- Nov 24, 2025
दिसम्बर आते ही पहाड़ी क्षेत्रों का आकर्षण और भी ज्यादा बढ जाता है। ऐसे ही तमिलनाडु के हिल स्टेशन ऊटी कुहासे और सुकून के पलों का एहसास कराती खूबसूरती का विशेष आवरण ओढ लेती है। हिल स्टेशनों की रानी कहलाने वाला यह स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं है, जहां चाय के बागानों की मंत्रमुग्ध करती खुशबू, पहाड़ी ढलानों पर लहराते देवदार चीड़ के पेड़ो की छाया और शानदार विश्राम स्थल जहां देश ही नहीं वरन् विदेशों से भी आने वाले सैलानियों के स्वागत को तैयार रहते हैं।
दिसम्बर के दिनों में नीलगिरी पहाड़ियों की खूबसूरती को निहारते हुए गर्म चाय या कॉफी की चुस्कियों के साथ पर्यटन की अद्वितीय खूबसूरती का दीदार करना दिसम्बर में इसकी रूहानी एहसास को तरोताजा करता है। आइए इसी भावना को बयां करने के लिए विस्तार से जानते हैं दिसम्बर में ऊटी के ख़ास अंदाज़ के बारें में।
ऊटी का संक्षिप्त इतिहास
प्राकृतिक और सांस्कृतिक खूबसूरती को सहेजता ऊटी यानी उधगमंडलम अपने दिलचस्प इतिहास की वजह से प्रसिद्ध है जहां टोडा, कोट और कुरूम्बा सहित विभिन्न मूल जनजातियाँ निवास करती हैं। इस जगह की खोज का स्पष्ट प्रमाण 19वीं शताब्दी में ब्रिटिशकाल में मिलता है। 1819 में जॉन सुल्विन नाम का अंग्रेज कलेक्टर कोयबंटूर जिले के प्रभारी थे। शिकार करते समय वे ऊटी पठार पहुंच गए। जहां प्रकृति की सुदंरता से प्रभावित होकर इन्होंने गर्मी और उमस से बचने के लिए ग्रीष्माकालीन विश्राम स्थल के रूप में इस जगह की पहचान बन गई।
ब्रिटिश समय में इसे हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया गया जहां व्यापार, वाणिज्य और शासन प्रशासन के महत्वपूर्ण केंद्र स्थल यहां स्थापित हो गए। नीलगिरी माउंटेन रेलवे की पहुंच से यहां का रास्ता और भी आसान हो गया, जो 1899 में बनाई गई थी, आज इसे यूनेस्को वैश्विक धरोहर स्थल में शामिल किया गया है। औपनिवेशिक अतीत के बाद भी ऊटी अपनी सुंदरता, विरासत और संस्कृति को सहेज कर रखने के लिए प्रसिद्ध है। 1947 में भारत की आजादी के बाद यह तमिलनाडु का अभिन्न अंग बन गया। वैसे मैसूर के राजा टीपू सुल्तान द्वारा निर्मित गुफाओं के निशान भी यहां देखने को मिलते हैं।
दिसम्बर में ऊटी का मौसम
ऊटी का मौसम दिसम्बर में सुहावना, ठंडा और मंत्रमुग्ध करता हुआ विशेष प्रतीत होता है। साफ स्वच्छ हवा, नीला आसमान और पर्यटन के लिए सर्द हवाओं के झोंको के साथ मौसम का सुहाना अंदाज़ देखने को मिलता है।
तापमान दरः तापमान की औसत दर लगभग 7.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 20 डिग्री सेल्सियस
प्रातःकालीन समयः कुहासे की चादर ओढे हुए ताजगी और धुंध से भरपूर रहती हैं। हल्के गर्म कपड़े पहन कर रखें।
दिनः लुभावनी और आरामदायक दोपहर, पर्यटन स्थलों की यात्रा का सर्वोत्तम समय
रात्रिकालीन समयः सर्द और ठिठुरन के साथ आरामदायक, अलाव वगैरह के पास बैठना आकर्षित करता है।
ऊटी में घूमने योग्य शीर्ष आकर्षण
