• Jan 16, 2026

महाबलेश्वर, महाराष्ट्र का लोकप्रिय हिल स्टेशन है जो सतारा जिले में स्थित नैसर्गिक सुंदरता, शीतल जलवायु और मंत्रमुग्ध करती हरियाली के शानदार नजारों से सैलानियों को आकर्षित करती है। पश्चिमी घाट के शांतिपूर्ण स्थानों में बसा यह पर्यटन स्थल अद्भुत आश्चर्यों का संकलन करता है, जहां पौराणिक, आध्यात्मिक और स्वाभाविक पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण है। हरीतिमा बिखेरती वादियां, विशाल पहाड़ों की गगनचुंबी झलक, झीलों व झरनों के साथ घाटियों के अनुपम परिदृश्य, इस स्थान को सर्वोत्तम पर्यटन स्थल बनाते हैं। आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे महाबलेश्वर की उन शानदार जगहों के बारें में जिन्हें जानकर आप यहां सैर सपाटे को जरूर आना चाहेंगे।

महाबलेश्वर के बारें में आश्चर्यजनक व रोचक तथ्य

महाबलेश्वर का शाब्दिक अर्थ होता है- ईश्वर की महान शक्ति। महाबलेश्वर को पहले मैलकम पीठ के नाम से जाना जाता है। पुणे शहर से लगभग 123 किमी दूर यह स्थान, ब्रिटिशकाल में कभी मुंबई प्रेसिडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी थी। महाबलेश्वर की खोज सबसे पहले राजा सिंघन ने की थी और उन्होंने ही यहां महाबलेश्वर मंदिर का निर्माण कराया था। यूं तो यहां एक से बढकर एक आश्चर्यजनक स्थानों की श्रृंखला है, लेकिन 17वीं शताब्दी में शिवाजी महाराज द्वारा बना प्रतापगढ किला और 1942 मे छत्रपति श्री अप्पासाहेब महाराज द्वारा बनी मानव निर्मित झील जिसे वैना झील के नाम से पर्यटको को खूब लुभाती है।

महाबलेश्वर मंदिर के अलावा यहां कई अन्य प्राचीन मंदिर हैं जो महत्वपूर्ण हैं, यहां बना पंचगंगा मंदिर लगभग 40 साल पुराना है। महाबलेश्वर जगह की खासियत है कि यहां वर्ष भर प्रत्येक महीने थोड़ी बहुत हल्की बारिश होती रहती है।

महाबलेश्वर का मौसम : ऋतु अनुसार

महाबलेश्वर का मौसम वर्ष भर बदलता ही रहता है जो हर तरह से अद्वितीय आकर्षण उत्पन्न करता है। सर्दी, गर्मी और बरसाती सीजन के दिनों में महाबलेश्वर का मौसम इस तरह रहता है। 

शीत ऋतु ( नवंबर से फरवरी ) : महाबलेश्वर पर्यटन के लिए शरद ऋतु का समय सबसे शानदार समय है जब तापमान 10-24 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इसलिए इस समय यह आकर्षण दर्शनीय स्थलों की यात्रा और हिल स्टेशनों के अन्वेषण करने का उपयुक्त समय है। मानसूनी ऋतु के बाद यहां की फ्रेशनेस और वनस्पतियो की हरियाली और बहते झरनो के कल कल करते स्वर करिश्माई रूप से अलौकिक अनुभव प्रदान करते हैं।

ग्रीष्मकाल ( मार्च से मई ) : गर्मियों के समय यह स्थान गर्मी के लिए जाना जाता है जिसका तापमान लगभग 36-37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। यहा पर सर्दियों वाले दिन गर्म सुखद एहसास प्रदान करते हैं और वही गर्मियों के दिन ज्यादा तापमान और धूप के साथ ज्यादा लंबी दोपहर वाले होते हैं। 

