- Jan 05, 2026
धर्म आस्था और विश्वास के प्रतीक भारतीय मंदिरों में आध्यात्मिकता व भक्तिमय वातावरण की दिव्यता हमेशा ही भक्तों को आकर्षित करती रहती है। भारत के इन मंदिरों में सिर्फ भक्तों की भीड़ ही नहीं बल्कि उनके द्वारा भेंट किए गए उपहारों, चढावों की रौनक हमेशा से ही आकर्षण का केंद्र रहा है, इन आर्थिक भेंटों से न सिर्फ भक्ति के आयामों की परिभाषा उच्च होती है बल्कि अर्थव्यवस्था को भी बल मिलता है। धार्मिक परिप्रेक्ष्य में आर्थिक उन्नति प्रदान करते इन मंदिरों की उपस्थिति प्रगति का द्योतक है जहां भारत में ऐसे दिव्य और वैभवशाली मंदिरों की कोई कमी नहीं है। आध्यात्मिकता, रीति रिवाज, परंपराओं के साथ आर्थिक विशेषताओं को सहेजते इन भारतीय मंदिरों के बारें में और भी अधिकता से इस आर्टिकल में जानते हैं।
1. श्री तिरूपति बालाजी, तिरूपति, आंध्र प्रदेश
तिरूमाला श्री वेंकटेश्वर मंदिर नाम से लोकप्रिय यह मंदिर भारत के उन प्रमुख मंदिरो में से एक है जहां धन संपति के अथाह भंडार पाए जाते हैं। इस मंदिर में कई तरह से भक्त अपने दान और चढावें को अर्पित करते हैं। तिरूपति मंदिर सिर्फ भारत ही नहीं वरन् दुनिया भर के मंदिरो में सबसे ज्यादा अमीर मंदिरों में से गिना जाता है, क्योंकि यहां हर साल सबसे ज्यादा दान और चढावा प्राप्त किया जाता है, जहां सिर्फ नकदी ही नहीं बल्कि स्वर्ण को भी बहुत ज्यादा मात्रा में समर्पित किया जाता है। यहां बताए गए सोने के भंडारों और नकद का वृहद हिस्सा बैंकों में जमा होता है जिनसे ब्याज के रूप में अच्छी खासी आय प्राप्त होती है। इस मंदिर में कई तरह से दान किया जाता है जिसमें केशदान भी प्रमुख है, इन केशों का व्यापार कर सालाना बेहतर आय मिल जाती है। इस मंदिर की समृद्धि और संपन्नता इतनी विशाल है कि यहां की संपति कई देशो की जीडीपी से भी बहुत आगे है। तिरूमाला तिरूपति मंदिर में मिलने वाले दान का वृहद हिस्सा धर्मशालाओं, भोजन और भक्तों की सुविधाओं पर खर्च किया जाता है। तिरूमाला देवस्थानम् द्वारा कई स्कूल, अस्पताल और धर्मशालाएं खोली गई हैं जहंा सभी को बुनियादी सुविधाएं आराम से मिल सके।
तिरूपति मंदिर में दान से जुड़ी किंवदंतीः
कहा जाता है कि जब भगवान वेंकटेश्वर ने श्रीनिवासन रूप में देवी पद्मावती से विवाह किया तब उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं थी तब उन्होंने भगवान कुबेर से कुछ धन उधार लिया था, तब से भगवान श्री वेंकटेश्वर कुबेर जी के धन का ब्याज चुकाने के कारण कर्ज में माने जाते हैं, इसलिए भक्तगण उनके कर्ज को कम करने के लिए धन संपति, स्वर्ण संपदा और एक मान्यता के कारण अपने केशों का दान समर्पित करते हैं।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ 3,00,000 करोड़ से अधिक
समयः सुबह 2ः30 मिनट से रात 1ः30 मिनट तक
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- तिरूमाला तिरूपति मंदिर दर्शन करने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट रेनिगंुटा है जिसे तिरूपति इंटरनेशनल हवाई अड्डे नाम से भी जानते हैं। जिसकी मंदिर से दूरी लगभग 15 किमी है। भारतीय प्रमुख शहरो से तिरूपति एयरपोर्ट के लिए सीधी फ्लाइट आसानी से मिल जाती हैं।
रेल मार्ग से
