- Dec 09, 2025
दिसम्बर में सिक्किम का सफर सर्द मौसम के शानदार नजारों के नजराने पेश करता है। सर्दियों में स्वर्ग समान दिखती बर्फीली चोटियों और शीतलहर से ढका वातावरण प्राकृतिक खूबसूरती प्र्रद्रर्शित करते हुए आनंद प्रदान करता है। झीलों का जमाव, शीत हरियाली और कभी कभार होती बर्फीली बारिश की सौगात, सब मिलकर प्रकृति को अद्भुत और उल्लासमय बना देते है। दिसम्बर में सिक्किम पूर्वोत्तर भारत की ऐसी जगह बन जाती है कि जिसकी समानता उत्तर में कश्मीर से कर सकते हैं। कंपकपाती ठंड और प्राकृतिक खूबसूरती का अद्भुत संयोग दिसम्बर में पर्यटन की जिज्ञासा को और भी ज्यादा बढा देता है। बर्फ से ढकी चोटियां, अल्पाइन जंगल और शांति प्रदान करते मठों के साथ सिक्किम की दिसम्बर यात्रा के बारें में विस्तार से जानते हैं, इस आर्टिकल में।
सिक्किम का संक्षिप्त इतिहास और विशेषताएं
पूर्वोत्तर भारत का अभिन्न अंग सिक्किम पश्चिम में नेपाल, उत्तर तथा पूर्व में चीनी तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र और दक्षिण पूर्व में भूटान से लगा हुआ है। सिक्किम के दक्षिण में पश्चिम बंगाल है, यहां अंग्रेजी, गोरखा खस भाषा, लेप्चा, भूटिया, लिम्बू और हिंदी बोली जाती है। सिक्किम में हिंदू और वज्रयान बौद्ध धर्म के अनुयायियो की संख्या देखने को मिलती है।
सन् 1975 में जनमत संग्रह से यह भारत गणतंत्र में विलय हो गया इससे पहले यहां राजतंत्र नामग्याल का शासन हुआ करता था। जनसंख्या की दृष्टि से सिक्किम न्यूनतम राज्यों की गिनती में शीर्ष पर आता है। क्षेत्रफल के आधार पर भी इस राज्य की गिनती सबसे छोटे राज्य गोवा के बाद होती है।
आकार मे छोटे होने के कारण भी इस राज्य की भौगोलिक विविधता आश्चर्यजनक है। सिक्किम के उत्तरी पश्चिमी भाग नेपाल की सीमा पर दुनिया की तीसरी सबसे ऊंची चोटी कंचनजंगा स्थित है। सिक्किम के कई हिस्सों से इस चोटी को देखा जा सकता है। इसके अलावा बौद्ध मठों की उपस्थिति जैसे रूमटेक, पेमायांग्त्से और एनचे मठ सिर्फ धार्मिक स्थल ही नहीं वरन् सामुदायिक जगह भी है जहां सभी वर्गो को मानसिक शांति और सुकून की प्राप्ति होती है। बौद्ध धर्म और अन्य सांस्कृतिक उत्सव आज भी विशिष्ट परंपराओं के द्योतक हैं।
दिसम्बर में सिक्किम का मौसम अपडेट
दिसम्बर में सिक्किम सर्दियों की रौनक अपने पूरे शबाब पर होती है जबकि राज्य में हर जगह की अपनी अलग ऊंचाई है लेकिन सर्दी का असर सभी जगह पर एक जैसा ही होता है।
तापमानः औसत तापमान 3 डिग्री सेल्सियस से लेकर 11 डिग्री सेल्सियस
बारिशः लगभग 14 मिमी
धूपः हल्की और औसत लगभग 5 घंटे
सिक्किम के अलग अलग भागों में मौसम का असर
| गंगटोक (5,410 फीट)ः | तापमान- 2 से 10 डिग्री सेल्सियस और रात में तापमान 0 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है। | साफ आसमान, कठोर सर्दी और पहाड़ों की घनी ठंड में शानदार परिदृश्यों की श्रृंखला पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है। |
| उत्तरी सिक्किम (लाचेन, लाचुंग, युमथांग घाटी)ः | तापमान अक्सर -5 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है। | बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और नजारों की शोभा अतुलनीय होती है। |