वर्षा ऋतु ( जून से सितम्बर ) : मानसूनी मौसम मे यहां तेज और मूसलाधार बारिश होती है जिसमें जुलाई महीने में सबसे ज्यादा बारिश होती है। इस मौसम में तापमान लगभग 20-25 डिग्री सेल्सियस तक रहता है जहां बारिश के लगातार होने से सड़के फिसलन भरी हो जाती हैं। 

महाबलेश्वर में आने वाला हर मौसम स्पेशल है इसलिए आप अपनी सुविधानुसार यहां घूमने के लिए मौसम का चयन कर सकते हैं, वैसे सर्दियों के दिनो में यहां घूमना सर्वाधिक पसंद किया जाता है।

महाबलेश्वर में घूमने योग्य 10 सर्वश्रेष्ठ स्थान

1. वेन्ना झीलः मानव निर्मित यह झील अपने सुंदरतम दृश्यों और गतिविधियो का आनंद ले सकते हैं। सन 1942 में अप्पा साहेब द्वारा निर्मित इस झील की शोभा अद्भुत है। जो आस पास के इलाकों में पानी की आपूर्ति के उद्देश्य से बनाई गई थी। प्रकृति प्रेमियों, हरियाली और मंत्रमुग्ध करते वातावरण की खूबसूरती को निहारने का अनोखा सुंदर स्थान है। प्रकृति के करीब रहकर आप तरोताजा और ताजगी से सराबोर महसूस कर सकते हैं। बड़ो के साथ बच्चे भी वेन्ना झील में मीरा गो राउंड और टॉय ट्रेन की सवारी का मजा ले सकते हैं। 

प्रमुख आकर्षणः बोटिंग पैडल व रो, झील के किनारे पर घुड़सवारी का आनंद, स्ट्रीट फूड्स का स्वाद लें। 

प्रवेश समयः सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक 

प्रवेश शुल्कः कुछ नहीं, बोट राइडिंग के लिए शुल्क निर्धारित है। 

स्थानः वेन्ना झील, सतारा, महाबलेश्वर 

2. महाबलेश्वर मंदिरः महाबलेश्वर के पश्चिमी घाट में स्थित यह शानदार लोकप्रिय हिल स्टेशन में यह तीर्थस्थल भगवान शिव को समर्पित हे जहां आध्यात्मिक आभा और दिव्यता का स्नेहपूर्ण आशीर्वाद मिलता है। वास्तुकला और ऐतिहासिक दृष्टि से संपन्न यह मंदिर करीब 16वीं शताब्दी का है जो कई सारे राजवंशों और घटनाओं का अभूतपूर्व साक्षी है। इस मंदिर की कहानी, कई लोककथाओं और मिथकों से जुड़ी हुई है, जो इसके रोचक और रहस्यमयी इतिहास को गहरा करते हैं। इस मंदिर का निर्माण चंदा राव मोरे वंश द्वारा हुआ जो मराठा साम्राज्य से जुड़े और भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। भगवान शिव के दूसरे नाम महाबली पर इस मंदिर का नाम रखा गया जिन्हे हिंदू धर्म में सबसे श्रेष्ठ देवताओ में से एक माना जाता हैं।

प्रमुख आकर्षणः मंदिर दर्शन, भ्रमण, सुबह शाम की आरती में शामिल होने के साथ ही आसपास की पर्यटन विशेषताओे को एक्सप्लोर कर सकते है। 

प्रवेश समयः सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक 

प्रवेश शुल्क : कुछ नहीं 

स्थानः सतारा, पुराना महाबलेश्वर, भारत आदिं

3. बंबिंग्टन प्वाइंट : समुद्र तल से करीब 1200 मीटर की ऊंचाई पर यह प्वांइट अद्भुत दृश्य बिंदु है जहां चाइनामैन झरने और घनी पर्वत श्रृंखलाओं से घिरे आसपास के क्षेत्र और मनमोहक दृश्यों को निहारने का सुखद अनुभव मिलता है। भीड़भाड़ और व्यस्त जिंदगी से राहत प्रदान करता है। पर्यटन के क्षेत्र से यह स्थान आस पास के दर्शनीय स्थलों की खोज करने का सुअवसर प्रदान करता है। यहां से आप प्रसिद्ध सोलशी और कोयना घाटी के विहंगम नजारों का दीदार कर सकते हैं। यहां आप घंटो बैठकर प्रकृति की मनमोहकता को निहारते हुए शांति अनुभव कर सकते हैं।

