• Nov 26, 2025

दिसम्बर में उत्तर पूर्व भारत शानदार और करिश्माई रूप से बदल जाता है। कोहरे से ढकी पहाड़ियां, घनी घाटियां और रंग बिरंगी संस्कृतियों के शीतकाल मे जादुई अनुभव प्रदान करता है। दिसम्बर में उत्तर पूर्व में घूमने के लिए शानदार जगहों में हर किसी के लिए कुछ न कुछ है, चाहे आप प्रकृति प्रेमी हों या रोमांचक गतिविधियों के शौकीन, विहंगम परिदृश्यों की चाहत रखते हों या आरामदायक विश्राम स्थल की खोज में हों। अरूणाचल के बर्फीले वातावरण से लेकर सिक्किम की वादियों तक, मेघालय के घने वनों व जीवंत पुलों से लेकर असमिया चाय बागानों तक हर हिस्सा बहुत कुछ अद्भुत और प्रकृति से जुड़े यादगार अनुभवों को प्रदान करता है। 

दिसम्बर में पूर्वोत्तर भारत की यात्रा खास क्यों है? 

शानदार मौसमः सुहावने मौसम की सौगात प्रदान करता यह मौसम अधिकांशतः 9 डिग्री सेल्सियस से लेकर 23 डिग्री सेल्सियस तक रहता है जिसमें बर्फबारी सिर्फ अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होती है। कहीं हल्की धूप के साथ दर्शनीय स्थलों की यात्रा यादगार हो जाती है। 

उत्सवः क्रिसमस, नये साल के जश्न, हॉर्नबिल महोत्सव और तवांग महोत्सव की रौनक पहाड़ी क्षेत्रों को और ज्यादा सजीव और शानदार बनाते हैं। 

बेहतर रोड ट्रिप व स्वच्छ आसमानः दिसम्बर के समय में साफ आसमान के चलते सड़क यात्रा बेहतर और विंहगम नजारों के साथ आकर्षक लगता है। पहाड़ियों और घाटियों के मध्य ड्राइव करना आनंद प्रदान करता है। 

मानसूनी हरियाली की झलकः बारिश के सीजन के बाद इन दिनों यहां हरी भरी वसुन्धरा के आंगन बेहद ही आकर्षक लगते हैं इसके अलावा नदियों और झीलों की शोभा अपने भरपूर भराव के कारण सीनरी जैसी सुंदरता बिखेरते हैं। 

कम पर्यटक शांत वातावरणः पूर्वोत्तर भारत का खुशहाल वातावरण अन्य मैदानी इलाकों के विपरीत पर्यटकों की पहुंच से दूर रहता है, इस वजह से यहां माहौल शांतिपूर्ण और सुकून प्रदान करने वाला रहता है। 

पूर्वोत्तर भारत दिसम्बर में घूमने के लिए अनोखा, शानदार और जीवंत पर्यावरण लिए सुखद और नर्म एहसास प्रदान करने वाला स्थान है।

दिसम्बर में पूर्वोत्तर भारत के राज्यवार तापमान अवलोकन

राज्य औसत तापमान डिग्री सेल्सियस मौसम का अनुभव ख़ास बात
त्रिपुरा 15-27 दिन गर्म, रातें सर्द दर्शनीय स्थलों की सुखद यात्रा 
सिक्किम 2-11 अत्यधिक सर्द कभी कभी बर्फबारी स्नोफॉल और पहाड़ों के शौकीनो के लिए सर्वश्रेष्ठ 
अरूणाचल प्रदेश 5-15 ऊंचाई पर सर्दी और बर्फबारी सर्दियों के लिए गर्म कपड़े जरूरी 
नागालैण्ड 9-19 मौसम में शुष्कता व दोपहर में धूप त्यौहारी महोत्सव के लिए उपयुक्त मौसम 
मेघालय 10-20 सुकून भरा स्पष्ट मौसम क्रिसमस त्यौहार की धूम और जीवंत मौसम की जुगलबंदी
मणिपुर 8-18 हल्की ठंड झीलो और पार्क के आकर्षण 
मिजोरम 12-22 सर्द हवाएं शीर्ष पर उत्सवी रौनक 
असम 12-26 मौसम सुखद और नमी में कमी वन्य संस्कृति के लिए उत्तम मौसम 

