• Dec 09, 2025

दिसम्बर में कोलकाता की रंगत कुछ अलग सी होती है। सर्दियों के लुभावने मौसम और जश्न की खुशियों के साथ और भी ज्यादा मनमोहक हो जाता है। खुशनुमा शहर अपने इतिहास, विरासत और नैसर्गिक सुंदरता का एक अनोखा सम्मिश्रण प्रस्तुत करता है, जिस वजह से सर्दियों के दिनों में पर्यटन के लिए यह शहर अपने अद्भुत रूप में दिखता है। धुंध से ढकी सड़कों के परिदृश्य, क्रिसमस पर मध्यरात्रि में होने वाली प्रार्थना की मधुर आवाजें, कैरोल के सुर और ब्रिटिशकालीन इमारतों के जीवंत नज़ारें- इतना सब कोलकाता में दिसम्बर की विशेषताओं को बतलाता है। 

पर्यटन की दृष्टि से कोलकाता घूमने का सबसे सही वक्त है। खूबसूरती की मिसाल पेश करता हुआ कोलकाता का मौसम यहां के मोहल्ले, घाटों, पवित्र जगहों और हरियाली का दामन ओढे गलियों की रौनक मन को आनंदित और प्रफुल्लित करती हुई तरंगों का असर यहां आने वाले प्रत्येक पर्यटक को आकर्षित करता है। आप भारत या दुनिया के किसी भी हिस्से से आ रहें हों, दिसम्बर में कोलकाता अपनी जीवंत ऊर्जा, पारंपरिक उत्सव और यादगार स्वाद के आनंद की सौगात प्रदान करता है।

इस आर्टिकल में आप जानेंगे दिसम्बर 2025 में कोलकाता की सर्वश्रेष्ठ 10 जगहों, करने योग्य गतिविधियों, मौसम की बातें, जो दिसम्बर यात्रा का लुत्फ उठाने में काफी सहयोगी साबित होगें।

कोलकाता का संक्षिप्त इतिहास

17वीं सदी के समय यहां ब्रिटिश सत्ता की नींव रखी गई थी, तब यह जगह कलकत्ता नाम से जानी जाती थी। सिटी ऑफ जॉय कहलाने वाला यह शहर हुगली नदी के पूर्वी तट पर बसा है, जो औपनिवेशिक काल में प्रमुख केंद्र रहा है। जहां 18वीं-19वीं शताब्दी में सांस्कृतिक और बंगाल के पुर्नजागरण का केंद्र भी रहा। वही 20वीं सदी में यह राष्ट्रीय आंदोलन का प्रमुख गढ बना, सन् 1911 तक यह ब्रिटिश राजधानी प्रमुख भी रहा है, जिसे बाद में दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया। कोलकाता आज भी अपने ऐतिहासिक, विरासत और खुशमिजाज़ संस्कृति के लिए ख़ास तरह की पहचान रखता है। 

दिसम्बर विशेष कोलकाता में क्या है खास?

कोलकाता में सर्दियों का समय नवंबर से फरवरी का रहता है जब शहर का आकर्षण अपने चरम पर होता है। शानदार तापमान, साफ स्वच्छ आसमान और दिसम्बर के आखिरी दिनों में जश्न की वाइब्स ऑन मोड पर होती हैं। 

अंग्रेजों के समय की ऐतिहासिक वास्तुकला, प्रेमपूर्ण सत्कार और बंगाली संस्कृति की मिठास कई विशेषताओं के साथ पुरानी राहों के सफर पर ले चलते हैं। 

कोलकाता की सड़को पर जब भीड़भाड़ की सामान्य सी खामोशी, आरामदायक जीवन शैली, जगमगाते करिश्माई मार्केट और स्ट्रीट फूड की ताज़ी खुशबू, सब मिलकर कहते है कि दिसम्बर का आगाज होने को है। 

दिसम्बर में कोलकाता का मौसम अपडेट

तापमान और आसपास का वातावरण सुहावना और आरामदायक अनुभव प्रदान करता है। सुबह में हल्का सा कोहरा देखने को मिलता है, जबकि दिन के समय मौसम हल्की धूप के साथ घूमने के लिहाज से शानदार रहता है। सांझ के समय तापमान में थोड़ी कमी के साथ वातावरण में सर्दी कुछ बढी हुई होती है, ऐसे में स्वेटर व शॉल राहत प्रदान करते है। 

