- Nov 15, 2025
उत्तर भारत और दिसम्बर महीना पर्यटन प्रेमियों के घूमने के लिए अत्यधिक लोकप्रिय रहता है। खत्म होते वर्ष की खट्टी मीठी याद को साझा करता यह समय नई शुरूआत की दस्तक देता हुआ खुशी प्रदान करता है, ऐसे में उत्तर भारत के कई स्थान है जहां आप इन पलों को एन्जॉए करने के लिए घूमने जा सकते हैं। उत्तर भारत की झोली में कई ऐसे नगीने हैं जहां प्राचीन या औपनिवेशिक काल से लेकर आधुनिक समय की गूंज में अपनी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक खूबसूरती की छाप छोड़ते हैं। मैदानी शहरों से लेकर पहाड़ी इलाकों तक नैसर्गिक सुंदरता का पर्याय बने यह स्थल पर्यटन की चाह रखने वालों के लिए एक खूबसूरत तोहफा हैं, जिनमें इन स्थानों की स्थानीय विशेषताएं, भाषा शैली, भोजन और वातावरण भी समाहित है। आइए, दिसम्बर 2025 माह में उत्तर भारत में घूमने के लिए पर्यटक जगहों के बारें में विस्तार से जानते हैं
1. लद्दाख
उत्तर भारत का यह क्षेत्र दिसम्बर माह में घूमने के लिए एकदम सुरक्षित है। जहां इस दौरान तकरीबन -13 डिग्री सेल्सियस से लेकर -15 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता है। दिसम्बर के महीनें में लेह लद्दाख पहुंचने के लिए अत्यधिक बर्फबारी की वजह से सड़क मार्ग उपयुक्त नहीं रहता इसलिए हवाई यात्रा के माध्यम से आप आराम से यहा की यात्रा की योजना बना सकते हैं। पैंगोग, जास्कर, त्सो मोरीरी, नुब्रा और अन्य आकर्षणों को जोड़ने वाले सभी मुख्य आतंरिक मार्ग पूरे साल खुले रहते हैं। लेह लद्दाख यात्रा में आप सिंधु घाटी, शाम घाटी, लामायुरू, कारगिल, शांति स्तूप, लेह पैलेस, हेमिस, थिक्से, शे, स्टोक, माथो और चेमरे मठों को देख सकते हैं। इसके अलावा कई और ऐतिहासिक इमारातों का दीदार कर सकते हैं।
प्रमुख आकर्षणः
लद्दाख में दिसम्बर के दौरान त्सेमो किला, अल्ची, लिकिर, स्पितुक, बासगो किला, गुरूद्वारा पत्थर साहिब, चुम्बकीय पहाड़ी देखने जा सकते हैं। दिसम्बर के दौरान आंतरिक सर्किट वाली जगहों के लिए सड़के खुली रहती हैं जहां आप अपनी यात्रा बिना रूके कर सकते हैं।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- लद्दाख लेह स्थित कुशक बकुला रिम्पोछे अंतरराष्ट्रीय हवाई अडडे से यहां की निर्बाध यात्रा संपन्न कर सकते हैं।
2. जोधपुरः
राजस्थान में दिसम्बर का समय हल्की ठंड लिए होता है। ऐसे में यहां की ब्लू सिटी यानी नीले शहर की छटा देखते बनती है। जहां गर्मी की परवाह किए बिना ऊंचे किलों की सैर कर सकते हैं, रेगिस्तानी नजारों की खूबसूरती में सूर्यास्त का मज़ा लेते हुए विशिष्ट व्यंजनों का स्वाद चख सकते हैं। रेतीली धरती में गरमी अपनी चरम सीमा पर जलवा बिखेरती है ऐसे में यह समय बेमिसाल अनुभव प्रदान करता है। जहां किलों की प्रतिष्ठित दीवारों की खुशबू और राजस्थानी लोकगीतों की मोहकता तकरीबन 10 डिग्री सेल्सियस से लेकर 26 डिग्री सेल्सियस तक न्यूनतम और स्वच्छ नीले आसमान के साथ सुंदर दिखता है। ऐसे में पैदल भ्रमण, ज़िपलाइनिंग और किले की सुंदरता को देखना दिसम्बर की ठंडी हवाओं के साथ इनका आनंद और भी ज्यादा बढ जाता है। रेगिस्तानी इलाकों की रातें दिसम्बर में और भी ज्यादा सर्द हो जाती हैं।
प्रमुख आकर्षणः