| दर्रे (नाथुला, जुलुक, जीरो पॉइंट)ः | तापमान अक्सर -15 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता है | जहां बर्फीली तेज हवाएं, कड़कड़ाती ठंड और सड़को पर घनी बर्फ की चादर सी दिखाई पड़ती है। |
- बर्फ सी दिखती नदियां और ओस से सराबोर जीवंत हरियाली के उत्सवी नजारें आंगुतकों को पर्यटन की खूबसूरती से रूबरू कराते हैं।
- दिसम्बर में सिक्किम का मौसम बेहद ठंडा होता है इसलिए इस समय गर्म और ऊनी कपड़े पहनना जरूरी है।
पैकिंग टिप्सः
- सिक्किम घूमने के दौरान पैकिंग बेहतर होनी चाहिए जिससे कोई समस्या न आए, भारी ऊनी कपड़े, जलरोधी फुटवियर, दस्ताने, स्कार्फ और सनग्लासेज जो आपको बर्फीली लाइमलाइट से राहत प्रदान करने के लिए जरूरी है।
- बर्फबारी होने से अक्सर ऊंचाई वाले इलाकों के रास्ते अचानक से बंद हो सकती है, इसलिए यात्रा की योजना में लचीलापन रखना समझदारी है। ऐसी परिस्थितियों में ड्राई नाश्ता रखकर यात्रा करने में गुरेज नही करना चाहिए।
दिसम्बर में सिक्किम में घूमने वाले 10 सर्वश्रेष्ठ पर्यटन आकर्षण
1. त्सोगमो झीलः करीब 12,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित त्सोम्गो झील एक हिमनद झील है जिसे चांगू झील भी कहते है। दिसम्बर महीने मे यह झील अक्सर थोड़े या पूरे रूप से जमी रहती है जो चारों ओर बर्फ से आवरण से ढकी रहती है। इस झील की खासियत है कि यह अपना रूप बदलती रहती है। इस झील मे पानी पास ही के हिमानी ग्लेशियर से पिघलकर आता है। यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों के साथ आप इस झील को अच्छे से निहार सकते हैं। झील की पृष्ठभूमि विभिन्न ऋतुओं में अलग अलग रंग का प्रतिनिधित्व करती है जो इसके तली में उपस्थित रहकर रोचकता प्रदान करती है। गुरू पूर्णिमा के दिन इसे अति शुभ माना जाता है और इस पानी को औषधीय गुणों का वरदान मिला हुआ हैं। साल 2006 में झील को समर्पित एक डाक टिकट भी जारी किया गया था।
2. लाचुंग गांवः दिसम्बर में लांचुग की यात्रा करना एक शानदार विकल्प है जहां सर्दियों के दिनों में शीतल हवा और देवदार के पेड़ों की महक के साथ ठंडे मौसम की सौगात और बर्फ के नजारे और कड़ाके की ठंड का अनुभव ले सकते हैं। अगर आपको बर्फबारी देखना और ठंड का मौसम एन्जॉए करना पसंद है तो लाचुंग की सैर करना रोमांचक अनुभव प्रदान करता हैं इस समय यहां के दर्शनीय स्थल खुले रहते है जहां आप दर्शनों के लिए जा सकते है। पेड़ों पर जमी बर्फ के शानदार नजारे और पहाड़ों और घाटियों के विहंगम दृश्य आकर्षित करते हैं। दिसम्बर महीने के मध्य में बर्फबारी बढने की संभावना ज्यादा हो जाती है। यहां का तापमान 10 से लेकर माइनस 5 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। बर्फ के गोले बनाकर आप यहां खेलने का मज़ा ले सकते हैं। दिसम्बर के समय यहा क्रिसमस के दौरान उमंग तरंग उल्लास के माहौल का संचार करता है जो स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटक वर्ग को भी खूब लुभाता है।