पूर्वोत्तर भारत की घूमने लायक जगहें 

1. अरूणाचल प्रदेशः भारत की उगते सूरज की भूमि के नाम से मशहूर है जो आर्किड राज्य भी कहलाता है। दिसम्बर के समय यह राज्य खूबसूरती से भी बढकर अद्भुत जगह में बदल जाता है। भारत के उत्तरी भाग में स्थित इस राज्य की भौगोलिक सीमाएं और उनकी विशेषताएं बर्फ की खूबसूरती से निखर जाती है। जिसमें पहाड़ी और घाटियों पर छाई श्वेत बर्फ के नज़ारे पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं। प्राकृतिक खूबसूरती और संतुलन के साथ यहां के साहसिक और सांस्कृतिक पर्यटन की खूबियां आकर्षित करती हैं। यहां की दर्शनीय खूबसूरती, रंग बिरंगे सास्ंकृतिक उत्सव और सर्दियों में एन्जॉए करने वाली ढेरों साहसिक गतिविधियों के आकर्षण अरूणाचल प्रदेश को सर्दियों में अनोखा आकर्षण प्रदान करती है। 

प्रमुख आकर्षणः अरूणाचल प्रदेश के बास्कॉन उत्सव का आनंद लें। गोरीचेन बेस कैंप और ईगल्स नेस्ट ट्रेकिंग का अनुभव सहेजें। नामदफा राष्ट्रीय उद्यान, पक्के वन्यजीव अभयारण्य, भालुकपोंग और अन्य आकर्षणों का दौरा करें। 

करने योग्य गतिविधियांः ऊंचे स्थानों में होने वाली बर्फबारी से स्कीइंग गतिविधि एन्जॉए कर सकते हैं। यहां मध्य ऊंचाई वाले क्षेत्र जीरो, अलोंग है जहां इन गतिविधियां का आनंद ले सकते हैं। प्राचीन मठों की शांति, बर्फ से ढके पहाड़ों पर ट्रेकिंग और कुछ अन्य गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। यहां मौजूद गर्म पानी के झरने में उपचारात्मक शक्तियों का लाभ ले सकते हैं जो दिरांग और तवांग में हैं। मांउटेन बांइकिग, कैंपिंग भी कर सकते हैं। 

मुख्य व्यंजनः पुता, खारजी, ब्याक, ब्रेसी, पो चा, बांस की टहनी, थुकपा आदि व्यंजनों का स्वाद चख सकते हैं। 

कैसे पहुंचे 

असम के उत्तरी लखीमपुर जिले में लीलाबाड़ी एयरपोर्ट है जहां से अरूणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर करीब 70 किमी दूर है। इसके अलावा असम के तेजपुर और गुवाहाटी एयरपोर्ट से अंतर्राष्ट्रीय स्तर की यात्रा कर भी अरूणाचल प्रदेश घूमने जा सकते हैं। 

इसके अलावा असम के हरमुती रेलवे स्टेशन से ईटानगर लगभग 46 किमी दूर है जहां आप स्थानीय वाहनों के माध्यम से पहुंच सकते हैं।

सभी प्रमुख शहरों से इंटरबस सेवाएं आसपास के राज्यों और एनएच 15, 52 और 415 से आप पूर्वोत्तर भारत को अपनी कार या निजी वाहनों से भी घूम सकते हैं। 

2. नागालैण्डः सर्दियां के मौसम में हॉर्नबिल महोत्सव नागालैण्ड की पहचान बन जाता है। जहां आप भी इस मनोरम आश्चर्यजनक अनुभव के लिए इस राज्य की यात्रा करने की योजना बना सकते हैं। फेक और त्रिस्तरीय झरनों, शिलोई, जूडु और तोत्सु वोझू झीलों और दोयांग व दिखू नदियों में ताजगी भरी हवा का आनंद लें। यहां के राष्ट्रीय उद्यान नटांगकी, खोनोमा, ट्रगोपान, सिंगफान, रंगापहाड़, फकीम और पुलिस बड़जे बहुत ही शानदार आकर्षण उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा कछारी खंडहर, जप्फू चोटी, कोहिमा युद्ध कब्रिस्तान, संग्रहालय, माउंट तियी, तुओफेमा गांव, लांगपांगकोग गुफाएं और हांगकांग बाजार विविधता आकर्षित करती है। 