मेहरानगढ किले की भव्य नक्काशी और वास्तुकला को निहारें, उम्मेद भवन पैलेस की भव्यता देखें। पुराना जोधपुर जो नीले रंग की खूबसूरती से रंगा हुआ है, अनुभव लें। आप यहां के बाजारों में खरीदारी का यादगार अनुभव कैद कर सकते हैं जहां आप हाथ से बनी हुई चीजें, चांदी की ज्वैलरी और चटपटे मसालों को खरीद सकते हैं।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- जोधपुर हवाई अड्डा से देश के प्रमुख हवाई अड्डों से अच्छें से जुड़ा हुआ है। जहां आप दिल्ली, मुंबई, जयपुर और अहमदाबाद जगहों से आसानी से पहुंच सकते हैं। एयरपोर्ट से शहर की यात्रा के लिए स्थानीय टैक्सियों की मदद से संपन्न कर सकते हैं।
रेल मार्ग से
- जोधपुर घूमने के लिए जोधपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन की मदद से यहां घूम सकते हैं जहां देश के प्रमुख शहरो से रेल सेवा उपलब्ध रहती हैं।
सड़क मार्ग से
- जोधपुर की ओर राजमार्गों की अच्छी व्यवस्था देखने को मिलती है। जहां से आप जयपुर, उदयपुर, जैसलमेर से तकरीबन 300 किमी की दूरी सड़क मार्ग से बस या अपने वाहनों से तय कर जोधपुर यात्रा कर सकते हैं।
3. जयपुर
राजस्थान की राजधानी और गुलाबी शहर के नाम से प्रसिद्ध शहर दिसम्बर के महीनें में औेर भी ज्यादा शानदार हो जाता है। जब हल्की गुलाबी सर्दी और ठंड का असर तापमान को और भी ज्यादा सुहावना कर देता है। इस दौरान यहां का तापमान 9 डिग्री सेल्सियस से लेकर 25 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। दिसम्बर के समय जयपुर के शीतकालीन उत्सव, राजस्थानी व्यंजनों का लज़ीज स्वाद और वन्यजीवों के आकर्षणों के साथ बहुत कुछ होता है, जिसका आनंद यहां ले सकते हैं। यहां के ऐतिहासिक किलों की भव्यता और दिन के समय यहां पैदल भ्रमण के साथ ही हॉट एयर बैलून की सवारी का आनंद लेना बेहतर अनुभव प्रदान करता है। दिसम्बर का समय जब मौसम में हल्की सी ठंड दस्तक देती है और जयपुर की गुलाबी गलियो में राजस्थानी संस्कृति का भरपूर आनंद ले सकते हैं जहां के बाजारों में हस्तशिल्प और लाख की बनी सुंदर सी चूड़ी, कंगन खरीद सकते हैं।
प्रमुख आकर्षणः
यूनेस्को वैश्विक धरोहर आमेर किला, जयगढ किला, गुलाबी बलुआ पत्थर से बनी संरचना हवामहल, खगोलीय वेधशाला व विश्व की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्य घड़ी लिए जंतरमंतर, सिटी पैलेस, जलमहल जैसी ऐतिहासिक विरासतों के दीदार करते हुए आकर्षक वास्तुकला को निहारें। एलिफैंटास्टिक में ऐशियाई हाथियों के लिए प्रसिद्ध अभयारण्य का दौरा करें। यहां बने तीर्थस्थल गलता जी धाम मे आध्यात्मिक अनुभव लेने के साथ ही प्रसिद्ध संग्रहालयों में अतीत के पन्नों से इतिहास को सहेजें।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- जयपुर में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ाने संचालित होती है। देश के प्रमुख शहरों से जयपुर की यात्रा के लिए जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से जयपुर घूमने जा सकते हैं।
रेल मार्ग से
- जयपुर रेलवे स्टेशन जयपुर घूमने का अच्छा विकल्प है जहां आप देश के प्रमुख शहरों से जयपुर यात्रा के लिए रल सेवा का उपयोग कर सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- जयपुर राजमार्गोंं से अच्छी तरह कनेक्टड है। प्रमुख सड़क रास्तों से होकर आप बस या स्वयं की कार से भी पहुंच सकते हैं।
4. पुष्कर
