• Dec 30, 2025

उत्तराखंड के रामनगर में बसा यह नेशनल पार्क वन्य जीवन, परिवेश और खुशनुमा वातावरण का अद्भुत मेल प्रस्तुत करता है। अगर आपको भी वन्य प्राणियों को देखने के साथ ही जंगल की सैर करना प्रिय है और आप किसी ऐसी ट्रिप की योजना बना रहे हैं तो जिम कार्बेट नेशनल पार्क सर्वोत्तम स्थान है जो कुदरत की गोद में प्रकृति और वन्य प्राणियों को सहेजता शानदार आकर्षण है। उत्तराखंड की खूबसूरत वादियां और पशु पक्षियां से जुड़े इस अनोखे स्थान का आनंद लेने के लिए यहां हम आपको जिम कार्बेट नेशनल पार्क से जुड़ी संपूर्ण ट्रैवल गाइड बताने जा रहे हैं, उम्मीद है यहां घूमने में यह जंगल गाइड आपके काम आएगी।

जिम कार्बेट नेशनल पार्क कहां है?

जिम कार्बेट नेशनल पार्क उत्तराखंड के नैनीताल जिले में रामनगर में स्थित है। जिसकी नई दिल्ली से दूरी लगभग 260 किमी है। दिल्ली से मुरादाबाद-काशीपुर-रामनगर होते हुए कार्बेट नेशनल पार्क की दूरी लगभग 290 किमी है। यह रामगंगा की पातलीदून घाटी मे 1318.54 वर्ग किमी में बसा हुआ है, जिसके अंतर्गत 821.99 वर्ग किमी का क्षेत्र जिम कार्बेट पार्क का व्याघ्र संरक्षित क्षेत्र है। इस पार्क मे उप हिमालयन बेल्ट की भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताएं है जो पर्यारण संरक्षण को बढावा देता है।

जिम कार्बेट नेशनल पार्क इतिहास

जिम कार्बेट नेशनल उद्यान भारत का सबसे पुराना राष्ट्रीय पार्क है, सन् 1936 में स्थापित यह उद्यान पहले हैली नेशनल पार्क के नाम से जाना जाता था, उस समय के गवर्नर मालकम हैली के नाम पर रखा गया था। आजादी मिलने के बाद इसका नाम रामगंगा नेशनल पार्क रख दिया गया। एक समय 1957 के बाद इस पार्क का नाम संसार में जिम कार्बेट नाम से मशहूर हो गया जो एक बहुत प्रसिद्ध शिकारी के रूप में जाने जाते थे।

जिम कार्बेट जीवन परिचय

जिम कार्बेट के बारें में बताया जाता है कि इनका जन्म 25 जुलाई 1875 को हुआ था जिन्हे आयरिश मूल लेखक व दार्शनिक थे। इन्होंने मानवीय अधिकारों और संरक्षित वनों के लिए संघर्ष किया। जिम कार्बेट एक कुशल शिकारी थे जो वन्य प्राणियों की सुरक्षा करते थे लेकिन जब कोई जानवर मानव प्रजाति को नुकसान पहुंचाने लगता तब उसका अंत भी कर देते थे। कुमांऊ और गढवाल में जब भी कोई आदमखोर शेर आ जाता तो जिम कार्बेट को बुलाया जाता था, वहां वे सबकी रक्षा कर और आदमखोर शेर को मारकर ही लौटते थे।

जिम कार्बेट कुशल शिकारी होने के साथ ही प्रभावशाली लेखक भी थे जिनका निवास उत्तराखंड में कालाढूंगी में था। मानव और वन्य जीवो की रक्षा को समर्पित जिम कार्बेट का जीवन एक आदर्श उदाहरण है जो विश्व मे इन्हें लोकप्रिय बनाता है। इनकी लिखी माइ इण्डिया किताब बहुत चर्चित और लोकप्रिय है। 

जिम कार्बेट नेशनल पार्क खुलने का समय 

ग्रीष्म ऋतु : सुबह 6ः30 बजे से 9ः30 बजे और शाम 4 बजे से 6 बजे तक 

मानसून ऋतुः यह पार्क बंद रहता हैं 

शीत ऋतुःः सुबह 7ः30 बजे से 10ः30 बजे और दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक 