3. यमथांग घाटीः सिक्किम की यह घाटी धरती पर किसी स्वर्ग से कम नही है जिसे फूलों की घाटी के नाम से भी जानते हैं। यह घाटी गंगटोक से करीब 140 किमी दूरी पर स्थित है। फूलो के शानदार नजारे और रोडोडेंड्रोन फूलों की 24 से भी ज्यादा प्रजातियां पाई जाती है जो सर्दी के अंत में और भी ज्यादा सुदंर आकर्षण उत्पन्न करती हैं। दिसम्बर के समय कड़ाके की ठंड और माइनस तापमान यहां बर्फ के आनंद को बिखेरता हुआ भव्य प्रतीत होता है। खास बात यह है कि इतनी सर्दी में यहां गर्म पानी के झरने अपनी औषधिय गुणों के लिए भी जाने जाते हैं जो त्वचा से जुड़ी कई प्रकार की दिक्कतो को दूर करता है। यहां आप ट्रेकिंग जैसी गतिविधियां एन्जॉए कर सकते हैं।
4. नाथू ला दर्राः यहां जाने के लिए परमिट की आवश्यकता पड़ती है। समुद्री तल से करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान ओल्ड सिल्क के नाम से मशहूर है जहां आप अपनी दिसम्बर की छुट्टियों का मज़ा बेहद रोमांचक तरीके से ले सकते हैं। यह दर्रा सबसे ज्यादा इसलिए भी प्रसिद्ध है क्योंकि यह दर्रा मानसरोवर झील की यात्रा को करीब 15 दिन से घटा कर 2 दिन का बना देता है। तिब्बती तीर्थयात्रा के रूमटेक मठ के दर्शन हेतु भी नाथू ला दर्रे का सफर तय करना जरूरी होता है। नाथू ला दर्रे से खूबसूरत बर्फ की चोटियों को देखना बहुत सुकून और शांति प्रदान करता है। समुद्री गहराईयों से इतनी ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। यहां जाने के लिए आपके पास यात्री की दो पासपोर्ट साइज फोटोज, सरकारी पहचान प्रमाण पत्र और परमिट होना जरूरी है, परमिट के लिए आपको पर्यटन और नागरिक उड़ान विभाग में आवेदन करना होगा।
5. सेवन सिस्टर्स वॉटर फॉलः गंगटोक से लगभग 32 किमी दूरी पर स्थित यह झरना गंगटोक लाचुंग राजमार्ग पर स्थित है जो बेहद लोकप्रिय स्थान है। नाम से ही जाहिर होता है कि यहां सात जलप्रपातों की शोभा एक साथ देखने को मिलती है। झरने का कलकल गिरता पानी हरी भरी वनस्पतियों से निकलकर चूना पत्थरो पर गिरता हुआ विशाल गड़गड़ाहट की ध्वनि उत्पन्न करता है। झरने के विहंगम परिदृश्य और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटको के लिए बेहद आकर्षक स्थान बन जाता है। इस स्थान को लेकर कहा जाता है कि एक राजा की सात बेटियां थी जिन्हें प्रकृति से बेहद प्रेम था इसलिए वे सातों की प्रकृति में विलीन हो गईं और झरने का रूप ले लिया।
6. रूमटेक मोनेस्ट्रीः बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल रूमटेक मठ गंगटोक से लगभग 24 किमी की दूरी पर स्थित हैं जहां बौद्धधर्म को करीब से देखने समझने का मौका मिलता है। दिसंबर मे सिक्किम का रूमटेक मठ बर्फीली चोटियों और बर्फ सी जमी झीलों के बीच एक शांति प्रदान करते आरामदायक स्थल के रूप में कार्य करता है। इन दिनों यह आश्चर्यजनक स्थान में बदल जाता है। मठ की आध्यात्मिक शांति, प्रदर्शनकारी सभाएं, नृत्य प्रस्तुतियां और यहां होने वाले दिसम्बर कालीन उत्सवों की रोशनी देखने लायक होती है। जीवंत परंपराओं और बौद्ध शिक्षाओं के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध यह जगह इन दिनों बेहद ही शानदार आकर्षण और मानसिक शांति प्रदान करता है।
