- Jan 07, 2026
भारत विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का देश है जहां हर पर्व के प्रमुख विशेष मौलिक कारण है। प्रकृति द्वारा प्रदत्त उपहारों के लिए कृतज्ञता जताते इन त्यौहारों की वास्तविकता भारत देश में अलग ही रूप में देखने को मिलती है। ऐसे ही त्यौहारों में से एक मकर संक्रांति का पर्व अपनी विशेष उपस्थिति से जन जन के मन को आल्हादित करता है। इस पर्व को मनाने का मुख्य कारण सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करना है, वह समय जब सूर्य पृथ्वी से अपनी दूरी कम करने की शुरूआत करता है और कड़कड़ाती सर्दी से राहत मिलने का क्रम शुरू हो जाता है। इस त्योहार को पूरे भारत में बहुत जोरों शोरों और उल्लास से मनाया जाता है, जहां इसके मनाने के ढंग और नाम के पीछे कई विविधताएं देखने को मिलती हैं, आज इस आर्टिकल में हम आपको भारत में इन प्रमुख जगहों के बारें में बताने जा रहे हैं जहां मकर संक्रांति से जुड़ी कई आकर्षक विशेषताएं आपका इंतज़ार कर रही हैं।
मकर संक्रांति 2026 कब मनाई जाएगी।
आपने गौर किया होगा कि मकर संक्रांति की तिथि को लेकर हमेशा ही 14 या 15 जनवरी का संशय देखा गया है। साल 2026 में मकर संक्रांति की तिथि 14 या 15 जनवरी में क्या होगी आइए देखते हैं। हर 70-72 सालों बाद मकर संक्रांति की तिथि में एक दिन की वृद्धि हो जाती है, यानी जब 19 वीं सदी थी तब तारीख 14 जनवरी थी लेकिन 20 वीं सदी की शुरूआत होने से पहले यह तारीख 15 जनवरी हो गई। इस बात का आशय है कि जब 18वीं सदी रही होगी तब मकर संक्रांति की तिथि 13 जनवरी रही होगी। इसलिए साल 2026 में मकर संक्रांति की तिथि 15 जनवरी ही है।
क्यों आगे बढ रही है मकर संक्रांति की तिथि
- अंग्रेजी वर्ष में साल पूरे 365 दिन का माना जाता है जब कि सौर वर्ष अनुसार एक साल 365 दिन व 6 घंटे का होता है। इस तरह से हर साल 6 घंटे बच जाते हैं जिसे लीप ईयर में व्यवस्थित किया जाता है। इसी वजह से हर 70-72 सालो बाद सूर्य के राशि परिवर्तन के समय में धीरे धीरे बदलाव होने से मकर संक्रांति की तिथि एक दिन आगे बढ जाती है।
प्रमुख 8 भारतीय अविस्मरणीय जगहें : जहां मकर संक्रांति त्यौहार की दिखती है विशेष झलक
1. प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी प्रयागराज में वैसे तो इस समय हिंदू माघ महीने की वजह से अलग ही रौनक देखने को मिलती है लेकिन मकर संक्रांति की वजह से इस दिन माघ महीने की महत्ता और श्रद्धालुओं की भीड़ कई गुना बढ जाती है। परम पावन गंगा नदी के जल में स्नान करने की विशेष परंपरा है इसके अलावा इस दिन दान पुण्य का विशेष महत्व बताया जाता है जिसमें तिल, गुड़, मूंगफलियां और कंबल दान किए जाते हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को यहां खिचड़ी त्यौहार से भी जाना जाता है, जहां इस दिन भोजन में विशेष रूप से खिचड़ी खाने और खिलाने से लेकर वृहद स्तर पर दान भी की जाती है।
प्रमुख आकर्षण
- मकर संक्रांति को खिचड़ी पर्व नाम से जाना जाता है।
- 15 जनवरी को सुबह से ही गंगा घाटों की शोभा और श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखते बनती है। भोर में ही गंगा स्नान कर ईष्टजनों को प्रणाम और दान की परंपरा की शुरूआत हो जाती है।