प्रमुख आकर्षणः ट्रेकिंग, पक्षी दर्शन और फोटोग्राफी का रोचक अनुभव ले सकते हैं। 

प्रवेश समयः सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक 

प्रवेश शुल्कः कुछ नहीं 

स्थानः तपोला रोड, बिरवाड़ी, सतारा, महाबलेश्वर 

4. मिनी कश्मीरः महाबलेश्वर का तपोला गांव ही मिनी कश्मीर के नाम से जाना जाता है, जहां आप सप्ताहांत या लंबी छुट्टियों का आनंद ले सकते हैं। यहा समय बिताना शांति पाने और तनावमुक्त होने की श्रेष्ठ जगह है। ग्रामीण संस्कृति के अनोखेपन के लिए मशहूर यह देहाती बस्ती महाबलेश्वर की सुकून भरी जगह है। 

प्रमुख आकर्षणः सूर्यास्त के नजारों को देखने का अलौकिक अनुभव लेने के साथ ही तैराकी, कायाकिंग, पैराग्लाइडिंग और बोटिंग जैसी साहसिक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। इतिहास के चाहने वालों के लिए यहां जयगढ और वसोटा जैसे प्राचीन स्मारक हैं। आप यहां कैपिंग और कई सारे खेल जैसे क्रिकेट, वॉलीबाल, कैरम और शंतरज के साथ ढेर सारी मस्ती फन कर सकते हैं। 

प्रवेश समयः गतिविधियो के लिए सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे तक, गांव आप कभी भी जा सकते हैं, पूरे दिन खुला रहता है। 

प्रवेश शुल्कः निःशुल्क 

स्थानः तापोला, सतारा, महाबलेश्वर 

5. राजपुरी गुफाएंः महाबलेश्वर के लोकप्रिय दर्शन स्थलों में से एक इस स्थान पर हर साल सैलानियों की भीड़ देखने को मिलती है। ये गुफाएं अपनी आध्यात्मिक दृष्टि और महत्व के लिए लोगों के बीच बहुत प्रसिद्ध हैं। यहां मौजूद चार गुफाएं और इनके आसपास तालाबों की उपस्थिति देखने मे शानदार प्रतीत होती है। पांडवों को उनके वनवास के समय पर इस स्थान पर आश्रय मिला था, इसके अलावा कहते हैं कि भगवान कार्तिकेय ने भी इस स्थान पर कई सारी धार्मिक गतिविधियों को संपन्न किया था। यहां मौजूद तालाबों या कुंडो में जो जल है वह अति पवित्र है जिसकी तुलना गंगाजल से की जाती है। माना जाता है कि यहां स्नान करने से सभी प्रकार के रोगों का नाश हो जाता है। 

प्रमुख आकर्षणः कार्तिकेय मंदिर के दर्शन करें जो गुफाओं की रेत से ही बना हुआ है। जनवरी या फरवरी के महीने मे होने वाले थाईपूसम उत्सव का आनंद लें। 