  • दोपहर का समयः 22 डिग्री सेल्सियस से 28 डिग्री सेल्सियस, धूप के साथ शानदार मौसम 
  • रात का समयः 12 डिग्री सेल्सियस से 17 डिग्री सेल्सियस, धुंध कभी कभी, मौसम सर्द 
  • नमी का स्तरः 50 प्रतिशत से कुछ ज्यादा
  • बारिशः बहुत कम 

दिसम्बर में कोलकाता में घूमने के लिए सर्वश्रेष्ठ 10 आकर्षण 

1. विक्टोरिया मेमोरियलः कोलकाता के केंद्र में स्थित विक्टोरिया मेमोरियल ब्रिटिश काल का आकर्षक उदाहरण है जो रानी विक्टोरिया की याद में बनवाया गया। करीब 25 साल शासन की बागडोर को महारानी विक्टोरिया ने संभाली थी। यह महल लगभग 64 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जिसका निर्माण सफेद संगमरमर से किया गया है। विशाल और भव्यता को प्रदर्शित करता यह महल हरी भरी हरियाली और स्मारक पर 16 फीट ऊंची कांस्य की प्रतिमा मेमोरियल को और भी ज्यादा आकर्षक बनाता है। इसे ब्रिटिशर्स द्वारा सन् 1904 से लेकर 1921 के बीच बनाया गया था। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा नियंत्रित संग्रहालय ब्रिटिशर्स से जुड़ी निशानियों को प्रदर्शित करता है। इंडो सरसेनिक वास्तुकला पर बना यह मेमोरियल मुगल, वेनिस, मिस्त्र और डेक्कन वास्तुकलाओं की भी छाप देखने को मिलती है। 

2. बिरला मंदिर कोलकाता में बना यह मंदिर जिसका निर्माण 1970 में हुआ था और इसे बनने में लगभग 26 साल लग गए। यह मंदिर भगवान राम, कृष्ण और विष्णु भगवान के अवतारों को समर्पित है। मुख्य गर्भग्रह में राधा और कृष्ण भगवान की मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के बाईं ओर शिखर गुंबद देवी दुर्गा को समर्पित है और दाहिनी ओर की गुबंद में भगवान शिव की ध्यान करती हुई मुद्रा में प्रतिमा विराजित है। यह मंदिर भुवनेश्वर के प्रसिद्ध लिंगराज मंदिर की भांति दिखाई पड़ता है। इस मंदिर की वास्तुकला में जटिल राजस्थानी झलक भी देखने को मिलती है। इस मंदिर में भगवद्गीता के ग्रंथों का सचित्र चित्रण यहां की दीवारों के पत्थर पर उत्कीर्ण किए गए हैं। कृष्ण जन्माष्टमी की धूम यहां विशेषतौर पर देखने में भाव विभोर करती है। 

3. साल्ट लेक सिटीः कोलकाता के इस शहर को बिधाननगर नाम से भी जाना जाता है। यह शहर चारों तरफ से झीलों से घिरा हुआ है जहां आप नौकायन का आनंद लेते हुए कई सारी अन्य रोचक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। हरी भरी हरियाली से घिरा यह स्थान खेल प्रशिक्षण और शॉपिंग प्लाजा की सुविधा भी प्रदान करता है। इस समय साल्ट लेक सिटी कोलकाता के पर्यटन स्थलों में बेमिसाल पहचान रखता है। इस सिटी की विशेषता है कि यहां सुदंर परिवेश और प्राकृतिक आकर्षणों के साथ अन्य कई विकास के लिए कदम भी उठाए गए हैं। यहां बने स्टेडियम में फुटबाल मैच भी खेले जाते हैं। कोलकाता एयरपोर्ट से इस सिटी की दूरी लगभग 11 किमी है जहां से आप आसानी से यहां पहुंच सकते हैं और फाल्गुनी बस स्टॉप के जरिए से यहां घूमने के लिए जा सकते हैं। 