- इस दिन पवित्र माघ महीने का दूसरा महत्वपूर्ण शाही स्नान माना जाता है। जगह जगह भोजन भंडारे आदि कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। दुनिया भर के साधुओं और संत समाज की उपस्थिति देखने का पवित्र अवसर प्राप्त होता है।
कैसे जाएं
हवाई मार्ग से
- प्रयागराज जाने के लिए नजदीकी घरेलू हवाई अड्डा बमरौली है जो प्रयागराज से करीब 12 किमी की दूरी पर स्थित है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई अड्डे लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट, वाराणसी व अमौसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, लखनऊ है, जिनकी प्रयागराज से दूरी क्रमशः 150 किमी व 200 किमी है। हवाई अड्डो से प्रयागराज तक की दूरी स्थानीय वाहन, बस या टैक्सी से तय कर पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- प्रयागराज उत्तर मध्य रेलवे जोन का हेड क्वार्टर है जहां प्रयागराज जंक्शन मुख्य रेलवे स्टेशन है। यहां प्रमुख आठ रेलवे स्टेशनों की मौजूदगी है जहां भारत के लगभग सभी प्रमुख शहरों से रेल यातायात सुलभ है।
सड़क मार्ग से
प्रयागराज मे विभिन्न जगहों से राष्ट्रीय राजमार्गों की सुविधा उपलब्ध है जिसका जुड़ाव भारत के कई शहरों से है।
- दिल्ली से कोलकाता - एनएच 2
- प्रयागराज से म0प्र0 मंगवान - एनएच 27
- प्रयागराज से राजस्थान पिन्द्वारा - एनएच 76
- प्रयागराज से अयोध्या को जोड़ता हुआ एनएच 96 फैजाबाद के एनएच 28 से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा प्रयागराज में तीन बस अड्डे हैं जहां अंतरराज्यीय बसों के माध्यम से देश के किसी भी प्रमुख शहर से पहुंच सकते हैं।
2. वाराणसी, उत्तर प्रदेश
वाराणसी, भगवान शंकर और मां गंगा की पवित्र नगरी कहलाती है जहां मोक्ष और परमानंद की प्राप्ति होती है। कहते हैं भगवान शिव के त्रिशूल पर बसी यह नगरी प्रलय काल जन्म जन्मांतर तक भी ऐसे ही बसी रहेगी। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर माघ मेले की धूम यहां भव्य स्तर पर भी देखने को मिलती है। साल 2026 में मकर संक्रांति पर लाखों की संख्या में श्रद्धालुओ के आने का अनुमान है। इस दौरान भक्त गंगा नदी में पवित्र डुबकी लगाने के साथ ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन करते हैं।
प्रमुख आकर्षण
- वाराणसी में मकर संक्रांति यानी खिचड़ी पर्व के इस त्यौहार पर भव्य पंतगबाजी का उत्सव देखने को मिलता है।
- तिल के लड्डूओं और विभिन्न पकवानों के स्वादिष्ट स्वाद को चखने के साथ ही कई जगहों पर गरमागरम खिचड़ी का प्रसाद पाने का अवसर प्रदान करता है, जिसकी महत्ता सर्दियों में शरीर को गर्म रखने से जुड़ी हुई है।
- काशी के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और रंगारंग धार्मिक प्रस्तुतियों का आयोजन देखने का अवसर प्राप्त होता है।
कैसे जाएं
हवाई मार्ग से
- वाराणसी बाबतपुर में घरेलू व अंतरराष्ट्रीय स्तर का लाल बहादुर शास्त्री एयरपोर्ट है जिसकी वाराणसी से दूरी लगभग 22 किमी है। इसे आप स्थानीय वाहन से आसान से तय कर पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- वाराणसी में रेल यातायात बेहतर है जहां वाराणसी जंक्शन प्रमुख रेलवे स्टेशन है जहा देश के प्रमुख शहरों से ट्रेन वाराणसी आती जाती हैं।