7. चोपता घाटीः दिसम्बर के समय चोपता घाटी अनूठा गंतव्य बन जाता है जहां मोड़दार नदियां और बर्फ से ढके परिदृश्य अपने अल्पाइन वन और बर्फ से ढकी पर्वत चोटियों के कारण ट्रेकर्स और रोमांचक गतिविधियों के शौकीनां के लिए शानदार स्थान बन जाता है। यहां बने तुंगनाथ मंदिर और देवरिया ताल झील शानदार आकर्षक लगती है। आप यहां कंचुला कोरक कस्तूरी मृग अभयारण्य में पक्षियो की विविध श्रृंखला का दर्शन कर सकते हैं। दिसम्बर के समय यहां वृहद स्तर पर प्रवासी पक्षी भी आते हैं। सर्दियों की गतिविधियों और स्वाद का आनंद लेते हुए चोपता घाटी को एक्सप्लोर करें।
8. बाबा हरभजन मंदिरः भारत चीन सीमा नाथूला दर्रे पर बना यह मंदिर भारतीय सैनिकों के लिए आस्था का पथप्रदर्शक है। करीब 13,000 फीट पर अवस्थित यह मंदिर कई सारी कहानियों और किस्सों को बयां करता है। सीमा पर ड्यूटी कर रहे सैनिक इस मंदिर के प्रति अपनी घोर आस्था और विश्वास रखते हैं। बाबा हरभजन सिंह के चमत्कारांं का अक्सर वहां के लोगों और सीमा पर तैनात सैनिकों के मुंह से सुनने को मिलता है। इस स्थान पर जाने के लिए आपको परमिट की आवश्यकता होती है। दिसम्बर के महीने में यहां भंयकर बर्फबारी और कड़ाके की ठंड का आलम रहता है।
9. गंगटोकः सिक्किम की राजधानी गंगटोक में दिसम्बर का महीना अपने शीत मौसम, साफ आसमान और जश्न के माहौल के लिए जाना जाता है जो करिश्माई रूप से आकर्षित करता है। गंगटोक की ऐतिहासिक परंपराएं, संपन्न वैभव और रोमांचकारी अनुभवों का आनंद सर्दियों में और भी ज्यादा बढ जाता है। इस समय यहां एमजी मार्ग पर खरीदारी व स्थानीय स्वाद को चख सकते हैं। गणेश टोक मंदिर में आध्यात्मिक दर्शन करने के साथ ही वहां से शानदार विहंगम दृश्यों का आनंद लेने के साथ ही फोटोग्राफी का लुत्फ भी ले सकते है। हनुमान टोक मे सुबह के समय दर्शन कर आकर्षक श्रृंखलाओं को निहारें।
10. रवंगलाः प्राकृतिक और आध्यात्मिक परिदृश्यों की खूबसूरती को शानदार तरह से प्रदर्शित करता रवांगला सिक्किम का लोकप्रिय गंतव्य हैं। सांस्कृतिक और सुकून प्रदान करने वाला यह स्थान अपने मठ की स्थापत्य कला और जीवंत संस्कृति और पंरपराओं के लिए सैलानियों को आमंत्रित करता है। रावांगला में आप कई सारे मठों के दर्शन कर सकते हैं जैसे बुद्ध पार्क मठ, रालंग मठ, ताशीदंग मठ, डोलिंग मठ इत्यादि अन्य कई मठ है जहां एक से बढकर एक आश्चर्य देख सकते हैं। बुद्ध पार्क मठ में बनी महात्मा बुद्ध की करीब 130 फीट ऊंची प्रतिमा भव्य और विशाल है जो हरे भरे बगीचो और प्रार्थना चक्रों से घिरी हुई है। बौद्ध शिक्षाओं की आध्यात्मिक जानकारी और महिमा बताते यह मठ सिक्किम की अनमोल धरोहर कहलाते हैं।
दिसम्बर में सिक्किम का स्वाद
सिक्किम के व्यंजन लजीज स्वाद और अनोखेपन के लिए जाने जाते हैं जहां लोगों और मान्यताओं का बहु जातीय मिश्रण की झलक इनके भोजन मेंं भी दिखाई पड़ती है। भोजन की विविधता में भारतीय, भूटानी, नेपाली और तिब्बती व्यंजन शामिल हैं। सिक्किम जैविक खेती के लिए प्रसिद्ध राज्य है जहां स्थानीय किसान फल, सब्जियां, अंडे और मांस पसंद करते हैं और बिना रासायनिक खाद के खेती करने में विश्वास रखते हैं। इनके भोजन सामग्री में कई ऐसी चीजें है जो सिर्फ सिक्किम में ही पाई जाती है, जिनका स्वाद संयोजन भारत के किसी और हिस्से में नहीं मिलता है। जानते हैं सिक्किम के स्वादिष्ट भोजन की विस्तृत श्रृंखला के बारें में।
