- Dec 13, 2025
शरद ऋतु का आगमन और राजस्थारी रंग में रंगा हुआ जैसलमेर अद्भुत छटाओं की स्वर्ण चमक बिखेरता है। सुनहरे रत्नों की तरह प्रकृति के अनमोल तोहफों और स्थापत्य कला के अद्वितीय आकर्षणों और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यों की रौनक को शीत ऋतु की ठंडक में निहारना और तारों की छांव में रेगिस्तानी श्वेत रेत को सुहावने मौसम में सर्दियों की चमक के साथ एन्जॉए करना शानदार और स्पेशल एहसास प्रदान करता है। भारतीय रेगिस्तानी पर्यटन के क्षितिज में रंग बदलते परिवेश की खूबसूरती सर्दियों में जैसलमेर में मौजूद राजसी किलों की शोभा और सफारियों की शोभा अपनी राजपूताना छवि से प्राचीन भारत की गौरवमयी परछाई का आलिंगन करने का अवसर प्रदान करता है। इन्हीं विशेषताओं के साथ सर्दियों में जैसलमेर घूमने की संपूर्ण यात्रा गाइड घूमने के बारें में विस्तार से बताते हैं।
जैसलमेर का संक्षिप्त इतिहास
भारत के उत्तर पश्चिमी भारतीय राज्य में राजस्थान में बसा एक शानदार शहर जो कहीं न कहीं ऐतिहासिकता का सुनहरा पक्ष प्रदर्शित करता है। इस शहर की स्थापना 1156 ई. में भाटी शासक रावल जैसल द्वारा की गई थी, इनके वंशजों ने भारत के लोकतंत्र बनने तक यहां करीब 770 वर्षों की लंबी अवधि तक शासन किया, जो इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है। सल्तनत काल के ऐतिहासिक समय के लगभग गुजरता हुआ मुगल शासन काल में भी 300 सालों तक अपने अस्तित्व को बनाए रखा। आश्चर्य की बात है कि भारत में अंग्रेजी शासन काल में भी स्थापना से लेकर आखिर तक जैसलमेर की गरिमामय उपस्थिति यूं ही बनी रही। भारत की आजादी के बाद यह क्षेत्र भारतीय लोकतंत्र का हिस्सा बन गया।
रेगिस्तानी इस धरती पर सुंदर महलों, हवेलियों और जैन मंदिरों के समूह आकर्षित करते हैं, जिनकी स्थापना 12वीं से 15वी शताब्दी के बीच बने हुए हैं।
जैसलमेर : सर्दियों में क्यो जाएं?
गर्मियों की दिक्कतो के विपरीत, शीत ऋतु सर्द और ड्राई जलवायु की सौगात लाती है। सुबह और शामों का वातावरण ठंड से युक्त तो वहीं दोपहरें गुनगुनाती गर्म धूप के साये लाती हैं। ऐसे मे जैसलमेर के किलों को एक्सप्लोर करने के लिए यह बेहद खास मौसम है। सर्दियों मे दिसम्बर से लेकर फरवरी तक का मौसम जैसलमेर पर्यटन के लिए खूबसूरत और शानदार होता है, इसी समय यहां स्थानीय उत्सवों और लोक कार्यक्रमों के प्रदर्शन की छवि अपने सर्वोत्तम आकर्षक रूपों में सामने आती हैं। फरवरी में आयोजित मरू महोत्सव जिसमे राजस्थानी संगीत, नृत्य और लोककलाओं से जुड़े ऐतिहासिक खेलों को देखने का मौका मिलता है।
इस समय ऊंट और जीप सफारी के अनुभव के लिए यह समय सबसे बेहतर होता है जहां सुबह और शाम के वक्त सुनहरे रंगो में नहाए मंत्रमुग्ध करते नज़ारों के परिदृश्य देखने का अवसर मिलता है। गर्मियो के समय डिहाइड्रेशन की समस्या से बहुत सारी शारीरिक बीमारियां घेर लेती हैं जबकि सर्दियों के मौसम में इन समस्याओं से रूबरू नहीं होना पड़ता है।
सर्द मौसम और जैसलमेर की शानदार जुगलबंदी के कारण, रेगिस्तानी शिविरों से लेकर ऐतिहासिक ठहरने की जगहों तक में दामों मे बढोत्तरी देखने को मिलती है। इसलिए बेहतर है कि आप यात्रा और रूकने संबंधी सभी जरूरी इंतजामों की व्यवस्था पहले ही कर लें, जिससे कि ऐन मौके पर समस्या का सामना न करना पड़े।
सर्दियों में जैसलमेर का मौसम व जलवायु
जैसलमेर थार रेगिस्तानी वातावरण के मध्य में स्थित है जहां गर्मियों के समय तापमान काफी ऊपर चला जाता है। लगभग 45 डिग्री से ऊपर यह तापमान, सर्दियों में उतना ही लुभावना और शीतलता पदान करते है। आइए देखते हैं शीत ऋतु में जैसलमेर का मौसम कैसा रहता है?