सड़क मार्ग से
- वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्गों से भली भांति कनेक्टड है जहां दिल्ली से कोलकाता के मध्य एनएच 2, एनएच 7- कन्याकुमारी और एनएच 29 गोरखपुर से जुड़े होने के कारण सड़क मार्ग से वाराणसी पहुंच सकते हैं।
3. अहमदाबाद, गुजरात
मकर संक्रांति पर्व की धूम का असली आनंद तो अहमदाबाद में दिखता है जब आकाश में चारों ओर उड़ती रंग बिरंगी पतंगों के आकर्षण और उत्तरायण की जुगलबंदी का अवसर हर किसी के मन को मोह लेता है। कई दिनों के बाद छतों पर दिखती सूर्य की चमक रोशनी और विभिन्न स्थानीय पकवानों की शानदार खुशबू मकर संक्रांति की रौनक कई गुना बढा देती है। आज के दिन होने वाली पतंगबाजी को यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली हुई है जिसका सजीव आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग अहमदाबाद का रूख करते हैं। अहमदाबाद में आज के दिन स्थानीय व्यंजनों में तिल और मूंगफली की चिक्की,गजक,जलेबी के साथ ही विशेष व्यंजन उंधियू जिसमें शकरकंद और फलियों सहित मिक्स्ड सब्जी का स्वाद मकर संक्रांति पर कभी न भूलने वाला स्वाद प्रदान करता है।
प्रमुख आकर्षण
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पतंगबाजी का महोत्सव आयोजन होता है जिसमें दर्शक और कलाकार बहुत दूर दूर से प्रतिभाग करते हैं।
- मकर संक्रांति को गुजरात में उत्तरायण पर्व के नाम से जाना जाता है।
- यहां होने वाले अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बुक में भी दर्ज है, जिसमें साल 2012 में 42 देशों ने भागीदारी की थी।
कैसे जाएं
हवाई मार्ग से
- अहमदाबाद जाने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा सरदार वल्लभ भाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जिसकी शहर के प्रमुख केंद्र से दूरी लगभग 12 किमी है।
रेल मार्ग से
- रेल मार्ग से अहमदाबाद पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन अहमदाबाद जंक्शन है जहां से आप आसानी से स्थानीय वाहनों की मदद से अहमदाबाद की नियत जगहों तक घूम सकते हैं। अहमदाबाद जंक्शन को कालूपुर रेलवे स्टेशन नाम से भी जानते हैं इसके अलावा यह शहर का एंट्री प्वाइंट नाम से भी जाना जाता है।
सड़क मार्ग से
- सड़क रास्ते से अहमदाबाद जाने के लिए आप गुजरात और आसपास के प्रमुख शहरों से आप आसानी से अहमदाबाद पहुंच सकते हैं। विभिन्न शहरो जैसे पुणे, मुंबई, नई दिल्ली व लखनऊ से अहमदाबाद की दूरी क्रमशः 650 किमी, 520 किमी, 900 किमी व 1170 किमी है।
4. जयपुर, राजस्थान
राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में मकर संक्रांति की झलक रंगीन पतंगबाजी के शानदार नजारों से शोभाएमान यहां के स्वच्छ नीले आसमान की रौनक और मनमोहक धूप की उपस्थिति में मनोरंजन करते लोगों की मौजूदगी वृहद स्तर पर सभी को यहां के प्रति और भी ज्यादा आकर्षित करती है। माना जाता है कि जयपुर में इस पर्व के दौरान पतंगबाजी की कला यहां के महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय द्वारा लखनऊ से लाई गई थी, उस समय लोकप्रियता की वजह से यहां पतंगाखाने नाम से नया विभाग भी बनाया गया था। जिसका परिणाम है कि इस पर्व पर यहां वृहद स्तर पर कई कारखानों में पतंग बनाने का काम जोरो शोरों पर चलता है।
