- Jan 06, 2026
भारत देश अपनी विविधताओं भरी विशेषताओं के लिए हमेशा ही ख़ास रहा है जिसकी गोद में हमेशा से ही कुदरत के नायाब तोहफे हैं, इन्हीं तोहफों में से एक राजस्थान का प्रसिद्ध रणथम्बौर राष्ट्रीय उद्यान है जो जंगल और ऐतिहासिक विरासत का साहसिक मेल है। यह उद्यान बंगाली टाइगर्स के लिए सर्वाधिक प्रसिद्ध है जहां इनके प्राकृतिक आवास और इनसे जुड़ी अन्य दुर्लभ नजारे देखने और जानने का अवसर मिलता है। रणथंबौर वन्यजीव प्रेमियों के लिए भारत की प्रमुख शानदार जगहो में से एक है, यहां मौजूद विहंगम झीलें, संपन्न जैव विविधता और अन्य कई आकर्षण पर्यटन की खूबसूरती को और भी ज्यादा बढा देते हैं।
रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान कहां है
राजस्थान के सवाई माधोपुर में स्थित रणथम्बौर राष्ट्रीय उद्यान यह जगह दिल्ली से करीब 380 किमी, आगरा से 240 किमी, उदयपुर से 385 किमी और मुंबई से तकरीबन 1030 किमी दूरी पर स्थित है।
रणथंबौर नेशनल पार्क का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
सवाई माधोपुर जिले में स्थित रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान पार्क का नाम रणथम्बौर किले के नाम पर रखा गया है। 10वीं शताब्दी के आसपास चौहान वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था, इनके बाद यह किला दिल्ली सल्तनत, मेवाड़ और मुगलों के अधिकार में रहा। किला जयपुर रियासत के अंदर 19वीं शताब्दी में शामिल कर लिया गया।
ब्रिटिश काल में इस पार्क को राजसी अंदाज के शिकारगाह के रूप मे जाना जाता था, तब बड़े पैमाने पर यहां बाघों और अन्य मुख्य जंगली जानवरों का शिकार किया जाता था। साल 1955 में स्थापित इस अभयारण्य की शुरूआत सवाई माधोपुर खेल अभयारण्य के रूप में हुई थी जो पहले 282 वर्ग किमी क्षेत्र में विस्तारित था।
1973 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत शामिल इस स्थान को बाघों की संख्या को संरक्षित करने की दिशा में मजबूती से स्थापित किया गया। 1980 में यह स्थान राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत घोषित कर दिया गया। साल 1991 में रणथंबौर नेशनल पार्क के क्षेत्रफल में बढोत्तरी करते हुए आसपास के केलादेवी और सवाई मान सिंह अभयारण्यों को भी शामिल किया गया जिससे इसका कुल क्षेत्रफल अब 1,334 वर्ग किमी. हो गया।
रणथंबौर नेशनल पार्क की क्षेत्रफल सीमा और वातावरण
रणथंबौर राष्ट्रीय पार्क भारत के राजस्थान राज्य में स्थित है जो उत्तर में बनास नदी और दक्षिण में चंबल नदी से घिरा हुआ है, पूर्वी भाग में अरावली और विंध्य पर्वतमालाओं के मिलन बिन्दु पर स्थित है। तकरीबन 1334 वर्ग किमी क्षेत्रफल पर फैला यह पार्क अर्ध शुष्क है जिसका गर्मियों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और इसी जगह का तापमान सर्दियों में 2 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुच जाता है। बारिश के दिनों में बेहतर मानसून से यहां वनस्पति हरी भरी और हरियाली लिए शानदार हो जाती है।
रणथंबौर नेशनल पार्क में वन्य जीव