तापमानः 7 डिग्री सेल्सियस से लेकर 25 डिग्री सेल्सियस
दोपहरः 18 डिग्री सेल्सियस से लेकर 24 डिग्री सेल्सियस
रातः 7 डिग्री सेल्सियस से लेकर 10 डिग्री सेल्सियस
बारिशः न के बराबर
नमीः न के बराबर
जलवायुः सुहावनी जलवायु
पैकिंग टिप्स
- रात के समय के लिए हल्के ऊनी या गर्म कपड़े
- दोपहर में फुल आस्तीन के कपड़े
- गर्म जैकेट या ऊनी कपड़े
- आरामदायक पेंट या जींस
- शॉल या स्कार्फ
- रेगिस्तानी कैंप में हैडलैम्प या टॉर्च
- दोपहर के समय धूप से बचाव के लिए लोशन या क्रीम
- नमी की कमी के कारण होंठ सूखते हैं ऐसे में मॉइश्चराइजर क्रीम या लिप बाम
- पानी की बोतले, जो दोबारा इस्तेमाल में आ सकें।
- आवश्यक दवाएं और प्राथमिक चिकित्सा किट से बेसिक चीजें
- सरकारी पहचान प्रमाण पत्र और यात्रा/जर्नी टिकट
जैसलमेर में करने योग्य शीतकालीन गतिविधियां
- रेत टीलों को घूमनाः
- भारत पाक सीमा का अवलोकन
- ऊंट, जीप और घुंघरा सफारी का आनंद ले
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों और स्थानीय रीति रिवाजों को समझेंः
- स्थानीय बाजारों में खरीदारी करें।
- रेगिस्तानी धरती पर सूर्योदय और सूर्यास्त का आनंद लें।
सर्दियो में जैसलमेर का विशेष आकर्षण : कच्छ का रण व विशेषताएं
नमक के रेगिस्तान के रूप में प्रसिद्ध कच्छ का महान रण जैसलमेर से नजदीक ही है। टेंट सिटी से कच्छ का रण 5 किमी स्थित है जो नमक की दलदली भूमि है। करीब 7500 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करते हुए कच्छ का रण में पाकिस्तानी सीमा है। सर्दियो के मौसम में यह दलदली भूमि सूख जाती है जहां सूर्यास्त के समय और पूर्णिमा की चांदनी के अंदाज में रेगिस्तानी की श्वेत चमक पर्यटको को और भी ज्यादा आकर्षित करती है। कच्छ के रण में सबसे ऊंचे स्थान काली पहाड़ी यानी कालो डूंगर पर चढना और वहां से यहां का नजारा देखना रोचक अनुभव प्रदान करता है।
कच्छ का रण सर्दियो के समय अपनी चरम खूबसूरती के लिए जाना जाता है, जहां इस समय कैंपिग, सफारी और अन्य सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्यों को निहारना आकर्षक लगता है। गुजरात सरकार इस कच्छ उत्सव को बहुत प्राथमिकता दी जाती है जो शीत ऋतु में लगता है। यहां की संस्कृति और आतिथ्य के साथ स्थानीय भोजन का स्वाद करिश्माई नजारों और हर्ष, उल्लास से भरपूर रण उत्सव के लोकनृत्य, संगीत और कला की सर्वोत्तम प्रस्तुति से चिहिन्त है, जिसका आनंद लेने के लिए दूर दूर से पर्यटक यात्री कच्छ के रण में पहुंचते हैं।
सर्दियों मे जैसलमेर पर्यटन के लिए अन्य विशेष आकर्षण
जैसलमेर का किलाः थार रेगिस्तान की सुनहरी धरती पर बना जैसलमेर किला किसी स्थापत्य चमत्कार से कम नहीं है। राजस्थानी कला का यह शानदार उदाहरण जहां भारत का यह सबसे जीवंत किला है, आज भी इसमें करीब पांच हजार लोग निवास करते हैं। विश्वस्तरीय पहचान बनाने वाला यह किला यूनेस्को वैश्विक धरोहरों में से एक है जो पीले बलुआ पत्थरों से बना है। इस किले के चारों ओर भव्य प्रवेश द्वार हैं जिनके नाम गणेश पोल, सूरज