- Dec 08, 2025
रेगिस्तानी राजस्थान, दिसम्बर में अद्भुत आकर्षण बिखेरता है, ऐसे में प्रसिद्ध ऐतिहासिक शहर जोधपुर और भी ज्यादा खूबसूरत लगने लगता है। गर्मी की तपिश के बाद सुहानी सी सुबह, हल्की धूप और रात में टिमटिमाते तारें यहां की सुदंरता को बयां करते हैं। राजसी किले, जीवंत त्यौहार, पारंपरिक राजस्थानी स्वाद और स्थानीय लोकगीतों के साथ, यह विश्व भर से सैलानियों को आकर्षित करता है। सर्दियों के समय इस शहर की नीली रंगत में और ज्यादा निखार आता है।
गर्मी की चिंता किए बिना जोधपुर को एक्सप्लोर करना रोमांचक और यादगार अनुभव देता है, यहां हम आपको दिसम्बर महीने में जोधपुर घूमने की आदर्श योजना के लिए संपूर्ण यात्रा गाइड का विवरण दे रहे हैं- जिससे ब्लू सिटी को घूमने और एन्जॉए करने का आनंद कई गुना बढ जाएगा।
जोधपुर का संक्षिप्त इतिहास
राजस्थान का ऐतिहासिक शहर जिसकी स्थापना राव जोधा ने 13वीं शताब्दी के आसपास की थी। इन्हीं के नाम पर यहां का नाम जोधपुर पड़ा। मारवाड़ साम्राज्य की राजधानी बना यह शहर राठौरों का प्रतिनिधित्व करता रहा है। राव जोधा के समय में इस स्थान ने व्यापारिक क्षेत्र में भी समृद्धि अर्जित की।
16वीं शताब्दी के आखिर में मुगल साम्राज्य का प्रभुत्व यहां स्थापित हो गया। इस समय यहां की स्थापत्य शैलियों में बदलाव देखने को मिलता है।
अंग्रेजो के समय, 19वीं शताब्दी की शुरूआत में यहां राजपूताना एजेंसी नाम से ब्रिटिश राज की सबसे बड़ी रियासत बन गई।
स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जोधपुर शहर का नवगठित राजस्थान राज्य में विलय कर दिया गया।
क्या दिसम्बर जोधपुर घूमने के लिए सही समय है?
जी हां, जोधपुर घूमने के लिए दिसम्बर का समय एकदम परफेक्ट है। लुभावना मौसम, जीवंत ऊर्जा और पर्यटन स्थलों की श्रेष्ठ दृश्यता के साथ सर्दियों का यह महीना उपयुक्त है। इस समय तापमान लगभग 10 डिग्री सेल्सियस से 25 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। बारिश इस समय न के बराबर होती है इसलिए आसमान साफ स्वच्छ और नीले रंग का दिखाई देता है। इस समय किले दर्शन, सांस्कृतिक स्थल और रेगिस्तानी क्षेत्र का अनुभव ले सकते हैं।
आरामदायक तापमान और साफ आसमान के साथ ठंडे और सुहावने मौसम की सौगात प्रदान करता दिसम्बर पर्यटकों के लिए शहर के आकर्षणों को देखने के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करता है।
शुद्ध वातावरण और हरा भरा परिदृश्य दिन भर बाहरी गतिविधियों और दर्शनीय स्थलों की सैर के लिए आदर्श परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं इसलिए दिसम्बर को लोकप्रिय यात्रा सीजन माना जाता है।
दिसम्बर महीने में जोधपुर का मिजाज़
दिसम्बर में मौसम बेहद शानदार दिनों की झलक देता है। जहां दिन में गुनगुनी धूप की चमक, हल्की सर्द भरी शामें, थोड़ी ज्यादा सर्द रातें और भोर की सुबह में ठंडी सैर का आनंद लेना जोधपुर की खासियतों से परिचय कराता है।
तापमान एक नजरः
दिन का तापमानः तकरीबन 24 डिग्री सेल्सियस से लेकर 25.5 डिग्री सेल्सियस हल्की धूप के साथ आरामदायक वातावरण
रात का तापमानः तकरीबन 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर 13 डिग्री सेल्सियस, शीत और रेगिस्तानी रातें कुछ सर्द होती हैं।