1. थेंकुकः यह एक प्रकार का सूप है जिसमें सब्जियां, चिकन या मटन और गेहूं के आटे का इस्तेमाल किया जाता है। जब आप इसे शाकाहारी तरह से बनाना चाहें तो इसमे चिकन या मटन का इस्तेमाल न करें। इसमें लोई के छोटे छोटे टुकड़े डाले जाते हैं जिसे सिक्किम के लोग रात के खाने में खाते हैं।
2. खाप्सीः यह थोड़ी मीठी या नमकीन होती है जो तली हुई पेस्ट्री की होती है। इसे विशेष अवसरों पर खाया जाता है जैसे तिब्बती विवाह में इसे बनाया जाता है। आटे की आकर्षक आकृति में बनने वाला यह व्यजन विभिन्न रंगों से सजाया जाता है।
3. वाचिपाः सिक्किम के किरात राय जातीय समूह का एक पारंपरिक सिक्किम व्यंजन है जिसे पके हुए चावल और कीमा में जले हुए चिकन पंखों से उत्पादित पाउडर के साथ मिलाया जाता है। इस पाउडर में कड़वा स्वाद होता है। इस डिश को सिक्किम में पारंपरिक रूप से बनाया जाता है जिसे शाकाहारी या मासांहारी में बना सकते हैं। शाकाहारी बनाने के लिए चिकन की जगह कड़वे दामलापा के पौधे की पत्तियों और फूलों को इस्तेमाल किया जाता है, इस तरह आप चाहें तो शाकाहारी वचीपा बनाना भी संभव है।
4. थुकपाः सिक्किम की यह डिश दुनिया भर में पसंद की जाती है जिसे नूडल सूप के नाम से जानते हैं। नूडल सूप के मसालेदार स्वाद के अलावा इसमें प्याज और हरी मिर्च भी शामिल है। इस रेसिपी को शाकाहारी या मांसाहारी किसी भी तरह से बना सकते हैं। सब्जियों की जगह मीट मांस का प्रयोग होने पर इसका फ्लेवर बदल जाता है।
5. बांस करील करीः यह व्यंजन बांस की कोमल कलियों से बनता है जो खाने योग्य होती है। पारंपरिक सिक्किम व्यंजन के रूप में यह किण्वित बांस से बनाया जाता है। बांस के अंकुर की कड़वाहट को छिपाने के लिए इसमें हल्दी के साथ करी मसालेदार कर दी जाती है। बांस के डंठल की सब्जी को सिक्किम में तमकरी कहा जाता है। इस करी को चावल के साथ बेहद पंसद किया जाता है।
6. गुन्द्रुकः यह एक तरह का सूप है जिसे सर्दियों के दिनों में सिक्किम में विशेषतया पसंद किया जाता है इसमें सरसों, पत्ता गोभी या मूली के पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है। साफ करने के बाद इन्हें सुखाया जाता है, फिर इन पत्तियों को कंटेनर में रख दिया जाता है। आमतौर पर मिट्टी के बर्तन में कुछ हफ्तों के लिए इसे रखने के बाद इस्तेमाल किया जाता है जिससे इसका स्वाद और भी ज्यादा स्वादिष्ट हो जाता है। स्वाद में कुछ खट्टा होता जो बहुत अद्वितीय है।
7. सिन्कीः सिक्किम का पसंदीदा भोजन है जिसमें मूली की जड़ का इस्तेमाल किया जाता है। इसे बांस के कंटेनर में रख कर पुआल से ढक दिया जाता है। यह लगभग एक महीने तक पौधो और मिट्टी से ढका रहता है और इसे अब एक साल तक धीरे धीरे पकने के लिए छोड़ दिया जाता है और फिर सूप में इस्तेमाल किया जाता है। सूप सिंकी सिक्किम में बहुत पसंद किये जाने वाला व्यंजन है।