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में प्रवेश शुल्क 

इस पार्क में भारतीयों के लिए प्रवेश शुल्क लगभग 200 रूपये और विदेशियों के लिए 1000 रूपये है। सफारी शुल्क आप अपनी च्वाइस अनुसार लगभग 500 रूपये से 3000 रूपये तक दे सकते हैं। 

जिम कार्बेट पार्क के विभिन्न जोन की जानकारी 

जीप सफारी के लिए जिम कार्बेन पार्क मे सात सफारी जोन हैं- बिजरानी, झिरना, ढेला, गर्जिया, फाटो, ढिकाला और दुर्गा देवी सफारी जोन। हर एक सफारी जोन का प्रवेश और निकास द्वार अलग अलग है। इन द्वारों के माध्यम से आप जंगल सफारी का अनुभव ले सकते हैं और पर्यटक सात अलग अलग क्षेत्रों से जंगल सफारी बुक कर सकते हैं। 

ढिकाला सफारी जोनः ढिकाला पाटली दून के किनारे स्थित है जो जिम कार्बेट उद्यान का सबसे प्रमुख और सबसे बड़ा सफरी जोन है। यह 15 नवंबर से जून के मध्य खुला रहता है जो बाघों, हाथियों, हॉग हिरण, चीतल, सरीसृप और कई घास के मैदानों पर पक्षियों के शानदार दर्शन वाला सफारी जोन है जो सबसे अधिक देखा जाने वाला जोन है। इसके अलावा यह हाथियों, मगरमच्छ, बाघों, चीतल, जगली मुर्गी, डोवर, समुद्री गल, लांफिग थ्रश, कॉमोरेट और कठफोड़वा जैसी प्रजातियों का घर है। इस जोन की एक प्रमुखता यह भी है कि यहां एकमात्र कैंटर ंसफारी की सुविधा भी मिलती हे। यहां पहुंचने के लिए बस और रेलवे स्टेशन रामनगर होते हुए ढिकाला सफारी जोन तक पहुंच सकते है। 

झिरना और ढेला सफारी जोनः झिरना सफारी क्षेत्र कार्बेट नेशनल पार्क के दक्षिणी कोने पर रामनगर से लगभग 16 किमी की दूरी पर स्थित है जो 1994 में जिम कार्बेट का हिस्सा बनां। झिरना या खारा गेट इस जोन का प्रवेश द्वार है। झिरना चीतल, सांभर, नीलगाय, भालू और बाघों की पर्याप्त संख्या के दर्शन कराता है। आप यहां झिरना वन विश्राम गृह में एफआरएच में रात्रि आवास स्टे की सुविधा भी मुहैया कराता है। इस रेंज मे सफारी के साथ गाइड की सुविधा अनिवार्य है। ज्यादातर पर्यटक झिरना-ढेला सफारी जोन का रूख करते हैं क्योंकि इसकी सुविधाएं और दृश्यता सभी को आकर्षित करती हैं। ढेला और झिरना में दो बार जीप सफारी की सुविधा है। यह सफारी जोन मानसून में भी बदं नहीं होता जबकि जोन बंद हो जाते हैं इसलिए इस समय यह जोन हमेशा अधिक पर्यटकों को आकर्षित करता हे। 

बिजरानी सफारी जोनः ब्रिटिशकाल से ही पंसदीदा शूटिंग स्थल और शिकारगाह के रूप में प्रसिद्ध बिजरानी सफारी रेंज वन्यजीव प्रेमियों के लिए बाघ देखने का भी लोकप्रिय स्थान है। बिजरानी सफारी रेंज में कोर, बफर और पर्यटन क्षेत्र है। सैलानियों को यहां केवल पर्यटन क्षेत्र में घूमने की ही अनुमति मिलती है। जीप के साथ हाथी सफारी का आनंद भी लिया जा सकता है। बिजरानी सफारी जोन में सुबह और शाम सफारी चलती है जिसके लिए भारतीय और विदेशी पर्यटकों के मध्य प्रवेश शुल्क भिन्न भिन्न होता है। रामनगर रेलवे स्टेशन से बिजरानी सफारी के लिए बहुत ही कम दूरी लगभग 3 किमी को तय कर पहुंच सकते हैं। 