प्रवेश समयः सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 

प्रवेश शुल्कः कोई शुल्क नहीं 

स्थानः पंचगनी, सतारा, महाबलेश्वर 

6. धोबी फॉल्सः प्राकृतिक खूबसूरती और नैसर्गिक सुदंरता के धनी महाबलेश्वर में धोबी फॉल्स, यहां के सेंटर से सिर्फ 3 किमी की दूरी पर ही स्थित है। महाबलेश्वर में एकांतिक स्थानों मे ंविशेष इस जगह आप परिवार या दोस्तों संग पिकनिक का आनंद भी ले सकते हैं। एकांत समय बिताने के लिए भी यह स्थान शानदार और उपयुक्त है। झरने की ओर जाने के लिए पैदल जा सकते हैं, प्रवासी पक्षियों, पेड़ पौधों और साफ स्वच्छ नीले आसमान की झलक देख सकते हैं। झरने तक जाने के लिए मजबूत पकड़ वाले फुटवियर पहनें और कीटों से बचने के लिए क्रीम या लोशन जरूर साथ रखें। 

प्रमुख आकर्षणः ट्रेकिंग, अद्भुत नजारों का आनंद सहेजें व मंत्रमुग्ध करते हरियाली और ऊंचाई से गिरते हुए झरने को निहारें। 

प्रवेश समयः सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक 

प्रवेश शुल्कः कुछ नहीं 

स्थानः सतारा, महाबलेश्वर 

7. पंचगनीः पांच गांवों की भूमि पंचगनी कहलाती है, जो अंग्रेजो द्वारा ग्रीष्मकाल में रिसार्ट की तरह बनाई गई है। यहां की जलवायु पूरे साल सुखद अनुभव प्रदान करती है। पंचगनी के पांच गांव दांडेघर, गोदावली, अंबराल, खिंगर और तैघाट है। यह स्थान बोर्डिंग और कान्वेंट स्कूलों के लिए भी जाना जाता है। महाबलेश्वर के पास इस स्थान पर आप कई सारे आकर्षणों की श्रृंखलाओं को देख सकते हैं। पंचगनी से लगभग 2 किमी की दूरी पर टेबल लैंड है जहां आप एशिया के दूसरे सबसे लंबे पर्वतीय पठार को देख सकते हैं। यहां आप घुड़सवारी, मीरा गो राउंड, मिनी ट्रेन, फूड स्टॉल और गेम्स काउंटर पर गेम्स भी खेल सकते हैं। 

प्रमुख आकर्षणः पंचगनी मे ंकई शानदार आकर्षण है जिन्हें आप एक्सप्लोर कर सकते हैं। पारसी प्वाइंट, सिडनी प्वाइंट, कास पत्थर, वाजराय झरनों का लुत्फ लें। 

प्रवेश समयः कभी भी जा सकते हैं, कुछ विशेष जगहों पर सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक। 

प्रवेश शुल्कः कुछ नहीं 

स्थानः पंचगनी, महाबलेश्वर

8. कृष्णाबाई मंदिरः यह मंदिर सदियों पुराना है जो अपनी पवित्रता और दिव्यता के लिए जाना जाता है। शानदार विरासत स्थल और सकारात्मकता बिखेरता यह मंदिर अपनी मौजूदगी और कृष्णा नदी के विहंगम दृश्यों से रूबरू कराता है। साल 1888 में निर्मित यह मंदिर भगवान शिव का पावन धाम है और प्रभु श्री कृष्ण की भी दिव्य प्रतिमा यहां स्थापित है। पत्थरों से बनी नक्काशीदार छत और स्तंभों वाला शिवलिंग के साथ इस स्थान की संपूर्ण वास्तुकला विशेष और अनुपम है। यहां मौजूद गौमुख से पानी निकलता है जो आगे चलकर कृष्णा नदी में मिल जाता है। 