- मंदिर से नजदीकी रेल विकल्प तिरूपति रेलवे स्टेशन, तिरूमाला से लगभग 26 किमी दूरी पर स्थित है। इसे आप बस टैक्सी या पैदल तय कर दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- तिरूपति से तिरूमाला यानी श्री वेंकटेश्वर मंदिर जाने के लिए हर 2 मिनट में बस की उपलब्धता रहती है जहां आप आसानी से मंदिर पहुंच सकते हैं। तिरूपति पहुंचने के लिए भी आंध्र प्रदेश के सभी प्रमुख शहरो सें बस, टैक्सी या निजी कार की सुविधा लेकर तिरूपति पहुंच सकते हैं।
2. श्री पद्मनाभ स्वामी, तिरूवनंतपुरम, केरल
इस मंदिर की स्थापना ऋषि दिवाकर विल्लमंगलम ने की थी जो भगवान विष्णु के प्रति भक्ति इतनी गहरी थी बालकस्वरूप में भगवान विष्णु इनके साथ क्रीड़ाएं किया करते थे लेकिन ये भगवान विष्णु के स्वरूप पहचान नहीं पाएं, एक बार किसी बात पर स्वामी विल्लमंगलम ने बालक को डांट फटकार दिया जिससे वह बालक जंगल मे जाकर विलुप्त हो गए। बहुत जल्दी ही विल्लमंगलम को एहसास हुआ कि वह बालक स्वयं भगवान विष्णु ही थे। तब दुखी होकर वे जंगल की ओर तलाश मे निकले तब वे बालक का पीछा करते हुए जैसे ही गुफा की ओर आगे बढे वह बालक महुआ वृक्ष में विलीन हो गए और इसी के साथ वृक्ष गिरते हुए भगवान विष्णु के स्वरूप में परिवर्तित हो गया जो लगभग 8 मील तक फैला हुआ था तब ऋषि विल्लमंगलम ने उनसे छोटा आकार ग्रहण करने का अनुरोध किया तब भी जंगली पेड़ों की उपस्थिति की वजह से ऋषि उन्हें एक बार में पूरी तरह नहीं देख पाएं, बल्कि तीन भागों में देख पाए। तभी से यह स्थान पद्नाभस्वामी मंदिर नाम से जाना जाता है।
केरल का यह मंदिर भगवान विष्णु के प्रसिद्ध मंदिरो ंमें से एक है जहां इनके अनंत रूप के विशाल दर्शन प्राप्त होते हैं। भव्य और विशाल अनंत दर्शन प्रदान करते पद्नाभ स्वामी की अनंतशयनम प्रतिमा शेषनाग पर स्थापित लगभग 18 फुट ऊंची और वृहद है कि आप इनके संपूर्ण शरीर के दर्शन एक साथ नहीं करते हैं। इन्हीं के अनंत नाम पर इस स्थान को तिरूवनंतपुरम यानी भगवान की भूमि के नाम से जाना जाता है। मंदिर में प्रवेश के लिए ड्रेस कोड का पालन सख्ती से किया जाता है जहां पुरूषों के लिए धोती और महिलाओ के लिए पारंपरिक साड़ी या सलवार सूट में प्रवेश करना ही जरूरी है। मंदिर में स्वर्ण कलश, हीरे जवाहरात और बहुमूल्य रत्नों की बेशकीमती तिजोरियां हैं साथ ही बताया जाता है कि मंदिर में एक गुप्त खजाना संग्रह है जिसे कभी खोला नहीं जाता है। यह भारत के बेशकीमती और अमीर मंदिरों में से एक है। मंदिर अपनी अद्वितीय वास्तुकला, अदम्य सुंदरता और गुप्त खजाना संग्रह के लिए जाना जाता है।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ 1,25,000 करोड़ से अधिक
समय: सुबह 3ः30-12ः00 बजे तक, शाम 4ः30-7ः20 बजे तक
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- पद्नाभस्वामी मंदिर केरल के तिरूवंनतपुरम में स्थित है जहां हवाई रास्ते से पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट त्रिवेंद्रम है। एयरपोर्ट से पद्नाभस्वामी मंदिर की दूरी लगभग 4 किमी है।
रेल मार्ग से
- रेल सेवा माध्यम से पद्नाभस्वामी मंदिर जाने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन त्रिवेंद्रम रेलवे स्टेशन है जहां से मंदिर की दूरी लगभग 2 किमी ही है।
सड़क मार्ग से