रणथम्बौर नेशनल पार्क में कई तरह के वन्य जीवों की विविधता पाई जाती है। यहां स्तनधारी, पक्षी, सरीसृप और कई तरह की वनस्पतियां पाई जाती हैं जिसकी विविध प्रजातियां यहां मौजूद है। इस अभयारणय को बाघो के अभयारण्य के रूप में जाना जाता है। वनस्पति, पेड़ पौधे, लताएं, छोटे जीव और पक्षियों की अलग अलग कई सारी विविधतांए आकर्षित करती हे।
जानवरों के अलावा पक्षियों की करीब 265 प्रजातियां देखने को मिलती है। शीत ऋतु में यहां कई विभिन्न तरह के प्रवासी पक्षी आते हैं जिनमें कई तरह के स्टॉर्क देखने के अलावा चील, क्रेस्टेड सरपेंट ईगल, स्परफाइल मोर आदि देखने को मिलते हैं।
सर्वे अनुसार यहां स्तनधारियों की 40, सरीसृपों की 35 और पक्षियों की 320 प्रजातियां मिलती है।
रणथंबौर नेशनल पार्क में मिलने वाली वनस्पतियां
रणथंबौर में ज्यादातर शुष्क पर्णपाती वनों की अधिकता देखने को मिलती है, पीपल, बरगद, महुआ, बबूल, धोक और अन्य प्रकार के पेड़ो को बड़ी संख्या में देखने का अवसर मिलता है। वर्षा ऋतु में यहां की हरियाली और आकर्षण देखने में अत्यंत मंत्रमुग्ध करती है। पेड़ों की यहां 300 से अधिक प्रजातियां है, जिनमे औषधीय गुणों वाले पेडों की संख्या लगभग 100 से ज्यादा है। इस क्षेत्र में सघन उष्णकटिबंधीय शुष्क वन, खुली झाड़ियां और चट्टानी क्षेत्र हैं, जिनके आसपास झीलें और नदियां मौजूद हैं। पारिस्थितिकी क्षेत्र में खटियार गिर शुष्क पर्णपाती वन देखने को भी मिलते हैं।
रणथंबौर किला वास्तुकला और महत्व
रणथंबौर दुर्ग, राजस्थान के अद्भुत और शानदार किलो में से एक है। चौहान वंश से संबंधित यह किला तकरीबन 10वीं से 12वीं सदी में बनाया गया था। शाही अंदाज और राजसी ठाटबाट जीने और देखने का आनंद लेना चाहते है तो यह किला परफेक्ट प्लेस है। रणथम्बौर राष्ट्रीय पार्क के बीचोंबीच बना यह किला यूनेस्को वैश्विक धरोहरों मे गिना जाता है। विश्व विरासत सूची में शामिल यह किला एक खास पहाड़ी पर बना है, जहां राजाओं के लिए शिकार के लिए घना जंगल भी है। इस किले को चारों तरफ से विशाल दीवारों से घेरा गया है। इन्हीं दीवारों पर बड़े पत्थरों से बनी सीढियां बनी है जो किले की ओर जाती हैं। किले की सुरक्षा के लिए इन्ही ंदीवारों पर सैनिक पहरेदारी करते थे। प्रसिद्ध वास्तुकला और सुदंरता की मिसाल यह किला विशाल दरवाजे, शानदार गुम्बद, स्तंभ, महल और मंदिरों की प्रसिद्धि पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है। बंदरों की अधिकता और उछल कूद की गतिविधियां, उनके नृत्य को प्रदर्शित करता है।
पुरातत्वियों के अनुसार चौहान वंश के राजा सपलक्ष के शासनकाल में इस किले का निर्माण शुरू हुआ जिसका बचा हुआ काम राजस्थान के चौहान वंश के शाही परिवार ने पूरा करवाया। चौहान वंश के राजाओं द्वारा इसे रणस्तंभ नाम दिया गया था। पृथ्वीराज प्रथम के शासनकाल में यहां जैन धर्म का बहुत प्रचार प्रसार देखने को मिलता है। सन् 1192 ई में मुहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज तृतीय से इस किले को अपनी सत्ता स्थापित कर ली। सन् 1236 में जब दिल्ली पर इल्लतुतमिश् का शासन था तब चौहानों ने इस किले के रूप में अपना गौरव पुनः प्राप्त कर लिया। सन् 1301 में यह किला अलाउद्दीन खिलजी के हाथों में चला गया।