प्रमुख आकर्षणः कृष्णा नदी का उद्गम स्थल और आध्यात्मिक आभा को महसूस कीजिए। 

प्रवेश समयः सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक 

प्रवेश शुल्कः निःशुल्क 

स्थानः छोटा पुल, गंगापुरी रोड, दानेबाजार, गनपत गली, वई, महाबलेश्वर 

9. मैप्रो गार्डनः स्ट्रॉबेरी के खेत और खूबसूरत शानदार पर्यटन स्थल, जहां परिवार या दोस्तों संग पिकनिक मनाने के लिए जाना जाता है। हरे भरे स्ट्रॉबेरी के खेत, फोटो बूथ, घर में ही उगाए गए खाकरा के पौधों से सजे विशाल बाग बगीचे और वातावरण की मनमोहक छवि के साथ आसपास की पहाड़ियों की भव्य छवि दिन भर आपको भव्य मनोरंजन की सौगात प्रदान करता है। यहां होने वाले पारंपरिक नृत्य और संगीत समारोह मैप्रो गार्डन्स की पृष्ठभूमि को और भी ज्यादा रोचकता प्रदान करता है। 

प्रमुख आकर्षणः सुंदरता और स्ट्रॉबेरी थीम की सजावट का अवलोकन करें, इसके अलावा जैविक रूप से बने हुए आइसक्रीम, फ्लेवर्ड दही और शेक का आनंद लें। यहा मौजूद छोटे झरनों और कृत्रिम कुंडो के मंत्रमुग्ध करते दृश्यों की शोभा को निहारें। 

प्रवेश समयः सुबह 8ः30 बजे से रात 10 बजे तक 

प्रवेश शुल्कः कुछ नहीं 

स्थानः गुरेघर पंचगनी, महाबलेश्वर रोड, महाबलेश्वर

10. पंचगंगा मंदिरः अद्भुत अकल्पनीय छवि प्रदान करता यह दिव्य स्थान पर्यटको को बहुत आकर्षित करता है, इसका सबसे ज्यादा चर्चित कारण है- यहां पांच जलस्त्रोतों के संगम होना, कृष्णा, वेन्ना, कोयना, सावित्री और गायत्री नाम के जलस्त्रोतों का एक स्थान पर मिलना बहुत आकर्षित करता है। इन नदियों का जल एकसाथ मिलकर गौमुखी मूर्ति से निकलता है। मान्यता है कि यह अत्यंत पवित्र जल होता है इसलिए लोग इसे भरकर अपने घरों में भी ले जाते हैं। इस स्थान पर मंदिर का निर्माण 13वीं सदी में उस समय के राजा यादव ने कराया था। 16वीं और 17वीं सदी में इमारत में कई सुधार हुए। पंचगंगा मंदिर के इतिहास से जुड़ी पौराणिक कथा है कि एक बार यहां पर भगवान विष्णु,, ब्रहमा और महादेव ने यज्ञ करने का निश्चय किया जिसमें उन्हें अपनी अपनी पत्नियों के साथ शामिल होना था। भगवान ब्रहमा की पत्नी सावित्री देवी यहां नहीं थीं। तब भगवान ब्रहमा ने नई कन्या गायत्री से विवाह कर यज्ञ स्थान में उन्हें बिठाया, लेकिन जब देवी सावित्री वहां पहुंची तो वे अत्यंत क्रोधित हुईं और इसी वजह से उन्होने यहा उपस्थित सभी लोगो को नदी में परिवर्तित होने का श्राप दे दियां जिसमें वेन्ना- भगवान ब्रहमा, कोन्याना- भगवान शिव, कृष्णा- भगवान विष्णु और देवी सावित्री और गायत्री अपने ही नामो से नदी रूप में जानी जाती हैं।

प्रमुख आकर्षणः पौराणिक कथाओ और आध्यात्मिक मान्यताओं को समझे और यहां की दिव्यता का मर्मस्पर्शी अनुभव सहेंजे।

प्रवेश समयः सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे तक, शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक

प्रवेश शुल्कः कुछ नहीं

स्थानः राज्य हाईवे 34 केए, पुराना महाबलेश्वर, महाबलेश्वर

महाबलेश्वर का प्रसिद्ध और लजीज स्वाद

सहयाद्रि पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित महाबलेश्वर न सिर्फ पर्यटन के क्षेत्र मे प्रसिद्ध है बल्कि यादगार स्वाद की अविस्मरणीय याद भी प्रदान करता है। महाबलेश्वर में खाने योग्य कई स्पेशल चीजें हैं जिनके अद्भुत स्वाद पर्यटकों को रिझाते हैं।