- केरल की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध तिरूवनंतपुरम आसपास के प्रमुख शहरोे से सड़क रास्ते के माध्यम से आसानी से जुड़ा हुआ है जहां आप स्थानीय बस टैक्सी के अलावा निजी वाहन से भी पहुंच सकते हैं।
3. श्री वैष्णो धाम देवी मंदिर, कटरा, जम्मू
माता वैष्णों का परम धाम और दिव्य पिंडी रूप में दर्शन कराता यह स्थल भक्तों के लिए आस्था और विश्वास की पूंजी है। शक्ति का विशिष्ट स्थान देवी वैष्णों मंदिर में हर साल लाखों करोड़ों भक्त दर्शन के लिए पधारते हैं। भक्तों द्वारा अर्पित किए गए दान, चढावा व आय से मंदिर प्रबंधन की आर्थिक संपन्नता दिनोदिन बढती जा रही है, जिसमें सोना चांदी, नकदी बड़ी मात्रा में प्राप्त होता है। मंदिर दैवीय 51 शक्तिपीठों में से एक है जहां त्रिकूट पर्वत पर इसकी उपस्थिति और आध्यात्मिक महत्व सदियों से अपनी दिव्यता का प्रकाश फैला रही है, इसके आस्थामय प्रकाश में भक्त वैष्णों देवी मंदिर दर्शन के लिए सदैव अभिलाषा रखते हैं।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ 2,550 करोड़ से अधिक
समय: सुबह 5 बजे से दोपहर 12 बजे, शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
वैष्णों देवी मंदिर पहुचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा जम्मू एयरपोर्ट है जिसे जम्मू सिविल एन्क्लेव भी कहते हैं। कटरा से इस एयरपोर्ट की तकरीबन दूरी 50 किमी है जिसे तय करने में लगभग 1.5-2 घंटे का समय लग सकता है।
रेल मार्ग से
वैष्णो देवी मंदिर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कटरा ही है। इसके अलावा करीब 50 किमी की दूरी पर स्थित जम्मूतवी रेलवे स्टेशन है जिसे आप स्थानीय बसों या टैक्सियो ंसे तय कर आराम से मंदिर पहंुच सकते हैं।
सड़क मार्ग से
कटरा स्थित श्री वैष्णो देवी मंदिर पहुंचने के लिए जम्मूतवी होते हुए सड़क रास्ते एनएच 44 से भी यात्रा कर सकते हैं। देश के प्रमुख शहरो से कटरा के लिए बसों वगैरह का संचालन होता रहता है। इनकी मदद से आप कटरा स्थित वैष्णो देवी मंदिर पहुंच सकते हैं।
4. श्री गुरूवायुर देवस्वोम मंदिर
दक्षिण की द्वारका नाम से मशहूर श्री गुरूवायुर मंदिर पौराणिक मान्यताओं और विशेषताओं के कारण जाना जाता है। भव्य द्रविड़ वास्तुकला और बेशकीमती धरोहरों के लिए जाना जाता है व इस मंदिर के पास तकरीबन 271 एकड़ भूमि भी है। श्रद्धालुओं द्वारा भेंट किए गए दान और चढावे से इस मंदिर का भंडार भरा हुआ है, जहां नकदी, रत्न और बहुमूल्य धातुओं के आभूषणो की भरमार है। समय समय पर गुरूवायुर देवस्वोम मंदिर की तरफ से आपदा वगैरह संकट में करोड़ों रूपये राशि दान की जाती है। गुरूवायुर मंदिर प्रबंधन दान व आय का पूरा रखरखाव संभालता है। मंदिर प्रबंधन अस्पताल व अन्य जरूरी संस्थाएं भी चलाता है।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ लगभग 2,550 करोड़
समय: सुबह 3 बजे से दोपहर 2 बजे तक, शाम 4ः30 बजे से रात 9ः30 बजे
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- गुरूवायुर मंदिर पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट व कालीकट इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जहां से दोनों जगहों की दूरियां लगभग 80 किमी ही है।
रेल मार्ग से