दिसम्बर में जोधपुर में करने के लिए 9 विशेष आकर्षण
1. भव्य किलों की सैर करें
जोधपुर की धरती पर मेहरानगढ किला सिर्फ राजस्थान ही नहीं वरन् पूरे भारत के आकर्षक किलों में से एक है। जहां इसके विशाल द्वार, जटिल नक्काशी महल और मंत्रमुग्ध करती प्राचीर सालों से राजसी कहानियों के किस्से बयां करते हैं।
शीश महल, फूल महल और झांकी महल के साथ ही अन्य आकर्षणों को निहारें।
यहा अवस्थित संग्रहालय में राजसी वेशभूषा, पेंटिग्स और पुरान अस्त्र शस्त्र देखें।
सुहावने वातावरण की रौनक में ज़िपलाइन एडवेंचर कार्य को कर सकते हैं
सुबह की ठंडक मेहरानगढ किले की खड़ी चढाई को आसान बनाता है।
2. भव्य स्मारकों का दर्शन कर उनके गौरवशाली इतिहास को समझें
वास्तुकला और ऐतिहासिक गतिविधियों के शौकीन लोगों के लिए दिसम्बर का महीना गर्मी से राहत प्रदान करता हुआ पर्यटन के लिए सबसे अच्छा समय है। मेहरानगढ किले से कुछ दूरी पर ही जसवंत थड़ा में महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की स्मृति में शांत संगमरमर के स्मारक है। बाग बगीचों और शानदार सरोवरों के बीच बना यह स्मारक मारवाड़ का ताजमहल कहलाता है। सर्दियों की धूप में संगमरमर की श्वेत चमक फोटो वगैरह लेने के लिए बेहतर पृष्ठभूमि प्रदान करता है। किले और शहर की बॉर्डर लाइन का आश्चर्यजनक परिदृश्य प्रस्तुत करता है।
3. जोधपुर में बने महलों की खूबसूरती का अन्वेषण करें।
जोधपुर में बने राजे रजवाड़ों के भव्य महल आज भी राजसी शान शौकत और रिहायशी जीवन शैली का प्रमाण देते हैं। इसी तरह यहां चित्तर पहाड़ी पर बना उम्मेद भवन पैलेस में निवास, संग्रहालय और होटल सारा कुछ बना हुआ है। बलुआ पत्थर से बनी यह शानदार कृति विश्व के सबसे बड़े और निजी महलों मे से एक है।
संग्रहालय में विंटेज वस्तुओं का अवलोकन करें जैसे कार, घड़ी और राजसी अंदाज़ में लिपटी कलाकृतियां देखें। महल के बगीचों से जोधपुर के रेगिस्तानी अंदाज़ का आनंद लें। शाही अनुभवों के लिए उम्मेद भवन पैलेस में ठहरें, भोजन का स्वाद चखें।
4. पुराने जोधपुर की नीली गलियों की रंगत का आनंद लें।
जोधपुर का पुराना अंदाज़ नीली गलियों में मध्धम सैर के लिए उपयुक्त है, जहां जोधपुर की कुछ पुरानी जगहों जैसे नवचोकिया और ब्रह्मपुरी के आसपास रंग बिरंगे नज़ारें, स्थानीय कलाकार और खूबसूरत दरवाजे देखने को मिलेंगे।
लोकल छत कैफे पर बैठकर चाय की चुस्की का स्वाद लें।
सर्दियों की सुबह की सुनहरी रोशनी और नीली दीवारों के सम्मिश्रण का रंग देंखे।
5. खरीदारी का यादगार अनुभव लें।
पुराने जोधपुर के दिल में बसे सरदार मार्केट में हस्तशिल्प, कपड़े, आभूषण और मसालों की बढिया सी खरीदारी कर सकते हैं। चांदी से बनी ज्वैलरी प्रसिद्ध है। इसके अलावा लोकल स्वाद चखना न भूलें। यहां की मखनिया लस्सी और मिर्ची बड़ा का लजीज स्वाद जोधपुर के स्वादिष्ट स्वाद को और ज्यादा बढाएगा।
6. राव जोधा डेजर्ट पार्क में रोमांचक गतिविधियों का आनंद लें।
किले मेहरानगढ के पास ही ठीक नीचे बना यह पार्क करीब 70 हेक्टेयर में बना पारिस्थितिक रिजर्व है। जिसमें रेगिस्तानी देसी वनस्पति का पुर्नस्थपन किया जाता है।