डोडाबेट्टा पीकः ऊटी का विशिष्ट उपहार डोडाबेटा पीक नीले पहाड़ों के बीच बसी बेहद खूबसूरत चोटी है। कहते हैं कि इस चोटी पर 12 सालों में एक बार खिलने वाले दुर्लभ नीले रंग के कुरिंजी फूलों की भव्य श्रृंखला देखने को मिलती है। बडागा भाषा में डोडाबेटा का शाब्दिक अर्थ बड़ा पर्वत होता है। यहां पर साहसिक गतिविधियों के शौकीन लोग ट्रेकिंग और अन्य प्राकृतिक नजारों का अविस्मयकारी दृश्य देख सकते हैं। इस पर्वत पर अल्पाइन और शोला झाड़ियों की मौजूदगी इसकी मोहकता और भी ज्यादा बढा देती है। नीलगिरी की 24 चोटियों में डोडाबेटा सर्वाधिक ऊंची चोटी है। इसकी ऊंचाई से सुदूर स्थित बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यान और मैसूर के ऊंचे इलाकों की अकल्पनीय शोभा देखने का सुअवसर मिलता है। पक्षी दर्शन गतिविधि डोडाबेटा की पसंदीदा एक्टिविटी है। इतनी ऊंचाई से देखने पर सूर्योदय और सूर्यास्त के शानदार नजारें बेहद प्रिय लगते हैं। दिसम्बर के महीने में डोडाबेटा चोटी का तापमान न्यूनतम 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
बोटॉनिकल गार्डनः यह गार्डन सिर्फ ऊटी ही नही बल्कि पूरे तमिलनाडु में सबसे अधिक देखे जाने वाला बोटॉनिकल गार्डन है। लगभग 55 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस उद्यान को देखे बिना ऊटी दर्शन पूरा नहीं हो सकता है। यह बोटॉनिकल गार्डन पांच खंडो में विभाजित है जिसमें फर्न हाउस, नया बगीचा, इतालवी बगीचा, कंज़र्वेटरी और नर्सरी है। फर्न हाउस फर्न की सत्ताइस सौ प्रजातियों का संरक्षण करता हुआ विशेष है। नया बगीचा दरअसल गुलाबों का बगीचा है जिसमें कई सारे प्राकृतिक फूलों की कालीन और प्राकृतिक तालाबों की खूबसूरती आकर्षित करती है। इतालवी बगीचे को प्रथम विश्व युद्ध के इतालवी युद्धबंदियों ने तैयार करवाया था। कंजर्वेटरी में फूलों के पौधों की विभिन्न समूह देखने को मिलते हैं और नर्सरी में कई सारे विदेशी पौधों की ग्लास श्रृंखला को देखने का मौका मिलता है। इस गार्डन का एक मुख्य आकर्षण बीस साल पुराना जीवाश्म वृक्ष का तना और टोडा मुंड या पहाड़ी है। गार्डन देखने के लिए नियत प्रवेश शुल्क राशि देना आवश्यक होता है।
ऊटी झीलः इस झील को ऊटी बोट हाउस के नाम से भी जाना जाता है। शांत सुरम्य वातावरण और हरी भरी हरियाली की खूबसूरती से सराबोर इस भव्य झील के नजारें दूर दूर तक मन को शांति और सुकून प्रदान करते हैं। करीब 65 एकड़ क्षेत्रफल में फैली यह झील मूल रूप से मछली पालन के उद्देश्य से बनाई गई थी। 1973 से यह तमिलनाडु पर्यटन विकास निगम के तहत पर्यटन पार्क में बदल दिया गया। इस झील में मनोरंजन करने के लिए कई सारी गतिविधियो का आनंद ले सकते हैं जिसमें नौका विहार करने के अलावा झील के चारों ओर घूमने के लिए किराए पर साइकिलें भी मिल जाती हैं। यहां मोटर बोट, पैडल बोट और रोइंग बोट का आनंद लिया जा सकता है। शांत हरियाली से भरे नजारें और दूर दूर तक फैली पहाड़ियों की रौनक के साथ ही यहां मौजूद बगीचा, मिनी ट्रेन और मनोरंजन पार्क में भूतिया घर, शीशे का घर और घुड़सवारी जैसी मनोरंजक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं।
