- Jan 29, 2026
हरियाणा के फरीदाबाद में स्थित सूरजकुंड में हर साल फरवरी के प्रथम पक्ष में आयोजित विशाल और भव्य सूरजकुंड मेले की रौनक, खुशहाली, वातावरणीय अद्भुत छटा और ढोल ताशों पर पड़ती लय, धुन से तन मन आनंदित और प्रफुल्लित हो उठता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध यह मेला लगभग एक पखवाड़े भर चलता है, जिसमें कई हजार पर्यटक और दर्शक सम्मिलित होते हैं। मेले की महत्ता और विविधता में भारत के हस्तशिल्प कलाकारों की कारीगरी और सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य की अद्वितीय विशिष्टता प्रत्येक को आकर्षित करती है। विश्व के सबसे बड़े मेले के रूप में प्रसिद्ध यह मेला हस्तशिल्प विरासत और पारंपरिक कौशलों को सहेजता हुआ एक सफल मंच हैं, जिसकी प्रसिद्धि देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मशहूर है।
सूरजकुंड मेले 2026 से जुड़ी व्यापक जानकारी प्रदान करने के उददेश्य से इस आर्टिकल में मुख्य तिथियां, थीम राज्य, आवागमन विकल्प और अन्य जरूरी बिन्दुओं को शामिल किया गया है।
सूरजकुंड मेला 2026 : एक नज़र
- आयोजक : सूरजकुंड मेला प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति, कपड़ा, विदेश, पर्यटन विभाग, हरियाणा सरकार और हरियाणा पर्यटन निगम
- वर्तमान सूरजकुंड मेला : 39वां संस्करण
- सूरजकुंड मेले की आरंभिक तिथि : 31 जनवरी 2026
- सूरजकुंड मेले की समाप्ति तिथि : 15 फरवरी 2026
- समय : सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक
- टिकट शुल्क : 120-180 रूपये ( परिवर्तनीय )
- जगह : हरियाणा, फरीदाबाद, सूरजकुंड
- भागीदार राष्ट्र : मिस्त्र
- आधार राज्य : उत्तर प्रदेश व मेघालय
- नजदीकी मेट्रो स्टेशन : बदरपुर बॉर्डर मेट्रो स्टेशन
क्यों खास है सूरजकुंड मेला
- सूरजकुंड मेले का मुख्य उद्देश्य भारतीय पंरपरागत और हस्तशिल्पीय कलाकारों के माध्यम से विश्व भर मे भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा को पहचान प्रदान करने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिल्पकारों की कलाओं के लिए सम्मानित, व्यवस्थित और प्रबंधित मंच प्रदान करना।
- कम प्रचलित और दुर्लभ श्रेणी की विस्मृत शिल्पकलाओं को संरक्षण और बढावा प्रदान करना।
- हथकरघे में प्रयुक्त/उपयोग करने हेतु शानदार उन्नत तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए जागरूक करना।
- वृहद स्तर पर हस्तशिल्प कला और हथकरघा उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करना।
- दिल्ली पर्यटकों के लिए महानगर की चकाचौंध भरे वातावरण के साथ ही सूरजकुंड मेले के जरिए ग्रामीण परिवेश की खासियतों से रूबरू कराने के उद्देश्य से इस मेले की संकल्पना को साकार रूप प्रदान किया गया है।
सूरजकुंड मेले की विशेषताएं : सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, हस्तशिल्प प्रदर्शन और अन्य खूबियां
हस्तशिल्प विशेषताएं : सूरजकुंड मेला भारतीय परंपराओं की लुप्त होती कलाओं और प्रदर्शन को बढावा देता हुआ मंच है जिसकी अवधारणा के चलते सन् 1987 में पहली बार इसे आयोजित किया गया था। इसमें 1010 कार्यशालाएँ हैं जहां बुनकर, बुनाई और शिल्पकार, शिल्पकला का कार्य करते हैं। लगभग 40 एकड़ क्षेत्रफल में विस्तृत सूरजकुंड मेला परिसर सिर्फ किसी एक उत्पाद की कला पर ही नहीं वरन् चित्र, टेराकोटा, काष्ठ, वस्त्र, हांथी दांत, मिट्टी, पत्थर, लाख, बेंत, घास के उत्पादों के अलावा अन्य बहुत से प्रकार के पदार्थों की विस्तृत श्रृंखलाओ पर शानदार कारीगरी प्रदर्शित करता है।
संगीतमय पेशकशः सूरजकुंड मेले में भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संपन्न और वैभवशाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हर दिन आगुंतकों को आकर्षित करती है। जहां विभिन्न भारतीय राज्यो के लोकनृत्य, लोकसंगीत और गीतों की विस्तृत श्रृंखला का मनोरंजन और आकर्षण लुभाता है। सिर्फ थीम स्टेट राज्य ही नहीं वरन् सभी राज्यो के प्रमुख नृत्य जैसे कालबेलिया, गिद्धा, भांगड़ा, गरबा व अन्य कई सारे नृत्य प्रस्तुतियो को देखने को अवसर मिलता है, इसके अलावा शास्त्रीय नृत्य, संगीत संध्या, सूफी संगीत, कवि सम्मेलन और कई अन्य विदेशी देशों की सांस्कृतिक पेशकश का आनंद ले सकते हैं।
