- Feb 10, 2026
भारत मे ंग्रीष्म ऋतु का समय विशेष त्यौहार और पर्वों के लिए मशहूर हैं- शोभामय संगीत उत्सव, रौनक, जोश उल्लास और सदियों से चली आ रही मान्यताएं इन त्यौहारों की खूबसूरती को और भी ज्यादा दृढ़ता प्रदान करती हैं। देश भर में मनाए जाने वाले ग्रीष्म ऋतु त्यौहार अपनी लोककथाओं, स्थानीय कहावतों और अनूठी संस्कृतियों से रीति रिवाजों और परम्पराओं का सम्मान करते भारतीय संस्कृति की नींव का आधार हैं। एक ओर जहां गर्मी का महीना तेज धूप और तपिश का एहसास देता तो वहीं दूसरी ओर इन त्यौहार और उत्सवों की झलक शीतलता का आंचल प्रदान करती है। भारत के विभिन्न स्थानों पर मनाए जाने वाले ग्रीष्मावधि के इन त्यौहारों और उत्सवों के बारें में और भी अधिक विस्तार से जानते हैं, इस आर्टिकल में।
उगादी/ गुड़ी पड़वा, कर्नाटक व महाराष्ट्र
चैत्र में शुक्ल पक्ष की पहली तिथि यानी प्रतिपदा को मनाए जाने वाला यह उत्सव भारत के सभी राज्यों में विभिन्न नामो से मनाया जाता है इस दिन को हिंदू नवसंवत्सर का आगाज़ माना जाता है। साल 2026 में यह दिन 19 मार्च, गुरूवार को है।
इस दिन को कर्नाटक में उगादी और महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा नाम से पुकारते हैं।
उगादी, हिंदू नव वर्ष का उत्सव है जिसे दक्षिणी भाग में उगादी पर्व कहते हैं। इस दिन प्रातःकाल से ही स्नान ध्यान कर नए वस्त्रों को धारण किया जाता है। घरों के बाहर आम, अशोक के पत्तों के वंदनवार और विभिन्न तरह की रंगोलियों से प्रवेश द्वार, पूजा घर व आंगन सजाए जाते हैं। मंदिरों में भक्तों द्वारा पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। आज के दिन उगाड़ी पचड़ी नाम से विशेष व्यंजन बनाया जाता है जिसमें मीठा, खट्टा, कड़वा और नमकीन सभी तरह का स्वाद रहता है, इसके अलावा पुलीहोरा इमली चावल, बोब्बटलू मीठी रोटी और वड़ा भी बनाए जाते हैं।
महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा की धूम देखते बनती है। जहां मुंबई, ठाणे, कोल्हापुर, दादर और भी कई शहरों में महाराष्ट्रीयन संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। विशाल शोभायात्रा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न पारंपरिक पोशाकों के साथ तैयार लोग जोश, हर्ष उल्लास और जीवंत उत्साह से लबरेज होकर इस पर्व को मनाते हैं।
गणगौर उत्सव, राजस्थान
राजस्थान का पारंपरिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता यह उत्सव वसंत उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व की धार्मिक मान्यता है कि यह भगवान शिव की पत्नी देवी पार्वती यानी गौरा जी को समर्पित है। विशेषकर महिलाओं द्वारा पूजित इस त्यौहार की धूम पुरूष वर्ग में भी कम नहीं दिखती। यह उत्सव वैवाहिक जीवन की खुशहाली और भावी जीवन संबंधों की सुमधुर नींव का आधार बनता है। पारंपरिक वेशभूषा और राजस्थानी परिवेश में सजे स्त्री पुरूष और गणगौर का भव्य उत्सव पूरे राजस्थान को जीवंत और आकर्षक बनाता है। जयपुर के बाज़ार हों या उदयपुर का राजसी अंदाज़, बीकानेर में सजे किले हो या जैसलमेर की रेगिस्तानी धरती हो, राजस्थान का कण कण उत्सव के दौरान खिल उठता है।
इस दिन नदियों, झीलों में या किसी तालाब के किनारे पर देवी गौरा जी की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना और अन्य रीति रिवाजों को संपन्न किया जाता है। जयपुर में एक दिन पहले शानदार और भव्य शोभायात्रा निकाली जाती हैं जिसमें सजी धजी महिलाएं हाथों में ंदेवी गौरा की प्रतिमा लेकर नगर भ्रमण पर निकलती हैं जहां सड़कें और चौराह विभिन्न तरह की सजावट से सजे होते हैं।