- गुरूवायुर मंदिर, रेल सेवा माध्यम से पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन गुरूवायुर है जहां से मंदिर की दूरी पैदल भी तय की जा सकती है। केरल व तमिलनाडु के प्रमुख शहरों से होकर रेलें गुरूवायुर रेलवे स्टेशन पहंुचती है। जहां कोच्चि, तिरूवनंतपुरम और चेन्नई जैसे शानदार शहरों से रेल सेवा आसानी से मिल जाती हैं।
सड़क मार्ग से
- गुरूवायुर बेहतरी से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है जहां आप केरल के प्रमुख शहर कोच्चि, पलक्कड़ और त्रिशूर से सीधी बसों के माध्यम से या निजी टैक्सी या कैब बुक कर भी मंदिर जा सकते हैं।
5. श्री सिद्धिविनायक मंदिर, मुंबई, महाराष्ट्र
वाणिज्यिक प्रमुख शहर मुंबई मे स्थित सिद्धिविनायक मदिर विश्वभर में लोकप्रिय है जहां देशभर की प्रमुख हस्तियों, बाॅलीवुड कलाकारों और अन्य लोगों से बड़ी मात्रा में आय व दान प्राप्त होता है। मंदिर की भीतरी छत पूरी तरह सोने से मढी हुई है जिसकी छवि और कीमत करोड़ों में आंकी जाती है। मंदिर की कमाई साल दर साल बढ रही है, जिसमें भक्तों द्वारा प्रदान किये गए चढावे की महती भूमिका है। मंदिर मंें मिलने वाले प्रसाद जैसे लड्डू और नारियल वड़ी की बिक्री करता है जिनकी तकरीबन संख्या 10,000 प्रतिदिन होती है इसके अलावा पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों से भी आर्थिक मजबूती मिलती है। मुंबई का सिद्धि विनायक मंदिर अपनी आध्यात्मिकता और दिव्यता के लिए श्रद्धालुओं को बेहद लुभाता है और यहां आने वाले दान को धर्मार्थ कार्यों में लगाता है।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ लगभग 132 करोड़
समयः सुबह 5ः30 बजे से रात 10 बजे तक
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- सिद्धिविनायक मंदिर से नजदीकी एयरपोर्ट मुंबई हवाई अड्डा है जहां से आप टैक्सी कैब या बस से मंदिर दर्शन के लिए जा सकते हैं।
रेल मार्ग से
- सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई जाने के लिए रेल सेवा सुगम माध्यम है जहां निकटतम रेलवे स्टेशन दादर रेलवे स्टेशन है।
सड़क मार्ग से
- महाराष्ट्र का मुंबई शहर भारत की वाणिज्यिक राजधानी है जहां पहुंचने के लिए सड़क मार्ग की उपलब्धता बेहतर है। आप प्रमुख भारतीय शहरो ंसे सीधी बसों के माध्यम से मंुबई सिद्धिविनायक मंदिर दर्शनों के लिए जा सकते हैं।
6. सोमनाथ मंदिर, प्रभास पाटन, गुजरात
अतीत काल से ही सोमनाथ मंदिर अपनी भव्यता और वैभव के लिए मशहूर रहा है जहां भगवान शिव के दिव्य प्रथम ज्योतिर्लिंग के दर्शन प्राप्त होते हैं। चालुक्य वास्तुकला का परिचायक सोमनाथ मंदिर प्राचीन समय में कई बार लूटा गया है, पर वर्तमान में इसे भक्तों द्वारा कई तरह का चढावा प्राप्त होता है जिसमें नकद, रत्न, स्वर्ण कीमती रत्नों की अद्भुत श्रृंखला देखने को मिलती है। मंदिर के गर्भग्रह और शिखर को स्वर्ण से सजाने के लिए लगभग 200 किलो स्वर्ण का दान किया गया है और इस बहुमूल्य भेंट से मंदिर की आय करोड़ो में हुई है। सोमनाथ मंदिर स्थापत्य विरासत और सांस्कृतिक गौरव का शानदार स्थल है। सूर्यास्त के समय होने वाले लाइट एंड साउंड शो मे बड़ी मात्रा में टिकट की खरीदारी होती है। पौराणिक रूप से प्रसिद्ध इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण, ऋग्वेद और श्री मद्भगवद् गीता जैसे ग्रंथों में पढने को मिलता है।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ लगभग 11 करोड़