नीलगिरी पर्वतीय रेलवेः ऊटी यात्रा के लिए विशेष अनुभव प्रदान करती नीलगिरी मांउटेन रेलवे टॉय ट्रेन के नाम से भी जानी जाती है। दक्षिण भारत मे रोज चलने वाली एकमात्र पर्वतीय रेलवे जहां इसकी कुल लंबाई 46 किमी लंबी है। सुरम्य पहाड़ियों से होती हुई यह रेलगाड़ी प्रथम और द्वितीय श्रेणियों से मिलकर बनी है। रेलगाड़ी से पहाड़ों की अद्भुत सुंदरता और सुरम्यता के आकर्षण मनमोहक और विहंगम दृश्यों का दीदार कराते हैं। नीले और क्रीम रंगों से शोभाएमान यह गाड़ी कई फिल्मों में अक्सर देखने को मिल जाती है। इस रेलगाड़ी को यूनेस्को विश्व धरोहरों मे भी शामिल किया गया है।
एवलांचे झीलः शहरी हलचल से कोसों दूर यह एवलांच झील अपनी तरह की खूबसूरत प्राकृतिक झील है जिसके नीले जल के आकर्षण में तन मन को उमंग तरंग का खूबसूरत एहसास होता है। क्रिस्टलीय नीले ताजे पानी की यह झील ऊटी से करीब 20 किमी दूर है। जहां आसपास के जंगल की हरियाली भरी सुरम्यता और आकर्षक हरियाली और ऊंची ऊंची नीलगिरी पहाड़ियों के संरेखित परिदृश्य सफेद कोहरे में लिपटे हुए और भी शानदार दिखते हैं। एवलांच लेकशोर यहां के उम्दा कैंपिंग स्पॉट्स में से एक है। जहां सूर्योदय के खूबसूरत नजारों के साथ तारों भरी रात का दीदार करने के लिए सड़क किनारे कैंप का अनुभव ले सकते हैं। प्रकृति की शांत और प्राचीन सुंदरता के बीच मछली पालन का आनंद भी ले सकते हैं। पश्चिम घाट का प्राकृतिक क्षेत्र जहां प्रकृति की छांव में समय बिताना बेहद रोमांचक अनुभव प्रदान करता है।
रोज गार्डनः दिसम्बर के महीने में इस गार्डन का आकर्षण अपनी चरम सीमा पर होता है। पर्वतीय स्थान के गौरव के रूप में प्रसिद्ध यह गार्डन विश्व भर के 35 गुलाब उद्यानों के एक विशिष्ट क्लब का हिस्सा है। इसे दक्षिण एशिया के लिए गार्डन ऑफ एक्सीलेंस का अवार्ड भी प्राप्त है। इस रोज़ गार्डन में लगभग 20 हजार से ज्यादा गुलाबों की किस्में इसे दुनियाभर में अद्वितीय बनाती हैं। सर्द मौसम और मानसून के बाद इन फूलों के खिलने का सुहावना मौसम लोकप्रिय बनाता है। इस गार्डन में हर साल हजारों की तादाद में पर्यटक गुलाबों की विस्तृत श्रृंखलाओं का दीदार करने आते हैं।
सेंट स्टीफन चर्चः ऊटी का सेंट स्टीफन चर्च अपनी तरह का विशेष चर्च है जिसका वास्तुशिल्प किसी चमत्कार से कम नहीं है। प्राचीन और विशेष अमानत के तौर पर अंग्रेज इसे छोड़कर गए थे। इस चर्च का निर्माण तकरीबन 19वीं सदी में हुआ जब किंग जार्ज चतुर्थ का जन्मदिन का अवसर था। मैसूर युद्ध में टीपू सुल्तान को हराने के बाद मेन बीम और जरूरी लकड़ियां उन्हीं के महल से लाई गई। इस चर्च में ब्रिटिश वास्तुकला का साफ और स्पष्ट नमूना देखने को मिलता है। इस चर्च में अंतिम भोज द्वारा बनाई गई पेंटिग उम्दा आकर्षण है। ऊटी के प्रमुख आकर्षणों मेंं से एक यह चर्च आज भी अपनी मजबूत बनावट के लिए जानी जाती है जहां हमेशा पर्यटकों की अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है। आज से लगभग दो सौ साल से ज्यादा पुरानी यह चर्च पर्यटकों के बीच आश्चर्य के केंद्र बिन्दु में रहती है।