प्रमुख आकर्षणः हार्नबिल महोत्सव जो संगीत, नृत्य, व्यंजनों और पांरपरिक कथाओं का जीवंत प्रदर्शन करता है। प्रेम, वीरता और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में ग्रेट हॉर्नबिल अपनी लोक प्रदर्शन, नागा कुश्ती और तीरंदाजी जैसे पांरपरिक खेल और आदिवासी प्रतियोगिताओं के साथ बेहद आकर्षित करता है। इसके अलावा किसामा हेरिटेज विलेज महोत्सव भी दिसम्बर में मनाया जाता है जिसमे अंतरजनजातीय के साथ ही नागा विरासत का संरक्षण भी करना है। 

करने योग्य गतिविधियांः ट्रेकिंग, कैपिंग और प्राकृतिक मौसम की खूबसूरती के साथ जनजातीय उत्सवों का भरपूर मनोरंजन करें। हाइकिंग रोमांचक गतिविधि भी एन्जॉए कर सकते हैं। 

मुख्य व्यंजनः सूअर का मांस, चावल, स्मोक्ड मीट और अकुनी व अनिशी जैसी किण्वित सामग्री से बनी कई सारे विकल्प मिलते है। स्मोक्ड पोर्क जिसमें बांस के अंकुरों या कड़वे बैंगन से बनाया जाता है और इसके साथ गल्हो जो चावल सब्जियों और मांस का मिश्रण है, खाया जाता है। नैप नांग डिश भी नागालैण्ड की प्रसिद्ध है जो काले चावल का हलवा है। 

कैसे पहुंचे 

नागालैण्ड घूमने के लिए आईएलपी की आवश्यकता होती है जिसके लिए आप ऑनलाइन या भारतीय प्रमुख शहरो से यह प्राप्त किये जा सकते है। नागालैण्ड जाने के लिए आप गुवाहाटी तक एयरपोर्ट, रेलवे या सड़क माध्यम से पहुंचकर आगे का सफर सड़क से तय कर पहुंच सकते हैं। गुवाहाटी से दीमापुर जाने में 8-10 घंटे और दीमापुर से कोहिमा जाने में लगभग 2-3 घंटे का समय लग सकता है। 

3. सिक्किमः भारत के उत्तर पूर्व में स्थित खूबसूरत पहाड़ी राज्य जो अपनी शानदार नैसर्गिक सुंदरता, ऊंचे पहाड़ों और सांस्कृतिक विरासतों के लिए जाना जाता है। यहां से आप कंचनजंगा के साथ ही पांच सबसे ऊंची चोटियों के नजारें देख सकते हैं। सिक्किम का मौसम दिसम्बर में बर्फबारी और अत्यधिक सर्दी लेकर आता है जब त्सोंगमो झील जम जाती है। नदियां झीलें अपनी बर्फ सी चमक से सभी को आकर्षित करती है। सिक्किम के बौद्ध मठ, दर्रे, झीलें और अद्भुत बाजारें अपनी संपन्न संस्कृति से पर्यटको को आकर्षित करते हैं। 
 

प्रमुख आकर्षणः गुरूडोंगमार झील जो दिसम्बर के मौसम में थोड़ी बहुत जम भी जाती है। नाथुला दर्रे की ऊंचाई को निहारें, युमथांग घाटी मे बर्फ के नजारें देखें, लाचुंग गांव की सांस्कृतिक विविधता समझें। रंवगला में बौद्ध मठों और पार्कों को देखें इसके साथ ही जुलुक, पेलिंग, गंगटोक और युकसोम नामची के आकर्षणों का अवलोकन करें। 