बैसाखी महोत्सव, पंजाब व हरियाणा
पंजाब और हरियाणा में विशेष रूप से मनाया जाने वाला बैसाखी उत्सव पंजाबी नववर्ष के रूप में जाना जाता है। हर साल 13-14 अप्रैल को मनाए जाने वाला बैसाखी पर्व दुनिया भर में सिख समुदाय द्वारा बहुत ही हर्ष उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसी दिन सिखों के दसवें व अंतिम गुरू गोविंद सिंह ने 1699 में खालसा पंथ की स्थापना की थी जिसकी गूंज गुरूद्वारों, खेतों और पूरे पंजाब में देखने को मिलती है। अमृतसर स्वर्ण मंदिर में ही खालसा पंथ की नींव रखी गई थी इसलिए हर साल यहां भारत भर से श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन को उमड़ती है। हरियाणा में कई जगह सांस्कृतिक पेशकश के साथ मनोरंजक गतिविधियों और स्थानीय परम्पराओं का आनंद लिया जाता है। बैसाखी फसल उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है जहां भांगड़ा, गिद्दा और ढोल नगाड़ों के साथ नाचना गाना सभी को झूमने पर मजबूर कर देता है। पंजाब के सभी मुख्य शहरों जैसे जालंधर, चंडीगढ, लुधियाना और अमृतसर इत्यादि में बैसाखी की सजावट, उत्साह और रौनक देखते बनती है।
हेमिस गोम्पा फेस्टिवल, लद्दाख
भारत के लद्दाख में मनाया जाने वाला हेमिस गोम्पा महोत्सव अपनी जीवंत संस्कृति और आनंदमय वातावरण के कारण स्थानीय और पर्यटको को आकर्षित करता है। साल 2026 में 27-28 जून को आयोजित होने वाले इस उत्सव को गुरू पद्मसंभव को समर्पित किया जाता है। मुखौटा डांस, लोकसंगीत और विशाल थांगका चित्रों को प्रदर्शित करता यह उत्सव लेह लद्दाख के सुहाने मौसम को और भी ज्यादा लुभावना बना देता है। इस उत्सव में बौद्ध संस्कृति और स्थानीय हस्तशिल्प की पेशकश सभी को उत्कृष्ट झलक प्रदान करती है।
गंगटोक समर फेस्टिवल, सिक्किम
उत्तर पूर्व भारत के प्रमुख राज्य सिक्किम की प्राकृतिक खूबसूरती, सांस्कृतिक संपन्नता और पौराणिक कथाएं सभी लोगों को मजबूती से बांधे रखता है। विभिन्न जीवनशैलियों को सहेजता सिक्किम अपने उमंग उत्साह और खुशहाली के लिए पर्यटकों को आकर्षित करता है। ग्रीष्म ऋतु में सिक्किम गंगटोक में मनाया जाने वाला यह पुष्प महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है जहां कई तरह के ऑर्किड और पर्वतीय वनस्पतियां आकर्षित करती है। यह उत्सव ग्रीष्म ऋतु का स्वागत करता हुआ वसंत की खूबसूरती से सराबोर रहता है। ग्लैडियोली, गुलाब और कई सारे अल्पाइन पौधों के लिए प्रसिद्ध उत्सव है इसके अलावा आप यहां साहसिक गतिविधियां जैसे ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और मौसम की खूबसूरती का यादगार अनुभव ले सकते हैं।
शिमला समर फेस्टिवल, हिमाचल प्रदेश
शिमला ग्रीष्म महोत्सव पर्यटकों के लिए बहुप्रतीक्षित और आकर्षक इंवेंट्स में से एक है जहां गर्मियों के समय शीतल हवाएं, सर्वोत्तम जलवायु और संस्कृति की जीवंतता, शिमला के शानदार महोत्सव में प्रकृति, लोकसंस्कृति और बेहतर अवकाश की तलाश पूरी हो जाती है। चिलचिलाती गर्मियों की धूप से राहत प्रदान करती शिमला की धरती रंगीन उत्सव से और भी ज्यादा शोभाएमान और आकर्षित करती है। पहाड़ी क्षेत्र की मोहकता, कला व परंपराएं को दर्शाते इस महोत्सव में मैराथन, टूर्नामेंट, पुष्प प्रदर्शनी, फैशन शो, लाइव संगीत कार्यक्रम और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां सिर्फ मनोरंजन ही नहीं बल्कि अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करती है। शिमला में ग्रीष्म महोत्सव के समय भारी संख्या में पर्यटक आते हैं जहां मंत्रमुग्ध करते मौसम की खूबसूरती के साथ ही स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत प्रतिभाएं पर्यटकों को रिझाती हैं।
