• Jan 12, 2026

अनकहे रहस्य और छिपी हुई प्रेतबाधित कहानियों की गहराईयों के मूल में अक्सर धर्म और संस्कृति की छाप देखने को मिलती है। भारत कई सारे हैरतगेंज अदृश्य डरावने अनुभवों का देश है, जहां अनसुलझे रहस्यों की खोज हमेशा से ही रोमांचित करती है। वैसे तो भारत कई सारी खूबसूरत और मंत्रमुग्ध करती जगहों का स्थान है और इसके बावजूद यहां कई ऐसे राज़ और ऐतिहासिक तथ्य लिए किले महल और जगहें हैं जहां जाने पर स्वाभाविक रूप से रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

अगर आप भी अपरिचित दुनिया को एक्सप्लोर करने में दिलचस्पी रखते हैं तो भारत के इन स्थानों पर आपकी इस ख़्वाहिश को पूरा करने के लिए घूम सकते हैं, जहां अंजानी विचित्र सी कहानियों की पृष्ठभूमि आपको हैरान कर देगी। तो फिर आइए ऐसी ही किसी जगहों के बारें में विस्तार से बात करते हैं।

1. शनिवार वाडा, पुणे महाराष्ट्र

शनिवार वाड़ा, पुणे में बना एक राजसी ऐतिहासिक किला है जो लगभग 1732 में बनवाया गया था और बाजीराव की शक्ति, बल और प्रेम का प्रतीक बना, इन्हीं पर बनी बॉलीवुड की प्रसिद्ध फिल्म बाजीराव मस्तानी इस किले की याद को ताजा कर देती है, फिल्म में पेशवा बाजीराव की राजसी जिंदगी और वैभव की झलक देखने को मिलती है लेकिन वास्तव में इस किले यानी शनिवार वाड़ा को रहस्यमयी कहानियों और विचित्र आवाजों व चीखों के लिए जाना जाता है। यहां से गुजरते कई लोगों ने बताया है कि उन्होंने यहां की दीवारों से टकराती भयानक और दैन्य स्वर में चीखने चिल्लाने की आवाज सुनी है- काका! मला वाचवा! यानी गिड़गिड़ाती आवाज में चाचा मुझे बचाओ, जिसे सुनकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि वास्तव में वहां कोई भी मदद के लिए नहीं पुकारता है।

पेशवा नारायण राव बालाजी बाजीराव के सबसे छोटे पुत्र थे। बालाजी बाजी राव पेशवा बाजीराव क पुत्र थे। कहा जाता है कि यहां पेशवा नारायण राव जो लगभग 18 वर्ष के थे, उनकी हत्या की साजिश उनके चाचा रघुनाथराव और उनकी पत्नी आनंदीबाई ने रची थी। इस नरसंहार में लगभग 11 लोगों की हत्या के साथ एक गाय भी मार दी गई थी, जिसमें सेवक चापाजी तिलकर के साथ सात ब्राह्मण, एक सेवक और दो दासियां शामिल थीं। नारायणराव के भूत की कहानी सदियों से चली आ रही है जहां रात्रि के अंधेरे में इन आवाजों का सुनाई देना हैरत से भर देता है। वैसे इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण देखने को नहीं मिलता है।

प्रमुख आकर्षण : 625 एकड़ में बने इस किले की वास्तुकला और रक्षात्मक तंत्र बेहद मजबूत है। पर्यटन आकर्षण और फैमिली के साथ पिकनिंक भी एन्जॉए कर सकते हैं। मराठाओं के समृद्ध इतिहास की कहानी भी कहता है। इस किले में पांच दरवाजे हैं- मुख्य प्रवेश द्वार, खिड़की दरवाजा, गणेश दरवाजा, मस्तानी दरवाजा और नारायण दरवाजा।

कैसे पहुंचे

शनिवार वाड़ा पुणे शहर के केंद्र में स्थित है जहां पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट पुणे है जो इस किले से लगभग 12 किमी दूरी पर है और नजदीकी रेलवे स्टेशन पुणे जंक्शन है जिसकी दूरी लगभग 3.5 किमी है। एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से स्थानीय बस टैक्सी कैब या मैट्रो से आसानी से पहुंच सकते हैं। 