इसकी पंगडंडियों पर चलते हुए स्थानीय पौधों और धरती की विशेषताओं को समझें।
दिसम्बर के मौसम में साहसिक गतिविधियों को एन्जॉए करे। सूरज की नर्म रोशनी में भोर या दिन के समय यहां भ्रमण करें।
7. किसी रेगिस्तानी कैंप या हवेली में सांस्कृतिक संध्या का लुत्फ लें।
राजस्थानी लोकसंगीत की बात निराली है। दिसम्बर महीने की शामें और अलाव की गर्माहट के बीच कालबेलिया नृत्य का आनंद देखते बनता है।
इसके लिए आप यहां ओसियां के पास किसी हेरिटेज जगह या रेगिस्तान कैंप में ठहरने का मज़ा लें।
जोधपुर के मंगनियार संगीत की धुनें और घी से भरी थालियों का लुत्फ लें।
8. ओसियां रेगिस्तान की यात्रा करें ।
जोधपुर से लगभग 65 किमी की दूरी पर ओसियां रेगिस्तानी जगह है जहां आप रेगिस्तान जमीन का दीदार कर सकते हैं। प्राचीन मंदिरों की वजह से इस जगह को राजस्थान के खजुराहो नाम से जानते हैं।
यहां ऊंट सफारी का आनंद लें और सुनहरे टीलों की सैर करें।
प्राचीन जैन और हिन्दू मंदिरों के दर्शन लाभ प्राप्त करें।
यहां पर जोधपुर के स्थानीय व्यंजनों का अनुभव लें।
9. जोधपुर के साथ जैसलमेर भी घूमें।
जोधपुर की सैर करने के साथ ही अगर आपके पास समय है तो आप जैसलमेर की यात्रा भी कर सकते हैं। राजस्थान में सर्दियों का यह समय बेहतर अनुभव प्रदान करता है। यहां के रेतीले टीले, किलों, स्मारकों और स्थानीय जीवन का आनंद ले सकते हैं।
दिसम्बर में जोधपुर अन्य पर्यटन के आकर्षण
उम्मेद भवन पैलेसः
विश्व के सबसे बड़े आवासों में से एक यह महल 347 कमरों का भव्य परिसर है। यह हेरिटेज होटल, संग्रहालय और निज निवास के रूप में है। जोधपुर राजघराने के इस महल का इतिहास किसी संत के श्राप से जुड़ा हुआ है, उन्होंने कहा था कि राठौड़ राजवंश के अच्छे शासन के बाद सूखे का समय आएगा। प्रताप सिंह के 50 साल अच्छे से बीतने के बाद साल 1920 में जोधपुर को सूखे का सामना करना पड़ा जो तीन साल तक चला था। ऐसे में समस्या का सामना कर रहे क्षेत्र के किसानों ने महाराजा उम्मेद सिंह से मदद की गुहार की। तब राजा उम्मेद सिंह ने किसानों को रोजगार प्रदान करने के उद्देश्य से इस महल को बनवाने का निश्चय किया। महल का वास्तु हेनरी वॉन लैंचेस्टर ने तैयार किया था। महल का निर्माण धीमी गति से किया गया क्योंकि इसका उद्देश्य अकाल और सूखे से पीड़ित निवासियों की मदद करना था। इंडो डेको शैली में बना यह महल कई सारी विशेषताओं और खूबसूरती का गढ है।
घंटाघर जोधपुर
जोधपुर का घंटाघर पूरे राजस्थान का प्रसिद्ध घंटाघर कहलाता है। इसका निर्माण महाराजा सरदार सिंह ने सन् 1909 में किया था। इसका उद्देश्य यूरोपीय शहरों की तरह नियोजित करने के लिए सार्वजनिक घंटाघर स्थापित करके जोधपुर का आधुनिकीकरण करना था। यहां लगने वाली घड़ी इंग्लैण्ड से मंगाई गई थी जो 1910 में स्थापित की गई। उस समय लोगों के लिए यह जगह विश्वसनीय समय मापक बन गई क्योंकि तब आम पॉकेट घड़ियां चलन में नहीं होती थीं। पांच स्तरीय संरचना में बना यह शानदार गुबंद शीर्ष पर शोभाएमान है। यह ढांचा अपने अलंकृत आंगन और जटिल नक्काशीदार खिड़कियों के लिए प्रसिद्ध और सुंदर है, इनका घिराव अष्टकोणीय पत्थर की रेलिंग से किया गया है, जिसकी वजह से यह टॉवर एक शानदार गोल चक्कर की तरह दिखाई पड़ता है।