1. स्ट्रॉबेरीः खट्टी मीठी स्वाद लिए स्ट्रॉबेरी महाबलेश्वर की खास पेशकश है जो सिर्फ महाराष्ट्र में ही उगाई जाती है। स्ट्रॉबेरी फल जैसी बेरी होती है जिसके स्वाद में तमाम सारे पोषक तत्व जैसे पोटेशियम, विटामिन सी, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद यह चीज बहुत टेस्टी फल है। महाबलेश्वर को भारत की स्ट्रॉबेरी राजधानी भी कहते हैं क्योंकि यहां पूरे भारत की लगभग 85 प्रतिशत स्ट्रॉबेरी यहीं उगाई जाती है। हर साल मैप्रो गार्डन में यहां स्ट्राबेरी उत्सव का आयोजन भी किया जाता है जिसमें स्ट्रॉबेरी का पल्प, जैम, जैली और सिरप वगैरह भी मिलता है। आप यहां खेत से ताजी ताजी स्ट्रॉबेरी को देखने के साथ ही उनका लजीज स्वाद चख भी सकते हैं जो आपको यादगार अनुभव प्रदान करता है।

2. स्ट्रॉबेरी क्रीमः महाबलेश्वर की स्ट्रॉबेरी क्रीम स्वादिष्ट स्वीट डिश है जिसमें ताजी स्ट्रॉबेरी, व्हीप्ड क्रीम और स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम भी शामिल होती हैं। इन सारी सामग्रियो ंको स्ट्रॉबेरी सिरप से सजाया जाता है। इसकी शानदार झलक और स्वाद दोनों बेमिसाल हैं। जहां मैप्रो गार्डन और यहां का बगीचा कॉर्नर जगहें इस स्वादिष्ट डिश के लिए बहुत प्रसिद्ध जगहें हैं। महाबलेश्वर के आकर्षक वातावरण में इस मिठाई का स्वाद जरूर चखिए।

3. मसाला कॉर्नः उबले हुए मक्के से बनी यह डिश स्थानीय मसाला, मिर्च पाउडर, नमक और नींबू के रस की कुछ बूंदों को मिलाकर स्वादिष्ट और मसालेदार नाश्ता बनता है जो महाबलेश्वर की वेन्ना झील और बगीचा कॉर्नर प्रसिद्ध जगहो में से एक है।

4. भुट्टा या मक्काः मक्का एक प्रसिद्ध अनाज है जिसमें विटामिन, खनिज, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, महाबलेश्वर की यात्रा और सुहावने मौसम के साथ प्रसिद्ध भुना हुआ भुट्टा खाने का स्वाद पर्यटन के आनंद को कई गुना बढा देता है। इसे आप झील किनारे नींबू और नमक के स्वाद के साथ जरूर आजमा सकते हैं।

5. चनाः महाबलेश्वर के सूखे नाश्ते के साथ स्थानीय टेस्ट का लाजवाब स्वाद बिखेरता महाबलेश्वर का चना अपने खास और स्वादिष्ट स्वाद के साथ भरपूर प्रोटीन और सेहतमंद नाश्ते का स्त्रोत है। चना अपने गुणों के कारण सभी को बहुत पसंद आता है। आप यहा ताजे भुने हुए चनों को खा सकते हैं।

6. चिक्कीः मूंगफली, तिल और गुड़ से बनी यह चिक्की बहुत ही स्वादिष्ट लगती है, जिनकी खुशबू और मिठास मुंह में घुल जाती है, जिससे आंतरिक मन को भी प्रसन्नता होती है। महाबलेश्वर में कई तरह की मशहूर चिक्की चखने को मिल जाएगी जैसे स्ट्राबेरी, चॉकलेट, नारियल और काजू से बनी इन चिक्की में गुड़ मूंगफली और चौलाई का इस्तेमाल होता है।