चाय कारखाना और संग्रहालयः दिसम्बर के महीने में भला चाय किसे पसंद नहीं होगी। अगर आप ऊटी दौरे पर हैं तब तो चाय पीने का शानदार अनुभव तो लेना बनता ही है। यहां मौजूद चाय कारखाना और संग्रहालय विशेष रूप से इसकी खासियत को दर्शाता है। डोडाबेट्टा स्थित चाय संग्रहालय/कारखाना बागवानी और बागान फसलों की जानकारी प्रदान करने के लिए जाना जाता है। लगभग एक एकड़ जमीन पर फैला यह संग्रहालय करीब 15 वर्षों से भी अधिक पुराना है। यहां चाय की पत्तियों से चाय बनाने की संपूर्ण विवेचना समझने को मिलती है। जब चाय की पत्ती को तोड़ा जाता है व वहां से लेकर छोटे छोटे दानों में बदलने के सफर को स्टेप बाइ स्टेप जानने का मौका मिलता है। चाय के संपूर्ण विकास को प्रदर्शित करती यह फैक्ट्री नीलगिरी क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। चाय की विभिन्न वैराइटीज जैसे ब्लैक टी, ग्रीन टी बहुत प्रसिद्ध है। इसके अलावा आप यहां से कप पेन टी शर्ट जैसे आईटम खरीद भी सकते हैं। हरियाली के खूबसूरत नजारें और शुद्ध प्रामाणिक चाय की खुशबू के साथ ही किसी अपने को तोहफे के रूप में दे भी सकते हैं।
टोडा झोपड़ियांः शांत छोटे से गांव के रूप में औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण शहर टियर 2 शहर बनने तक का सफर तय कर चुका है। पश्चिमी घाट की मूल जनजातियां ऊटी और आसपास के इलाकों में निवास करती आई हैं। यह मुख्य रूप से पशुपालक होते है जो जानवरों को चराकर और थोड़ी बहुत खेती करके अपना जीवन यापन करते हैं। आज भी यहां स्थानीय आबादी में इन जनजाति की बड़ी संख्या देखने को मिलती है। ऊटी से लगभग 15 किमी दूरी पर स्थित टोडा गांव अपनी संस्कृति, रहन सहन, वेशभूषा और उनके समुदाय के लिए प्रसिद्ध स्थान है। जहां आप इन सभी विशेषताओं को और ज्यादा करीब से जान सकते हैं। यहां बनी टोडा झोपड़ियां वास्तुकला की दृष्टि से बेहद आकर्षित करती है। इसके अलावा यहां इसी तरह टोडा मंदिर भी बना हुआ है जहां सिर्फ पुरूष ही जा सकते हैं।
पाइकारा झरना व झीलः ऊटी मैसूर मार्ग से करीब 20 किमी दूरी पर स्थित पाइकारा झील मुकुर्थी चोटी से निकलने वाली नदी और झरने के लिए जानी जाती है। आकर्षक और शानदार नजारों की विस्तृत श्रृंखला प्रस्तुत करते मनोरंजक पिकनिक स्थल की तरह पर्यटकों के बीच मशहूर है। इस झील पर बना बांध और बिजलीघर जल विद्युत उपलब्ध कराता है। विरासत स्थल की तरह प्रसिद्ध यह स्थान दो भव्य झरनों का निर्माण करती है। एक 55 मीटर ऊंचा और दूसरा लगभग 61 मीटर ऊंचा है। यहां नौका विहार और गिरते हुए पानी को निहारना अति प्रिय लगता है।
दिसम्बर में ऊटी मे करने योग्य गतिविधियां
नौका विहार करे
शीतल पानी और सर्द हवाओं की रौनक में घूमने के लिए बेहतर स्थान है जहां सुबह शाम की सैर करिश्माई रूप से गहरा असर छोड़ती है। कोहरे की पतली चादर सी परत और घनी छावं में नौका विहार भ्रमण का आनंद लाजवाब होता है। नाव की सवारी करने के लिए ऊटी झील या पाइकारा झील का रूख करें।
ड्राइव का आनंद लें