समयः सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक, शाम 4 बजे से शाम 9 बजे तक
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- सोमनाथ मंदिर जाने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट दीव हवाई अड्डा, राजकोट एयरपोर्ट व अहमदाबाद हवाई अड्डा है। जिनकी दूरियां क्रमशः 80 किमी, 160 किमी और 415 किमी है जिसे आप बस, टैक्सी या कैब से तय कर पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- सोमनाथ पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल है जहां से मंदिर की दूरी वाॅकिंग डिस्टेंस पर है। जहां से आप रिक्शाॅ या पैदल मंदिर तक की दूरी तय कर सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- सड़क माध्यम से सोमनाथ जाने के लिए गुजरात के प्रमुख शहरों अहमदाबाद, राजकोट, द्वारका, पोरबंदर से आराम से कैब या बस की मदद से पहुंच सकते हैं जिनकी प्र्रमुख दूरी क्रमशः लगभग 400 किमी, 200 किमी, 230 किमी और 130 किमी है।
7. जगन्नाथ मंदिर, पुरी, ओडिशा
भारत के चार धामों में से एक जगन्नाथ मंदिर ओडिशा के पुरी में स्थित प्रमुख मंदिर है जहां धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यताएं बेहद सर्वोपरि है। श्रद्धालुओ की विशाल भीड़ और मंदिर की भव्यता देखते बनती है। इस मंदिर में रोज लाखों श्रद्धालुओं महाप्रसाद ग्रहण करते हैं जिसकी खासियत है कि आखिरी भक्त तक भी यह प्रसाद न ही घटता है और न ही खत्म होता है। जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन इस मंदिर का रखरखाव और प्रबंधन करता है, मंदिर को करोड़ों रूपये का चढावा हर साल मिलता है जिसमें भक्तों से मिलने वाले दान और आय शामिल है। यहंा भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के हीरे, जवाहरात, सोने चांदी और अमूल्य पत्थरों की भरमार लिए राजाओं द्वारा भेंट किए गए मुकुट, हार, स्वर्ण आभूषण और बेहद कीमती वस्तुएं शामिल हैं। इस मंदिर के बाहरी और भीतरी भंडार में अलग अलग तरह के रत्न व आभूषण रखे हुए हैं।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ लगभग 150 करोड़
समयः सुबह 5ः30 बजे से रात 9 बजे तक
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- जगन्नाथ पुरी मंदिर पहुंचने के लिए हवाई रास्ता बेहतर और सुगम मार्ग है जिसके लिए नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर स्थित बीजू पटनायक इंटरनेशनल एयरपोर्ट है जहां से आप बस या टैक्सी की मदद से मंदिर तक जा सकते हैं।
रेल मार्ग से
- जगन्नाथ पुरी मंदिर तक रेल सेवा के माध्यम से पहंुचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन पुरी जंक्शन है जहां से मंदिर की दूरी लगभग 2 किमी है।
सड़क मार्ग से
- ओडिशा केे पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर की पहुंच सड़क माध्यम से बेहतर है जहां ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर एनएच 316 होते हुए पुरी लगभग 1.5-2 घंटे में पहुंच सकते हैं।
8. स्वर्ण मंदिर, अमृतसर, पंजाब