7. फज़ः मक्खन, दूध, क्रीम और चॉकलेट से बनी यह अद्भुत कन्फेशन बहुत ही शानदार मीठी, मुलायम और स्वादिष्ट कैंडी जो विश्व भर में प्रसिद्ध है। महाबलेश्वर में आप चॉकलेट वॉलनट फज का बेमिसाल स्वाद जरूर चख सकते हैं। अखरोट और चॉकलेट की मिठास का स्वाद मुंह मे यादगार अनुभव देता है।

8. मकई पकौड़ाः मक्के के दानों से बने यह पकोड़े बेसन, मसाले और जड़ी बूटियांं से बने एक स्वादिष्ट और कुरकुरे स्वाद को प्रदान करते भारतीय डिश है, इन्हें चाय के साथ खाने से सर्दियों के दिनो ंमें इनके स्वाद में और ज्यादा वृद्धि हो जाती है। शीत माहौल में यह गरमागरम कुरकुरा नाश्ता पर्यटकों को बेहद पसंद आता है।

9. कॉर्न चीज़ फ्रेंकीः इस डिश में बेसन की रोटी के साथ मक्के दाने, कद्दूकस किया पनीर, मसाले और कुछ जड़ी बूटियों के स्वाद इसे स्वादिष्ट होने के साथ ही सुपरफूड भी बनाता है। जो भूख तृप्त करने के साथ ही स्वादिष्ट और स्वास्थ्य की दृष्टि से सेहतमंद भी है।

10. पूरनपोलीः पूरनपोली महाराष्ट्र की फेमस डिश है जो अपने आप में अद्वितीय है। इसकी मिठास और सामग्री की वस्तुएं किचन में आसानी से मिल जाती हैं। पूरन- उबली और पिसी हुई चने की दाल का गुड़ के साथ मिश्रण होता है। बेसन और गेहूं के आटे के मिश्रण में पूरन भर कर तैयार किया जाता है। यह मीठी डिश है जिसका बेमिसाल स्वाद खाने के शौकीनों को पूरनपोली और घी के स्वाद के साथ बहुत प्रिय लगता है।

11. भरली वांगीः यह एक तरह से बैंगन से बनी डिश है जिसे वांगी नाम से जानते हैं। वांगी पोटेशियम, फाइबर और बायोएक्टिव यौगिकों से भरपूर होता है। स्थानीय मसालों, कसा हुआ नारियल, मिर्च पाउडर, हल्दी, विशेष गोडा मसाला, तिल और कुटी हुई मूंगफली के साथ बनाई जाती है। इस मसाले को बैंगन यानी वांगी में भरकर विशेषकर भाप में पकाया जाता है। इसकी महक और स्वाद श्रेष्ठ, प्रामाणिक और स्वादिष्ट महाराष्ट्रीयन व्यजन बनाता है। भरली वांगी को रोटी के साथ खाने का स्वाद बेहद पसंद किया जाता है। महाबलेश्वर में पर्यटकों को खाने में बहुत कुछ स्पेशल, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक चीजें मिलती हैं।

महाबलेश्वर यात्रा पर जाते समय यात्रा सुझाव

  • सुबह और शाम तापमान में कुछ ठंडक रहने की वजह से हल्की पतली जैकेट या शॉल साथ रखें। 
  • लंबी यात्रा या ट्रेकिंग के लिए आरामदायक और उपयुक्त फुटवियर कैरी करें। 
  • झीलों मे तैरने के लिए स्विम कॉस्ट्यूम कैरी करें। 
  • यात्रा के लिए जाते समय टॉयलेट्रीज के साथ ही कीट और धूप से बचाव के लिए कोई क्रीम या दवाई साथ रखें
  • आवश्यक रेगुलर दवाईयां और अन्य जरूरी उपकरण जैसे टॉर्च, पावर बैंक और कैमरे की अतिरिक्त बैटरी कैरी कर सकते हैं। 
  • महंगी वस्तुओं को यात्रा के दौरान न लेकर चलें और जरूरत का ही सामान रखें। 
  • स्थानीय मंदिरों और संस्कृतियों का सम्मान करें और कही पर भी गन्दगी न फैलाएं। 