वास्तुकलाः रणथंबौर पार्क मे यह किला एक चटटान पर बना है जिसकी सुरक्षा दीवार बेहद विशाल है और सात दरवाजे हैं। इनके नाम हाथी पोल, अंधेरी पोल, गणेश पोल, नवलखा पोल, दिल्ली पोल, सूरज पोल और सतपोल द्वार हैं। इस किले में एक कचहरी भी मौजूद है जिसमे 3 कक्ष हैं- केंद्रीय कक्ष सबसे बड़ा है। हम्मीर पैलेस को राजा हमीर ने अपने शासनकाल में बनवाया था जिसे हम्मीर पैलेस कहते हैं। इसमें बालकनी और कक्ष हैं जिनके सीढी और कमरे छोटे पारंपरिक दरवाजों से जुड़ा है। हमीर पैलेस तीन मंजिल बनी हुई है जिसमें 32 खम्भें हैं, इनकी वजह से यानी गुम्बद को मजबूती प्राप्त होती है, इसके अलावा इस पैलेस की हर मंजिल पर बरामदा प्राप्त है। रणथंबोर में 84 स्तंभों पर टिका हुआ एक बड़ा हॉल है जिसकी ऊंचाई 61 मीटर है। इस को बादल महल के नाम से जाना जाता है, जिसका उपयोग राजाओं द्वारा बैठने और शासन चलाने के लिए करते थे। रणथंबौर महल की ऐतिहासिकता और भव्यता ऐतिहासिक प्रेमियो ंको बहुत आकर्षित करती है।
रणथंबौर में सफारी और पर्यटन
रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान का सबसे प्रमुख गतिविधि सफारी का आनंद लेना है जो पर्यटको के लिए सबसे प्रमुख आकर्षण हैं। यहां सफारी का आनंद लेने के लिए ऑनलाइन बुकिंग सेवा का उपयोग करके जीप और कैंटर सफारी में सीटों की ऑनलाइन बुकिग कर सकते हैं। रणथंबौर बाघ अभयारण्य को 10 सफारी जाने में विभाजित किया गया है, जहां सभी सफारी जोन में सफारी टूर का आयोजन किया जाता है। रणथंबौर टाइगर सफारी सेवा पार्क के सभी जोन के लिए उपलब्ध है।
सफारी के प्रकार
रणथंबौर मे वन्य प्रकृति और जीवों का अन्वेषण करने के लिए दो तरह से सफारी का विकल्प मौजूद है- जीप सफारी और कैंटर सफारी। प्रतिदिन निश्चित समय सीमा मे दो बार सफारी का आयोजन किया जाता है। यहां पर्यटकों के समूह को ले जाने के लिए जीप और कैंटर सफारी, एक प्रशिक्षित और विशेषज्ञ गाइड के साथ ही वैध परमिट की आवश्यकता को दर्शाता है, इनके बिना प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती है। वर्तमान में रणथंबौर टाइगर सफारी बुकिंग नीति के अनुसार 6 सीटर वाली 20 जीप और 20 सीटर वाले 20 कैंटर को दोनों में से किसी एक शिफ्ट में रणथंबौर नेशनल पार्क में एंट्री करने की अनुमति है। सफारी शिफ्ट का चयन आप स्वयं कर सकते हैं। रणथंबौर पार्क में सफारी की ऑनलाइन बुकिंग पहले आओ पहले पाओ के नियम से की जाती है, जिसमें शुल्क पहले से ही देना होता है। सफारी के लिए बुक किए गये भुगतान शुल्क को वापस नहीं लिया जा सकता और न ही किसी और को हंस्तारित किया जा सकता है।
रणथंबौर सफारी बुकिंग प्रक्रिया के नियम
- प्रत्येक पर्यटक के बारे में व्यक्तिगत जानकारी, सरकारी पहचान प्रमाण पत्र के अनुसार होना जरूरी है।
- सफारी बुकिंग की तिथि और शिफ्ट निश्चित करें।
- सरकारी पहचान प्रमाण पत्र का विशिष्ट पहचान क्रमांक चाहिए।