स्वर्ण मंदिर को हरमिंदर साहिब भी कहकर बंुलाया जाता है जहां इनके भक्त सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी इनके दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर की वास्तुकला के तहत बना स्वर्ण गंुबद और छटा लिए धार्मिक लोगों को बेहद आकर्षित करता हे। सिर्फ सिख धर्म ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म के अनुयायी भी यहा दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर की वार्षिक संपन्नता और राजस्व करोड़ों में आंका जाता है। हरमिंदर साहिब में प्रतिदिन लंगर सेवा का आयोजन किया जाता है, जहां रोज तकरीबन एक लाख से अधिक लोग भोजन करते हैं। सामाजिक समरसता, एकता और सेवा का संदेश प्रदान करता स्वर्ण मंदिर हमेशा सभी धर्मों का स्वागत करने के साथ ही उनकी सुख सुविधाएं और जरूरी चीजों जैसे अस्पताल, पढाई व कई कल्याणकारी कामों के लिए व्यवस्था और प्रबंध करता है।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ लगभग 500 करोड़
समयः 24 घंटे खुला रहता है।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- हवाई रास्ते से स्वर्ण मंदिर पहुंचने के लिए लगभग 13 किमी की दूरी तय कर पहुंच सकते हैं। इसके लिए आसानी से बस, आॅटो वगैरह मिल जाती है।
रेल मार्ग से
- अमृतसर रेलवे जंक्शन निकटतम रेलवे स्टेशन हैं जहां से स्वर्ण मंदिर की दूरी लगभग 2 किमी है।
सड़क मार्ग से
- पंजाब के अमृतसर पहुंचने के लिए भारत के प्रमुख शहरों से सीधी बसे चलती हैं जहां आप आसानी से अमृतसर स्वर्ण मंदिर की सैर के लिए पहुंच सकते हैं। दिल्ली से अमृतसर की सड़क मार्ग की दूरी लगभग 465 किमी है, इसे एनई 5 से तय किया जा सकता है।
9. मीनाक्षी मंदिर, मदुरै, तमिलनाडु
वैगई नदी के तट पर बसा यह मंदिर तमिलनाडु के मदुरै शहर में बसा हुआ पवित्र और प्रसिद्ध आकर्षण हैं जहां मीनाक्षी मंदिर की शोभा देखते बनती है। मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर जुड़वां मंदिर की तरह है जहां मीनाक्षी रूप में देवी पार्वती और सुंदरेश्वर रूप में भगवान शिव की आराधना की जाती है। तकरीबन 65 हजार वर्ग मीटर के विस्तृत क्षेत्रफल में फैले हुए इस मंदिर का निर्माण 2000 साल पहले हुआ था। जुड़वां मंदिरों में पाचं प्रवेश द्वारों की भव्यता देखते बनती है। मीनाक्षी मंदिर द्रविड़ वास्तुकला, ऐतिहासिक किंवदंतियों और यहां होने वाले उत्सवों के कारण जाना जाता है जहां पोट्रामरई कुलम नाम का पवित्र तालाब भी है। इस मदिर की वास्तुशिल्प कला अपने आप में ही विशेष और अद्भुत है जहां अयिरामकाल मंडपम जिसमें हजार स्तंभों का बना हाॅल और इन सभी स्तंभों पर बनी अद्वितीय छवियां बेहद खूबसूरत प्रतीत होती है। इन स्तंभों की विशेषता है कि जब भी इन स्तंभो को किसी भी एगंल से देखा जाएगा तो सारे स्तंभ पंक्तिबद्ध नज़र आते हैं। बाहरी तरफ तराशे गए अनोखे स्तंभ मंत्रमुग्ध संगीत की ध्वनि के लिए खासा प्रसिद्ध है जहां इन्हें थपथपाने पर प्रत्येक स्तंभ से अलग तरह की म्यूजिकल ध्वनियां निकलती हैं। यह मंदिर भारत के धनी मंदिरों में गिना जाता है यहां आने वाले भक्त मंदिर के आध्यात्मिक व धार्मिक मान्यताओं के साथ ही यहां मिलने वाले दान व आय के कारण विशेष रूप से जाना जाता है।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ लगभग 6 करोड़