4. दक्षिणेश्वर मंदिरः काली मां को समर्पित यह मंदिर काली बाड़ी नाम से भी जाना जाता है। हिंदू नवरत्न शैली पर बना यह मंदिर हुगली नदी के किनारे बसा है। इसका निर्माण यहां की रानी रशमोनी ने सन् 1855 मे कराया था। 19वीं सदी में यह मंदिर स्वामी विवेकानंद जी के गुरू स्वामी रामकृष्ण परमहंस और उनकी पत्नी सारदा देवी से जुड़ा हुआ है। नौ शिखरों वाला मुख्य मंदिर है जिसके अलावा यहां अन्य देवी देवताओ के मंदिर बने हुए हैं, साथ ही रानी रशमोनी जी की प्रतिमा भी यहां स्थापित है। यहां बने संगीत टॉवर में सारदा देवी ने अपने जीवन का काफी समय बिताया। रानी रश्मोनी अति भक्तिपूर्ण थीं जो बनारस की यात्रा के लिए जाना चाहती थीं तभी स्वप्न में देवी मां ने उन्हें दर्शन देकर उक्त मंदिर बनवाने का आदेश दिया और यही पूजा करने को कहा। मंदिर के गर्भग्रह में देवी काली की विशाल प्रतिमा स्थापित है जिन्हे भवतारिणी भी कहा जाता है। 

5. पार्क स्ट्रीटः कोलकाता की प्रसिद्ध सड़क है जहां दिसम्बर की धूम देखने लायक होती है। यह सड़क क्रिसमस और नव वर्ष के जश्न के लिए प्रसिद्ध है। भारत के पहले ब्रिटिशकालीन जज एलिजा इम्पे का हिरण पार्क इसी सड़क से होकर निकलता था। आज इस सड़क पर होने वाले समारोह, जश्न और पार्टीज की धूमधाम सभी को आकर्षित करती है। कभी इस सड़क को घोरूस्तान का रास्ता, वेनिसिटार्ट एवेन्यू या ब्यूरियल ग्राउंड रोड भी कहा जाता था। ब्रिटिश काल से ही इस सड़क के पास मनोरंजन का खास स्थान रहा है। पार्क स्ट्रीट, कई सारे रेस्तरां और पब के साथ कोलकाता में अच्छे स्वाद के लिए मशहूर है। इसे पार्क स्ट्रीट के अलावा फूड स्ट्रीट या कभी न सोने वाली गली के नाम से भी जानते हैं। पार्क स्ट्रीट पर क्रिसमस की नायाब सजावट पूरे विश्वस्तरीय पर प्रसिद्ध है। 

6. जैन मंदिरः कोलकाता के मानिकतला के गौरीबाड़ी में स्थित श्वेताबंर जैन मंदिर है जिसे राय बद्रीदास ने 1867 में बनवाया था। पार्श्वनाथ मंदिर के रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में 4 मंदिरों का परिसर है जिसमें मुख्य मंदिर दसवें तीर्थंकर शीतलनाथ को समर्पित है। प्रसिद्ध जैन भिक्षुओं जिनदत्त सूरि और आचार्य जिनकुशलसूरि के यहां पदचिन्ह स्थापित हैं। कोलकाता के प्रमुख जैन मंदिरों में स्थापित यह मंदिर अपनी अर्ध कीमती पत्थरों, धातुओं से सजा हुआ शानदार आकर्षण प्रदान करता है। पर्युषण पर्व जो अगस्त सितम्बर में मनाया जाता है, इस समय 8 दिवसीय त्यौहार यहां बहुत भक्तिभाव और जैन नियमों को पालन करते हुए मनाया जाता है। इस त्यौहार का आखिरी दिन संवत्सरी कहलाता है। इस मंदिर में चार प्रमुख मंदिर- शीतलनाथ मंदिर, चंद्रप्रभा मंदिर, महावीर मंदिर और दादाबाड़ी मंदिर है। संपूर्ण मंदिर जैन तीर्थंकर पार्श्वनाथ को समर्पित है। शीतलनाथ तीर्थंकर का हीरा जड़ित मस्तक श्रद्धालुओं को बेहद आकर्षित करता है। 