2. कुलधरा, राजस्थान

जैसलमेर के पास स्थित यह गांव करीब 17 किमी दूरी पश्चिम में स्थित एक वीरान गांव है जो तीन शताब्दी पूर्व में एक संपन्नशाली गांव कहा जाता था। गांव 1291 में पालीवाल ब्राहमणों द्वारा बसाया गया स्थान था जहां रेगिस्तानी धरती होने के बाद भी बेहतर फसल होने से यह वैभव और समृद्धिशाली जगह थी। लेकिन 1825 मे एक रात में कुलधरा और आसपास के 83 गांवों में लोग रात के अंधेरे मे लुप्त हो गए। कहते हैं कि यहां के एक मंत्री सलीम की कुदृष्टि मुखिया की बेटी पर पड़ी और उसने घोषणा कर दी कि वह इस लड़की को उसकी बिना मर्जी के भी उठा ले जाएगा और किसी ने ऐसा करने से रोका तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ऐसे में ग्रामीणों ने उसके आदेश को मानने के बजाए रातोंरात वह गांव खाली कर दिया और जाने से पहले इस जगह को श्रापित कर दिया कि यहां कोई भी कभी घर नहीं बसा पाएगा। आज भी यह गांव वीरान और उजाड़ पड़ा है। यहां आज भी 17वीं सदी के खंडहर और स्थापत्य कला के शानदार नमूने अपनी संकरी गलियों और किंवदंतियो के कारण आकर्षित करते हैं। इस गांव में फोटोग्राफर और फिल्म निर्माताओं की रोचकता देखने को मिलती है जो पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आने वाला एक संरक्षित स्थान है।

प्रमुख आकर्षणः जैसलमेर के नजदीक इस गांव को घूमने के साथ ही रेगिस्तानी आकर्षण में सैम सैंड ड्यून्स में रेगिस्तानी सफारी, जैसलमेर किला, पटवो की हवेली, गड़ीसर झील, नथमल की हवेली के अलावा कई सारे आकर्षणों का आनंद ले सकते हैं।

कैसे पहुंचे

कुलधरा पहुंचने के लिए जैसलमेर से किराए पर टैक्सी की मदद से पहुंच सकते है। जैसलमेर का नजदीकी एयरपोर्ट जोधपुर हवाई अड्डा है और निकटतम रेलवे स्टेशन जैसलमेर है।

3. डाउ हिल कुर्शियांग, पश्चिम बंगाल 

भारत के प्रेतबाधित स्थानों में से एक यह स्थान दार्जिलिंग से लगभग 30 किमी दूर, कुर्सियोंग का डाउ हिल है जहां कई सारी डरावनी घटनाओं की कहानियां सुनने को मिलती है। शानदार परिदृश्य, चाय कॉफी के बागान और चारों ओर फैली हरियाली की शोभा लिए शानदार हिल स्टेशन है जहां भूतिया जगहों के किस्से और निशान देखने को आज भी मिलते हैं। कुर्सियोंग में मौजूद 100 साल पुराना विक्टोरिया बॉयज कॉलेज प्रेतबाधित वन के घने साए में घिरा है, जहां बाहरी लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है, सर्दियों की छुट्टियोें यानी दिसम्बर से मार्च के दौरान स्कूल बंद होने के बावजूद तेज सरसराहट और कदमों की आहट भरी आवाजें सुनने को मिलती है। ‘‘मौत की सड़क’’ नाम से जाना जाता एक रास्ता जहां दिन ढलने के बाद अनगिनत अजीबोगरीब घटनाओं के निशान देखने को मिलते है। भारत में इस जगह को सबसे अधिक डरावनी जगहों में प्रसिद्ध है जहा दिन हो या रात अलौकिक और हैरतगेंज गतिविधियां देखने या सुनने को मिलती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां बिन सिर वाले भूत को देखा गया है, जिसके हाथ में उसका सिर है। घने जंगल के बीच में घूरती हुई लाल आंखें और भूरे कपड़े पहने हुए महिला के भूत देखे हैं, इन सभी वजहो ंसे इस जंगल में लोग या तो पागल हो जाते हैं या आत्महत्या करने का प्रयास करते है, इन जंगलों में पहले कई मौतें हुईं हैं जिनका कोई स्पष्ट कारण नहीं है। 

प्रमुख आकर्षणः दार्जिलिंग में स्थित इस हिल स्टेशन के पास टाइगर हिल, मिरिक लेक, सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय, अंबूतिया टी गार्डन को देखने के अलावा दार्जिलिंग की प्रसिद्ध टॉय ट्रेन का लुत्फ भी ले सकते हैं। 

कैसे पहुंचे 

कुर्सियोंग सिलीगुड़ी से तकरीबन 34 किमी सड़क मार्ग की दूरी पर है और दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे से कनेक्टड है, यहां पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा बागडोगरा है और नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुड़ी है। एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से टैक्सी, कैब या बस की सुविधा से पहुंच सकते हैं। 

