यादा मुलायम और नर्म होता है। मीठे और नमकीन स्वाद के शानदार मिश्रण को यहां खाने मे महसूस कर सकते हैं। 

खाखराः गुजराती पारंपरिक व्यंजनों में यह एक कुरकुरी रोटी है जो एक तरह से प्रसिद्ध जैन व्यंजन है इसे मटकी, गेहूं के आटे और तेल से बनाया जाता है। गुजराती परिवारों मे यह एक मुख्य और पंसदीदा भोजन है, जिसे मसालेदार अचार या मीठी चटनी के साथ खाना बेहद प्रिय लगता है। 

बासुंदीः यह दूध से बनने वाला मीठा व्यंजन है जो उत्तर भारत की दूध से बनी मिठाई रबड़ी से मेल खाती है। इसमें दूध मे कस्टर्ड एप्पल और अंगूर जैसे अन्य स्वादों में बनाया जाता है यह दूध उबालकर गाढे दूध से बनाया जाता है। बासुंदी गुजराती पांरपरिक त्यौहारों और शुभ अवसरों पर बनाया जाने वाला खास व्यंजन है। विशेष रूप से छोटी दीवाली और भाऊबीज उत्सवों पर बनाया जाता है।

दाबेलीः गुजरात के कच्छ क्षेत्र की स्पेशल स्नैक्स दाबेली शानदार गुजराती नाश्ता है जो देखने में मुम्बईया वडा पाव जैसा लगता है और कच्छ में सबसे ज्यादा खाया जाने वाला भोजन है, जहा लगभग 20 लाख दाबेली खाई जाती है। इसमें ब्रेड बन के अंदर मसले हुए आलू, मसाले, मूंगफली, चटनी, सेव और विशेष दाबेली मसाला डालकर इस डिश को तैयार किया जाता है। 

फाफड़ा जलेबीः गुजराती मीठे और नमकीन स्नैक्स का यह मेल हमेशा ही सभी को बेहद पसंद आता है। नमकीन फाफड़ा एक कुरकुरा नाश्ता है जो बेसन, हल्दी और अजवायन के संयोजन से बनाया जाता है। इसके साथ जलेबी का आनंद गुजरात मे ही देखने को मिलता है। यह स्नैक्स गुजरात की हर कली नुक्कड़ पर आसानी से मिल जाता है। 

उंधियूः गुजरात व्यंजनों में से एक उंधियू सूरत की प्रसिद्ध डिश है जो मिश्रित सब्जी वाला व्यंजन है जिसे मिट्टी के बर्तनों में उल्टा करके तैयार किया जाता है। सर्दियो के महीने में इस लाजवाब डिश को पतंग उत्सव में बेहद प्रमुखता से बनाया जाता है। गुजराती शब्द उंधु से इस डिश का नाम रखा गया है जिसका हिन्दी अर्थ ‘उल्टा’ होता है। इसकी साम्रग्री में बैंगन, तले हुए बेसन के पकोड़े, केले और बीन्स, आलू और हरी मटर शामिल है। इसे छाछ नारियल और मसालों के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता है।

रोटलोः गुजरात का प्रमुख भोजन ज्वार या नाचनी के आटे से बनी एक चपटी रोटी है इस समय पूरे भारत मे तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पारंपरिक रूप से रोटलों को कच्चे सफेद प्याज, हरी मिर्च और छाछ के साथ खाया जाता है। इसे मुख्यतया सर्दियों के दिनों में ज्यादा पसंद किया जाता है। 

दिसम्बर मे गुजरात में मनाए जाने वाले प्रमुख इवेंट, उत्सव और त्यौहार

1. पैराग्लाइडिंग त्यौहारः गुजरात के सापुतारा पहाड़ियों की गोद में मनाया जाने वाला यह उत्सव साहसिक भावना को बल प्रदान करता हैं। इसका आयोजन दिसम्बर और जनवरी के समय पर 26 दिनों तक मनाया जाता है जिसमें रोमांचक पसंद करने वाले लोग शानदार आसमानी यात्रा पर निकलते हैं जिसके लिए जरूरी नही है कि आप अनुभवी ही हों, यहां नौसिखियों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उड़ान का आनंद लेने के साथ ही यहां मोड़दार पहाड़ियों के हरे भरे नजारें हवाओं के साथ शीतलता का अनुभव कर सकते हैं। 

2. क्रिसमस और नववर्ष का जश्नः दिसम्बर मे मनाया जाने वाला प्रमुख त्यौहार क्रिसमस और नये साल की पूर्व संध्या पर होने वाली प्रार्थनाएं और जश्न का माहौल पर्यटन के आनंद को और भी ज्यादा बढा देता है। कैरोल की धुन और आतिशबाजी की धूमधाम वातावरण को हर्ष और उल्लास से सराबोर करती है। 

3. अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सवः हर साल जनवरी में 14-15 जनवरी को गुजरात में यह उत्सव बहुत बड़े पैमाने पर मनाया जाता है जिसकी तैयारी दिसम्बर से ही शुरू हो जाती है। दिसम्बर माह में यहां इस महोत्सव की तैयारियो के वृहद नजारों का आनंद लिया जा सकता है। दुनियाभर से पतंग प्रेमी इस महोत्सव में शामिल होने के लिए बहुत जोर शोर से तैयारी करते हैं, जो अपने आप में बेहद अनोखा उत्सव है। 