- सफारी का प्रवेश शुल्क एडवांस ही देना है।
- जोन 1/2/3/4/5 प्रत्येक बुधवार को बंद रहता है
- जोन 6/7/8/9/10 प्रत्येक मंगलवार को बंद रहता है।
रणथंबौर सफारी बुकिंग के लिए अपनाने योग्य जरूरी बातें
- सफारी बुकिंग के लिए आपको पूरी फीस अग्रिम फीस चुकाना जरूरी है।
- यहां आने पर सरकारी पहचान पत्र होना जरूरी है और सफारी के लिए बुकिंग के समय लगाया गया पहचान प्रमाण पत्र ही अनिवार्य होता है।
- कन्फर्म बुकिंग होने पर धनराशि वापसी या रद्दीकरण की अनुमति नहीं है।
- बुकिंग अहस्तांतरणीय है। इसे किसी को और हस्तांतरित नहीं कर सकते हैं।
- सफारी बुकिंग अधिकतम 90 दिन पहले बुक कर सकते हैं।
- बिना किसी पूर्व सूचना के पार्क बंद किया जा सकता है।
- सफारी के तय प्रस्थान समय से 15 मिनट पहले ही बोर्डिंग स्थान पर रिपोर्ट करना जरूरी है।
- बुकिंग के बाद शुल्क में किसी प्रकार की संशोधन की स्थिति में पर्यटको को पार्क में प्रवेश के समय अंतर राशि का भुगतान करना जरूरी है।
सफारी समय
| सफारी महीने | रणथंबौर सफारी की समय सारिणी |
| 1 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक | सुबह 6ः30 मिनट से 10 बजे और दिन में 2ः30 बजे से शाम 6.00 बजे तक |
| 1 नवंबर से 31 जनवरी तक | सुबह 7.00 बजे से 10.30 बजे और दिन में 2ः00 बजे से शाम 5ः30 बजे तक |
| 1 फरवरी से 31 मार्चः | सुबह 6ः30 बजे से 10.00 बजे तक और दोपहर 2.30 बजे से शाम 6.00 बजे तक |
| 1 अप्रैल से 15 मई तक | सुबह 6.00 बजे से 9.30 बजे और दोपहर 3.00 बजे से शाम 6.30 बजे तक |
| 16 मई से 30 जून तक | सुबह 6.00 बजे से 9.30 बजे तक और दोपहर 3.30 बजे से शाम 7.00 बजे तक |
रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षण हेतु चलाई जा रही योजनाएं
वन्य जीव संरक्षण और वन्य प्रजातियो ंकी देखरेख के लिए रणथम्बौर राष्ट्रीय उद्यान में कई जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। जैसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत 1973 में बाघों की संख्या में वृद्धि भी हुई। तमाम सारे सामाजिक संगठनों और सरकारी स्तर पर जैव विविधता को सुरक्षित करने के उद्देश्यों से कई योजनाओ को चलाया जा रहा है। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर प्रकृति और वन्य जीवों की संरक्षा और सुरक्षा हेतु सभी की भागीदारी होना जरूरी है।
रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान में घूमने योग्य स्थान
त्रिनेत्र गणेश मंदिरः इस स्थान पर गणेश भगवान का पूरा परिवार एक साथ विराजमान है जो बहुत दुर्लभ है। रणथंबौर किले में स्थित इस मंदिर के दर्शन उद्यान विचरण करते समय देख सकते हैं। इस मंदिर की विशेषता है कि यह लाल करौली पत्थरों से बना है जो सदियों से लोकप्रिय धार्मिक स्थलों मे गिना जाता है। गणेश जी को बुद्धि का देवता माना जाता है जो भाग्य, धन और शिक्षा भी प्रदान करते हैं। यहां श्रद्धालुओं की भीड़ अक्सर दर्शन करने को आती हैं।