करने योग्य गतिविधियांः प्राकृतिक दृश्यो को निहारने के साथ ही यहां ट्रेकिंग, हाइकिंग और कैंपिग का अनुभव लें। बर्फ के पहाड़ों पर स्कीइंग गतिविधि भी कर सकते हैं 

मुख्य व्यंजनः थुकपा, सेल रोटी, थेकुंक, मोमोज, खाप्सी, वाचिपा, बांस करील करी, गुन्द्रुक, सिन्की, दाल भात, फंग्शापा जैसी कई व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं। 

कैसे पहुंचे 

सिक्किम पहुचने के लिए सबसे करीबी हवाई अड्डा पाक्योंग है जो गंगटोक से 35 किमी लगभग दूरी पर है। रेलवे माध्यम से नजदीकी रेलवे स्टेशन न्यू जलपाईगुडी है जो सिलीगुड़ी में है। यहां से बस या टैक्सी से गंगटोक जा सकते हैं। सिलीगुड़ी से गंगटोक तक जाने के लिए सार्वजनिक बसें टैक्सियां सड़क मार्ग से गंगटोक की सैर कराते हैं। 

4. असमः दिसम्बर में असम शांत और सजीव पलायन की खोज को साकार करता हुआ सर्दियों के आकर्षणों से रूबरू कराता है जहां हरी भरी हरियाली के परिदृश्य, साफ स्वच्छ नीला आसमान, शीतल हवाओं के झोंके असम को एक्सप्लोर करने को उत्साहित करते है। पूर्वोत्तर भारत का यह छिपा हुआ रत्न वन्यजीव, नदियां, नदी द्वीप माजुली और यहां मौजूद वैष्णव मठों की आध्यात्मिकता, असम के हरे भरे चाय बागान और इसके साथ ही ऐतिहासिक वास्तुशिल्प भव्य महल, मंदिर और समृद्धशाली इतिहास की झलक प्रदान करता है। दिसम्बर के मौसम और पूर्वोत्तर भारत की शोभा अपनी खूबसूरती से पर्यटको को आकर्षित करती है। 


प्रमुख आकर्षणः ब्रहमपुत्र नदी के किनारे सैर करें, कामाख्या मंदिर के आध्यात्मिक वातावरण में ध्यान साधना कर आशीर्वाद प्राप्त करें। असम राज्य चिड़ियाघर, काजीरंगा, मानस राष्ट्रीय उद्यान और वनस्पति उद्यानों में वन्यजीव दर्शन, प्रकृति और पारिस्थितिकी संतुलन को समझें। 

करने योग्य गतिविधियांः पूर्वोत्तर भारत के हस्तशिल्प, वस्त्र और सांस्कृतिक अनुष्ठानों का अनुभव लेने के लिए शिल्पग्राम की सैर करें। असमिया रेशम और ऐतिहासिक रीति रिवाजो को प्रदर्शित करने वाली कलाकृतियों को खरीदें। जीप सफारी, रिवर राफि्ंटग और स्थानीय गांवों का भ्रमण करें। माजुली द्वीप एक्सप्लोर करें। चाय बागानों का भ्रमण कर नदी तट पर विश्राम करें। रंगघर और तलातल घर के वास्तुचमत्कारों को समझें। 

मुख्य व्यंजनः मेथी के पत्ते, कोसु जाक(मछली के साथ अरबी के पत्ते), पुरा बेंगेना, सुका जाक मास (मछली के साथ सोरेल के पत्ते) और पारो मंगक्सों जो कबूतर मासं करी है। असम के प्रमुख व्यंजन है। 

कैसे पहुंचे 

लोकप्रिय गोपीनाथ इंटरनेशनल एयरपोर्ट गुवाहाटी असम में ही है जहां सें आराम से असम जा सकते हैं। रेल माध्यम से गुवाहाटी रेलवे जंक्शन प्रमुख रेल स्टेशनों से कनेक्टड है। असम का सफर एन एच से अच्छे से जुड़ा हुआ है जहां कई बसें या टैक्सियां असम गुवाहाटी तक यात्रा कराती हैं। 