समयः सुबह 4ः30 बजे से दोपहर 12ः30 बजे तक, शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- मीनाक्षी मंदिर पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट मदुरै हवाई अड्डा है जहां से मंदिर की दूरी लगभग 12 किमी है
रेल मार्ग से
- रेल सेवा के माध्यम से मीनाक्षी मंदिर पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन मदुरै जंक्शन है जिसकी दूरी मीनाक्षी मंदिर से लगभग 2 किमी से भी कम है।
सड़क मार्ग से
- सड़क रास्ते से मदुरै तमिलनाडु जाने के लिए मट्टुथवानी बस स्टैंड से आप मंदिर के लिए आॅटो या रिक्शा कर पहुंच सकते हैं। बस स्टैंड से मंदिर की दूरी 4-5 किमी है।
10. श्री शिरडी साईं मंदिर, शिरडी, मुंबई
लगभग 167 वर्ष पहले इस धरती पर श्री साईं बाबा ने पूरी दुनिया को प्रेम, मानवता, करूणा और सद्भाव का संदेश दिया। मान्यता है कि यह धरती राक्षसों के गुरू शुक्राचार की तपोस्थली है। साईं बाबा से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल यहां दर्शनीय है। द्वारकामाई से लेकर मीठी नीम की पत्तियां चमत्कार और श्रद्धा का साक्षात उदाहरण है, जहां श्री साईं बाबा की दिव्य उपस्थिति श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। कहते हैं कि शिरडी के इस मंदिर मे दानपात्र कभी खाली नहीं होते हैं जहां रूपये पैसे के अलावा, बहुमूल्य रत्न, पत्थर, सोने चांदी से बनी चीजों का भी दान किया जाता है।
अनुमानित कुल संपत्ति : ₹ करीब 3,20,000 करोड़
समयः सुबह 4 बजे से रात 10 बजे तक
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- शिरडी मंदिर पहुंचने के लिए हवाई रास्ते के जरिए शिरडी के कोकड़ी गांव स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के माध्यम से पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- रेल माध्यम से शिरडी पहुंचने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन कोपरगांव है जहां से लगभग 16 किमी दूरी तय कर आराम से शिरडी मंदिर जा सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- शिरडी मुंबई का प्रमुख शहर है जहां आप अहमदनगर मनमाड राजमार्ग के माध्यम से प्रमुख शहरों नासिक, मुंबई और पुणे जैसे शहरों से शिरडी पहुंच सकते हैं। शिरडी की दूरी अनुमानित तौर पर नासिक-70 किमी, पुणे-150 किमी और मुंबई से 250 किमी है।
निष्कर्ष
आस्था और भक्ति के प्रतीक भारतीय मंदिरों की संपदा, वैभव और समृद्धि संपन्नता आध्यात्मिक पराकाष्ठा की मिसाल प्रदान करते हैं जहां भक्तों द्वारा संपूर्ण हृदय से दान पुण्य किया जाता है। श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय इन मंदिरों की वास्तुकला, मंत्रमुग्ध करते आकर्षण और भावपूर्ण कहानियां हमेशा सेे ही भक्तों को आमंत्रित करती हैं। जहां भक्तों द्वारा समर्पित दान चढावा और अन्य सामग्रियां मंदिरों को आर्थिक मजबूती प्रदान करती हैं। साल दर साल इन धन संग्रहों में बढोत्तरी हिंदू तीर्थों और उनकी चमत्कारिक उपस्थिति की उत्कृष्टता बयां करती है। धार्मिक स्थानों में दान चढावा और श्रद्धा के साथ अर्पित की गई धन संपति का इस्तेमाल मानव कल्याण और सेवा के उद्देश्य से किया जाता है, इस सुकृत्य से सच्ची मानवता और परोपकार की भावना समाज को पुष्टता प्रदान करती है और मंदिरों की उपस्थिति सार्थकता प्राप्त करती है।
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