पोल, भूत पोल और हवा पोल है। इन द्वारों से होकर आप दशहरा चौक नाम के विशाल वृहद प्रांगण में पहुंचेगे। किले के अंदर ही लक्ष्मीनाथ मंदिर, जैन मंदिर, तोप पॉइंट, पांच मंजिला मूर्तिकला महारवाल महल और किला संग्रहालय के अलावा अन्य ढेर सारे आकर्षण स्थित है। सर्दियो का समय यहां घूमने के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है। जैसलमेर किले को भारत का स्वर्ण किला कहते हैं जो भारत का दूसरा सबसे पुराना किला है। इस किले में कई फिल्मों की शूटिंग भी हुई है। पहाड़ी पर बना यह किला लगभग 1500 फीट लंबा और 750 फीट चौड़ा है। इस किले में आप कई तरह के भोजनालय का स्वाद चख सकते हैं, यहां आप इटैलियन, फ्रेंच और इण्डियन डिशेज भी खा सकते हैं।
व्यास छतरीः जैसलमेर में यह छतरी एक प्रमुख आकर्षण है जो ऋषि व्यास जी को समर्पित है, इन्हें हिंदू महाकाव्य महाभारत का रचयिता माना जाता है। यह संरचना इनके प्रति श्रद्धांजलि है, जो करीब 18वीं शताब्दी की है। जैसलमेर के किसी शासक द्वारा इस छतरी का निर्माण कराया गया था। राजपूताना वास्तुकला का उत्तम उदाहरण है जिसमें बारीक नक्काशी और जीवंत रंग है। छतरी वृहद परिसर में बनी अद्भुत संरचना है जिसमें कई मंदिर, मंडप और ढेर सारे कई अन्य आकर्षण हैं। यहां से सूर्यास्त का मनमोहक नजारा देखने के लिए पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं। जैसलमेर का नजारा यहां से देखना और भी ज्यादा अच्छा लगता है, जहां से एक बार में इस पूरी स्वर्ण नगरी का अवलोकन कर सकते हैं। महारावल जवाहर सिंह के शासनकाल में बना यह स्मारक ब्राहमण समुदाय के लिए अति पूजनीय है जहा राजस्थानी वास्तुकला शैली की अद्भुत झलक के साथ मुगल और हिंदू दोनो शैलियों की छाप देखने को मिलती है।
गड़ीसर झीलः जैसलमेर की कृत्रिम झील जिसे इस शहर संस्थापक राजा ने ही बनवाया था जो 1156 ईस्वी में तैयार हुई थी। इनके उत्तराधिकारी ने इस झील का पुनर्निर्माण 1367 ई. मे ंकराया था। जैसलमेर किल से इस झील की दूरी लगभग 1.5 किमी है, इससे पूरे शहर मे पानी की आपूर्ति की जाती है। इस झील में इंदिरा गांधी नहर से पानी आता है, जहां यह कभी नहीं सूखती है। गड़ीसर शब्द का अर्थ गड़सी से लिया गया है और यह जैसलमेर के दक्षिणी भूभाग पर बनी हुई है। इस झील के किनारे हिंदू देवी देवताओं के कई मंदिर और छतरियां भी बने हुए हैं- जहां से सूर्योदय, सूर्यास्त के मनमोहक नजारों को देखने के साथ ही स्थापत्य कला के इन उदाहरणों को देखना और समय बिताना अच्छा लगता है। अगर आप फोटोग्राफी का शौक रखते हैं तो निर्धारित शुल्क देकर कैमरे सहित प्रवेश कर सकते हैं।