इस मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक कथा है कि 1299 ई. मे रणथंबौर दुर्ग पर राजा हम्मीर और अलाउद्दीन खिलजी के बीच युद्ध हुआ तब युद्ध के समय रणथंबौर दुर्ग मे जहां राजा रहते थे, वहां खाद्यान्न सामग्री के साथ आवश्यक वस्तुओं को गोदाम में भर कर रख लिया गया। युद्ध कई सालों तक चला और गोदाम में रखी सामग्री भी खत्म होती गई।
इस बात से चितिंत राजा भगवान गणेश जी के बहुत बड़े भक्त थे, तब राजा के स्वप्न में गणेश जी ने कहा कि खाद्यान्न सामग्री फिर से भर जाएगी और समस्याएं दूर हो जाएंगी। तब अगले दिन देखा गया तो गोदाम भरे हुए थे और भगवान गणेश की यही त्रिनेत्र प्रतिमा भी वहां मिली, युद्ध समाप्त हो गया। इसके बाद राजा ने गणेश जी का भव्य मंदिर बनवाकर वही प्रतिमा यहां स्थापित की।
बकौलाः रणथम्बौर राष्ट्रीय पार्क में कई ऐसी जगहें हैं जहां आप सफारी के दौरान रॉयल बंगाल बाघ और वन्यजीवो की विविध श्रृंखला को देख सकते हैं, इसी में एक प्रसिद्ध है बकुला। सघन वन क्षेत्र और तालाब, कुंड देखने लायक आकर्षणों को एकत्रित कर पर्यटको का मनोरंजन कराते हैं। तेज धूप के समय प्यास के कारण बाघिन और उनके शावको को अन्य जंगली जानवरों के साथ जलकुंडो के आसपास घूमते हुए देखा जा सकता है। यहां की सघन वनस्पति सर्द हवाओं के झोंको के साथ बकुला क्षेत्र रणथंबौर की अन्य जगहों की अपेक्षा अधिक सर्द और शानदार बन जाता है। यहां आप दूरबीन की मदद से यहां के विविध जानवरों को निहार सकते हैं।
लकारदा और अनंतपुराः रणथंबौर नेशनल पार्क के उत्तर पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में स्थित ये क्षेत्र पर्यटको को आकर्षित करते हैं क्योंकि यहां वृहद संख्या में सुस्ती यानी स्लोथ पाई जाती है जो यहां फैले चीटियों के टीलों की ओर आकर्षित होते हैं। कभी कभार धारीदार लकड़बग्घे भी देखने को मिल जाते हैं जिनकी संख्या बेहद कम होती है।
काचिदा घाटीः रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान के बाहरी परिवेश में कचिदा घाटी पर्यटको के लिए पैंथरो की आबादी के कारण बेहद आकर्षित करती है। दरअसल यह बंगाल के रॉयल टाइगर्स से बचने के लिए यहां निवास करते हैं। मधुमक्खियों के छते ओर चीटियों के टीलों की वजह से स्लॉथ की भी अच्छी खासी संख्या यहां देखने को मिलती है। कचिदा घाटी पहुचने के लिए जीप सफारी अच्छा साधन है। प्राकृतिक खूबसूरत वातावरण और फोटोग्राफी शौकीन के लिए यहां एक्सप्लोर कर सकते हैं।
राज बाग खंडहरः यह खंडहर रणथंबोर नेशनल पार्क में पदम तालो और राज बाग तालो के बीच स्थित है जहां प्राचीन खंडहर, मेहराबों, प्रांगणों, गुबंदों और सीढियों के अवशेष दर्शाती संरचनाएं हैं। वातावरणीय अनुभव और ऐतिहासिक महत्व समझाता यह खंडहर वैभव और संपन्नता के साथ ही प्रभावशाली भी हैं जहां अक्सर रॉयल बंगाल टाइगर्स छिपने के लिए आते हैं। नेशनल पार्क में वन्यजीव सफारी का आनंद लेने के साथ ही इन पत्थर के खंडहरों को दूर से ही निहारा जा सकता है।