5. मेघालयः पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों पर बसा यह इलाका बादलों के घर नाम से जाना जाता है जहां दिसम्बर में कोहरे, धुन और क्रिसमस की त्यौहारी चमक इसे शानदार सुदंरतम बना देती है। मेघालय के जीवंत जड़तम पुलों की शोभा जिन्हें यूनेस्को विश्व धरोहरों में शामिल भी किया गया है। झरनें, ट्रेल्स, और आदिवासी गांव की झलक प्रदान करता यह राज्य पर्यटन की दृष्टि से आदर्श जगह है। इस समय यहां दृश्यता भी उत्तम होती है जिसमें विहंगम दृश्यो की शानदार श्रृंखला दिखाई देती है। यह समय यहां उत्सवों और संगीत की छटा पर्यटन आनंद को और भी ज्यादा सुहाना बना देती है। 


प्रमुख आकर्षणः मेघालय में क्रिसमस उत्सव का रंग कुछ ज्यादा ही चटख होता है क्योकि इसकी राजधानी शिलांग में ईसाई धर्म के लोगों की बस्तियां अन्य जगहों से ज्यादा है। मध्य रात्रि में प्रार्थना के स्वर, हवाओं में कैरोल की धुन और लाइव संगीत कन्सर्ट की रौनक सभी को आकर्षित करती है। लिविंग रूट ब्रिज की बनावट निहारें। शिलांग जिसे पूर्व का स्कॉटलैंड कहते है ंयहां वार्डस झील, पुलिस बाजार, लैटलुम घाटी, मैरी कैथेड्रल चर्च की सैर करें। 

करने योग्य गतिविधियांः ट्रैकिंग, बोटिंग और गुफाओं की सैर और फोटोग्राफी का अनुभव ले सकते हैं। नौका विहार, प्राकृतिक पूल के किनारे होमस्टे और सर्दियों में पूरी तरह सुरक्षित झरने और पन्ना धाराओं मे तैर सकते हैं। तुरा शीतकालीन महोत्सव का आनंद लें। 

मुख्य व्यंजनः जादोह, दोह खलीह, नखम बिची, पुमालोई, दोह नेइआेंंग, तुंगरीम्बाई, पुडोह, मिनिल सोंगा, पुखलेन, साकिन गाटा, क्यात आदि व्यंजनो का स्वाद चख सकते हैं। 

कैसे पहुंचे 

शिलांग हवाई अड्डा उमरोई या गुवाहाटी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से कम से कम 3 घंटे का सफर तय कर शिलांग यात्रा कर सकते हैं। नजदीकी रेलवे स्टेशन गुवाहाटी असम है जहां से साझा वाहनों से शिलांग जा सकते हैं। एन एच 6 और एन एच 40 के माध्यम से सड़क रास्ते से गुवाहाटी या चेरापूंजी से शिलांग का सफर करना आसान है। 

6. त्रिपुराः दिसम्बर त्रिपुरा घूमने के लिए शानदार समय है जो प्राकृतिक सुंदरता और रोमांच का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है। यहां पर्यटन स्थलों की कोई कमी नहीं है जो भारत का तीसरा सबसे छोटा राज्य है। यहां कई ऐतिहासिक स्थान, धार्मिक स्थल और सुंदर हिल स्टेशन हैं। उनाकोटि की प्राचीन धार्मिक मूर्तियां देखना हो या हिल्स से मनोरम दृश्यों को देखना हो, यहां मिलने वाली विविधता आपको यहां के प्रति आकर्षित करती है। त्रिपुरा में आदिवासी संस्कृति का सुंदरतम ग्रामीण जीवन और परंपराएं पूरी दुनिया से लोगों को आंमत्रित करती हैं। यहां के चाय बागानों की खुशबू और लाइव उत्पादन देखना और भी अधिक रोमांचित करता है। 