7. अलीपुर चिड़ियाघरः कोलकाता स्थित अलीपुर चिड़ियाघर 1876 मे स्थापित किया गया था जो भारत के सबसे पुराने प्राणि उद्यानों मे से एक है। यह भारत का पहला कांच से घिरा खुला वॉक इन ऐवियरी बेहद आकर्षक पर्याय है। विशाल कांच के घेरे में टहलने का सुअवसर और साथ 14 प्रजातियों के करीब 200 प्राकृतिक पक्षियों को देखने का अवसर प्रदान करता है। हरी भरी धरती और स्वच्छ हवा का आनंद प्रदान करने वाले स्थान पर शाही बाघों से लेकर चंचल प्राइमेट तक कई सारे विविध तरह के प्रजातियों को देख सकते हैं। अलीपुर स्थित इस चिड़ियाघर में आप अकेले आएं या परिवार, दोस्तों के साथ यह चिड़ियाघर सभी उम्र के लोगो को विशेष आकर्षण प्रदान करता है। आप यहां खारे पानी में मगरमच्छों को देखने के साथ ही स्पूनबिल पक्षी पिंजरे की ओर बढते हैं, इसे बंगाल में खुंटे बोक कहते है, इस पक्षी की खासियत है कि यह 21 दिन में चार अंडे देता है। यहां के जलक्षेत्र में बड़ी बड़ी मछलियां भी देखने को मिलती है। सफेद बाघ की तरह यहां सफेद मोर भी पाए जाते हैं। 

8. काली घाट मंदिरः देवी सती के 51 शक्तिपीठों मे से एक यह मंदिर कालीघाट मंदिर नाम से जाना जाता है, जो हुगली नदी से जुड़ने वाली नहर आदि गंगा के तट पर स्थित है। पहले कभी यह नहर हुगली नदी का मूल मार्ग हुआ करती थी, इसीलिए इसे आदि कहते हैं। इस स्थान पर देवी सती के पैर का अगूंठा गिरा था, जहां एक कुंड मेंं मानव पैर के अगूंठे का चिन्ह पत्थर के रूप में दिव्य प्रकाश की अनुभूति होने पर निकाल कर उसकी पूजा की जाने लगी। तभी से इस मंदिर में मां काली की पूजा की जाने लगी। इस मंदिर का निर्माण 19वीं शताब्दी में हुआ था जो आज करीब 200 साल पुराना है। वैसे तो इस स्थान का जिक्र 15वीं शताब्दी और 17वीं शताब्दी के ग्रंथों में भी पढने को मिलता है। कहते हैं कि मूल मंदिर एक झोंपड़ीनुमा संरचना थी जो 16वीं शताब्दी के समय राजा मानसिंह द्वारा बनवाया गया था। इस मंदिर में पूजी जाने वाली मां काली की प्रतिमा बलुआ पत्थर से बनी हैं जो तीन बडी आंखों, चार हाथों और एक लंबी उभरी हुई जीभ वाली हैं और इनका निर्माण दो संतो आत्माराम गिरी और ब्रहमानंद गिरी ने किया था। 

9. फोर्ट विलियमः कलकत्ता में हेस्टिंग्स के शासनकाल में बना यह किला अंग्रेजो के स्थापत्य का प्रमाण है और हुगली नदी के तट पर स्थित है। 70 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बना यह किला राजा विलियम तृतीय के नाम पर रखा गया था, इसके एक आंतरिक गार्ड रूम को ब्लैक होल कहा जाता है जो प्रसिद्ध ब्लैक होल घटना के कारण इस नाम से जाना जाता है। आज यह किला भारतीय सेना की पूर्वी कमान का हेड क्वार्टर है। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समय बना यह किला अंग्रेजो के शासन का प्रमुख हिस्सा रहा है जहां से उन्होंने पूरे भारत पर शासन सत्ता संभाली है। मूल इमारत में दो मंजिले और प्रोजेक्टिंग विंग थी, इस वजह से अंग्रेजो ने मैदान मे नया किला बनवाया जिसमें आयुध कारखानों को 1775 मेंं फोर्ट विलियम में स्थापित किया गया। 

10. कुमारतुलीः कोलकाता मे अवस्थित मूल रूप से कुम्हारों के इलाके को कुमारतुली कहा जाता है। यह भाग मूर्तिकला के लिए जाना जाता है। जहां विभिन्न त्यौहारों पर मिट्टी की मूर्तियां बनती हैं और उनका निर्यात भी किया जाता है। इस जगह को ब्रिटिश शासन में ही कुम्हारों के लिए आवंटित किया गया था। इसी स्थान पर ढाकेश्वरी माता का मंदिर स्थापित है जिन्हें 1947 में ढाका स्थित ढाकेश्वरी मंदिर से कोलकाता लाया गया था। इस मंदिर में मां की प्रतिमा लगभग 1.5 फीट ऊंची है जिनकी दस भुजाएं और महिषासुरमर्दिनी अवतार में शेर पर सवार हैं। 