सैम सैंड ड्यून्सः अगर आप रेतीले स्थान पर एडवेंचर के शौकीन है तो जैसलमेर का यह क्षेत्र परफेक्ट है, जहां आप शाम से आकर समय बिता सकते हैं। वन्यजीवन और ऊंट सफारी का आनंद लेने के साथ ही आप यहां के शानदार परिदृश्यों को देख सकते हैं। जैसलमेर के कनोई में आप विशाल रेगिस्तान में उसकी सुंदरता का अन्वेषण करने के साथ ही ऊंट की सवारी से लेकर तारों भरी रातों मे कैंपिंग का अविस्मरणीय अनुभव ले सकते हैं। रोमांचक और साहसिक गतिविधियों जैसे सैंडबोर्डिंग, रैपलिंग और रॉक क्लाइम्बिंग जैसी एडवेंचर्स एक्टीविटीज का आनंद ले सकते हैं। यहां आलीशान टेंट से लेकर साधारण झोपड़ियों के आवास विकल्प चुन सकते हैं। यहां मौजूद रेस्तरां में स्वादिष्ट भोजन का स्वाद ले सकते है, जहां राजस्थानी डिशेज के साथ ही अन्य जगहों के स्पेशल व्यंजनों को भी चख सकते हैं। ऊंट सफारी के अलावा जीप सफारी का अनुभव भी ले सकते है और विभिन्न पक्षियों के दर्शन भी कर सकते हैं। यहां होने वाले नृत्य और लोककलाओं के अद्भुत आकर्षण देखने का लुत्फ ले सकते हैं। जैसलमेर जाएं तो यहां रेत टीलो पर जाकर पर्यटन का आनंद ले सकते हैं।
कुलधरा गांवः जैसलमेर से लगभग 18 किमी दूरी पर स्थित यह गांव अपने रोचक रहस्य, किस्से, कहानियों और लोककथाओं के लिए पर्यटको के बीच बहुत लोकप्रिय है। यहां की उन्नत जल प्रंबधन प्रणाली भी प्रसिद्ध रही है जो 13वीं सदी मे पालीवाल ब्राहमणों द्वारा बेहद प्रसिद्ध रहा है। 18वीं सदी की शुरूआत में यह गावं रातो रात बंजर वीरान सा हो गया, जिसके पीछे कारण बताया जाता है कि यहां स्थानीय शासक गांव की एक लड़की से जबरन शादी करना चाहता था इस वजह से उसने बहुत भारी कर लगा दिए गए और उसने यह भी धमकी दी कि वह और भी कई तरहो से परेशान करेगा। इसलिए रातों रात यहां से लोग इस गांव को छोड़कर जाते हुए लोगो ंने यह श्राप दिया कि फिर यहां कोई अपना घर नहीं बसा पाएगा। इसलिए आज यह स्थान एक उजाड़ भुतहा शहर बना हुआ है, जिसकी धरा पर्यटन के लिहाज से लोगों को आकर्षित करती है। खंडहरों की खेज करते समय लोगों ने यहां अजीब तरह की आवाजें भी सुनी हुई हैं जो इस तथ्य को और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाती है। अगर आप भी ऐसी जगहें देखने में दिलचस्पी रखते है तो यहा का भ्रमण कर सकते हैं।
पटवों की हवेलीः जैसलमेर किले के बाद दूसरी सबसे ज्यादा चर्चित इमारत पटवों की हवेली है जो पटवा परिवार की संपन्नता और समृद्धि का प्रामणिक सार है, ये सोने चांदी और कीमती पत्थरों के प्रमुख जैन व्यापारी थे जिन्होने पटवो की हवेली का निर्माण लगभग पांच दशकों में किया, जो पांचो भाइयों द्वारा अपने अपने हिस्से का निर्माण कार्य करवाकर संपन्न कराया गया। पीले बलुआ पत्थर से निर्मित इस हवेली का अग्रभाग सुनहरी धूप में मनमोहक स्वर्ण चमक बिखेरता है जो अत्यंत आकर्षक प्रतीत होता है। हवेलीनुमा वास्तुकला जो राजपूताना और मुगल शैली का सुखद सम्मिश्रण प्रस्तुत करता है। जटिल नक्काशी, शिल्प कला और बारीक पत्थर के अलंकृत छज्जे प्रदर्शित करता है। सिर्फ वास्तुकला ही नहीं वरन् संग्रहालय भी है जो जैसलमेर की समृद्ध इतिहास की कहानियों को बेहद करीने के साथ दर्शाता है, जिससे पर्यटक आकर्षित होते हैं।