पहाड़ी क्षेत्रों पर ड्राइव का आनंद लेना भी किसी यादगार अनुभव से कम नहीं है। पूरे रास्ते में चाय कॉफी के बागानों की झलक, झरने, झीलें और अन्य पर्यटन स्थलों को देखना किसी रोमांचक अनुभव से कम नहीं होता। आप यहां कुन्नूर की 20 किमी लंबी ड्राइव का आनंद ले सकते हैं जहां आप लैम्ब्स रॉक पर कुछ देर रूककर ताजी हवा को महसूस करें।
स्थानीय भोजन का स्वाद चखें
घर की बनी चॉकलेट का अद्वितीय स्वाद प्रदान करती ऊटी की इस रेसिपी के साथ और भी कई सारे व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं। बन्स की गरमाहट और कॉफी की जुगलबंदी के अलावा मसालेदार करी का स्वाद ऊटी पर्यटन का आनंद कई गुना बढा देता है।
चाय बागानों की सैर करें
यहां के चाय बागानो की खुशबू को करीब से महसूस करें। ताजगी और राहत प्रदान करती नीलगिरी चाय का दीदार कर उसका स्वाद चखें और इन्हें बनाने वालो ंसे भी भेंट करें। दिसम्बर के महीनें में चाय का मज़ा और भी ज्यादा आता है।
अलाव की रातों का आनंद लें
दिसम्बर की सर्द रातों में गर्माहट प्रदान करते बोनफायर और उसकी मौजूदगी अजीब तरह की शांति और सुकून प्रदान करती है। इस महीनें में रिसॉर्टस अलाव, बारबेक्यू की उपस्थिति व लोकसंगीत की जुगलबंदी से ऊटी घूमने का यादगार अनुभव जुड़ जाता है। सर्दियों की रातों में अलाव के पास बैठकर आसमान के साफ नजारें में तारों की दृश्यता आकर्षित करती है।
ट्रैकिंग और प्रकृति का भ्रमण
दिसम्बर का महीना सर्द वातावरण और अलसाई प्राकृतिक रंगों से सजा होता है जिसकी धूम में डोडाबेट्ट पीक, कोटागिरी और ग्लेनमॉर्गन के रास्तों पर ट्रैकिंग और प्रकृति के भ्रमण का आनंद लेना बेहतर अनुभव प्रदान करता है।
खरीदारी का अनुभव लेंः
ऊटी में आप चाय और मसालों की खरीदारी कर विशेष रूप से नीलगिरी तेल, नीलगिरी तेल और जैविक मसालों की खरीदारी कर सकते है। यहां हाथ की बनी कई चीजों के साथ ही चॉकलेट का स्वाद भी बेमिसाल भी है। बाजारों की खासियत है कि यहां ऊनी शॉल ओर स्वेटर मिलता है। इसके अलावा लकड़ी के हस्तशिल्प और टोडा कढाई वाले प्रसिद्ध स्मृति चिन्हों को खरीद सकते हैं।
फोटोग्राफी और अनुभवों को एकत्रित करें
डोडाबेटा चोटी से चारों ओेर के परिदृश्यों को निहारें, जहा धुंध के बादल आकर्षित करते हैं। ट्रेन की सवारी करते हुए सुंदर परिदृश्यों को एल्बम में सजा कर रखें। ऊटी झील से शांत और बहती नावों का दीदार कर उनकी तस्वीरों को कैद कर सकते हैं। हरी पट्टियो में सजे चाय बागानो को कैमरे की मेमोरी में एकत्रित कर सकते हैं।
दिसम्बर में मनाए जाने वाले उत्सव व कार्यक्रम
चाय एवं पर्यटन महोत्सवः यह आयोजन ऊटी में दिसम्बर के आखिरी या जनवरी की शुरूआत में मनाया जाता है। इसमें चाय की लोकल वैराइटीज, हाथ से बनी शिल्प वस्तुएं और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ऊटी की समग्र खासियतों का अवलोकन कर सकते हैं।
क्रिसमसः ऊटी स्थित सभी चर्चों में क्रिसमस की धूम देखने लायक होती है। पूर्व रात्रि में चर्चों के अंदर होने वाली प्रार्थना सभाओं की आवाजें और आतिशबाजी की धूम का नजारा प्रकृति के साथ इस पर्व की रौनक और भी ज्यादा बढा देती है।