मंडोर गार्डन
जोधपुर भ्रमण में वास्तुकला विरासत की उत्कृष्टता को दर्शाता यह मंडोर गार्डन सभी को बेहद आकर्षित करता है। यहां इतिहास और प्रकृति प्रेमियों के लिए बहुत कुछ है। ऐतिहासिक महत्ता और परिसर का प्रकृति की खूबसूरती से भरा अंदाज़ सभी को आकर्षित करता है। पहले यह पार्क मारवाड़ साम्राज्य के शासको का राजसी श्मशान स्थल हुआ करता था, जो अब खूबसूरत बगीचे में बदल गया है। इस जगह को विशेषतः पसंद किया जाता है जहां पर्यटकों के साथ ही स्थानीय जनता भी घूमना पसंद करती है।
मंडोर गार्डन में मंडोर किला भी है जिसका निर्माण छठी शताब्दी के दौरान हुआ था। इस समय यहां खंडहर अवशेष नक्काशी और वास्तुकला अवशेष देखने को मिलते हैं। इस परिसर में एक और अनोखा आकर्षण हैं- यहां रावण का मंदिर है, इसके बारें में कहते हैं कि मंडोर कस्बे में ही राक्षसराज रावण और मंदोदरी का विवाह हुआ था। यहां 30 करोड़ देवताओं के मंदिर भी बने हैं जहां अन्य किंवदंतियां भी प्रचलित हैं।
तूरजी का झालरा बावड़ी
जोधपुर शहर के बीचों बीच बनी यह ऐतिहासिक विरासत का समृद्ध प्रमाण हैं, जिसकी भव्य वास्तुकला और स्थापत्य कला की भव्यता इसके महत्व के बारें में दर्शाता है। इस बावड़ी का निर्माण राठौड़ राजवंश के शासनकाल में हुआ था, जिसकी रचनात्मकता और सौंदर्यता शानदार आकर्षण प्रस्तुत करती रही है। तूरजी का झालरा 18वीं शताब्दी में बनी प्रसिद्ध बावड़ी है जिसका निर्माण राजा अभय सिंह की पत्नी महारानी तवर जी ने कराया था, इन्हें ही उपनाम तूर जी से बुलाया जाता था। राजस्थान जैसे शुष्क जल क्षेत्र में इस बावड़ी के माध्यम से जलापूर्ति करना इसके निर्माण का प्राथमिक उद्देश्य था। इसकी विशेषता है कि यह अपनी जटिल नक्काशी और ज्यामितीय पैटर्न की वजह से जमीन से करीब 200 फीट तक नीचे जाती है। जलाशय तक जाने के लिए सीढियो का निर्माण किया गया है।
बाल समंद झील
जोधपुर जैसे शुष्क क्षेत्र में बाल समंद झील हरी भरी हरियाली, शांति सुकून प्रदान करता आरामदायक जगह है, जो मंत्रमुग्ध करते परिदृश्यों को प्रस्तुत करती है। मानव निर्मित यह झील 12वीं शताब्दी में बनाई गई थी जो लगभग 5 किमी तक फैली हुई है। बाल समंद झील के प्रसिद्ध आकर्षणों में से एक हैं यहा बना हेरिटेज होटल जो अपने जमाने के शाही निवास में शुमार रखता था। राजपूत स्थापत्य शैली का उदाहरण बना यह महल झील के सुदंर परिदृश्यों को निहारने का अवसर प्रदान करता है। इसके अलावा यहां पक्षियों की विभिन्न प्रजातियो को देखने का मौका मिलता है। यहां नौका विहार का आनंद भी लिया जा सकता है।
श्री सच्चायमाता मंदिर
देवी मंदिर से समर्पित यह स्थान अपनी पौराणिक कहानियों और चमत्कारी घटनाआेंं की वजह से प्रसिद्ध स्थान है। भारतीय वास्तुकला का प्रभावशाली उदाहरण स्थापित करता यह मंदिर अपनी जटिल नक्काशी, मूर्तियों और गुंबद के लिए प्रसिद्ध है। दसवीं शताब्दी के आसपास बना यह मंदिर राजस्थान का सबसे प्राचीन मंदिर है जो लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर दो विशाल पशुओं की मूर्तियां स्थापित हैं। सचिया माता अपने भक्तों को समय समय पर चमत्कारों से अभिभूत करती रहती हैं। प्राचीन काल में यहां भैंसों की बलि दी जाती थी।