सलीम सिंह की हवेलीः इस हवेली का निर्माण 19वीं सदी में जैसलमेर के मंत्री और सलीम अली ने कराया था, जो बहुत धनी व्यक्ति थे। उस समय के दो प्रसिद्ध वास्तुकार भाइयों ने इस हवेली का निर्माण कार्य किया था जिसमें राजस्थानी और मुगल शैलियों के मिश्रण देखने को मिलता है। जहाज आकार में बनी यह हवेली अपनी आकृति के कारण और भी ज्यादा विशेष आकर्षण उत्पन्न करती है। घुमावदार अग्रभाग और जटिल बारीक नक्काशी के साथ यहां कई आंगन और कमरों की शोभा देखने को मिलती है। जिसमें हैरानी की बात है कि हर कमरे की अपनी अनोखी डिजाइन और कला है। हवेली के उच्च भागों से जैसलमेर की भव्य छवि दिखती है जो भाव विभोर करती है। इस हवेली में कुल 38 बालकनियां है, जिसमें से प्रत्येक का डिजाइन अलग होने के साथ ही फोटोग्राफी के लिहाज से भी अद्भुत और आकर्षक अनुभव प्रदान करता है।
नथमल की हवेलीः शहर के मध्य में स्थित नथमल की हवेली शानदार और खूबसूरत आकर्षण हैं जो अद्भुत वास्तुकला और संपन्न इतिहास के लिए जाना जाता है। 19वीं सदी के अंत में बनी यह हवेली अपनी भुंगा शैली की वजह से वास्तुकला का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती है। इस हवेली का निर्माण नथमल और हाथी नाम के दो भाइयों ने कराया था जिसे बनने में लगभग 22 साल लगे थे। यहा जाने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाता है जिसे आप सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक देखने जा सकते हैं।
सर्दियो में जैसलमेर के लोकप्रिय व्यंजन
1. दाल बाटी चूरमाः राजस्थान का पारंपरिक स्वाद दाल बाटी चूरमा जैसलमेर का भी फेवरेट व्यंजन है, जिसे लोगों द्वारा बेहद पसंद किया जाता है। इसे आप पूरे जैसलमेर में कही भी खा सकते हैं। लंच हो चाहे डिनर, यह कभी भी खाया जा सकता है। इस डिश में दाल और खस्ता जैसी बाटी को साथ खाया जाता है और देसी घी में बना चूरमे का स्वाद बेहद लज़ीज होता है।
2. प्याज की कचौरीः जैसलमेर में प्याज की कचौरी का स्वाद अनोखा है जिसकी खुशबू से ही मुंह में पानी भर आता है। प्याज कचौरी, जैसलमेर के पर्यटन स्थलो मे कहीं भी आसानी से मिल जाती है जिसका स्वाद बेहद खास और लाजवाब होता है। इन कचौरियों को चटनी, कढी, छोला या चाय के साथ पसंद किया जाता है।
3. केसर मिल्कः जैसलमेर का यह स्वाद कमजोरी और थकान को दूर करने के लिए जाना जाता है। शहर में कहीं भी इस मिल्क फ्लेवर को खाया जा सकता है। दूध को ड्राई फ्रूट और केसर के साथ मिलाकर पकाने पर केसर मिल्क का मीठा स्वाद स्थानीय लोगों और पर्यटको द्वारा बहुत आकर्षित करता है, जिसको पीने के लिए लोग खासतौर पर यहां आते हैं।
4. घोटवा मिठाईः जैसलमेर की यह मिठाई एक तरह से लड्डू की आकृति में बनी यह मिठाई देश विदेशों तक में भी प्रसिद्ध है। बेसन, केसर, इलायची, शक्कर और देशी घी से बनने वाली यह मिठाई बनाने में समय भी लगता है जिसके स्वाद की मिठास और शुद्धता इसके स्वाद को और भी ज्यादा स्पेशल बनाता है।
5. कैर सांगरीः जैसलमेर की खास सब्जी कैर सांगरी मुख्यतः दो तरह की मुख्य चीजो ंसे बनकर तैयार होती है। कैर छोटी छोटी गोल आकार में होती है जबकि सांगरी लगभग 2-4 इंच लंबी पतली फली होती है, ये दोनो ही सब्जियां कम पानी वाली जगह पर उगती है, जिन्हें कुछ विशेष मसालों के साथ सूखी तरकारी रूप में तैयार किया जाता है। कैर सांगरी को बाजरे की रोटी के साथ खास पसंद किया जाता है। जैसलमेर के घरों में इस डिश को बहुत पसंद किया जाता है, इसलिए बहुतायत इसका स्वाद व खुशबू पर्यटकों को भी बहुत भाता है।