प्रमुख आकर्षण
- राजसी समय में मकर संक्रांति के दिन तुक्कलनुमा पतंगों को हवा में उड़ाकर उनकी डोर को किसी मजबूत खूटे में बांध दिया जाता था। ऐसे में कई बार जब पतंग की डोर टूट जाती थी तो पतंग को लाने के मकसद से यहां घुड़सवार दौड़ाए जाते थे।
- जयपुर के महाराजा स्वयं भगवान गोविंद देव के आशीर्वाद को लेने के बाद पतंग उड़ाने की प्रथा का शुभारम्भ किया करते थे।
- मकर संक्रांति के दिन यहां स्थानीय व्यंजन फेनी बहुत प्रसिद्ध और प्रचलित है जिसमें तिल के लड्डू और गजक के साथ फेनी जिसके स्वाद को ज्यादातर गर्म दूध या चीनी के घोल में डुबोकर लिया जाता है।
- व्यंजनों में चावल उड़द की खिचड़ी के अलावा दाल बाटी चूरमा और गरमागरम पकौड़े भी खाए जाते हैं।
कैसे जाएं
हवाई मार्ग से
- हवाई रास्ते से जयपुर जाने के लिए यहां प्रमुख जयपुर इंटरनेशनल हवाई अड्डा है जहां आप आसानी से पहुंच सकते हैं। जयपुर के सांगानेर में बना यह एयरपोर्ट शहर के मुख्य केंद्र से लगभग 13 किमी दूरी पर है, जिसे भारत के सर्वोत्तम हवाई अड्डों में से एक माना जाता है।
रेल मार्ग से
- राजस्थान की राजधानी जयपुर रेल मार्ग से पहुंचने के लिए प्रमुख रेलवे स्टेशन जयपुर रेलवे स्टेशन है जहां आप देश के प्रमुख शहरो से उपयुक्त रेल सेवा माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- राज्य के प्रमुख शहर होने की वजह से जयपुर कई राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है जहां दिल्ली से पहुंचने के लिए दिल्ली जयपुर नेशनल हाईवे का चयन कर पहुंच सकते हैं। नेशनल हाईवे 8, 11 और 12 के माध्यम से जयपुर कई राज्यों के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।
5. गुवाहाटी, असम
जनवरी माह में मनाए जाने वाले मकर संक्रांति पर्व की अनोखी प्रथा, रीति रिवाजों और परंपराओ को दर्शाता माघ बिहू असम का प्रमुख त्यौहार है जिसे यहां बेहद अलग ढंग से मनाया जाता है। शीतकाल की लंबी सर्द रातों के साथ ही फसल कटाई के अंत का प्रतीक है जहां ज़मीनी जुड़ाव और प्रकृति की उपयोगिता को साकार करता बिहू उत्सव सिर्फ जश्न ही नहीं वरन् ईश्वर को धन्यवाद देने का दिन है। सिर्फ कृषि क्षेत्रों में ही नहीं अपितु शहरों में भी बिहू उत्सव, पारंपरिक वेशभूषा में सामूहिक रूप से विशेष नृत्य कला का अद्भुत प्रदर्शन करता है।
प्रमुख आकर्षण
- असम में मकर संक्रांति त्यौहार को माघ बिहू या भोगाली बिहू नाम से पुकारा जाता है। यह जश्न नव वर्ष के आगाज़ और पुरानी फसल के सफलतापूर्वक पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
- माघ बिहू के दौरान मेजिस नाम से अलाव जलाए जाते हैं, जिनमें एक रात पहले सामूहिक रूप से बनने वाले भोजन व्यवस्था में प्रयुक्त लकड़ी, बांस और घास का प्रयोग किया जाता है। इसके चारों ओर असमिया भोजन का स्वाद चखते हैं।