8. सेल रोटीः इसे बनाने मे चावल का आटे का प्रयोग किया जाता है जिसमें चावल साफ कर इसमें इलायची और चीनी के स्वाद को भी मिलाया जाता है। इस सामग्री को रिंग शेप मे गर्म तेल में डालकर तला जाता है जिसे तलना आसान नहीं होता है, इसे आलू की सब्जी के साथ खाया जाता है।
9. ढिंडोः स्थानीय निवासियों के साथ ही यह व्यंजन पर्यटकों को भी खूब लुभाता है। इसमें बाजरे या गेंहू का आटा इस्तेमाल किया जाता है जिसमें भूनते हुए कलछी से लगातार चलाया जाता है। इसको बनाने में लोहे की कढाही का उपयोग किया जाता है जिसे सिक्किम मे पालमे टपके कहा जाता है और कलछी को डाबिलो कहा जाता है।
10. किनेमा करीः सिक्किम का लोकप्रिय व्यंजन है इसे चावल के साथ खाया जाता है। इस व्यंजन में धूप मे ंसुखाई गई सोयाबीन प्रयोग की जाती है। किण्वित सोयाबीन के साथ मिश्रित होने पर इसका स्वाद बेमिसाल हो जाता है जो उच्च प्रोटीन के साथ सिक्किम के लोगों का लोकप्रिय नाश्ता है।
दिसम्बर में सिक्किम में मनाए जाने वाले उत्सव त्यौहार व इवेंट
1. लोसर ( तिब्बती नव वर्ष ) : तिब्बती समुदाय में बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक जिसे तिब्बती चंद्र कैलेण्डर के अनुसार मनाया जाता है। बौद्ध धर्म में यह त्योहार नववर्ष का प्रतीक कहलाता है, इसमें भगवान बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है और इनसे आशीर्वाद की कामना की जाती है। आध्यात्मिक और सामाजिक परंपराओं पर आधारित यह त्योहार प्रार्थनाओं, अनुष्ठानों और प्रतीकात्मक प्रसाद से भरा होता है। इस साल 21 दिसम्बर से 23 दिसम्बर 2025 में इसे मनाया जाएगा।
इस अनुष्ठान को मनाने के लिए अपने बगीचे से पहला फल चखने की प्रथा का पालन किया जाता है जिसे अच्छी फसलों की कामना से जोड़ा जाता है। पूरा परिवार एक साथ भोजन साथ करता है जिसमें थुकपा, सेल रोटी, शप्तक और चांग का आनंद लेते हुए पांरपरिक नृत्य और गीत का भी भव्य आयोजन करते हैं। नृत्य, गायन और ढोल नगाड़ों से सिक्किम की सड़के गुंजाएमान हो जाती हैं। इन्हें बजाने का उददेश्य नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाना है।
2. त्सेवांग-विजय उत्सव : सिक्किम के भूटिया समुदाय द्वारा मनाए जाने वाला यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत की निशानी है जो बौद्ध धर्म में पूजनीय व्यक्ति पद्मसंभव को समर्पित है। इनके बारे मे कहा जाता है कि ये तिब्बत में बौद्ध धर्म लेकर आए थे। उनके इस अभूतपूर्व योगदान के लिए आज के दिन उनका धन्यवाद देते हुए मनाया जाता है जिन्होंने तमाम दैत्यों और बाधाओं को पार करते हुए सिक्किम में विजय पताका फहराने का काम किया। आज के दिन मठों में अनुष्ठान और प्रार्थना का आयोजन किया जाता है इसके बाद भोग और प्रसाद वितरित करते हुए ग्रहण भी किया जाता है। नृत्य और गायन के साथ तिब्बती लोग जश्न मनाते हैं। साल 2025 में यह उत्सव दिनांक 10 दिसम्बर को मनाया जाएगा।
3. क्रिसमस एवं नव वर्ष जश्नः हर साल 25 दिसम्बर को क्रिसमस त्यौहार मनाया जाता है जिसकी धूम और आतिशबाजी की रौनक क्रिसमस की पूर्व रात्रि से ही दिखने लगती है। मध्य रात्रि में होने वाली प्रार्थनाओं के स्वर और कैरोल की धुन पर नाचते गाते मैरी क्रिसमस से गुंजाएमान वातावरण बेहद ही आकर्षक और लुभावना लगता है। दिसम्बर की आखिरी तारीख को पूरी रात नए रात का जश्न पार्टी और संगीत से सिक्किम की सर्द रातें और भी ज्यादा सुहावनी हो जाती हैं।