6. मखनिया लस्सीः जैसलमेर की मखनिया लस्सी पंजाब की लस्सी से किसी भी तरह कम नहीं है। शानदार टेस्ट, ड्राई फ्रूट और चेरी के स्वाद के साथ मक्खन वाली यह लस्सी जैसलमेर की दोपहर को मस्त बना देती है। इसको पीने से दिन भर की थकान छूमंतर हो जाती है। जैसलमेर जाएं तो मखनिया लस्सी का स्वाद जरूर चखें।
7. गट्टे की सब्जी : बेसन के छोटे छोटे टुकड़ों और विशेष मसालो के स्वाद बनी यह डिश गट्टे की सब्जी कहलाती है जो आप रोटी, नान, तंदूरी या चावल के साथ खा सकते हैं। गट्टे की सब्जी पाचन के लिहाज से भी श्रेष्ठ है इसलिए पर्यटन करते समय यह सब्जी खाने के लिए बेहतर रहती है।
शीत ऋतु में जैसलमेर घूमने के लिए यात्रा सुझाव
- सर्वोत्तम मौसम में यात्रा करने के लिए जैसलमेर की यात्रा नवंबर से फरवरी के दौरान करना बेहतर है।
- शाम और प्रातःकाल में शॉल या स्कार्फ साथ रखें।
- नकदी साथ रखें क्योकि कुछ छोटे दुकानदार यूपीआई में सहज नहीं होते हैं।
- किसी भी पर्यटन स्थल में कूड़ा करकट न फैलाएं और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकें।
- स्थानीय वेशभूषा, संस्कृति और कला का मजाक न उड़ाएं, उन्हें सम्मान और प्यार दें।
शीत ऋतु में कैसे पहुंचे जैसलमेर
हवाई मार्ग से
- हवाई रास्ते से जैसलमेर जाने के लिए आप जोधपुर हवाई अड्डे के माध्यम से जैसलमेर की यात्रा करने के लिए पहुंच सकते हैं। जोधपुर से जैसलमेर की दूरी तकरीबन 280 किमी है, जिसे तय करने के लिए आप सार्वजनिक या निजी वाहन की मदद से पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग
- जैसलमेर का नजदीकी रेलवे स्टेशन जैसलमेर है, जहां आप ट्रेन के माध्यम से जैसलमेर की यात्रा कर सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- जैसलमेर पहुंचने के लिए सड़क माध्यम की कनेक्टिविटी भी बेहतर है जहां आप राज्य परिवहन, प्राइवेट या निजी कार के माध्यम से जैसलमेर पहुच सकते हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर से जैसलमेर की दूरी लगभग 540 किमी है।
निष्कर्ष
सर्दियों के मौसम में जैसलमेर अपने सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य और रोमांचकारी गतिविधियों तक ठंड जैसलमेर की सुंदरता को निहारती है। इस मौसम में राजस्थान का यह इलाका रेगिस्तानी की नैसर्गिक सुंदरता और स्थापत्य आकर्षणों की विविधता सुलभ और सहज हो जाती है, जहां कुदरत और ऐतिहासिक विरासत के रंग अपने अनोखे अनुभव में सहजता के साथ ऐसे मिल जाते है जैसे शीतल हवा मे ंभीनी भीनी खुशबू की महक। आप चाहें तो रेतीले टीलों की रौनक देखना चाहते हों या उत्सवों की खुशनुमा बौछार की खनक सुनना चाहते हैं, जैसलमेर का सर्द वातावरण और मनमोहक नजारें पर्यटन की दृष्टि से अद्वितीय आकर्षणों का आंचल प्रदान करता है।
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