- असम के कुछ स्थानों पर बैलों की लड़ाई प्रतियोगिताओं के साथ अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
- असमिया संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित करते बिहू नृत्य, असम के लोकनृत्य के रूप में प्रतिष्ठित है।
कैसे जाएं
हवाई मार्ग से
- हवाई रास्ते से गुवाहाटी पहुंचने के लिए शहर के मुख्य केंद्र से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित गुवाहाटी एयरपोर्ट की मदद से गुवाहाटी घूमने पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- असम की राजधानी गुवाहाटी तक रेल सुविधा उपलब्ध है जो उत्तर पूर्वी भारत का प्रमुख रेलवे स्टेशन माना जाता है। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से स्थानीय वाहन द्वारा आप आराम से घूमने जा सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- गुवाहाटी राष्ट्रीय और राज्यीय मार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है जहां आप असम और नजदीकी राज्यों को आराम से घूमने जा सकते हैं।
6. मदुरै, तमिलनाडु
संपूर्ण भारत देश में मकर संक्रांति की धूमधाम विविध रूपों में देखने को मिलती है। तमिलनाडु में मकर संक्रांति पर्व को चार दिवसीय पोंगल उत्सव रूप में मनाया जाता है। जिसमें मकर संक्राति की तुलना दूसरे दिन के पोंगल उत्सव थाई पोंगल से मानी जाती है, यानी यहां इस उत्सव की धूम मकर संक्रांति के एक दिन पहले से लेकर दो दिन बाद तक मनाई जाती है। चार दिवसीय पोंगल उत्सव में क्रमशः भोगी पोंगल, थाई पोंगल, माट्टू पोंगल और कानुम पोंगल नाम से जाना जाता है। इस त्यौहार में सिर्फ कृषि ही नहीं बल्कि मवेशियों को भी सम्मान और धन्यवाद दिया जाता है, जिनके लिए उत्सव का तीसरा दिन यानी माट्टू पोंगल निर्धारित है, इस दिन गायों व बैलों के साथ अन्य मवेशियो को भी खेती में सहयोग देने के लिए कृतज्ञता व्यक्त की जाती है जिसमें उन्हें स्नान आदि करा तैयार कर नव पुष्पों की माला और घंटियो से सजाया जाता है और अंतिम कानुम पोंगल पर पारंपरिक रूप से एक दूसरे को उपहार और साथ रहकर समय बिताते हुए त्यौहार का आनंद लेते हैं।
प्रमुख आकर्षण
- तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल कहकर मनाया जाता है जिसके पीछे कारण सूर्य के उत्तरायण और शीतकालीन फसलों के अंत के साथ नई फसल की शुरूआत होना माना जाता है।
- तमिलनाडु में पोंगल उत्सव चार दिवसीय प्रमुखता के साथ आयोजित किया जाता है जिसके प्रत्येक दिन को विभिन्न रूपों के पोंगल और खासियत के साथ मनाया जाता है।
- थाई पोंगल पर यहां विशेष पकवान शक्करई पोंगल जो चावल दूध और गुड़ से बनने वाला मीठा पकवान है, मिट्टी के नए बर्तन में पकाए जाने वाले इस पकवान की विशेषता है कि इसे बर्तन से बाहर निकलने तक उबाला जाता है, जिसका आशय भविष्य में आने वाली समृद्धि और संपन्नता से संबंद्ध माना जाता है।
कैसे जाएं
हवाई मार्ग से
- मदुरै पहुंचने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निकटतम हवाई अड्डा मदुरै है जहां से तमिलनाडु की कई प्रमुख जगहो तक जाया जा सकता है। हवाई अड्डे से मदुरै मुख्य केंद्र की दूरी लगभग 12 किमी है जिसे आप स्थानीय वाहनो सें तय कर सकते हैं।
रेल मार्ग से