प्रमुख आकर्षणः त्रिपुरा में उनाकोटि रॉक नक्काशी यहां विख्यात अंसंख्य ऐतिहासिक और धार्मिक मूर्तियों के घर, उज्जयंत पैलेस जिसकी वास्तुकला ग्रीक पद्धति पर आधारित है, नीरमहल पैलेस का जादुई परिदृश्य, जम्पुई हिल्स, हेरिटेज पार्क, त्रिपुर सुंदरी, महामुनि बुद्ध मंदिर की आध्यात्मिकता, संग्रहालय, तेपानिया इको पार्क की हरियाली प्रिय लगती है। 

करने योग्य गतिविधियांः प्राकृतिक चट्टानों के सुरम्य नक्काशी देखें, गुबंदनुमा ऐतिहासिक जगहो का अन्वेषण करें। झील किनारे सैर और नौका विहार का आनंद लें। हेरिटज पार्क में वॉकिग ट्रेल कर सकते हैं। यहां लगने वाले मेलों, उत्सवों की सैर करें। कई सारी रोमांचक गतिविधियों का लुत्फ ले सकते हैं। वन्यजीव दर्शनों का यादगार अनुभव सहेजें। 

मुख्य व्यंजनः मुई बोरोक जो बांस के अंकुर, मछली और सूअर के मांस का शानदार मिश्रण हैं। कोसाई बुट्टी- भुने हुए हरे चने से बना पांरपरिक त्रिपुरी नाश्ता, वहान मोसडेंग- प्याज, मिर्च और सूखी मछली से तैयार किया गया सलाद , गुडोक- किण्वित मछली, फलियांं और आलू से बना व्यंजन है। इसके अलावा मसालेदार टमाटर की चटनी जिसे सूअर के मांस और उबले हुए चावल के साथ खाया जाता है मोसडेंग सेरमा नाम से जानी जाती है। 

कैसे पहुंचे 

त्रिपुरा जाने के लिए राजधानी में अगरतला एयरपोर्ट की उपलब्धता है। रेलवे ट्रेक से जाने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन कुमारघाट है जिसकी त्रिपुरा से दूरी करीब 140 किमी है। त्रिपुरा जाने के लिए सड़क मार्ग भी उपयुक्त है। 

7. मणिपुरः रत्नों और समृद्धि की धरती मणिपुर अपनी विविध अनोखी स्थलाकृति और प्रकृति के शानदार व आश्चर्यजनक नजारों के लिए जानी जाती है जिसे देखना एक शानदार अनुभव है। लुढकती पहाड़ियां, अनसुलझे इलाके, हरी भरी हरियाली लिए घास के मैदान, विहंगम झरने, मनमोहक चाय बागान, जगमगाती नदियां और भी कई शानदार आकर्षण शामिल हैं। पूर्वोत्तर का यह छोटा सा राज्य अपने आप में समृद्धशाली संस्कृति, आकर्षक पंरपराओं और शानदार, ऐतिहासिक विरासतों के लिए जाना जाता है। मणिपुर अपने पर्यटन स्थलों, आकर्षक प्रकृति और लजीज व्यंजनो के स्वाद के लिए बेमिसाल जगह है। 


प्रमुख आकर्षणः केबुललामजाओं जो भारत ही नही अपितु विश्व मे तैरते उद्यान के रूप मे जाना जाता है जो शानदार लोकटक झील पर बसा है। रासमंच मंदिर, दल मडोल, कंगला किला, श्री गोविंद जी मंदिर, संग्रहालय, प्राणी उद्यान, एंड्रो गांव, जुकोउ घाटी और थारोन गुफाएं एक्सप्लोर कर सकते हैं। 

करने योग्य गतिविधियांः विश्व का एकमात्र तैरता हुआ उद्यान केइबुललामजाओ पर नौका विहार क आंनद ले सकते है। किलों की वास्तुकला और ऐतिहासिक कहानियों को समझें। बाजारों में स्थानीय संस्कृति और हस्तशिल्प वस्तुओं की खरीदारी का दिलचस्प अनुभव लें। ऑर्किडेरियम मे ट्रेकिंग का आनंद लें। 