नववर्ष समारोहः नये साल की धूम और जश्न हिल स्टेशन की वादियांं में देखते बनता है। पार्टीज, बोनफायर और डीजे म्यूजिक के साथ लाइव प्रस्तुतियों का लुत्फ मिलता है। रिसॉर्टस में पर्यटक यात्रियो के लिए कई सारी खूबसूरत एक्टीविटीज का आनंद लिया जाता है।
दिसम्बर मे ऊटी के खास स्वाद
घूमने का आनंद तब और बढ जाता है जब स्वाद से जुड़ी वस्तुओं का अंदाज़ भी पर्यटन यात्रा में शामिल हो जाता है। ऊटी यात्रा में यहां के विशेष स्वाद को और भी ज्यादा बढाने वाली वस्तुएं इस प्रकार हैं।
1. घर पर बनी चॉकलेटः यहां होम मेड चॉकलेट का स्वाद गहरा और विशेष अनुभव प्रदान करता है। जिसकी उपलब्धता कई सारे फ्लेवर्स में मिलती है।
2. दक्षिण भारतीय भोजनः दक्षिण भारत में केले के पत्ते के ऊपर भोजन का स्वाद और भी ज्यादा विशेष होता है। मसालेदार करी की रेसिपी विशेष तौर पर ऊटी आए पर्यटकों का मन मोह लेती है।
3. ऊटी वर्की बिस्किटः यहां बने खास तरह के बिस्किट, जिनका स्वाद चाय के साथ और भी ज्यादा टेस्टी लगता है।
4. स्ट्रीट कॉर्न व तले हुए स्नैक्सः ऊटी झील के निकट मिलने वाले यह स्टॉल अपनी इस खास स्वाद के कारण पर्यटकों को बहुत लुभाता है।
5. ताजा नीलगिरी चाय व कॉफीः चाय के बागानों की ताजी पत्तियों से बनी चाय का स्वाद मन मस्तिष्क को नई ऊर्जा प्रदान करता है। कॉफी के बागानो की शुद्धता और इनसे बनी कॉफी का स्वाद भी आकर्षित करता है।
6. भुनी हुई मूंगफलीः दिसम्बर के महीने में भुनी हुई मूंगफली का स्वाद सर्दियों का आनंद और भी ज्यादा बढाता है।
7. गरमागरम सूपः सर्दियों के समय में गरमागरम सूप की रेसिपी लुभावनी और पंसदीदा स्वाद में से एक है।
ऊटी के आसपास अन्य आकर्षण
बांदीपुर राष्ट्रीय उद्यानः कर्नाटक राज्य में मौजूद यह नेशनल पार्क साल 1974 में बनाया गया था। पश्चिमी घाट पर बना यह अभयारण्य मैसूर के राजा का निजी शिकारगाह के रूप में जाना जाता था जो आज भारत के सबसे ज्यादा सफल संरक्षण स्थलों में से एक है। यह एक बाघ संरक्षण क्षेत्र के साथ ही पक्षी प्रजातियों के लिए भी जाना जाता है। जैव विविधता के लिए मशहूर इस क्षेत्र में रोमांचक सफारी का यादगार अनुभव ले सकते हैं।
कुन्नूरः नीलगिरी क्षेत्र के अन्तर्गत आने वाला यह क्षेत्र ऊटी से करीब 20 किमी की दूरी पर है, जो सुरम्य जकटल्ला यानी जगथला घाटी के बीच बसा है। जंगली पहाड़ियो के बीच बसा यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली, फूलों की श्रृंखलाएं और अन्य झीलों झरनों के लिए पर्यटको को आकर्षित करता है।
कोटागिरीः ऊटी घूमने की लिस्ट में कोटागिरी की पहाड़ियों का जिक्र होना तो लाजिमी है। हरे भरे घास के मैदान और यूरोप जैसी सर्दी का एहसास प्रदान करता यह स्थान दो डाकुओं का पीछा करते हुए खोज में सामने आई थी। कैथरीन फॉल्स और रंगास्वामी स्तंभ के आसपास की जगहों का दीदार कर यहां के मंत्रमुग्ध करते परिदृश्यों को निहारें।
मुदुमलाई राष्ट्रीय उद्यानः ऊटी से लगभग 68 किमी दूरी पर बना यह राष्ट्रीय पार्क मनमोहक सुंदरता और धुंध भरी पहाड़ियो के लिए प्रसिद्ध उद्यान है जहां बाघों को संरक्षण प्रदान किया जाता है। स्थानीय समुदाय की संस्कृति, रीति रिवाजों को समझने के साथ ही नीलगिरी के अनछुए पहलुओ को महसूस कर सकते हैं।