त्रिशूर पुरम केरल
केरल में उत्सवों की भरमार है, यहां त्रिशूर पुरम उत्सव साल में मनाया जाने वाला मंदिर उत्सव है जो मलयालम कैलेंडर के मेदम महीने में चंद्रमा पूरम नक्षत्र के साथ उदय होने पर मनाया जाता है। इस उत्सव को एशिया में सबसे ज्यादा बड़े त्योहारों में गिना जाता है जिसमें श्रद्धालु और आंगतुकों की संख्या दस लाख से ज्यादा ही रहती है, जिसकी धूम 40 से 50 दिनों तक चलती है। मंदिर उत्सव के रूप में प्रसिद्ध त्रिशूर पुरम उत्सव की शुरूआत केरल के सबसे बड़े मंदिर आरट्टूपुझा में होने वाले एक दिवसीय उत्सव से हुई थी, तब यह आरट्टूपुझा पुरम नाम से जाना जाता था। फिर किसी कारण से पूरे त्रिशूर शहर के सभी मंदिरों में इस उत्सव को मनाया जाने लगा। इस उत्सव की विशेषता है। कि इसमें उपयोग होने वाली हर चीज हर नए सिरे से बनाई जाती है। मंदिरों को दो समूहों मे ंविभक्त कर नेतृत्व संपन्न कर उत्सव की तैयारी करते हैं, इसमें एक पक्ष परमेक्कावु पक्ष और दूसरा थिरुवम्बाडी पक्ष। केरल के त्रिशूर में अवस्थित प्रमुख मंदिर वडक्कूनाथन मंदिर, थिरुवंबाडी श्री कृष्ण मंदिर, परामक्कावु भगवती मंदिर, तेक्किन्काडु मैदान, पूराम प्रदर्शनी और प्राकृतिक स्थलों की शोभा आकर्षित करती है।
ऊटी पुष्प समर फेस्टिवल, तमिलनाडु
तमिलनाडु के हिल स्टेशन ऊटी में ग्रीष्मकालीन समय में नीलगिरी पहाड़ियों की रौनक और आकर्षण चरम पर होता है। ऐसे में ऊटी का ग्रीष्म उत्सव अपने पारंपरिक आयोजन और त्योहार के साथ दक्षिण की यात्रा के लिए आमंत्रित करता है। तकरीबन 121 साल पुराना यह आयोजन तमिलनाडु और भारतीय पर्यटन की सयुंक्त पहल का परिणाम है, साल 2026 में यह प्रदर्शनी 4 मई से 27 मई तक आयोजित होने वाली है, जो प्रमुखतः प्राकृतिक खूबसूरती, रंग बिरंगे पुष्प और उनसे बनने वाले उत्पाद और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आकर्षित करती है। इसके अलावा प्राकृतिक झील पर नौका दौड़, नृत्य संगीत और अन्य सांस्कृतिक विशेषताएं फूलों की अनोखी क्यारियों के साथ बेहद अनूठे और अद्वितीय नजारें प्रस्तुत करती है। इस फेस्टिवल में फ्लावर शो, वेजिटेबल शो, डॉग शो, नाव दौड़ व परेड, हॉट एयर बैलून शो, विंटेज कार रैली, फोटोग्राफी, पेटिंग्स प्रतियोगिताएं और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षित करते हैं।
मोअत्सु फेस्टिवल, नागालैण्ड
नागालैण्ड में मनाया जाने वाला यह त्रिदिवसीय उत्सव मई के शुरूआती दिनों यानी बुवाई के बाद मनाया जाता है जो एक फसल उत्सव है। उत्तर पूर्वी भारत में संपन्न होने वाला यह उत्सव प्रकृति को धन्यवाद समर्पित करते हुए खेतों की सफाई, खरपतवार हटाने और बीज बोने के बाद मनाए जाते इस त्यौहार में सामूहिक मेलजोल और एकता की भावना के साथ खुद को शाबाशी देने जैसा है। नाचना गाना, खाना पीना और ईश्वरीय प्रार्थना के साथ यह त्योहार जमीन की अच्छी फसल की कामना से मनाया जाता है। नागा और आओ जनजाति के लोगों द्वारा इस त्यौहार को समृद्धि और वैभव के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर महिलाएं व पुरूष पारंपरिक वेशभूषा धारण करते हुए अद्वितीय आभूषण और वस्त्र पहनते हैं। मोअत्सु फेस्टिवल के दौरान नागालैण्ड में कई सारे पर्यटक आते हैं। यहां के मोकोकचुंग जिले, मोपुंगचुकेट गांव, उंगमा गांव, लोंगखुम गांव, जुकोऊ घाटी, दीमापुर और अन्य कई जगह घूम सकते हैं। इस उत्सव में लोग अपने पूर्वजों की वीरतापूर्ण कहानियों को बताने के साथ ही कई सारी मनोरंजन गतिविधियों के केंद्र के रूप में जाने जाते हैं