दिसम्बर में कोलकाता के स्वादिष्ट व्यंजन

दिसम्बर के महीने में स्वाद की खासियत प्रदर्शित करता कोलकाता कई सारी मिठाइयों के लिए जाना जाता है। यहां आप इनका स्वाद चख सकते हैं।

नोलेन गुड ़(खजूर का गुड़)ः पश्चिम बंगाल में पाए जाने वाला पांरपरिक गुड़ है जो विंटर सीजन में ही पाया जाता है। सर्दियों के मौसम में नोलेन गुड़ यानी खजूर के रस से तैयार इस गुड़ को लोग बहुत पसंद करते हैं और इसका इस्तेमाल तरह तरह की मिठाईयों में होता है। यह स्वाद और सेहत दोनों ही दृष्टि से शानदार रहता है। इम्यूनिटी बूस्टर की तरह इस्तेमाल किया जाता है। 

पाटीशप्ता (मीठे क्रेप्स)ः शाकाहारी व्यंजन है जो सेहत के साथ ही स्वाद में भी लाजवाब है। इसमें मौजूद सामग्री आपको विटामिन प्रोटीन प्रदान करती है। 

शोंदेश गुड़ः नोलेन गुड़ से बनी मिठाई शोंदेश गुड़ कहलाती है जो पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध डेजर्ट है। प्रायः शोंदेश मिठाई आमतौर पर साल भर मिलती है, लेकिन शोंदेश गुड़ सर्दियों के समय खजूर के गुड़ से बनाई जाती है। 

इनके अलावा चटपटे और मसालेदार स्वाद के लिए आप इन व्यंजनों को चख सकते हैं। 

कोशा मंगशोः मसालेदार मटन करी के रूप में बनाई जाने वाली यह डिश फेमस बंगाली व्यंजन है जिसमें रसेदार मटन को मसालों का फ्लेवर दिया जाता है। इसके स्वाद को बरकरार रखने के लिए इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है। सादे चावलों के साथ खाई जाने वाली यह मटन करी स्वादिष्ट और लाजवाब है। 

लूची विद आलुर दमः मसालेदार आलू के साथ तली हुई रोटी है जो बंगाली लोगों की फेवरेट डिश है, जो भारतीय क्षेत्र के हर कोने में पसंद की जाती है। एक तरह से यह आलू की सूखी सब्जी और पूड़ी का कॉम्बिनेशन है। बंगाली रसोई में यह डिश अलग तरह से स्वाद बिखेरती हुई बेहद ही स्वादिष्ट लगती है। 

फिश फ्राई और कटलेटः बंगाली फिश फ्राई और कटलेट का स्वाद सभी जगहो स एकदम अलग और बेहद स्वादिष्ट होता है। अगर आप भी नॉन वेजिटेरियन है तो आपको यहां की बंगाली फिश फ्राई और कटलेट का स्वाद जरूर चखना चाहिए। 

दिसम्बर में कोलकाता में करने योग्य चीजें व गतिविधियां

1. नाव की सवारी और भ्रमण करें : हुगली नदी के किनारे भ्रमण करें और सुबह के समय नाव की सवारी का आनंद लें। आसपास की हरियाली और खुशनुमा मौसम का मजा लेते हुए हुगली के तट पर कुछ समय बिताएं। कलरव करते पक्षियों की मौजूदगी और हाथ से चलने वाले रिक्शों की खासियत कोलकाता की निराले अंदाज से रूबरू कराते हैं। 

2. ऐतिहासिक विरासत ट्राम की सवारी का अनुभव सहेंजेः कोलकाता की ट्रामें एशिया की सबसे पुरानी इलेक्ट्रिक ट्रामें हैं, जिनकी धीमी गति में बैठकर कोलकाता दर्शन करना यादगार और रोचक अनुभव प्रदान करता है। दिसम्बर की हल्की सर्दी के दौरान इन ट्रामों में घूमना और भी ज्यादा शानदार अनुभव प्रदान करता है। 