दुर्गा देवी सफारी जोनः पक्षी दर्शन, मछली पकड़ने के लिए प्रमुख रूप से प्रसिद्ध यह जोन जिम कार्बेट नेशनल पार्क के उत्तर पूर्व क्षेत्र में बसा है जहां सफारी जोन को लंबे समय तक एक्सप्लोर कर सकते हैं। दुर्गा देवी सफारी जोन ब्लैक चिन्ड युहिना, ग्रे हेडेड फिशिंग ईगल, क्रेस्टेड लाफिंग थ्रश, बार-टेल्ड ट्री क्रीपर, मैरून ऑराइल, लॉन्ग टेल्ड ब्रॉडबिल, स्लेटी ब्लू फ्लाईकैचर और लिटिल फोर्कटेल जैसे पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। 

सीताबनी बफर जोनः यह जिम कार्बेट पार्क का हिस्सा नहीं है बल्कि जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान के ठीक सामने एक बफर जोन है जो अपने मंदिरों और कई सारे प्रजातियों के पक्षियों के लिए जाना जाता है। सीताबनी सफारी जोन अपने घने जंगल और प्राकृतिक दृश्यों जिसमें नदी, नाले, झरनों के साथ आकर्षित करता है साथ ही यहां जंगली जानवरों की अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है। यहां एक वन विश्राम गृह भी है। 

सोनानदी सफारी जोनः सोनानदी वन्यजीव अभयारण्य एक अनोखा वन्यजीव आश्रय स्थल है जो जिम कार्बेट उद्यान और राजाजी राष्ट्रीय उद्यान के बीच है। इसकी स्थापना 1987 मे हुई थी जो करीब 300 वर्ग किमी में फैला हुआ है। यहां हाथी, बाघ, सांभर, सरीसृप, तेंदुए और चीतल सहित 500 से अधिक पक्षी प्रजातियों का घर है। सोनानदी सफारी जोन में हल्दूपाराव एकमात्र वन विश्राम गृह है।

जिम कार्बेट में पार्क में घूमने की प्रसिद्ध जगहें 

सीताबनी वन अभयारणयः एक कठोर वन क्षेत्र है जो जिम कार्बेट में पक्षी दर्शन के लिए प्रसिद्ध जगह है। हिंदू महाकाव्य में भी इस स्थान का जिक्र किया गया है। कहते हैं कि भगवान राम की धर्मपत्नी देवी सीता ने वनवास के समय के कुछ दिन यहां सीताबनी में बिताए थे। सीताबनी का यह क्षेत्र पूरे साल सफारी टूर के लिए खुला रहता है जहां वाहनों के प्रवेश पर कोई सीमा नहीं है। इस क्षेत्र में घूमने के लिए सीताबनी वन विभाग जीप सफारी का परमिट प्रदान करता है। यहां भगवान शिव का प्रसिद्ध मंदिर भी है। यहां से होकर बहने वाली उथली धाराएं और पर्यटकों के लिए आनंददायक वातावरण विश्राम प्रदान करती है। यहां आप फिशिंग का मनोरंजन कर सकते हैं, जहां मछली पकड़ना शानदार अनुभव है। सीताबनी अपनी समृद्ध वनस्पति और विविधता के लिए बेहद लोकप्रिय है जहां पेड़ों, झाड़ियों, बांसों, जड़ी बूटियो, घास, आर्किड, काष्ठीय लताओं और आर्द्रभूमि वनस्पतियों की 600 से ज्यादा प्रजातियों के आकर्षण पाए जाते हैं। यहां साल, शीशम, कंजू, ढाक, हल्दू, पीपल, रोहिणी और आम के वृक्ष देखने में मोहित करते है। 

कालागढ बांधः इस बांध को रामगंगा बांध भी कहा जाता है जो जिम कार्बेट उद्यान के भीतर स्थित है जो कालागढ से लगभग 3 किमी ऊपर रामगंगा नदी पर बना एक मिट्टी और चट्टान से भरा तटबंध बांध है। इसी बांध के माध्यम से उद्यान को विद्युत प्राप्त होती है। सर्दियो ंके मौसम में आप यहां प्रवासी पक्षियों की अच्छी खासी संख्या देख सकते हैं जिनकी रौनक देखते बनती है। शानदार परिवेश और वैभवशाली पृष्ठभूमि के साथ इस बांध की शोभा और वातावरण आकर्षित करता है। यहां से नजदीकी शहर लैंसडाउन है। 