राजस्थानी धरती पर प्रसिद्ध तीर्थस्थल पुष्कर अपनी दिव्यता और भव्यता के लिए यह हिंदू धर्म के लोगों के बीच प्रसिद्ध आस्था का केंद्र है। पवित्र घाटों, मंदिरों और झीलों के इस शहर को हम ब्रहमा जी के प्रसिद्ध मंदिर की वजह से ज्यादा जानते है। लेकिन यहां सिर्फ यही नहीं बल्कि कई अविस्मरणीय आकर्षणों की विस्तृत श्रृंखला है। अरावली पर्वतमाला से घिरा यह क्षेत्र भारतीय राजस्थानी संस्कृति की जीवंतता को आज भी उसी तरह से सहेजे हुए है। रेगिस्तान का आनंद लेते हुए ऊंट की सवारी करना रोमांचक अनुभव प्रदान करता है। दिसम्बर के समय पुष्कर का मौसम हल्की सर्दी लिए हुए शानदार रहता है, जैसा कि इस समय यहां का तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से लेकर 25 डिग्री सेल्सियस तक रहता है, रात के समय पारा और गिर जाता है। इस समय पुष्कर में विभिन्न उत्सवों की धूम के साथ ही कई मनोरंजक गतिविधियां और कार्यक्रमों का आनंद लेना यादगार अनुभव प्रदान करता है।
प्रमुख आकर्षणः
पुष्कर झील और 52 घाटों का मनमोहक परिदृश्य, ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर बाजारों में खरीदारी का अनुभव लें। पुष्कर अजेमर से लगभग 15 किमी दूर है, अजमेर में अजमेर शरीफ देख सकते हैं। रेगिस्तानी पृष्ठभूमि पर सफारी का आनंद लें। गायत्री मंदिर शक्तिपीठ, और नदी की मनमोहक छटा देखने के साथ ही यहां के स्थानीय स्वाद जैसे दालबाटी चूरमा, गट्टे की सब्जी, मालपुआ, कचोरी और लाल मास जो तीखी मीट करी कहलाती है, चटपटे स्वाद को चख सकते हैं।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- नजदीकी हवाई अड्डा जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जहां से आप पुष्कर की यात्रा के लिए स्थानीय वाहनों की मदद से जा सकते हैं। जयपुर से पुष्कर की दूरी लगभग 147 किमी है।
रेल मार्ग से
- पुष्कर का नजदीकी रेलवे स्टेशन अजमेर रेलवे स्टेशन है, जिसकी लगभग दूरी 11 किमी है। यहां से आप स्थानीय बस या टैक्सी से पुष्कर पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- भारत और राजस्थान के प्रमुख शहरो से सड़क मार्ग से भी पुष्कर की यात्रा संपन्न की जा सकती है। बस कैब या टैक्सी से आप पुष्कर दर्शन करने जा सकते है।
5. डलहौजी
अगर आप भारत में स्विट्जरलैण्ड की रौनक को देखना चाहते हैं तो हिमाचल प्रदेश के डलहौजी की छटा को निहारना बेहद रोमांचक अनुभव प्रदान करता है। छोटे से शहर के रूप में प्रसिद्ध पहाड़ी शहर हिमालय की धौलाधार रेंज के बीच बसा हुआ प्रकृति की गोद में प्यारा सा हिल स्टेशन है। सूर्यास्त और सूर्योदय के खूबसूरत नजारों को देखना, प्रकृति को निहारना तब और भी ज्यादा अच्छा लगता है जब दिसम्बर के महीने में यहां का तापमान -2 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। यह समय हनीमून और रोमांचक पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए बेहद खास है। यह समय किसी जादुई करिश्में से कम नहीं लगता जब बर्फ से ढके परिदृश्यों की अद्भुत श्रृंखलाएं पर्यटकों को खासतौर पर विशेषतः आकर्षण करती हैं। यह समय यहा ट्रैकिंग और प्रकृति के करीब रहने के अलावा हिमाचली व्यंजनो के अनोखे स्वाद को भी चखने के लिए श्रेष्ठ है।
प्रमुख आकर्षणः
मिनी स्विट्जरलैण्ड कहे जाने वाले खज्जियार की सैर करें, कालाटोप वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों को देखें। इस दौरान यहा साहसिक गतिविधियां करने से मन मस्तिष्क को स्फूर्ति प्राप्त होती हे। पंचपुला झरने पर पिकनिक करने के अलावा गांधी चौक पर खरीदारी का अनुभव लें। सतधारा झरना, सुभाष बावली, गंजी पहाड़ी, बकरोटा हिल्स, डैनकुंड पीक ओर चामुंडा देवी मंदिर दर्शन करें ।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- डलहौजी जाने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट गग्गल हवाई अड्डा, कांगड़ा है। जहां से डलहौजी की दूरी लगभग 100 किमी है।