मुख्य व्यंजनः चामथोंग या कांगशोई जो मौसमी सब्जियों से बना एक स्वास्थ्यवर्धक वेजिटेबल डिश है जो चावल या मछली के साथ खाया जाता है। एरोम्बा-उबली हुई सब्जियों और मछलियों का लजीज मिश्रण है जिसे अक्सर मरोई और धनिया पत्ती से सजाया जाता है। मोरोक मेटपा- सूखी हरी मिर्च, न्गारी मछली के साथ बनी हुई तीखी चटनी है जो कई व्यंजनों के साथ खाया जाता है। 

कैसे पहुंचे 

मणिपुर से नजदीकी हवाई अड्डा तुलिहल एयरपोर्ट है जहां से आप ऑटो या टैक्सी की मदद से मणिपुर जा सकते हैं। रेल मार्ग से जाने के लिए पहले आपको नागालैंड के दीमापुर रेलवे स्टेशन पर जाना होगा, यहां से आप सड़क मार्ग से मणिपुर पहुंच सकते हैं। सिलचर, कोहिमा, गुवाहाटी जैसे शहरों से सीधे बस सेवा या निजी वाहन के माध्यम से मणिपुर जा सकते हैं। 

8. मिजोरमः मिजोरम प्रकृति की खूबसूरती के साथ शानदार और समृद्ध संस्कृति का दर्शन कराता हुआ रोमांचित करता है। कहते है कि मिजोरम जैसी दूसरी कोई जगह नहीं है, जहां धरती पर स्वर्ग जैसी अनुभूति कराता यह स्थान हकीकत को बयां करता है। अपने शांतिपूर्ण वातावरण, अनोखेपन और मनोरम दृश्यांं के लिए जाना जाता यह शहर आमतौर पर भीड़भाड़ से दूर आकर्षित करता है। 


प्रमुख आकर्षणः लुंगलेई वन्यजीव अभयारण्य, हमुइफांग, तामदिल झील, चानमारी, ममित में डम्पा वन्यजीव अभयारणय दर्शन करें। सैटलाव, वेस्ट फेलेंग, पुकजिंग देखें। 

करने योग्य गतिविधियांः हस्तशिल्प संग्रहालय की झलक और खरीदारी का अनुभव सहेंजे। रोमांचक गतिविधियों के अलावा क्लासिक आकर्षणों का लुत्फ ले सकते हैं। खड़ी जगली ढलानों पर वानटॉग झरना देखें जो वॉच टावर का काम भी करता है। 

मुख्य व्यंजनः बाई जो पत्तेदार सब्जियों, स्थानीय जड़ी बूटियां और मांस से बनाया जाता है और सर्द दिनों मे लोकप्रिय डिश है। वॉक्सा रेप स्पोक्ड पोर्क है जो पसंद किया जाता है। कोट पीठा मीठे केले के पकौड़े हैं जिसका आनंद सर्दियों के दिनों मे लिया जाता है। बांस शूट फ्राई हल्का और ताजा व्यजंन है जो स्वस्थ भोजन का पर्याय है। 

कैसे पहुंचे 

लैंगपुई एयरपोर्ट सबसे नजदीक है और मानू व सिलचर रेलवे स्टेशनों के माध्यम से करीब 77 किमी और 180 किमी की दूरी तय कर आइजोल के लिए स्थानीय वाहनों के माध्यम से जा सकते हैं। बस से जाने के लिए आपको गुवाहाटी से मणिपुर आइजोल के लिए करीब 470 किमी को तय करने के लिए बसें आसानी से मिल जाती हैं। 

दिसम्बर में पूर्वोत्तर भारत की यात्रा करने हेतु जरूरी सुझाव 

परमिट और बुकिंग के लिए पहले से ही तैयारी कर लेंः नागालैण्ड, सिक्किम और अरूणाचल प्रदेश के कुछ भागों में जाने के लिए इनर लाइन परमिट की आवश्यकता रहती है। इसके साथ ही रूकने वगैरह की व्यवस्था और आवागमन टिकट्स पहले से ही कर लें क्योंकि दिसम्बर की छुट्टियां अधिकतर पर्यटन के लिए आकर्षित करती हैं। 

कपड़ें कई परतों में पहनेंः यहां दोपहर हल्की और सुबह शाम ज्यादा ठंडी हो सकती हैं। इसलिए कपड़ें लेयर में पहनने पर सर्दियों के अनुकूल रहता है। 