कोसी नदीः जिम कार्बेट नेशनल पार्क में बहने वाली कोसी नदी अल्मोड़ा जिले के बारामंडल क्षेत्र में करीब 2,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित धारपानी धार से निकलती है। यह प्राचीन नदी उत्तराखंड के रामनगर की हरी भरी घाटियों और कस्बों से होकर बहती है। हिमालयी नदी यहां स्थानीय लोगो के बीच कोसिला नाम से जानी जाती है। जिम कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान में यह नदी वन्यजीवों के लिए पानी का मुख्य स्त्रोत है और 168 मीटर लंबी नदी कुमाऊं के खेतों को पानी से भर देती है। कोसी नदी का तल पत्थरो से भरा है इसका प्रवाह अनियमित है और अप्रत्याशित रूप से यह नदी अपना मार्ग बदल देती है, हालांकि यह नदी उद्यान में प्रवेश नही करती लेकिन जंगली जानवरों की प्यास बुझाने के लिए और खासकर बाढ के समय इस नदी के जल का उपयोग किया जाता है। कोसी नदी में महाशीर मछली पाई जाती है जो कई प्रवासी पक्षियों को लुभाती है। आप यहां रिवर राफि्ंटग का आनंद भी ले सकते हैं। 

गर्जिया मंदिरः उत्तराखंड के प्रसिद्ध शक्तिस्थलों में से एक गर्जिया देवी मंदिर जिम कार्बेट उद्यान के पास ही है। यह मंदिर गर्जिया देवी जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं इनके पिता हिमालय को गिरिराज भी कहते है इसीलिए इनकी पुत्री जो देवी पार्वती शक्ति का अवतार है, उन्हें यहां गर्जिया कहते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस मंदिर में विशाल भव्य मेले का आयोजन होता है। इसे देखने के लिए यहां दूर दूर से भक्तगण आते है, मंदिर के अंदर गणेश, सरस्वती और भैरवनाथ भगवान की मूर्ति देवी गर्जिया के साथ प्रतिष्ठित है। यह मंदिर कोसी नदी के बीच एक चट्टान के ऊपर व राजमार्ग 121 पर रामनगर के पास स्थित है। मानसूनी दिनों में कोसी नदी के बाढ के कारण यहां जाना मुश्किल हो जाता है, इसके अलावा इस मंदिर में कभी भी दर्शन के लिए जा सकते हैं। 

कॉर्बेट संग्रहालयः कालाढूंगी के पास स्थित यह ऐतिहासिक विरासत स्थल, कार्बेट संग्रहालय पर्यटकों के लिए सिर्फ चहारदीवारी में मौजूद संग्रहालय से बहुत ज्यादा है। मुख्य इतिहासकारों, वन्य आदर्शों और ऐतिहासिक विरासत के लिए यह संग्रहालय अपनी खूबसूरती और ऐतिहासिक सामानों से शोभाएमान पर्यटकों को रिझाता है। यहां जिम कार्बेट के पर्सनल सामान, उनकी बदूंक, टोपी, मछली पकड़ने का सामान, कैप, पेंटिग, पांडुलिपियां, संस्मरण और उनके द्वारा किए गए अंतिम शिकार को देख सकते हैं। जिम कार्बेट संग्रहालय का समय गर्मियांं में सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक और शीत ऋतु में सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक है। यहां प्रवेश शुल्क भारतीयों के लिए 10 रूपये और गैर भारतीयों के लिए 50 रूपये है। विद्यार्थी वर्ग को विशेष छूट मिलती है। 

कॉर्बेट झरनाः यह जलप्रपात रामनगर से करीब 25 किमी दूरी पर है जो पर्यटकों के लिए पिकनिक स्थल के रूप में प्रसिद्ध स्थल है जो घने सागौन के जंगलों से घिरा हुआ शानदार और प्राकृतिक सुंदरता से ओतप्रोत लगता है। यहा उपस्थित पक्षियों की चहचहाहट झरने के साथ मधुर संगीत मे बदलती हुई प्रतीत होती है। यहां पर्यटको को आंतरिक शांति और फन के लिए कई सारी गतिविधियों को करने का मौका मिलता है। 