हथकरघा प्रस्तुति : इसके तहत राष्ट्रीय डिजाइन संस्थानों द्वारा फैशन शो का आयोजन आकर्षित करता है जो लीक से हटकर और परंपराओं का सफल प्रदर्शन करता है।
सूरजकुंड मेलें में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी 2026 : मिस्त्र राष्ट्र
- सूरजकुंड मेले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रियता का सिलसिला साल 2009 से शुरू हुआ जब इसका पहला भागीदार राष्ट्र मिस्त्र था। साल 2012 में वैश्विक स्तर पर मिलने वाली प्रसिद्धि और विशेषताओ के कारण इसका नाम ‘सूरजपुर अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला’ कर दिया गया। साल दर साल इसकी लोकप्रियता और बढती उपयोगिता के कारण दुनिया भर के कई देश भागीदार राष्ट्र के रूप में शामिल होते हैं जहां सिर्फ हस्तशिल्प कला ही नहीं वरन् पाक कला, स्वाद व्यंजनों को भी प्रदर्शित किया जाता है। इस मेले में होने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक परिवेश की मोहकता न सिर्फ भारतीय कलाकारों को बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अन्य कलाकारों को प्रेरित करते हुए शानदार आगाज़ का अवसर प्रदान करती है।
- सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले की विशेषताएं और आगुंतकों की संख्या में इज़ाफ़ा इसकी लोकप्रियता और बढता दायरा दर्शाता है। मेले के माध्यम से भारतीय दर्शकों को विदेशी परंपराओं, शिल्पकला और व्यंजनों के साथ ही अन्य कई परिप्रेक्ष्यों में जानने का अवसर प्राप्त होता है। दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीकी देशों, मध्य एशिया और न्यूजीलैंड इस मेले में शामिल हो चुके हैं।
- सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेले में भागीदार राष्ट्र हैण्डक्राफ्ट और अन्य कलाओं में स्वयं के पारंगत शानदार कलाकारों शामिल होने का कला प्रदर्शन का बेहतरीन मौका प्रदान करते हैं। प्रत्येक देश को किसी न किसी हैण्डक्राफ्ट या अन्य में विशेष प्रसिद्धि प्राप्त होती है, जो सूरजकुंड मेले के माध्यम से प्रदर्शित होने पर और भी ज्यादा खास हो जाता है।
- इस साल 2026 में सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव में भागीदार राष्ट्र मिस्त्र है, जिसकी भागीदारी साल 2009 में भी हुई थी।
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला थीम स्टेट : उत्तर प्रदेश व मेघालय
- सूरजकुंड मेले में थीम स्टेट की अवधारणा सन् 1989 से शामिल की गई। थीम स्टेट अवधारणा के तहत भारत के सभी राज्यों को हस्तशिल्प, कला और पाक शास्त्र में उन्नत और व्यापक प्रदर्शन करने और प्रगति की ओर अग्रसर करने के मकसद से तैयार किया जाता है। हर साल किसी एक या दो राज्यों को थीम स्टेट का दर्जा दिया जाता है जिसमें उन राज्यों की लोककलाओं, परंपराओं व कारीगरों की उन्नति और बेहतर प्रसिद्धि प्रदान करने के उद्देश्य से कलाओं, हस्तशिल्पीय उत्पादों और लोक कलाओं का व्यापक और उत्कृष्ट प्रदर्शन भारतीय और विदेशी आगुंतकों को मंत्रमुग्ध करता है।
- इस साल 2026 में उत्तर प्रदेश और मेघालय को थीम स्टेट का दर्जा मिला है, इसके तहत ये राज्य मेले में किसी निश्चित जगह पर अपनी पारंपरिक विशेषताओं को प्रदर्शित करते हुए साज सज्जा और अपनी अद्वितीय विशेषताओं की वजह से और भी ज्यादा आकर्षित करने की तैयारी में हैं। थीम स्टेट की खास पेशकश के तहत ‘‘अपना घर’’ नाम से अर्ध स्थायी संरचना बनाई जाती है जिसमें मेले के पूरे पखवाड़े के समय उक्त राज्य से जुड़ा कोई एक पारंपरिक परिवार निवास भी करता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश और मेघालय की जनजातीय विशेषताएं और जीवनशैली को करीब से देखने के लिए सूरजकुंड मेले का रूख करें जहां आप उत्तर प्रदेश व मेघालय की लोककलाओं, उत्पादों और प्राकृतिक तालमेल से खुद को अवगत करा पाएंगे।