पारंपरिक रीति रिवाजों और स्थानीय संस्कृति का आदर करेंः यह क्षेत्र आदिवासी सभ्यता और पांरपरिक रीति रिवाजों को मानने वाला है, ऐसे में उनके कुछ नियम और मान्यताएं हैं जैसे कई जगह फोटोग्राफी प्रतिबंधित है तो इन नियम और मान्यताओ का पालन करना सैलानियों का कर्तव्य है। ध्यान रखें कि आपके किसी भी कृत्य से उन्हें ठेस न पहुंचे। 

यात्रा गति संतुलित रखेंः पहाड़ी क्षेत्रों में दूरी भले ही मानचित्र पर कम हों लेकिन इन रास्तों को बेहद सावधानी के साथ तय करना चाहिए इसलिए धैर्य के साथ इन रास्तों पर यात्रा करनी चाहिए।

नकदी साथ रखेंः पूर्वोत्तर भारत में नेट या सिग्नल कनेक्टिविटी कुछ कम हो सकती है, साथ ही यहा एटीएम संख्या भी बहुत ज्यादा नही रहती है। इसलिए इन जगहों पर नकदी साथ रखना जरूरी होता है। 

पर्यावरण अनुकूल रहें और प्रेरित करेंः पूर्वोत्तर भारत में घूमने के दौरान गंदगी न फैलाएं। प्लास्टिक से दूरी बनाएं और शून्य अपशिष्ट पर्यटन को तवज्जो दें। 

उत्सव और सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद लेंः दिसम्बर के समय होने वाले उत्सवों, कार्यक्रमों और उनकी विविधता को स्पर्श करें और मनोरंजन करें। 

गांव और घाटियो के आकर्षण को सहेजेंः पूर्वोत्तर भारत घूमने के लिए सिर्फ मुख्य शहर ही नहीं वरन छोटे छोटे गांव और घाटियां भी घूमने के लिए सर्वोत्तम जगहें हैं जहां आप अच्छे से एक्सप्लोर कर सकते हैं। 

उत्तर पूर्व भारत की सैर के लिए कैसे पहुंचे

पूर्वोत्तर भारत जाने के लिए सबसे ज्यादा यहां के प्रवेश द्वार गुवाहाटी से जाया जाता है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत पहुंचने के लिए साधन विकल्प हैं। 

हवाई मार्ग से 

गुवाहाटी, डिब्रूगढ(असम), इम्फाल(मणिपुर) और बागडोगरा (सिक्किम) प्रमुख हवाई अड्डों के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत की सैर कर सकते हैं। 

रेल मार्ग से 

गुवाहाटी रेलवे स्टेशन के माध्यम से आप पूर्वोत्तर भारत के लिए आसानी से पहुंच सकते हैं। 

सड़क मार्ग से 

राष्ट्रीय राजमार्ग 27 और एनएच 15 से पूर्वोत्तर भारत के लिए सार्वजनिक या निजी वाहन के माध्यम से पहुंच सकते हैं। 

निष्कर्ष 

दिसम्बर 2025 में पूर्व उत्तर भारत विविध श्रृंखलाओं से सजा हुआ शानदार गंतव्य बन जाता है जहां नदी द्वीपों की अद्वितीय खासियत, बर्फ से ढके पहाड़ो के दृश्य और देवदार ओक से बसे घने जंगलों के बीच बसी घाटियों में गूंजते स्वरों की कलियां। भारत के सबसे विहंगम और मनमोहक रूपों से परिचित कराते हैं। यहां की प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक विशेषताएं सैलानियों को हमेशा ही आश्चर्यचकित करती हैं।

सिक्किम की बर्फबारी और नागालैंड, मेघालय में गूंजती खुशियों और उल्लास की धुनें अपनी खूबियों से सर्दियों में अलाव जैसी राहत प्रदान करती हुई दिसम्बर में उत्तर पूर्व भारत को पर्यटन विशेष सुरम्य विशेषताओं की झलक दिखाते हैं। 

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