- Jan 05, 2026
भारत ही नहीं वरन् पूरे विश्व में जैन धर्म बेहद प्राचीन और अनुशंसित धर्म है जिसमें सत्य, धर्म और अहिंसा को मुक्ति का सर्वोपरि मार्ग बताया गया है। जैन शब्द का अर्थ जिन यानी विजेता होता है- जीवन जीते हुए मोक्ष को प्राप्त करना विजयी होना माना जाता है। जैन धर्म शांति, सौहार्द और जीवों पर दया करने को ही मानव धर्म का सार बताता है। भारत में इन्ही शिक्षाओं का प्रचार प्रसार करते प्रमुख जैन मंदिरों की उपस्थिति मन को भावनाशील और आंतरिक शांति प्रदान करते हैं। महावीर जैन भगवान द्वारा स्थापित जैन धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा का रूख करते हैं। जानते हैं विस्तार से
1. आदिनाथ जैन मंदिर, रणकपुर, राजस्थान
अरावली पर्वत की घाटियों के मध्य स्थित ऋषभदेव का प्रमुख मंदिर है जो राजस्थान जोधपुर, पाली के निकट रणकपुर में चतुर्मुखी जैन मंदिर है। घनी हरियाली और जंगलों के बीच बसा भव्य बना यह मंदिर करीब 40,000 वर्ग फीट में फैला हुआ है। यह मंदिर करीब 50 सालों से भी अधिक समय में बना है, जो 1446 विक्रम संवत, यानी करीब 600 साल पहले इसका निर्माण कार्य आरंभ हुआ था। मंदिर में चार जटिल नक्कशीदार द्वार हैं। मंदिर के मुख्य गर्भग्रह में तीर्थंकर आदिनाथ की संगमरमर से बनी करीब 72 इंच की चार विशाल प्रतिमाएं हैं जो अलग अलग दिशाआेंं की ओर स्थापित है, इस विशेषता के कारण इसे चतुर्मुख मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर में लगभग 76 छोटे गुम्बदनुमा पावन स्थल, चार बड़े प्रार्थना कक्ष और चार बड़े पूजन स्थल हैं। भारत के जैन मंदिरों में से इस मंदिर की इमारत बेहद विशाल और शानदार है। इस मंदिर के करीब 1444 खम्भे है जो बेहद शानदार अद्वितीय है, जिन पर जटिल नक्काशी और इन खंबो की विशेषता है कि इनकी वजह से मुख्य दर्शन करने में कोई व्यवधान नही आता है। यहां भगवान ऋषभदेव व शत्रुंजय की सीख पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
प्रमुख आकर्षण : कलात्मक तरह से दो स्तर में बना हुआ है, उत्तर मे रायन के पेड़ स्थित है। बेहतरीन खंभों के कारण इसे खंभो का अजायबघर कहते हैं व जैन धर्म के पांच प्रमुख तीर्थों में से एक है।
कैसे पहुंचे :
हवाई मार्ग से
- नजदीकी हवाई अड्डा महाराणा प्रताप एयरपोर्ट, उदयपुर है जहां से आप करीब 88 किमी दूरी तय कर मंदिर दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- आदिनाथ जैन मंदिर से करीबी रेलवे स्टेशन फालना है जहां से आप बस या कैब से करीब 34 किमी की दूरी तय कर मंदिर पहुंच सकते हैं।
सडक मार्ग से
- राजस्थान और देश के प्रमुख शहरों जैसे जोधपुर, जयपुर, अहमदाबाद व दिल्ली आदि जगहों से आदिनाथ जैन मंदिर रणकपुर के लिए सड़क मार्ग की कनेक्टिविटी बेहतर और सुलभ है, जहां अरावली पहाड़ियो ंसे होकर जाना शानदार लॉंग ड्राइव का आनंद प्रदान करता है।
2. पालीताना जैन मंदिर, गुजरात
गुजरात भावनगर के पास बना यह स्थल बेहद पवित्र है, इसका निर्माण तकरीबन 11वीं सदी के आसपास हुआ और इसे बनने में करीब 900 साल लग गए थे। पालीताना में बने इन मंदिरों की संख्या 863 है, जहां लगभग 3500 सीढियां चढकर पहुंच सकते हैं। यह मंदिर जैन धर्म के महाप्रभु ऋषभनाथ को समर्पित है। 14वीं व 15वीं सदी के आसपास इन मंदिरों पर मुस्लिम आक्रमण हुए, इस वजह से यहा सोलह बार जीर्णोद्धार कराया गया। पालीताना में बने इन जैन मंदिरो की अद्भुत स्थापत्यकला और देवी देवताओं की रत्नजड़ित कीमती पत्थरों की प्रतिमाएं हैं, इन मंदिरो में दिगंबरों का जैन मंदिर प्रसिद्ध और पुराना है जहां भगवान शांतिनाथ की मूर्ति है जिसकी ऊंचाई तकरीबन 42 इंच च शुद्ध सफेद संगमरमर की बनी है।