- तमिलनाडु का मदुरै शहर रेल सेवा के माध्यम से जुड़ा हुआ है जहां यह शहर दक्षिणी रेलवे का मुख्य केंद्र भी है। मदुरै रेलवे स्टेशन के माध्यम से आप यहां पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- सड़क रास्ते से मदुरै की पहुंच बेहतर है जहां नेशनल और स्टेट हाईवे से यहां जाने के लिए साधन हमेशा उपलब्ध रहते हैं। मदुरै में दो बस अड्डे हैं जिनके नाम एमजीआर बस स्टैंड व आरापलयम बस टर्मिनस है। इन टर्मिनसों के माध्यम से आप आसानी से मदुरै तक आवागमन कर सकते हैं।
7. अमृतसर, पंजाब
पंजाबी संस्कृति और संपन्नता को प्रदर्शित करता मकर संक्रांति पर्व बहुत हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। पंजाब में मकर संक्रांति त्यौहार एक दिन पहले लोहड़ी रूप में और मकर संक्रांति माघी रूप में जानी जाती है। जहां लोहड़ी पर्व अलाव जलाकर उसमें रेवड़ी, गुड़ और लड्डुओं की आहुति देते हुए चारों ओर नाचते गाते हुए मनाया जाता है। ढोल ताशे की धुनों पर थिरकना और स्वादिष्ट व्यंजनों को स्वाद चखते हुए लोहड़ी पर्व की चमक सिर्फ अमृतसर ही नहीं वरन् पूरे पंजाब को प्रकाशमय करती है। पूरे सिख समुदाय के लिए मकर संक्रांति या माघी पर्व बेहद महत्वपूर्ण त्यौहार है।
प्रमुख आकर्षण
- मकर संक्रांति यानी माघी मेला पर हरमिंदर साहिब यानी स्वर्ण मंदिर की स्थापना की गई थी, इस वजह से पूरे अमृतसर में उत्सव की चहल पहल और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। इसके अलावा चालीस मुक्तों की याद मे बहुत बड़े और भव्य मेले का आयोजन देखने को मिलता है।
- मकर संक्रांति के एक दिन पहले लोहड़ी पर्व की शाम को बेहद उत्साह और पारंपरिक वेशभूषा में लोकगीतों और पंजाबी नृत्यों के साथ अलाव के चारो ंओर घूमते हुए तिल गुड़ मक्के से बनी वस्तुओ को अर्पित कर श्रद्धा और धन्यवाद देते हुए मनाया जाता है।
- बसंत आगमन की खुशी को प्रदर्शित करता यह त्यौहार पंजाब में नई फसल की शुरूआत का शानदार प्रतीक माना जाता है।
कैसे जाएं
हवाई मार्ग से
- अमृतसर में प्रमुख रामदास अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जहां से शहर के मुख्य केंद्र की लगभग दूरी 11 किमी है जहां आप घरेलू और इंटरनेशनल स्तर की उड़ानों द्वारा पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- रेल माध्यम से अमृतसर पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन अमृतसर ही है जहां आप देश के प्रमुख शहरों से रेल द्वारा पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- अमृतसर तक सड़क माध्यम की पहुंच बेहतर है जहां आप उत्तर भारत के कई शहरो जैसे दिल्ली, चंडीगढ, देहरादून, ऋषिकेश, जम्मू, हिमाचल प्रदेश के शहरों से सीधी बस या स्वयं की कार द्वारा आसानी से पहुंच सकते हैं।
8. कोलकाता, पश्चिम बंगाल