जैन महावीरा मंदिर
लाल बलुआ पत्थर से बना यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और नक्काशी के लिए प्रसिद्ध जैन मंदिर है। विश्व भर से लोग यहां भगवान महावीर के दर्शनों के लिए आते हैं, इसका निर्माण 783 ई. में गुर्जर प्रतिहार वंश के राजा वत्सराज ने कराया था। इसका विस्तार 15वीं शताब्दी में महाराजा जसवंत सिंह के शासनकाल में हुआ था। मंदिर के भित्ति चित्र और जटिल नक्काशी आकर्षित करती है। भगवान महावीर की काले रंग की प्रतिमा बहुमूल्य रत्न आभूषणों से जड़ित और पुष्प आकृतियो से सुसज्जित है। मंदिर के गुंबद पर सुंदर नक्काशी और शीर्ष पर जल कलश की उपस्थिति आकर्षित करती है।
कायलाना झील
जोधपुर की कायलाना झील साफ स्वच्छ पानी से सुशोभित होती हुई शानदार आकर्षण उत्पन्न करती है। यहां आप सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक समय बिता सकते हैं। इस झील पर आप कई सारी रोमांचक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं जैसे नौकायन, विभिन्न पक्षियों की झलक और कायाकिंग। जैव विविधता देखने में आकर्षित करती है जिसमें वनस्पतियों और जीवो की विभिन्न प्रजातियों को देखने का अवसर प्राप्त होता है। दिसम्बर के महीने में यहां आपको किंगफिशर, बगुले और कई सारे प्रवासी पक्षियों को देखने का अवसर मिलता है। यहां आप फोटोग्राफी के शौक को भी पूरा कर सकते हैं।
फूल महल पैलेस
फूल जैसी आकृति के कारण इसका नाम फूल महल पड़ा। इसके अदंरूनी भाग में सोने की पत्ती, बारीक शीशे का काम और अलंकृत नक्काशियों के नजारों के साथ दीवारों और छतों पर राजपूत समय के कालक्रमों और घटनाओं को बताने वाले उत्कृष्ट भित्ति चित्र हैं। 18वीं शताब्दी में महाराजा अभय सिंह द्वारा बनवाया गया यह महल आराम और निजी कक्ष के उद्देश्य से बनवाया गया था। प्रवेश करते ही चंदन की लकड़ी से बना केंद्र बिंदु है जो हाथीदांत, सोने और कीमती पत्थरों से जड़ित है। फूल महल प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण हैं जहां राजपूताना शान और समृद्धि की संपन्न विरासत का प्रमाण दिखाई पड़ता है।
दिसम्बर में जोधपुर का पारंपरिक और लोकप्रिय स्वाद
मिर्ची बड़ा
तली हुई बड़ी हरी मिर्च जिसमें मसालेदार आलू भरे होते हैं जोधपुर का फेमस स्ट्रीट फूड है। इसका चटपटा स्वाद मीठी या खट्टी चटनी के साथ गरमागरम नाश्ते में चाय के साथ सर्व किया जाता है। मिर्ची बड़ा जोधपुर का स्पेशल स्वाद लिए बढिया स्ट्रीट व्यंजन है।
प्याज कचौरी
प्याज, मसाले और दाल के सम्मिश्रण से भरी हुई यह कचौरियां स्वादिष्ट चटपटी तीखी और मसालेदार स्वाद से सभी को आकर्षित करती हैं।
मावा कचौरी
मावा कचौरी एक तरह की मिठाई है जिसमें गाढा दूध और चाशनी का प्रयोग होता है। कचौरी को मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है।
दाल बाटी चूरमा
मारवाड़ियों का प्रसिद्ध भोजन दाल बाटी चूरमा जोधपुर में आसानी से मिलने वाला व्यंजन है। लोकल भोजनालयों या मेलों की रौनक में इस व्यंजन की खुशबू आपको मोहित कर देगी।।
कचौरी चाट