दुर्गा मंदिरः दुर्जेय देवी दुर्गा को समर्पित यह मंदिर प्रतिष्ठित और पूजनीय स्थान है जहां दुनिया भर से अंसख्य लोग पर्यटको को आकर्षित करता है। यह मंदिर 18वी शताब्दी में टिहरी गढवाल के महाराजा पंचवंशी के संरक्षण में बनवाया गया था जो हिंदू वास्तुकला का प्रामाणिक उदाहरण है। मंदिर का आश्चर्यजनक डिजाइन समय से भी परे है जो प्राचीन कौशल की शिल्पकला और शक्ति भक्ति का प्रतीक है। मंदिर का स्थान रामगंगा नदी के तट पर हरी भरी हरियाली से घिरा हुआ अत्यंत सुदंर रमणीक स्थान है। घुमावदार नदियां और प्राचीन जंगल के अनोखे दृश्य प्रकृति और आस्था का सुखद मेल कराते हुए आकर्षित करते हैं। दुर्गा मंदिर अपनी भव्यता और वास्तुकला आकर्षण के लिए श्रद्धालुओं के बीच बेहद प्रसिद्ध है। 

श्री हनुमान धाम मंदिरः रामनगर में शांत और सुकून भरे वातावरण में अवस्थित यह दर्शनीय स्थल भगवान हनुमान के स्वरूपों को समर्पित है। मंदिर की भीतरी और बाह्यवास्तुकला दोनो ही आकर्षक और अद्भुत है। इस प्रसिद्ध मंदिर में प्रवेशद्वार का धनुषाकार होना और उस पर दो मछलियों का अंकन सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक चिन्ह है। नक्काशी युक्त स्तंभों पर पदानुक्रमिक ढंग से निर्मित एक भव्य छतरी जैसा स्वरूप प्रदान करता है। कार्बेट पार्क के पास समृद्धशाली और शांतिसंपन्न वातावरण बेहद आकर्षित करता है जो प्रकृति और आध्यात्मिकता की उत्तम यात्रा मेल का स्पर्श अनुभव कराता है। 

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में करने योग्य गतिविधियां 

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में आप अपने परिवार या दोस्तों के संग जा रहे हैं तो यहां कई रोमांचक गतिविधियांं का आनंद भी ले सकते हैं। जैसे

यहां आप जीप सफारी का मजा ले सकते है और एशियाई बंगाल टाइगर्स, एशियाई हाथी और कई अन्य जानवरांं के दर्शन कर सकते हैं। 

यहां हाथी सफारी का भी अपना अलग ही आनंद है जो बहुत यादगार और रोमांचक अनुभव प्र्रदान करता है। 

जिम कार्बेट मे आप कैंपिग का आनंद भी ले सकते है जहां आप बिजरानी कैंप, कैंप कार्बेट, कैंप रिवर वाइल्ड रिजॉर्ट है। 

अगर आप पक्षी प्रेमी है तो विविध प्रजातियों के कई पक्षियो को निहार सकते हैं। 

जिम कार्बेट नेशनल पार्क की अद्भुत वनस्पतियां 

जिम कार्बेट पार्क में अल्पाइन के जंगल देखने को मिलते हैं साथ ही यहां मीठे पानी की झील की शोभा जानवरो और पक्षियों े लिए सहूलियत प्रदान करती है। जानवरों और पक्षियों के रहने के लिए कई तरह की वनस्पतियां देखने को मिलती है जैसे पहाड़, साल वन, खैर-सिसो वन, चौर इत्यादि। माना जाता है कि इस पार्क में पौधों की 600 से भी ज्यादा प्रजातियां देखने को मिलती है। यहां बासं के जंगल की पर्याप्तता बेहतर होने के साथ ही कई तरह के फूलदार पेडत्र और झाड़ियां भी देखने को मिल जाती हैं।

जिम कार्बेट नेशनल पार्क के जीव जंतु

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में रॉयल बंगाल टाइगर, एशियाई हाथी जैसे जानवर बहुतायत मिल जाते हैं। इसके अलावा यहां पीले गले वाले नेवले, एशियाई काल भालू, हॉग हिरण, सांभर, भालू और ऊदबिलाव जैसे शानदार जानवर भी दिख सकते हैं। यहा पशु पक्षियों में ग्रेट पाइड हॉर्नबिल, सफेद पीठ वाला गिद्ध, नारंगी छाती वाला हरा कबूतर, पल्लास फिश ईगल, गोल्डन ओरियोल, टैनी फिश उल्लू, भारतीय पिठ्ठा भी दर्शनीय है। घड़ियाल, मगरमच्छ, किंग कोबरा भी देखने को मिल सकते हैं। 