रेल मार्ग से
- डलहौजी पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट जंक्शन है जहां से डलहौजी की दूरी करीब पठानकोट जंक्शन की दूरी लगभग 80 किमी है।
सड़क मार्ग से
- हिमाचल प्रदेश के डलहौजी पहुंचने के लिए आप रोडवेज या निजी बसों के माध्यम से धर्मशाला अमृतसर के रास्ते पहुंच सकते हैं। दिल्ली से डलहौजी के लिए सीधे बस या कैब के माध्यम से डलहौजी की सैर करने के लिए जा सकते हैं।
6. अमृतसर
दिसम्बर के महीने में अमृतसर की रौनक खुशियों के रंग से सराबोर और स्वर्ण मंदिर की स्वर्ण रोशनी से झिलमिलाता हुआ अद्भुत प्रतीत होता है। उत्तरी भारत की हल्की सर्दी की छाप अमृतसर में दिखाई पड़ती है। सर्द भरी सुबहें गरमागरम प्यालियो से और भी ज्यादा गहरी खूबसूरत प्रतीत होती है। शांति और अमन का पाठ पढाता अमृतसर सिख रीति रिवाजों और पंरपराओं के लिए दुनिया में विख्यात है। दिसम्बर के समय यहां का माहौल अच्छा खासा सर्द हो जाता है जहां तापमान 8 डिग्री सेल्सियस से लेकर 22 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। धुंध भरी सुबहे और उजले दिनों के साथ कुहासे से ढकी शामें और सुकून भरी रातें आपको दिसम्बर के महीनें में और भी ज्यादा मंत्रमुग्ध करती हुई प्रतीत होते हैं। शाम के समय तापमान कम से कम 10 डिग्री सेल्सियस तक रहता हे।
प्रमुख आकर्षण
स्वर्ण मंदिर यानी हरमिंदर साहिब जहां आप आध्यात्मिक शांति और संपन्नता का दीदार कर सकते हैं। यहा शिष्टाचार संबंधी नियम पालन करना जरूरी होते है।ं दिन रात होते भजनों के उच्चारण, कडाह प्रसाद, लंगर का स्वाद चख सकते हैं। देश की आजादी में अमृतसर की प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना, जालियां वाला बाग हत्यांकांड और राष्ट्रीय सम्मान को बढता वाघा बॉर्डर जो अमृतसर से करीब 30 किमी करीब दूर है, देखने जा सकते हैं। विभाजन संग्रहालय, दुर्गियाना मंदिर, गोबिंदगढ किला जिसमें 7डी लेजर शो और सिख कलाकारियों का आनंद ले सकते हैं।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- अमृतसर का नजदीकी हवाई अड्डा श्री गुरु रामदास जी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्उा है जो अमृतसर को देश के मुख्य शहरों के अलावा विदेशो तक से जोड़ता है।
रेल मार्ग से
- उत्तर भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक अमृतसर रेलवे जंक्शन भारत के प्रमुख शहरों से आसानी से रेल माध्यम से पहुचने का साधन है।
सड़क मार्ग से
- अमृतसर राजमार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है जहां आप दिल्ली, चंडीगढ और जम्मू से भी आसानी से पहुंच सकते हैं। पंजाब के शहरों से टैक्सी बुक कर आराम से अमृतसर की सैर कर सकते हैं।
7. श्रीनगरः
दिसम्बर आते ही श्रीनगर मे सर्दियों के मौसम का आगाज़ हो जाता है। राजसी हिमालयी वादियों में बसा श्रीनगर समृद्धशाली और गिरते पारे के कारण और भी ज्यादा आकर्षक लगता है। इस समय तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से लेकर 8 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है, जहां डल झील जम जाती है और इन पर तैरते बगीचों की शोभा देखते बनती है। यहां की रातें बेहद ठंडी हो सकती है। शहरी हलचल और भागदौड़ से दूर यह जगह अपनी बेहतरीन खूबियों के लिए पर्यटकों को विशेषतः आकर्षित करता है। अद्भुत प्राकृतिक सुदरता और गर्मागरम चाय की प्याली का संयोजन श्रीनगर पर्यटन में चार चांद लगाने का काम करता है। इस दौरान होने वाली बर्फबारी देखने के लिए लोग श्रीनगर को बहुत पसंद करते हैं।