- इसके अलावा मेघालय और उत्तर प्रदेश के बेमिसाल व्यंजनों के स्वाद को चखने का भी अवसर प्राप्त होने वाला है जहां इन राज्यों के फूड स्टॉलों में आप पारंपरिक और स्वादिष्ट व्यंजनों के लज़ीज अंदाज़ को अपना सकते हैं।
सूरजकुंड मेले का अनुमानित प्रवेश शुल्क
सूरजकुंड मेले में टिकट शुल्क दर कार्यदिवस और सप्ताहांत में अलग अलग हो सकता है। वीआईपी पास के तहत भी प्रवेश ले सकते हैं, इसके अलावा कुछ विशेष वर्ग समूह को रियायत प्रदान की जाती हैं जो सीनियर सिटीजन, दिव्यांगजन या विद्यार्थी हो सकते हैं, इसके लिए वैध पहचान प्रमाण पत्र होना आवश्यक है।
- सामान्य प्रवेश शुल्क :120 रूपये-180 रूपये
- दिव्यांगजनों को शुल्क मुक्ति में 50 प्रतिशत की छूट मिल सकती है।
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रवेश शुल्क मुक्त है।
- टिकट ऑनलाइन या ऑफलाइन मोड पर कैसे खरीदें-
- सूरजकुंड मेले के लिए आगुंतक ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनो माध्यमों से टिकट खरीद सकते हैं।
- ऑनलाइन टिकट खरीदने के लिए डीएमआरसी पोर्टल और मुख्य टिकटिंग वेबसाइटो के माध्यम से खरीद सकते हैं।
- ऑफलाइन टिकट मेला स्थल पर बने काउंटरों के माध्यम से खरीद सकते हैं।
- दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के चुनिंदा स्टेशनों पर डीएमआरसी ऐप के माध्यम से भी आसानी से टिकट ले सकते हैं।
- सूरजकुंड मेले को एक्सप्लोर करने के लिए टिकट की पूर्व बुकिंग करा लेना बढिया ऑप्शन है। मेले की ऑनलाइन टिकट खरीद के लिए कई निर्धारित प्लेटफॉर्म पर संपर्क कर सकते हैं।
सूरजकुंड मेले के आसपास घूमने योग्य स्थान
तुगलकाबाद किला : दिल्ली के प्राचीन किलो ंमें से एक तुगलकाबाद किला तीसरे एतिहासिक शहर के रूप में जाना जाता है जिसका निर्माण 1321 ई मे हुआ था। यह किला महत्वपूर्ण जैव विविधता वाला क्षेत्र है जो सूरजकुंड के पास ही स्थित है।
कुतुब मीनारः सूरजकुंड से मेट्रो या सड़क माध्यम से आप कुतुबमीनार को देखने आ सकते हैं।
बडखल झीलः सूरजकुंड के पास ही बडखल झील स्थित थी, जहां प्राकृतिक रूप से बनी यह झील अरावली पर्वतमाला से घिरी हुई मानव निर्मित तटबंध जगह पर बनी हुई थी। झील के पास ही सूरजकुंड जलाशय, अनंगपुर बांध, आदिलाबाद खंडहर और छतरपुर मंदिर देख सकते हैं।
इसके अलावा आप कई सारे ऐतिहासिक स्मारकों, राष्ट्रीय उद्यान और आकर्षणों को देख सकते हैं।
सूरजकुंड मेला : कैसे पहुंचे ?
हवाई मार्ग से : सूरजकुंड मेले से नजदीकी एयरपोर्ट नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है जिसकी दूरी लगभग 35 किमी है। हवाई अड्डे से मेले तक की दूरी किसी टैक्सी या मेट्रो के माध्यम से तय कर पहुंच सकते हैं।
मेट्रो/रेलवे स्टेशन : फरीदाबाद के सूरजकुंड से नजदीकी मेट्रो स्टेशन वायलट लाइन पर बदरपुर बॉर्डर मेट्रो स्टेशन है जिसकी दूरी लगभग 9 किमी है इसे आप शेयरिंग टैक्सी, ई रिक्शा या किसी अन्य परिवहन माध्यम से आसानी से पार कर पहुंच सकते हैं। इसके अलावा सूरजकुंड, फरीदाबाद रेलवे स्टेशन से 8 किमी की दूरी पर हैं, जहां आप देश भर में निर्धारित रेलवे स्टेशनों के माध्यम से रेल द्वारा पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से : सूरजकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर है जहां गुरूग्राम से दूरी 35 किमी और दिल्ली से 22 किमी है। सूरजकुंड बेहतरीन सड़क माध्यमो ंसे जुड़ा है जहां आप स्वयं अपने वाहन, बस या कैब के माध्यम से डोर टू डोर यात्रा संपन्न कर सकते हैं
निष्कर्ष
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्पीय मेला महोत्सव सिर्फ मनोरंजन का साधन ही नहीं बल्कि व्यापार वाणिज्य और स्थानीय रीति रिवाजों को नई दिशा प्रदान करता विशेष वार्षिक मेला है। जीवंत और आकर्षक हस्तशिल्प व हथकरघा समुदायों, लोकगीत मंचन और भारत की सांस्कृतिक विविधता को आकर्षक रंगों से गुलज़ार करते इस मेले का 39वां संस्करण आगुंतकों के लिए समग्र तैयारी के साथ स्वागत को तैयार है, इसकी उत्सुकता सिर्फ किसी विशेष वर्ग या समुदाय में ही नहीं वरन् देश विदेश के सभी कला प्रेमियों में विशिष्ट रूप से नज़र आती है।
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