दिसम्बर मे सिक्किम यात्रा करने से पहले सुझाव
- दिसम्बर में सिक्किम की यात्रा करने के लिए पैकिंग की तैयारी सोच समझकर और वहां होने वाले मौसम के अनुरूप ही करना जरूरी है।
- सिक्किम में नाथुला, लाचेन, लाचुंग, गुरूडोंगमार और युमथांग पर्यटन के लिए परमिट की आवश्यकता होती है।
- भारतीय सैलानी बस ऑपरेटर्स की मदद से परमिट की व्यवस्था कर सकते हैं।
- विदेशी पर्यटको को दो के समूह में यात्रा की अनुमति है और कुछ क्षेत्रों जैसे नाथुला, गुरूडोंगमार पर प्रवेश की मनाही है।
- ऊंचाई से होने वाली बीमारी से बचने के लिए धीरे धीरे एडजस्ट करने की कोशिश करें।
- आवश्यक दवाईयां भी रखें और बच्चों बुजुर्गों के साथ सर्दी ज्यादा होने पर ऊंचाई पर जाने से परहेज करना चाहिए
- सिक्किम के उत्तरी हिस्से में यात्रा करने के लिए अनुभवी स्थानीय ड्राइवरों की ही मदद लें
- स्थानीय परंपराओं और तीर्थस्थलों पर शालीनता का परिचय देते हुए वेशभूषा पहनें और स्थानीय लोगों या बौद्ध भिक्षुओं की तस्वीर अनुमति लेकर ही क्लिक करें।
दिसम्बर में सिक्किम कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- सिक्किम गंगटोक पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डे के रूप में बागडोगरा एयरपोर्ट जो लगभग 124 किमी की दूरी पर स्थित पश्चिम बंगाल के अन्तर्गत आता है।
रेल मार्ग से
- सिक्किम गंगटोक पहुंचने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन सिलीगुड़ी या जलपाईगुड़ी है जो तकरीबन 160 किमी दूर है। इन रेलवे स्टेशनों से गंगटोक जाने के लिए नियमित रूप से बस और टैक्सियां चलती हैं जहां से आप आराम से गंगटोक पहुंच का सिक्किम यात्रा पूरी कर सकते हैं।
सड़क मार्ग से
- नेशनल हाईवे 31ए सिक्किम को अन्य राज्यों से कनेक्ट करता है। इसके माध्यम से आप बस, टैक्सी या निजी कार द्वारा सिलीगुड़ी, बागडोगरा, जलपाईगुड़ी और कोलकाता जैसे शहरों से होकर गंगटोक का सफर तय कर सकते हैं।
निष्कर्ष
सिक्किम, पूर्वोत्तर भारत का सर्दियों के समय आश्चर्यजनक तरह से बर्फ के जादुई परिदृश्य में बदल जाता है। जहां तापमान माइनस डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच जाता है और बर्फीले तूफान की चकाचौंध बर्फीली सड़कों को श्वेत स्वर्ग में बदल देती है। जमती नदियां, घने वन, स्वादिष्ट स्वाद आनंद और बौद्ध धर्म के त्यौहार सिक्किम पर्यटन की शोभा में चार चांद लगाते हुए पर्यटको को इसकी विशेष परंपराओं की समझ प्रदान करते हैं। सुहाने मौसम, जैविक खेती, मनोरम परिदृश्य और बौद्ध मठों की शांति से सजे सिक्किम में शहरीकरण और आधुनिकीकरण की अंधी दौड़ देखने को नहीं मिलती है। दिसम्बर के महीने में बर्फबारी के अद्भुत परिदृश्यों की छवि, हरी भरी धरा और दूर दूर तक शांति के स्वर मन को भाव विभोर करते हुए यह जगह पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट झलक प्रदान करती है।
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