प्रमुख आकर्षण
श्रीनगर में दिसम्बर के समय घूमने के लिए दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान, डल झील के किनारे पर ढलते हुए सूर्य के नजारें देखने के साथ ही खरीदारी का आनंद ले सकते हैं, यहां प्रकाश और ध्वनि शो भी देख सकते हैं। निगीन झील, परी महल, जवाहरलाल नेहरू स्मारक वनस्पति उद्यान, हरि पर्वत, हजरतबल मस्जिद जो चारों ओर से बर्फीले परिदृश्य से घिरी रहती है, चार चिनार, मानसबल झील में पक्षी दर्शन का आनंद लें, इस दौरान यहां प्रवासी पक्षियों की अच्छी खासी संख्या देखने को मिलती है जो बेहद आकर्षक है। घुड़सवारी का रोमांचक अनुभव भी ले सकते हैं। अस्तानमर्ग में पैराग्लाइडिंग का साहसिक अनुभव लें। शंकराचार्य पहाड़ी की सैर करें।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- श्रीनगर मौजूद हवाई अड्डा शेख उल आलम एयरपोर्ट से आसानी से आप श्रीनगर की सैर पर जा सकते हैं जहां शहर के केंद्र से इसकी दूरी तकरीबन 15 किमी है।
रेल मार्ग से
- श्रीनगर रेलवे स्टेशन से मात्र लगभग 13 किमी की दूरी तय कर आप रेल के माध्यम से श्रीनगर भ्रमण करने को जा सकते हैं। यहां से स्थानीय बस टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। जम्मूतवी रेलवे स्टेशन श्रीनगर से करीब 270 किमी दूरी पर है जिसे बसों या कैब से तय किया जा सकता है।
सड़क मार्ग से
- श्रीनगर का सड़क मार्ग बहुत बढिया है। जहां मुख्य शहरों जैसे दिल्ली, जम्मू, पंजाब और चंडीगढ से बेहतर जुड़ाव है। आप चाहें तो सार्वजनिक वाहनों की मदद से या अपनी पर्सनल कार से भी श्रीनगर की यात्रा पर निकल सकते हैं। सड़क मार्ग प्रयोग करने से पहले मौसम और सडक की स्थिति की अद्यतन जानकारी अपने पास रखिए।
8. ऋषिकेश
उत्तराखंड का यह शहर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान कायम स्थापित किए हुए योग राजधानी के रूप में जाना जाता है। जहां साल भर घूमने के लिहाज से प्रतिष्ठित जगह है लेकिन दिसम्बर के महीनें में यहां मौसम शीतल और ठंडक प्रदान करता हुआ होता है। शांत परिवेश और प्रकृति की गोद यह स्थान मानसिक शांति और सुकून का खज़ाना है। मानसिक राहत के साथ ही यहां आत्मिक तरोताजगी भी मिलती है। दिसम्बर के महीने में यहां का तापमान लगभग 7.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, जहां सर्द एहसास होना लाज़िमी है। वैसे साल का यह सबसे ठंडा समय नहीं होता है लेकिन सुहाने मौसम लिए समय यहां बिताना बेहद आकर्षक अनुभवों को देता है। यहां आप योग और ध्यान की गतिविधियों का आनंद लेते हुए मनोरंजन कर सकते हैं, जिनका दिसम्बर में आनंद और ज्यादा बढ जाता है। यहा अवस्थित विभिन्न आश्रमों में आप योग ध्यान का अभ्यास करते हुए मंत्रमुग्ध करते वातावरण की दिव्यता का एहसास कर सकते हैं।
प्रमुख आकर्षणः
ऋषिकेश में योग ध्यान के अलावा साहसिक गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं जैसे रिवर राफि्ंटग, कैंपिंग, जिपलाइनिंग, कैफे एक्सप्लोर कर सकते हैं। ऋषिकेश में खरीदारी का अनोखा अनुभव है जहां पहाड़ी संस्कृति से सजे हुए हस्तशिल्पी नमूने और अन्य सजावटी सामानों की विस्तृत रेंज देखने को मिलती है। लक्ष्मण झूला, गंगा आरती, त्रिवेणी घाट और अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन करें।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- ऋषिकेश से लगभग 20 किमी की दूरी पर देहरादून स्थित जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से आप स्थानीय टैक्सी या बस की मदद से ऋषिकेश पहुंच सकते है।