महाबलेश्वर में करने योग्य गतिविधियां

  • समुद्र तल से करीब 4500 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस स्थान पर बहुत सारी रोचक गतिविधियो ंका आनंद ले सकते हैं, महाबलेश्वर में आप कई सारे पर्यटन स्थल जैसे आर्थर सीट, प्रतापगढ किला, लिंगमाला फॉल, सनसेट प्वांइट, सनराइज प्वाइंट, हाथी सिर बिंदु और एल्फिन्स्टन प्वाइंट आदि क्षेत्रों को एक्सप्लोर कर सकते हैं। 
  • महाबलेश्वर में शॉपिंग प्रेमियो के लिए काफी कुछ है जहां वे हस्तनिर्मित लकड़ी के बने उत्पाद, कोल्हापुरी चप्पलें, चमड़े की वस्तुएं, शरबत और मसाले खरीद सकते है। 
  • स्ट्रॉबेरी फार्मों, कोहरे से ढकी घाटियों और ब्रिटिशकालीन आकर्षणों को निहारते हुए यहा आप नौका विहार और घुड़सवारी का आनंद ले सकते हैं। 
  • आर्थर सीट पर गहरी घाटियों और कोंकण क्षेत्र के आश्चर्यजनक दृश्य देख सकते हैं जिसमें ऊपर से फेंकी गई हर चीज तैरती हुई प्रतीत होती है। 
  • शिवसागर झील में कयाकिंग और बोटिंग का आनंद लेने के साथ ही जंगल ट्रेकिंग और कैम्पिंग करते हुए स्थानीय संस्कृति को समझ सकते हैं।

महाबलेश्वर कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग से

  • महाबलेश्वर पहुंचने के लिए पुणे एयरपोर्ट पर पहुंच सकते हैं जहां आप भारत के किसी भी एयरपोर्ट से यहां का सफर कर सकते हैं।

रेल मार्ग से

  • महाबलेश्वर जाने के लिए रेल मार्ग थोड़ा असुविधाजनक हो सकता है। महाबलेश्वर से करीब 60 किमी दूरी पर वाथेर रेलवे स्टेशन है, वाथेर पहुंचने के लिए आपको मुंबई या पुणे से रेल सफर कर सकते हैं।

सड़क मार्ग से

  • महाराष्ट्र में महाबलेश्वर तक पहुंचने के लिए पुणे, सतारा, कोल्हापुर आदि स्थानों से महाबलेश्वर जाने के लिए रोज कई बसें जाती रहती हैं। वहां तक जाने के लिए आप सीधे मुंबई से महाबलेश्वर तक जाने के लिए बस या टैक्सी/कैब की सुविधा ले सकते हैं

निष्कर्ष

मुंबई और पुणे से नजदीक यह हिल स्टेशन अपनी तरह का खास स्टेशन है जहां सर्दियो के दौरान जाना सबसे अधिक लुभाता है। खट्टे मीठे स्वाद और मनमोहक मंदिरों की आध्यात्मिकता की खूबसूरती से सराबोर इस हिल स्टेशन की छटा निराली है। अद्भुत अनुपम और अद्वितीय छवि दर्शाती इस जगह की हरी भरी वादियों, खूबसूरत घाटियों, पक्षियो की चहचहाहट और जलप्रपातों के भव्य दर्शनों से अभिभूत होने का अपना ही आनंद हैं, जिसकी प्राकृतिक खूबसूरती भाव विभोर करती है। महाबलेश्वर की शानदार प्राकृतिक सुंदरता को देखकर इसकी ऐतिहासिक और मार्मिक विशेषताओं का स्वयं आभास कर सकते हैं।

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