4. डुमस बीच, गुजरात

गुजरात का यह शांत और खूबसूरत समुद्री तट शाम होते ही डरावना और भूतहा हो जाता है जहां स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह तट भारत की कुख्यात जगहों में से एक है जहां काली रेत और अंजानी घटनाएं डुमास बीच की प्राकृतिक सुंदरता के साथ ही इसे अनछुए एहसास को तराशता है। सूरत शहर से करीब 21 किमी दक्षिण पश्चिम में स्थित डुमास बीच अन्य तटों पर पाई जाने वाली चमकीली और स्वर्ण रेत के बजाए काली रेत के लिए जाना जाता है। समुद्री तट की कहानी के पीछे कई लोककथाओं और ऐतिहासिक तथ्यों का होना पाया जाता है- डुमास बीच पहले हिंदू क्रबिस्तान के रूप में इस्तेमाल किया जाता था, इसलिए मानते हैं कि यहां हुए दाह संस्कार आत्माएं आज भी भटकती हैं। इन घटनाओं के बारें में कई पर्यटको ने अपने अनुभव साझा किए हैं जैसे फुसफुसाहट, अचानक से तेज ठंड और रेतीली जमीन पर अविश्वसनीय हलचल। 

यहां से जुड़ी एक किंवदंती है कि जो भी रात में इस समुद्री तट पर टहलने निकलते हैं फिर वो कभी वापस नहीं लौटते और कुछ लोगों का मानना है कि बेचैन प्रेतआत्माएं रात में यहां घूमने वाले लोगों को अपने साथ सम्मोहित कर कहीं दूर ले जाती हैं। 

प्रमुख आकर्षणः दिन के समय इस समुद्री तट पर पर्यटक व स्थानीय लोग पिकनिक, समुद्र किनारे समय बिताने और शानदार सा सूर्यास्त देखने के साथ ही स्ट्रीट फूड में कई तरह के स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चख सकते हैं, जहां समुद्री तट के आकर्षण प्रिय लगते हैं। शाम खत्म होते ही यहां का माहौल रहस्यमयी तरह से शांत और बदल जाता है। 

कैसे पहुंचे 

डुमास बीच पहुंचने के लिए आपको सूरत पहुंचना होगा, जहां से नजदीकी हवाई अड्डा सूरत में है और निकटतम रेलवे स्टेशन सूरत ही है। सूरत पहुंचने के बाद लगभग 22 किमी का सफर किसी बस, टैक्सी या कैब की मदद से तय कर सकते हैं। गुजरात और आसपास के प्रमुख शहरों से सूरत तक सड़क माध्यम से भी पहुंच सकते हैं।

5. लंबी देहर माइंस, उत्तराखंड

उत्तराखंड में मसूंरी के निकट इस स्थान पर लगभग 50,000 हजार मजदूर गलत ढंग से होने वाली माइनिंग काम के कारण दर्द से मर गए थे। सन 1990 में यहां खदान में काम करने वाले मजदूर फेमड़ों की बीमारी से ग्रस्त हो गए थे और उनकी मृत्यु खांसते खांसते हो गई थी। इन सभी मजदूरों को खून की उल्टियां हो रही थीं। इसी समय से इन जगह को हैवानी जगहों में से एक माना जाने लगा जिसका खूनी इतिहास लोगों में दहशत का माहौल बनाता है। कहते हैं इस जगह चीखें रोने चिल्लाने की आवाजें सुनाई देती रहती हैं जिन्हें प्रेत आत्माआेंं से जुड़ा बताया जाता है। साल 1996 में इस खदान को बंद कर दिया गया। कहते हैं इस खदान के सामने से गुजरने पर मौत या एक्सीडेंट हो जाता है।

प्रमुख आकर्षणः लंबी देहर माइंस के आस पास जॉर्ज एवरेस्ट पीक, कंपनी गार्डन, बेनोग वन्यजीव अभयारण्य और केम्पटी फॉल्स के शानदार नजारों का अनुभव ले सकते हैं। नाग टिब्बा ट्रेक, हैथीपांव और मिनी एवरेस्ट घूम सकते हैं।

कैसे पहुंचे 

यहां पहुंचने के लिए आपको पहले मसूरी पहुंचना होगा जहां से टैक्सी या कैब की मदद से लगभग 10 किमी दूरी का सफर तय करते हुए इस वीरान खदान को देखने जा सकते हैं।

निष्कर्ष

भारत के ये भूतिया स्थान जहां डर, रहस्य और अदृश्य कहानियां किस्से सुनने को मिलते हैं। इनमें से कुछ तो न सिर्फ डरावनी है बल्कि प्राकृतिक या ऐतिहासिक रूप से बेहद सुंदर और शानदार भी है। हरी भरी वादियां, प्राचीन गहन वास्तुकला और भव्य समुद्री लहरों को दर्शाते इन स्थानों पर रोमांचक अनुभव का एहसास प्रदान करते इन स्थानों पर थोड़ी सावधानी और समझदारी से यात्रा करना सुखद यादगार क्षणों को प्रदान करता है, क्योंकि प्रचलित कहावत और इनसे जुड़े तथ्य भले ही कैसे भी हों लेकिन रात के अंधेरे में जाने से अच्छा है, दिन के उजाले में एक्सप्लोर करें।

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