जिम कार्बेट नेशनल पार्क में जंगल सफारी का आनंद

जिम कार्बेट में सफारी का आनंद अद्भुत और अविस्मरणीय है जहां बाघ संरक्षण केंद्र के रूप में स्थापित यह क्षेत्र करीब 7 क्षेत्रों मे ंबटा हुआ है जिनमे से दो बफर जोन हैं। पांच मुख्य ढिकाला, बिजरानी, झिरना, ढेला और दुर्गा देवी है। सफारी के भी कई सारे तरीके हैं जैसे हाथी सफारी, कैंटर सफारी और जीप सफारी तो सबसे ज्यादा फेमस कही जाती है। सफारियों मे जरूरत पड़ने पर गाइड की सुविधा भी प्रदान की जाती है। 

जिम कार्बेट जाने का सबसे योग्य समयः

यह उद्यान हर मौसम में आकर्षक रंग बिखेरता है जहां आप गर्मियों में बाघों को आसानी से देख सकते हैं क्योंकि जल पीने के उद्देश्य से नदी, नाले, तालाब और झरनों पर अक्सर दिख जाते हैं। बारिश में मानसूनी हरियाली का लुत्फ तो ले सकते हैं लेकिन कई छोटे छोटे कीड़ों की आवक भी ज्यादा हो जाती है जो पर्यटन में परेशानी का सबब दे सकते हैं। शीतकाल में इस उद्यान का आनंद और नजारा खुशनुमा हो जाता है। यह समय पार्क को आकर्षक फूलो से रंग देती है जिनकी कोमल खुशबू इस समय हर किसी को यहां आमंत्रित करती है। 

जिम कार्बेट नेशनल पार्क से जुड़े आश्चर्यजनक और रोचक तथ्य 

  • जिम कार्बेट नेशनल पार्क बंगाल टाइगर्स के लिए प्रसिद्ध है, जहां उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रयास किये जाते हैं। 
  • जिम कार्बेट नेशनल पार्क का नाम जिम कार्बेट के नाम पर रखा गया जो एक उम्दा और प्रसिद्ध शिकारी थे, इनका पूरा जीवन वन्य जीव संरक्षण को समर्पित रहा। 
  • जिम कार्बेट ने कई किताबों की रचना भी की जो बाघों पर अध्ययनरत थीं, इनकी मैन ईटर्स ऑफ कुमाऊं सबसे लोकप्रिय और पसदीदा किताबो में से एक है। 
  • यहां पर करीब 73 प्रतिशत भाग पर पेड़ पौधे है और शेष 10 प्रतिशत भाग पर घास के मैदान हैं।
  • यहां पर पक्षियों की करीब 580 प्रजातियां और स्तनधारियो की 50 प्रजातियां निवास करती है।

जिम कार्बेट नेशनल पार्क कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग से

  • जिम कार्बेट नेशनल पार्क के लिए नजदीकी हवाई अड्डा देहरादून स्थित जॉली ग्रांट एयरपोर्ट है जिसकी दूरी लगभग 170 किमी है। यहा से आप पार्क तक जाने के लिए वाया कैब या बस लगभग 3-4 घंटे में पहुंच सकते हैं। 

रेल मार्ग से 

  • जिम कार्बेट नेशनल पार्क जाने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन रामनगर है जहां से बेहद कम दूरी पर यह पार्क स्थित है। 

सड़क मार्ग से 

  • सड़क मार्ग से यहां जाने के लिए बेहतर उपलब्धता है जहां आप रामनगर के लिए बस या कैब के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं। दिल्ली से यहां की दूरी लगभग 240 किमी है जिसे लगभग 5 घंटों में तय किया जा सकता है। देहरादून 170 किमी है तो वहीं बरेली की दूरी 160 किमी लगभग है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड नैनीताल के रामनगर क्षेत्र में बसा यह नेशनल पार्क प्रकृति और रोमांच प्रेमियों को बहुत आकर्षित करता है। विभिन्न पशु पक्षी, जानवर और सरीसृपों की विविधता और घने जंगलों की मोहकता प्रकृति के आंगन में अठखेलिया करती हुई शानदार और अविस्मरणीय अनुभवों को प्रदान करती है। हरी भरी हरियाली के बीच पक्षियों का कलरव और पशुओं की ध्वनि मन को भीतर तक झंकृत करती हुई भाव विव्हल करती है। जिम कार्बेट नेशनल पार्क सिर्फ एक उद्यान नही वरन् प्रकृति का वो आंचल है जो पशु पक्षी जानवरो और वनस्पतियो के साथ मानव मन को भी नव उमंगो और तरंगों से ओतप्रोत करती है।

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