चटनी दही सेव और अनार के साथ कचौरी चाट का खट्टा मीठा स्वाद बेहद स्वादिष्ट लगता है। कचौरी चाट का यह अंदाज जोधपुर के अलावा कहीं और चखने को नहीं मिलता है।
गुलाब हलवा
दूध और गुलाब की पंखुड़ियों से बना गुलाब हलवा एक दुर्लभ राजस्थानी व्यंजन है जो जोधपुर की प्रसिद्ध मिठाईयों में गिना जाता है और चुनिंदा दुकानों पर ही मिलता है।
सेव टमाटर
क्रिस्पी सेव के साथ चटपटे मसालेदार टमाटर की ग्रेवी सेव टमाटर स्थानीय स्वादिष्ट व्यंजन है। यह एक तरह की सब्जी है जिसे रोटी या परांठे के साथ खाया जाता है।
रबड़ी लस्सी
यह लस्सी से कहीं ज्यादा स्वादिष्ट है जो जोधपुर की खास रेसिपी है। एक ऐसा पेय जिस पर रबड़ी के साथ मलाई डाली जाती है। बढिया से नाश्ते या खाने के बाद यह मजेदार ताजगी देने वाला पेय है।
मलाई घेवर
पहले यह मिठाई किसी खास पर्व पर ही मिलती थी पर अब हमेशा मिलने वाली यह स्वादिष्ट मिष्ठान अपने हल्के, कुरकुरेपन की वजह से खास पसंद किया जाता है। जिस पर ऊपर से सूखे मेवे और क्रीम डाली जाती है।
जोधपुर के मसालेदार व्यंजनों से लेकर मिठाईयों की मिठास तक, यहां की पारंपरिक रीति रिवाज और सांस्कृतिक गतिविधियों का आईना है। जोधपुर के पर्यटन आनंद में यहां के व्यंजनों का विशेष योगदान है।
दिसम्बर में जोधपुर के सांस्कृतिक उत्सव
जोधपुर सिर्फ अपने पर्यटन आकर्षण, व्यंजनों और रीति रिवाजों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है। बल्कि आज भी अपनी विशेष सांस्कृतिक अद्वितीय गुणों के कारण जाना जाता है।
राजस्थानी लोक संस्कृति या रेगिस्तान में लगने वाले शिविरों के दौरान कालबेलिया नृत्य और अन्य लोकनृत्य का प्रदर्शन देखें।
लोकल कारीगरो द्वारा राजस्थान की मिट्टी के बने बर्तन और ब्लॉक प्रिटिंग हुनर को सीखें और समझें।
सांस्कृतिक स्थानीय स्वाद को चखें जैसे कचौरी चाट, दालबाटी चूरमा, सेव टमाटर और चटनी के स्वाद को चखें।
दिसम्बर में त्यौहार और उत्सव
मारवाड़ महोत्सव
वैसे तो इस लोक महोत्सव का आयोजन अक्टूबर में होता है, पर जोधपुर और आसपास के प्राकृतिक आकर्षणों में इसकी झलक सर्दियो तक जारी रहती है। इस महोत्सव में राजपूत राजाओं और योद्धाओं की वीरता व उनकी मान मर्यादा का जश्न मनाता है। लोकनृत्य, संगीत सभा, कैमिल शो और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से दर्शकों का मन मोह लेते हैं।
राजस्थान अंतरराष्ट्रीय लोक महोत्सव (आरआईएफएफ)
इस महोत्सव का आयोजन अक्टूबर में होता है लेकिन सर्दियो के मौसम में इसकी रौनक और असर बरकरार रहता है। मेहरानगढ किले में आयोजित होने वाला यह उत्सव दुनिया भर के संगीतकारों की प्रस्तुति एक जगह पर उपलब्ध कराता है। अगर आप भी संगीत प्रेमी हैं तो जोधपुर की सैर कर इस उत्सव का आनंद जरूर लें।
हस्तशिल्प शीतकालीन उत्सव
सर्दियों के समय स्थानीय शिल्पकार कढाईदार और महीन बारीक कामगार वस्त्रों की नुमाईश के साथ ही चांदी की विभिन्न तरह की डिजाइन्स वाले आभूषणों की विस्तृत रेंज प्रस्तुत करते हैं। इसका आयोजन उम्मेद भवन में होता है। आप यहां से खुद के लिए या किसी को उपहार देने के उद्देश्य से खरीदारी कर सकते हैं।
क्रिसमस और नए साल की तैयारी का जश्न