3. हस्तशिल्प खरीदारी करेंः बंगाली साड़ियों की छवि और गुणवत्ता बेहतर होती है, जिनकी छाप इसे अद्वितीय बनाती है। बंगाली सूती साड़ियां, टेराकोटा आभूषण और हाथ से बने हुए सजावटी सामानों की शोभा लाजवाब और शानदार लगती है। बंगाली सिंदूर को भी बहुत पसंद किया जाता है। 

4. सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंः कोलकाता में दिसम्बर के समय होने वाले प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने से आप तरोताजा और ऊर्जावान महसूस करते हैं। यहां कई ऐसी अकादमी हैं जहां होने वाली कल्चरल एक्टिविटीज आकर्षित करती हैं। 

5. पुरातत्व स्थलों को निहारेंः पश्चिम बंगाल की राजधानी और औपनिवेशिक युग की दास्तां बयां करते यहां के ऐतिहासिक स्थलों की सैर पर निकल सकते हैं जहां इनकी विशेषताएं और भी ज्यादा आकर्षित करती हुई कोलकाता के पुरानी गलियों से रूबरू कराती हैं। पुराने बाजारों से होकर गये रास्तों पर जर्जर होती इमारतों, पुरानी किताबो की दुकानें रेट्रो कोलकाता के दर्शन कराते हैं। 

दिसम्बर में कोलकाता में मनाए जाने वाले प्रमुख इवेंट, त्यौहार व उत्सव

कोलकाता अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवः साल 2025 में यह उत्सव भले ही नवंबर माह से शुरू हुआ है। लेकिन इसकी रौनक और सजावट दिसम्बर के महीने में भी महसूस होने वाली है। सप्तपदी फिल्म के प्रीमियर से शुरू हुआ यह उत्सव 39 देशों की 215 फिल्मों का अंकन करेगा। कोलकाता में होने वाला यह उत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिनेमा जगत को सम्मान देने का शानदार उत्सव है। 

सतरंगी संगीत उत्सवः सोनू निगम मशहूर गायक द्वारा इस म्यूजिकल इवेंट को दिसम्बर में 6 तारीख को मनाया जा रहा है। सोनू निगम के साथ संतरंगी इवेंट संगीत, धुनों, रंगों और अनकही भावनाओं का सम्मिश्रण हैं। सात प्रसिद्ध शहरों के अविस्मरणीय संगीत की यात्रा, मनमोहक प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मनोरंजन करवाएगें। 

केरेओथॉन 2025ः साल्टलेक कोलकाता में आयोजित होने वाला यह इवेंट प्रतिभागियों के बीच दौड़ का आयोजन करता है। 14 दिसम्बर 2025 को इसका शुभारंभ किया जाएगा। प्रतिभागियों के लिए खास सुविधाओं का प्रबन्ध करते हुए विजेताओं के लिए ट्राफी ईनामों का भी प्रबन्ध है। 

ग्लोबल स्टार्टअप समिट 2025ः 6 दिसम्बर को आयोजित होने वाला यह समिट भारतीय इकोसिस्टम स्टार्टअप को समर्थन देने के लिए मंच के रूप में काम करता है। उद्यमियों के लिए फंडिग की कमी और अच्छी गुणवत्ता के बिजनेस के लिए जरूरी एसेसरीज और भविष्य में विकास के विचार पर काम करने वाली परियोजना है। अगर आप भी अपने विचारों को उड़ान देते हुए कोई स्टार्टअप करना चाहते हैं तो फंडिग संबंधित मदद के लिए यह एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। 

कोलकाता पुस्तक मेलाः वैसे तो इस मेले की शुरूआत जनवरी में होती है लेकिन पूर्व तैयारिया और साहित्यिक संगोष्ठियां दिसम्बर के अंत से ही शुरू हो जाते हैं। ऐसे में इस माह में पर्यटन की रौनक और भी ज्यादा बढ जाती है। 

क्रिसमस और नया सालः दिसम्बर में क्रिसमस की धूम देखने लायक होती है। जब चर्चों में मध्यरात्रि में गुंजाएमान प्रार्थना के स्वर और कैरोल की ध्वनि पर थिरकते कदमों की आहट, आतिशबाजी और मनोरंजन की धुनों पर तन और मन झूम उठता है। दिसम्बर के आखिर में नए साल के स्वागत की तैयारी बहुत ही जोश उल्लास के साथ की जाती है। 