दिसम्बर में ऊटी यात्रा करने के लिए यात्रा सुझाव
- यहां का तापमान रात के समय लगभग 8 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे जा सकता है। इसलिए गर्म कपड़े, जैकेट, कंबल साथ जरूर रखें।
- दिसम्बर के समय विशेष रूप से हनीमून और हॉलीडे एन्जॉए करने वाले पर्यटन सैलानियों के बीच ऊटी खासा पसंद किया जाता है। ऐसे में बुकिंग वगैरह पहले से ही कर लें।
- सर्दियों में अक्सर पानी वगैरह पेय पदार्थों का प्रयोग कम होने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। इसलिए पानी वगैरह पीते रहें।
- सर्दियों मे ंकोहरे की खूबसूरती वाहन चलानें वालों के लिए चुनौती जैसा होता है, ध्यान रखें वाहन सावधानी के साथ धीरे धीरे चलाएं।
- कूड़ा करकट न फैलाएं। अक्सर पर्यटक स्थलों पर गंदगी भरे परिदृश्यों का सामना करना पड़ता है जिसे पर्यटकों द्वारा ही फैलाया जाता है। ध्यान रखें कि हिल स्टेशन की किसी भी जगह पर कूड़ा कचरा बिल्कुल न फैलाएं।
- ऊटी का संपूर्ण और विस्तार दर्शन करने के लिए सुबह अपनी दिनचर्या जल्दी समाप्त कर घूमने के लिए निकल जाएं और फोटोग्राफी के लिहाज से भी शांत और खूबसूरत वातावरण सर्वोत्तम रहता है।
- नकदी साथ रखेंः ऊटी घूमने से पहले नकदी वगैरह भी साथ रखें क्योंकि यहां एटीएम की संख्या सीमित और दूरदराज के क्षेत्रों मे ंरह सकती है। सिग्नल अस्थिरता का सामना भी करना पड़ सकता है।
दिसम्बर में ऊटी कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- ऊटी जाने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा कोयंबटूर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जहां से हिल स्टेशन की दूरी लगभग 85 किमी है।
रेल मार्ग से
- ऊटी नीलगिरी मांउटेन रेलवे के माध्यम से मेट्टुपालयम से जुड़ा हुआ है जो पर्वतो के रास्ते मनोरम दृश्यों की श्रृंखलाओ का दीदार कराते हुए पहुंचती है।
सड़क मार्ग से
- बंगलुरू, ऊटी से करीब 270 किमी और कोयंबटूर से ऊटी की दूरी लगभग 85 किमी है। इन जगहों के माध्यम से बांदीपुर और मुदुमुलाई के जंगलों से होकर गुजरने वाले खूबसूरत रास्ते से आप ऊटी का तक का सफर सड़क मार्ग से कर सकते हैं। सार्वजनिक परिवहन के अलावा आप स्वयं के वाहन से भी ऊटी पहुंच सकते हैं।
निष्कर्ष
ऊटी, तमिलनाडु का सर्वोत्तम पर्यटन स्थल है जो हर मौसम में अपनी आकर्षकता से सबको आश्चर्यचकित कर देता है। हर मौसम हर ऋतु में इसका एक अलग ही अंदाज़ देखने को मिलता है जिसमें दिसम्बर के समय यह जगह कोहरे की चादर ओढे किसी प्रेयसी से कम नहीं लगता। गुनगुनाते स्वर में गाती पहाड़ियों की गूंज, मदमस्त सी चाय की महक और यहां की हर एक वस्तु परमानंद की अनुभूति कराती हुई प्रतीत होती है। सिर्फ पर्यटन स्थलों के भ्रमण ही नही वरन् यहां की हर सांस, हर बिताए गए पल की कीमती सुकून का एहसास कराने के बारे में है। अगर आप भी सर्दियो की सैर मेंं यहां एन्जॉए करना चाहते हैं तो तमिलनाडु के इस पहाड़ी इलाके का भ्रमण अवश्य करें।
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