पदम तालाबः रणथंबौर नेशनल पार्क के भीतर स्थित रणथम्बौर की सबसे बड़ी झीलों में से एक है। कहते हैं कि यहां राजकुमारी पद्मावती स्नान करती थी और यही उन्होंने सती होने का संकल्प लिया था। झील के पास ही अलंकृत जोगी महल खूबसूरत आकर्षण हैं। सघन वनों से घिरी इस झील के पास कई जानवर अधिकतर आते हैं जो भीषण गर्मी से राहत पाने और प्यास बुझाने के लिए झील की ओर आते हैं। अक्सर प्रातःकाल में यहां दुर्लभ चिंकारा हिरण देखने को मिलता है। जानवर झील के पास अक्सर दिख ही जाते है जो फोटोग्राफी के लिहाज से भी विशेष आकर्षित करता है। गर्मियों मे पानी सूखने के समय यहां मगरमच्छ जैसे जानवरों को देख सकते हैं।
जोगी महलः रणथम्बौर राष्ट्रीय उद्यान में एतिहासिक शिकारगाह के रूप में प्रसिद्ध यह महल 19वीं सदी के समय जयपुर के राजा द्वारा बनवाया गया था, जिसे बाद में अतिथि ग्रह में बदल दिया गया। पदम तालाब झील के पास स्थित यह महल झील और आसपास के वातावरण का खुशनुमा पहलू प्रस्तुत करता है। जोगी महल की खासियत है कि यहां बरगद का पेड़, भारत का दूसरा सबसे बड़ा बरगद का पेड़ है, जिसकी आयु लगभग 700 सालो ंसे भी अधिक है। इस पेड़ की विस्तृतता करीब 300 मीटर से भी अधिक क्षेत्रफल पर है। धार्मिक दृष्टि से इस पेड़ को अति पूज्य माना जाता है इसके अलावा वन्य प्राणियों के लिए भी यह स्थान फेमस है, यहां बाघ, तेंदुआ, हिरण, रीसस मकाक, भालू के अलावा पक्षियो ंकी कई प्रजातियां देखने को मिल जाती हैं।
रणथंबौर नेशनल पार्क घूमने के लिए सबसे योग्य समय
शीत ऋतुः शरद ऋतु अक्टूबर से मार्च तक का मौसम यहां घूमने की दृष्टि से सबसे अच्छा माना जाता है। इस समय मौसम सुहाना और शानदार रहता है और लुभावनी धूप में जानवर भी खुले में ज्यादा घूमते दिखाई देते हैं। सुबह और शाम की सफारी के लिए यह समय बेहद उपयुक्त व विशेष होता है।
रणथंबौर घूमने के लिए सबसे अच्छा समय सर्दियों का मौसम होता है जब वातावरण मे ठंडक के साथ यहां के शानदार नजारें और ऐतिहासिक परिदृश्य आकर्षित करते हैं।
ग्रीष्म ऋतुः गर्मी के मौसम में यहां का तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अप्रैल से जून तक यह मौसम में गर्मी बहुत रहती है लेकिन इस मौसम में बाघों ओर अन्य जानवरों को देखने की संभावना अधिक होती है क्योंकि वे अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी के तालाबों में आते हैं।
वर्षा ऋतुः बारिश के सीजन में जुलाई से सितम्बर तक रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान के काफी सारे क्षेत्र आगुंतको के लिए बंद हो जाते हैं, क्योंकि यह समय बाघों के प्रजनन का होता है। ऐसे में आप हरियाली भरे नजारों की सैर करने के लिए यहां जा सकते हैं।
रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- रणथंबौर पहुंचने के लिए जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा स्थित है जो लगभग 200 किमी दूरी पर अवस्थित है। हवाई अड्डे से यहां तक पहुंचने के लिए आप बस या टैक्सी के माध्यम से पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- रणथंबौर पहुंचने के लिए रेल मार्ग की सुविधा भी मिलती है इसके लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन है। जो