प्रमुख आकर्षणः पालीताना को मंदिरों का शहर कहते हैं, जहां 900 से अधिक छोटे बड़े मंदिर स्थापित हैं। जैन धर्म के अनुयायियों के लिए पूरे जीवनकाल में कम से कम एक बार इस पर्वत की चढाई करना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। यहा जैन धर्म के दिगंबर और श्वेतांबर संप्रदायों के मंदिर हैं। प्रमुख मंदिर- चौमुख मंदिर, आदिश्वर मंदिर, समोवसरन मंदिर व जंबूद्वीप मंदिर है, जहां श्री ऋषभनाथ 108 फीट ऊंची मूर्ति आकर्षक हैं।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- नजदीकी एयरपोर्ट भावनगर हवाई अड्डा है, यहां से करीब 60 किमी दूरी पर मंदिर स्थित हैं।
रेल मार्ग से
- पालिताना मंदिरो से नजदीकी रेलवे स्टेशन पालिताना है जो करीब 3.5 किमी दूरी पर है।
सड़क मार्ग से
- गुजरात के भावनगर के नजदीक यह मंदिर सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
3. श्री दिंगबर जैन लाल मंदिर, दिल्ली
श्री दिगम्बर जैन मंदिर का निर्माण 1656 में हुआ था, जहां इस मंदिर में दिंगबर मुनि आचार्य शांतिसागर का आगमन हुआ, जो तकरीबन आठ शताब्दियांं के बाद सन् 1931 में दिल्ली आने वाले जैन भिक्षु थे। इस मंदिर को लाल मंदिर या वन्यजीव मंदिर भी कहते हैं जो जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ को समर्पित है। दिल्ली के चांदनी चौक क्षेत्र में बने इस मंदिर का मुख्य पूजा स्थल पहली मंजिल पर है और इसके सामने मनस्तंभ स्तंभ है। लाल किले के पास स्थित यह जैन मंदिर लाल बलुआ पत्थर से बना हुआ प्रसिद्ध स्मारक है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जाना जाता है जो बेहद पुराना और शांति प्रदान करता है।
प्रमुख आकर्षणः इस मंदिर की दीवार से लगा पक्षी चिकित्सालय है और इसके बगल में गौरी शंकर मंदिर की स्थापना लगभग 1761 में हुई थी। प्राचीनता, आस्था विश्वास का केंद्र जो शांति और सौहार्द का प्रतीक है।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट जहां से आप स्थानीय टैक्सी या मेंट्रो के माध्यम से आप मंदिर पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
- यहां से नजदीकी रेलवे स्टेशन दिल्ली है और मेट्रो स्टेशन चांदनी चौक है, जहां से मंदिर पैदल दूरी पर ही स्थित है।
सड़क मार्ग से
- भारत की राजधानी दिल्ली देश के किसी भी शहर से अच्छे से कनेक्टड है जहां आप स्वयं ड्राइविंग या बस, टैक्सी के माध्यम से आ सकते हैं।
4. पार्श्वनाथ मंदिर, खजुराहो, मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश, छतरपुर जिले के खजुराहो में स्थित पार्श्वनाथ मंदिर पूरे संसार में अपनी शानदार वास्तुकला के लिए जाना जाता है और संसार के लिए प्रसिद्ध धरोहर भी है। आकर्षक जटिल नक्काशी और शानदार कलाकृतियों के लिए यह मंदिर विशेष रूप से जाना जाता है। खजुराहो के इन जैन मंदिरों की छवि बेहद उत्कृष्ट है। इन मंदिरों की स्थापना चंदेल वंश के शासकों ने कराया जिसकी कलाकृतियां बेजो़ड़ और नायाब है। इस मंदिर का निर्माण करीब 950 ईस्वी के आसपास कराया गया जहां धार्मिक चित्र और विशाल आकृतियां बनी हुई है। इस मंदिर की खासियत है कि यहां इस्लामी और बौद्ध तत्व दर्शन की झलक भी मिलती है। भारतीय पुरातत्व विभाग ने इस मंदिर को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में भी मान्यता प्रदान की है।