4. मोढेरा नृत्य महोत्सवः गुजरात के मेहसाणा जिले में होने वाला यह उत्सव वैसे तो जनवरी में मनाया जाता है। लेकिन दिसम्बर के महीने में यहां जीवंत समुद्री तट के किनारे बने मोढेरा सूर्य मंदिर में इस महोत्सव की धूमधाम और तैयारियों के परिदृश्य आकर्षित करते हैं। जनवरी के तीसरे सप्ताह में इस महोत्सव को आयोजित किया जाता है। बलुआ पत्थर से बना यह ऐतिहासिक मंदिर समुद्री तट की खूबसूरती को रोशनी से और भी ज्यादा शानदार बना देता है। 

दिसम्बर में गुजरात यात्रा पर निकलने से पहले यात्रा सुझाव और पैकिंग टिप्स

1. बुकिंग पहले से करेंः गुजरात में दिसम्बर के महीने में कच्छ का रण इस दौरान अपने रण उत्सव और सुहावने मौसम की वजह से पर्यटकों की पहली पसंद के रूप में देखा जाता है। इसलिए इस समय आने जाने और ठहरने की व्यवस्था हेतु बुकिंग पहले से ही करा लें। 

2. सफारी टिकट आरक्षित करानाः दिसम्बर महीने में गिर राष्ट्रीय उद्यान में सफारी के लिए टिकटों को पहले से ही आरक्षित कर लें क्योंकि इस दौरान टिकट अधिकतर बिक जाते हैं। 

3. विरासत जगहो ंपर रूकने का यादगार अनुभव लेंः गुजरात ऐतिहासिक रूप से संपन्न राज्य है जहां विभिन्न महलो और जगहों को हेरिटेज होटल में बदल दिया गया है, आप इन जगहों पर ठहर कर यहां की समृद्ध विरासत और कला को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं। 

4. गुजराती व्यंजनों का स्वाद चखेंः गुजराती स्वाद का आनंद उठाएं, यहां के जलेबी, फाफड़ा, ढोकला, उंधियू और गुजराती मौसमी थाली का लुत्फ लें। 

5. दिसम्बर उत्सवों में रूचि लेंः दिसम्बर में होने वाले उत्सवों मे शामिल होने की योजना बनाएं इसके लिए इनकी तिथियों और समय पर अवश्य ध्यान दें। कच्छ रण उत्सव तारीखों और अन्य स्थानीय त्यौहार या उत्सवों की विशेषताओं को भी सहेजें। 

6. गुजराती प्रसिद्ध जगहों को एक्सप्लोर करेंः गुजरात के प्रसिद्ध और छिपी हुए आकर्षणों को निहारे। 

गुजरात कैसे पहुंचे 

हवाई मार्ग से

हवाई रास्ते से गुजरात पहुंचने के लिए प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट अहमदाबाद में है जहां से घरेलू और इंटरनेशनल दोनों तरह की उड़ानें संचालित की जाती है। अहमदाबाद पहुंचने के बाद आप गुजरात के किसी भी हिस्से तक पहुंचने के लिए सड़क मार्ग या रेल मार्ग की मदद ले सकते हैं।

रेल मार्ग से 

गुजरात रेल कनेक्शन से बहुत अच्छी तरह कनेक्टड है। सभी मुख्य शहरों मे ंरेलवे स्टेशन की सुविधा उपलब्ध है जहां से आप देश में कहीं से भी गुजरात के किसी शहर की यात्रा के लिए पहुंच सकते हैं। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, द्वारका, प्रभास पाटन, जामनगर अन्य मुख्य सभी गुजराती हिस्सो में रेल यात्रा के माध्यम से जाना सुगम विकल्प प्रदान करता है। 

सड़क मार्ग से 

गुजरात में सैर करने के लिए सड़क मार्ग आसान और सर्वसुलभ विकल्प है। राष्ट्रीय और राज्यीय राजमार्गों की भरपूर उपलब्धता के कारण आसपास के राज्यों से या देश के किसी भी प्रमुश शहरों से गुजरात घूमने के लिए आया जा सकता है। 

निष्कर्ष

गुजरात अपनी विरासत और मौसमीय परिस्थितियों के कारण दिसम्बर में पर्यटको को खूब लुभाता है। यह ऐसा समय होता है जब गर्मी और सर्दी का संतुलन पर्यटन की खूबियों से रिझाता है। सर्दियों मे कच्छ के रण के श्वेत रेगिस्तानी त्यौहार शानदार और आकर्षित करते हुए स्थानीय कलाओ का दर्शन कराते हैं। अहमदाबाद के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और सोमनाथ, द्वारका की आध्यात्मिक आभा से ओतप्रोत शांति और सुकून इसके अलावा दीव में शानदार धूप प्रदान करते समुद्री तटों की झलक गुजरात भ्रमण यात्रा में चार चांद लगाने का काम करते हैं, तो आइए इस दिसम्बर गुजरात की सैर पर निकलते हैं। 

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