गंगा दशहरा उत्सव, उत्तराखंड/उत्तर प्रदेश
साल 2026 में गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जाएगा। यह मेला रंग, अबीर, गुलाल और स्वादिष्ट मिठाईयों के लिए जाना जाता है जो उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में खासतौर पर मनाया जाता है। होली के बाद आने वाला यह त्यौहार रंगों को जीवंत उत्सव के रूप में तब्दील कर देता है। गंगा मेला, गंगा नदी के तट पर मनाया जाने वाला उत्सव है जिसका भव्य जलसा और जश्न वातावरण में खुशी उल्लास का संचार कर देता है। हरिद्वार, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज और अन्य गंगा तटों पर इस त्यौहार को बेहद धूमधाम से मनाया जाता है।
पोइला बैसाख, पश्चिम बंगाल
पोइला बैसाख बंगाली नववर्ष की शुरूआत का दिन है जो बैसाख महीने का पहला दिन होता है जो 14 या 15 अप्रैल के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बंगाली लोग सुबह स्नान ध्यान कर नए वस्त्र पहनते हैं और मान्यतानुसार कुछ स्वर्ण या चांदी के आभूषण खरीदते हैं। इस उत्सव को मनाने की शुरूआत मुगल शासनकाल से हुई थी जब कर संग्रह सुधारों की घोषणा के प्रतीक दिन के रूप में मनाया जाने लगा। शुभ नव वर्ष और बंगाली कैलेंडर का पहला दिन बेहद उत्साह और शानदार तरह से मनाया जाता है। इस दिन बंगाली क्षेत्रों में विशाल शोभायात्रा सभी को आकर्षित करती है।
माउंट आबू समर फेस्टिवल, राजस्थान
राजस्थान का एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू अपनी प्राकृतिक सुंदरता, मंत्रमुग्ध करते परिदृश्यों और झीलों के शांत परिदृश्यों को दर्शाता है। माउंट आबू का यह त्यौहार अपने उल्लास और उत्साहमय वातावरण से सभी को आकर्षित करता है। महात्मा बुद्ध को समर्पित यह पर्व बुद्ध पूर्णिमा के साथ मनाया जाता है। दो दिवसीय ग्रीष्मकालीन उत्सव के रूप में माउंट आबू सुंदरतम रूप को प्रदर्शित करता है। इस त्योहार की शुरूआत रोचक गतिविधियों, नृत्य, संगीत प्रतियोगिताओं, शो और आतिशबाजी के साथ होती है, इसके अलावा स्थनीय हस्तशिल्प की कलाकृतियां, नौका दौड़, घुड़दौड़ की झलक देख सकते हैं। संगीतमय शामें और मनोरंजन गतिविधियों से माउंट आबू समर फेस्टिवल करिश्माई रूप से खुशी प्रदान करता है।
निष्कर्ष
भारतीय संस्कृति और कला को चरम आकर्षण प्रदान करते इन ग्रीष्म त्यौहारों की झलक प्रत्येक वर्ग को आकर्षित करती है। जहां राजस्थान में होता गणगौर उत्सव हो या केरल में होने वाला त्रिशूर पुरम उत्सव, ये त्योहार पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताओं को वर्तमान में भी उतनी ही नवीनता और जीवंतता प्रदान करते हैं। गर्मियों के दिनों में शीतलता प्रदान करते हिल स्टेशन जैसे ऊटी, शिमला, गंगटोक इन उत्सवों में पर्यटन आनंद की सीमा और भी कई गुना बढ जाती है, जहां रंग बिरंगे पुष्पों की लताएं और हस्तशिल्प कलाएं ग्रीष्म ऋतु में पर्यटन को शानदार और यादगार बना देती हैं।
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