जोधपुर की रेगिस्तानी अंदाज में क्रिसमस की धूम आतिशबाजी, रेस्तरां पार्टीज और हेरिटेज होटल में विशेष रूप से दिखाई देती है। नव वर्ष की पूर्व संध्या पर जोधपुर का दृश्य देखते बनता है। लोक संध्या नृत्य और पार्टीज का विशेष आयोजन देखने को मिलता है।
दिसम्बर में जोधपुर की सुगम यात्रा हेतु सुझाव
शालीन वेशभूषा पहनेंः राजस्थान की संस्कृति पारंपरिक और लोक कलाओं पर आधारित है, ऐसे में शालीन वेशभूषा में सहज महसूस होता है। साथ ही स्थानीय रीति रिवाजों और संस्कृति के प्रति सम्मान झलकता है।
पीक सीजन में एडवांस बुकिंग करेंः जोधपुर घूमने के लिए दिसम्बर का महीना पीक सीजन कहलाता है, इसलिए आवास और परिवहन सेवाओ ंकी अतिरिक्त मांग से बचने के लिए पहले से बुकिंग कर लेना ही समझदारी है। आखिरी समय में यह अनावश्यक परेशानियों और झंझट से भी बचाता है।
नकदी साथ रखेंः वैसे तो अधिकतर जगहों पर ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार हो जाता है पर फिर भी कुछ छोटी दुकानों पर नकदी को ही वरीयता देते हैं या फिर कभी कभार नेट सर्वर की समस्या भी हो सकती है। इसलिए कुछ नकदी साथ रखकर चलना ठीक रहता है।
स्थानीय संस्कृति के प्रति आदर की भावना रखेंः जोधपुर की स्थानीय संस्कृति के प्रति आदर और सम्मान की भावना के साथ बर्ताव करें। किसी भी परिस्थिति में बिना अनुमति के किसी व्यक्ति, वस्तु या उनकी निजी संपति की फोटो वगैरह न खीचें। बेहतर रहेगा कि अनुमति मिलने के बाद ही उक्त कार्य करें।
खरीदारी करते समय शिष्टता का परिचय देंः खरीदारी करते समय मोल भाव की कला अपनाएं लेकिन बेहद शिष्टता के साथ अपना पक्ष रखें।
जोधपुर कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- जोधपुर पहुंचने के लिए जोधपुर हवाई अड्डा प्रमुख हवाई अड्डो से सीधी उड़ानें प्रदान करता है। जैसे दिल्ली, मुंबई, जयपुर और अहमदाबाद आदि जगहों से आप आराम से जोधपुर की यात्रा के लिए आ सकते हैं।
रेल मार्ग से
- जोधपुर में जोधपुर जंक्शन प्रमुख भारतीय रेलवे स्टेशन है जहां से भारत के प्रमुख शहरो से आसानी से रेल सेवा के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- जोधपुर राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतरी से जुड़ा हुआ है। जहां आप सार्वजनिक वाहन या अपनी कार से स्वयं ड्राइव कर भी पहुंच सकते हैं।
निष्कर्ष
जोधपुर, राजस्थानी रंग में रंगी हुई अद्भुत और अनोखी जगह है जो राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा महानगर और ब्रिटिशकाल की भी सबसे बड़ी रियासत रही है। है। नीले शहर के नाम से प्रसिद्ध स्थान जहां कला और विरासत के उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिलते हैं। झीलों की सुंदरता और किलों की भव्यता के साथ ही बारीक नक्काशियों से बने मंदिरो के प्रमाण देखने को मिलते हैं। सौंदर्य और ऐश्वर्य के प्रतीक फूल महल की कोमलता और कायलाना झील में साहसिक गतिविधियों का रोमांचक आनंद लेना जोधपुर के प्रति और भी ज्यादा आकर्षित करता है।
चाहें दिसम्बर में गरमागरम कचौरी चाट या गुलाब हलवा का आनंद लेना हो या इस समय होने वाले उत्सवों की धूम देखना हो। सर्दियों का समय जोधपुर घूमने के लिए सर्वोत्तम है।
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