उद्यान से करीब 14 किलोमीटर दूर स्थित है। जयपुर रेलवे स्टेशन से आप लगभग 200 किमी दूरी तय कर यहां पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- सड़क मार्ग के माध्यम से दिल्ली से रणथंबौर जाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग 11ए और राष्ट्रीय राजमार्ग 8 से पहुंच सकते हैं। उदयपुर और प्रयागराज एनएच 76 के रास्ते जा सकते हैं। प्रदेश राज्यमार्ग 24 के माध्यम से आप जयपुर और एसएच 1 से आगरा और भरतपुर के रास्ते रणथंबौर जा सकते हैं।
निष्कर्ष
रणथंबौर राष्ट्रीय उद्यान सिर्फ प्राकृतिक धरोहर है बल्कि ऐतिहासिक और सास्कृतिक देन भी है, जहां पुरातत्व स्थलों की रौनक अद्भुत और अकल्पनीय होने के साथ ही वन्य प्राणियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है। रणथम्बौर राष्ट्रीय उद्यान अपने वन्य पारिस्थितकी तंत्र और संपन्न जैव विविधता के लिए मशहूर है। यहां के रॉयल बंगाल टाइगर्स और अन्य जीव जगत पर्यटकों को लुभाते हैं जहां इनकी विशेषताएं और उपस्थिति रोमांचक अवसर प्रदान करती है। पर्यावरण संरक्षण को बढावा देते ये राष्ट्रीय उद्यान कुदरत की धरोहरों को संजोए रखते हैं।
रणथम्बौर नेशनल पार्क की यात्रा करते समय अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न उत्तर
प्रश्नः क्या, रणथम्बौर नेशनल पार्क साल भर खुला रहता है?
उत्तरः हां, लेकिन मानसून ऋतु में रणथम्बौर नेशनल पार्क के कुछ हिस्से बंद कर दिये जाते हैं।
प्रश्नः क्या सफारी के लिए ऑनलाइन बुकिंग सुविधा मिलती है?
उत्तरः हां, रणथम्बौर नेशनल पार्क मेंं सफारी के लिए ऑनलाइन बुकिंग सुविधा भी मिलती है।
प्रश्नः अधिकतम कितने दिनों पहले सफारी बुकिंग कर सकते है?
उत्तरः अधिकतम 90 दिनों पहले आप ऑनलाइन सफारी बुकिंग सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
प्रश्नः क्या, ऑनलाइन सफारी बुकिंग कराते समय अग्रिम राशि जमा करनी होती है?
उत्तरः जी हां, रणथम्बौर नेशनल पार्क में ऑनलाइन सफारी बुकिंग कराते समय लागू धनराशि बुकिंग के समय ही देना होता है।
प्रश्नः क्या, बुकिंग धनराशि वापसी या हस्तान्तरणीय योग्य है?
उत्तरः नहीं
प्रश्नः रणथम्बौर नेशनल पार्क में कितने तरह की सफारी सुविधा है?
उत्तरः रणथम्बौर नेशनल पार्क में जीप और कैंटर सफारी सुविधा मिलती है।
प्रश्नः क्या पर्सनल वाहनों को पार्क के अंदर जाने की अनुमति है?
उत्तरः जी नहीं, पार्क में केवल अधिकृत सफारी वाहनों को ही जाने की अंदर जाने की अनुमति है।
प्रश्नः रणथम्बौर नेशनल पार्क में रणथम्बौर किले में कौन सा मंदिर दर्शनीय है?
उत्तरः रणथम्बौर किले में त्रिनेत्र गणेश मंदिर प्रसिद्ध और पवित्र तीर्थस्थल है।
प्रश्नः रणथम्बौर नेशनल पार्क में घूमने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा और रेलवे स्टेशन कौन सा है?
उत्तरः रणथम्बौर नेशनल पार्क से नजदीक जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और नजदीकी रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर है।
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