रेल मार्ग से
- ऋषिकेश में ऋषिकेश रेलवे स्टेशन के माध्यम से उत्तर भारत के प्रमुख शहरों से यहां पहुंचना बहुत आसान है। प्रमुख शहरों के रेलवे स्टेशन से आप ऋषिकेश रेलवे स्टेशन तक की यात्रा रेल माध्यम से तय कर ऋषिकेश पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी लगभग 240 किमी है। सार्वजनिक बस, टैक्सी या कैब सर्विस आसानी से मिल जाती है। देश के प्रमुख शहरों से भी ऋषिकेश जाना बहुत आसान है क्योंकि सार्वजनिक वाहन या अपनी कार से स्वयं ड्राइव कर पहुंच सकते हैं।
9. आगरा
ऐतिहासिक नगरी के नाम से प्रसिद्ध यह शहर अपनी विरासतों और परंपराओं के लिए जाना जाता है। मुगलों की ऐतिहासिक इमारतें, बाजारों की जीवंतता और प्रतिष्ठित स्मारकों के लिए आगरा का नाम सदियों से ही लिया जाता रहा है। दिसम्बर का महीना आगरा घूमने के लिए एकदम परफेक्ट है जहां पर यमुना नदी की चमक व वातावरण की दृश्यता मौसम के मिजाज से तालमेल खाता धुंध रहित परिदृश्य और सुहाने मौसम की सौगात प्रदान करता यह नज़ारा उत्सवों जैसी उमंग और तरंग का संचार करता है।
प्रमुख आकर्षणः
आगरा के प्रमुख आकर्षणों मेंं ताजमहल का नाम सबसे पहले आता है, जहां की अद्भुत वास्तुकला सभी का मन मोह लेती है। आगरा किले की विशालता और वास्तुकला बेहद भव्य है। ऐतामाद्दौला का मकबरा देख सकते हैं, जिसे बेबी ताज भी कहते हैं। मेहताब बाग जिसे चांदनी बाग भी कहते हैं, यह ताजमहल के करीब ही है। सुर सरोवर पंछी अभयारण्य में विभिन्न तरह के पक्षियों का दीदार कर सकते हैं जहां पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां निवास करती हैं। अकबर का मकबरा जिसका निर्माण लाल बलुआ पत्थरों से हुआ है, निर्माण जहांगीर ने कराया था और आगरा से 23किमी दूरी पर है।
कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग से
- आगरा पहुंचने के लिए अंतरराज्यीय आगरा हवाई अड्डा अवस्थित है लेकिन इंटरनेशनल उड़ानों के लिए दिल्ली एयरपोर्ट के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट से आगरा की दूरी करीब 300 किमी है, जिसे आप किसी वाहन या टैक्सी से तय कर सकते हैं।
रेल मार्ग से
- आगरा मे कई रेलवे स्टेशन है जहां आप अपनी सुविधानुसार नियत रेलवे स्टेशन पहुंचकर तय कर सकते हैं। यहां आगरा सिटी, आगरा जंक्शन और आगरा फोर्ट इत्यादि हैं।
सड़क मार्ग से
- आगरा का सफर सड़क मार्ग से तय करने के लिए आप एनएच 19 के माध्यम से मथुरा से आगरा की दूरी तय कर सकते हैं और दिल्ली से यमुना एक्सप्रेसवे के माध्यम से आगरा के सफर पर निकल सकते हैं।
निष्कर्ष
साल 2025 के दिसम्बर माह में उत्तर भारत में पर्यटन के लिए सर्वोत्तम स्थानों के कई विकल्प हैं जहां संस्कृति, मौसम, रोमांच और सुकून भरे पलों के अनोखे अनुभव प्राप्त होते हैं। भारत का उत्तर भाग अपनी विविधताओं और रचनात्मक दृष्टि से सैलानियों के लिए हमेशा ही विशिष्ट स्थान रहा है। लद्दाख की शांति से लेकर राजस्थान की ऐतिहासिकता और अमृतसर की राष्ट्रीयता से लेकर श्रीनगर की रोमांचक घुड़सवारी तक हर एक परिप्रेक्ष्य में उत्तर भारत लाजवाब है इसलिए दिसम्बर 2025 की छुट्टियों का आनंद लेने की तैयारी करने के साथ ही अविस्मरणीय पलों का आनंद लेकर यादगार अनुभवों को कैद कीजिए।
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