दिसम्बर में कोलकाता यात्रा करने के लिए सुझाव

  • वैकेशन सेलिब्रेशन वीक यानी क्रिसमस वीक के लिए बुकिंग वगैरह पहले से ही करा कर रखें, क्योंकि इन दिनों होटल रेस्टोरेंंट जल्दी भर जाते हैं।
  • कोलकाता घूमने के लिए सुबह जल्दी शुरूआत करें, जो भीड़भाड़ से दूर शांति प्रदान करते हैं। कोहरे से ढका वातावरण आकर्षित करता है। 
  • कोलकाता में घूमने के लिए मेट्रो विकल्प भी चुन सकते हैं जिससे समय और यातायात ट्रैफिक से बचाव होता है। 
  • कोलकाता के ऐसे स्थानों पर रूके जहां से शीर्ष आकर्षणों की पहुंच आसान और सुगम हो। जैसे पार्क स्ट्रीट, अलीपुर या एस्प्लेनेड क्षेत्रों में रहें। 
  • सास्कृतिक जगहों जैसे मंदिरों, गिरिजाघरों में शालीन वेशभूषा पहने और धर्म का सम्मान करे। 
  • डिजिटल भुगतान विकल्प के साथ ही नकदी भी रखकर चलें। छोटी छोटी खरीदारी करते समय नकदी को प्राथमिकता दी जा सकती है।
  • कोहरे के समय में ट्रेनों या उड़ानों में थोड़ी बहुत देरी हो सकती है। धैर्य बनाएं रखें। 
  • औपनिवेशिक वॉक पर निकले और ऐतिहासिक तथ्यों को समझें। 
  • स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चखें और दिसम्बर की सर्दी में यहां की स्पेशल दूध की चाय पीना न भूलें। 
  • दिसम्बर में होने वाले इवेंट, उत्सव या किसी त्यौहार में शामिल होकर अविस्मरणीय कार्यक्रमों का हिस्सा बनें। 

पैकिंग टिप्सः

दिन ढलने के बाद कुछ हल्के ऊनी कपड़े पहने 

दिन में घूमने के समय सुविधाजनक सूती कपड़े पहनना सही है।

सुबह के समय नदी किनारे टहलें तो स्कार्फ या शॉल कैरी करें

दिन के समय धूप से एलर्जी या किसी और समस्या से बचने के लिए सनग्लासेज और धूपरोधी लोशन का प्रयोग कर सकते हैं। 

कोलकाता कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग से

  • कोलकाता में नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट शहर के केंद्र से लगभग 17 किमी दूरी पर स्थित है जहां से स्थानीय वाहनों के जरिए कोलकाता यात्रा पूरी कर सकते हैं।

रेल मार्ग से

  • कोलकाता में दो प्रमुख रेलवे स्टेशन है जहां पश्चिमी और उत्तरी रास्तों के लिए हावड़ा जंक्शन है और पूर्वी व पूर्वोत्तर रास्तों के लिए सियालदह स्टेशन है।

सड़क मार्ग से

  • कोलकाता पहुंचने के लिए देश के सभी प्रमुख शहरों से राष्ट्रीय राजमार्गों की मदद से सड़क के रास्ते जा सकते हैं। ओडिशा, बिहार और असम जैसी जगहो के जाने के लिए एनएच 16, एनएच 19 और एनएच 12 के माध्यम से पहंच सकते हैं।

निष्कर्ष

दिसम्बर के महीनें में कोलकाता प्रेमपूर्ण आतिथ्य और अद्भुत कलाओं का दीदार कराता खासा आकर्षित करता है। महकते फूलों की खुशबू को बिखेरती शीतल हवाओं की चंचलताः गर्म सर्द दोपहरों में भ्रमण और शाम की रोशनी में जगमगाती सड़कें और कोलकाता शहर की आबोहवा, पर्यटक वर्ग को और करीब ले आती है। पश्चिम बंगाल की राजधानी के रूप में विकसित यह शहर कई सारे आकर्षणों की श्रृंखला प्रस्तुत करता हुआ और भी ज्यादा खूबसूरती और खुशियों का जश्न मनाता है। खुशियों का शहर कहलाते विख्यात कोलकाता दिसम्बर माह में नवीन और ऐतिहासिक मिलन का शानदार संगम प्रदर्शित करता है।

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