कोलकाता में मकर संक्रांति का यह पर्व पौष पारबोन या पौष संक्रांति नाम से भी जाना जाता है जहां यह पर्व अपनी विशेष स्थानीय रीति रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है। दरअसल मकर संक्रांति के दिन यहां पश्चिम बंगाल में बंगाल की खाड़ी के पास विशाल और भव्य गंगासागर मेला का आयोजन होता है जो साल में सिर्फ एक बार ही लगता है जहां कपिल मुनि के आश्रम में पूजा अर्चना करने के साथ ही स्नान दान का विशेष महत्व है। कोलकाता से गंगासागर तीर्थ जाने के लिए नाव, मोटर बोट आदि से ही जाया जाता है। इसके अलावा पूरे कोलकाता में गंगास्नान की विशेष महत्ता है जहां ब्रहम मुहूर्त से ही श्रद्धालु स्नान के लिए एकत्र हो जाते हैं। सूर्य देव का अर्घ्य देने के अलावा तिल गुड़ चखते हैं और इन्हीं सब वस्तुओं का दान पुण्य आदि करते हैं।
प्रमुख आकर्षण
- मकर संक्राति पर लगने वाला गंगासागर मेला तीर्थ हिंदू धर्म के श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास और पवित्र स्थान होता है। जिसके बारें में कहावत है कि ‘‘सारे तीर्थ बार बार, गंगासागर एक बार’’’ यानी पूरे जीवनकाल में यदि सिर्फ एक बार भी गंगासागर स्नान और तीर्थयात्रा करने से मोक्ष मिल जाता है।
- मकर संक्रांति के ही दिन कपिल मुनि के आश्रम में यहां राजा सगर के मृत हजार पुत्रों की आत्माओं को गंगाजल की वजह से मोक्ष की प्राप्ति हुई थी इसलिए तब से आज के दिन यहां डुबकी लगाने का विशेष महत्व है।
- पश्चिम बंगाल में इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है और मुख्य रूप से ताजी कटी हुई धान और खजूर से बने गुड़ का इस्तेमाल कर ताजी फसल के चावल, नारियल और दूध से बनी ‘‘पुली पीठा’’ मिठाई तैयार की जाती है।
कैसे जाएं
हवाई मार्ग से
- कोलकाता पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट कोलकाता है। जहां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर की उड़ानें संचालित की जाती हैं। शहर के मुख्य केंद्र से एयरपोर्ट की दूरी लगभग 16.5 किमी है।
रेल मार्ग से
- पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता रेल सेवा के माध्यम से पहुंचने के लिए कोलकाता में स्थित दो प्रमुख रेलवे स्टेशनों हावड़ा जंक्शन और सियालदह पहुंचकर कोलकाता की सैर कर सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- कोलकाता पहुंचने के लिए सड़क विकल्प राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से जुड़ा हुआ है जहां एनएच 12 और एनएच 16 कोलकाता से होते हुए गुजरते हैं।
निष्कर्ष
मकर संक्रांति त्यौहार पूरे भारत देश में शुभता के आगमन का प्रतीक है जहां पुरानी फसल के अंत से लेकर नई फसल की शानदार बुवाई का आगाज़ करता यह पर्व देश के कोने कोने में विभिन्न नामों, रीति रिवाजों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। उल्लसित माहौल और नवपल्लवों की शोभा पूरे वातावरण को गुंजित व प्रकाशमय करती हुई प्रकृति को बसंती रंग में सराबोर करने की तैयारी पर होती हैं। ऐसे में भारत में मकर संक्रांति की रौनक उत्तर प्रदेश में खिचड़ी, गुजरात में उत्तरायण, पंजाब में माघी, असम में बिहू, पश्चिम बंगाल में पौष पारबोन और दक्षिण में पोंगल नाम से प्रकृति के कण कण में एकता और समरसता के संदेश का संचार करती हुई त्यौहारी विशेषताओं को और भी ज्यादा शानदार बनाती है, जहां पर्यटन का आनंद सिर्फ खूबसूरती तक सीमित न होकर स्थानीय संस्कृतियों के अनछुए पहलुओं को भी उजागर करता है।
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