प्रमुख आकर्षणः चंदेल शासक धनगा द्वारा बनवाये इस मंदिर को यूनेस्को वैश्विक धरोहर का दर्जा मिला हुआ है जो अपनी भीतरी भित्ति चित्रों, जटिल नक्काशी और मानव व पशु चित्रों के लिए जाना जाता है। खजुराहों में अन्य मंदिर और आकर्षण बहुतायत है जहां आप पर्यटन आनंद ले सकते हैं। मातंगेश्वर मंदिर, कंदरिया महादेव मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, व जवारी मंदिर देख सकते हैं।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
पार्श्वनाथ मंदिर पहुंचने के लिए नजदीकी हवाई अड्डा खजुराहो है जहां से स्थानीय टैक्सी, बस या ऑटो रिक्शा माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग से
निकटतम रेलवे स्टेशन , खजुराहो रेलवे स्टेशन है जहां से आप आसानी से मंदिर दर्शन को जा सकते है।
सड़क मार्ग से
खजुराहो सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है जहां आप आसपास के प्रमुख शहरों जैसे झांसी, छतरपुर आदि जगहों से आसानी से सीधे चलने वाली बसों या स्वयं की गाड़ी से पहुंच सकते हैं।
5. दिलवाड़ा जैन मंदिर, माउंट आबू, राजस्थान
पांच मंदिरों का यह समूह तकरीबन 11वी से 13वीं शताब्दी में बनवाया गया था जो जैन तीर्थंकरों को समर्पित है। 1031 ईस्वी में बना यहां विमलशाही मंदिर प्रथम जैन तीर्थंकर को समर्पित है, यहां जैन धर्म के प्रत्येक तीर्थंकर को समर्पित मंदिर हैं। दिलवाड़ा में जैन तीर्थंकरों में 22वे तीर्थंकर नेमिनाथ को समर्पित लुन वासाही मंदिर है, यह 1231 ईसवी में बनवाया गया था। दिलवाड़ा जैन मंदिरों की श्रृंखला पूरे विश्व और भारत में विशेष रूप से प्रसिद्ध है जिनकी शोभा और सौंदर्यता के किस्से सदियों से गाए जाते हैं। मंदिर में बनी आदिनाथ भगवान की मूर्ति के नयन असली हीरे के बनाए गए है और इनके कंठ में बहुमूल्य शानदार रत्नों का हार सुशोभित है। इन मंदिरों में जैन धर्म की सादगी, मूल्यों और शिल्प को दर्शाया गया है।
प्रमुख आकर्षणः विमल वासाही मंदिर-आदिनाथ, लूणवसही मंदिर-नेमिनाथ, पित्तलहार मंदिर-ऋषभदेव, श्री पार्श्वनाथ मंदिर, श्री महावीर स्वामी मंदिर और अन्य मंदिरो की शोभा को निहारें जहां आश्चर्य शिल्पकला वास्तुकला आकर्षित करती है।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
माउंट आबू से नजदीकी शहर उदयपुर है जिसकी दूरी लगभग 170 किमी है। उदयपुर में महाराणा प्रताप हवाई अड्डा है, जो मंदिर का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट है।
रेल मार्ग से
निकटतम रेलवे स्टेशन आबू रोड है जहां से आप स्थानीय वाहनो की मदद से दिलवाड़ा जैन मंदिर की यात्रा पर जा सकते हैं।
सड़क मार्ग से
माउंट आबू राजस्थान, गुजरात के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है जहां से आप प्रमुख शहरों से सीधी बस सेवा के माध्यम से माउंट आबू पहुंच सकते हैं।
6. गोमतेश्वर मंदिर, श्रवणबेलगोला, कर्नाटक
इस स्थान को इंद्रगिरी नाम से भी जाना जाता है जहां 57 फीट यानी लगभग 17 मीटर ऊंची पत्थर ग्रेनाइट के एक ही ब्लॉक से तराशी गई विश्व की सबसे प्राचीन प्रतिमा है, इसीलिए यह एकाश्म प्रतिमा कहलाती है। विध्ंयगिरी पहाड़ी श्रवणबेलगोला के पास बनी यह प्रतिमा जैन धर्म के एक पात्र बाहुबली को समर्पित है, जो ऋषभनाथ के भाई थे। श्रवणबेलगोला की दो पहाड़ियों विंध्यगिरी और चंद्रगिरी है जिसमें चंद्रगिरी ऋषभनाथ के पुत्र भरत को समर्पित है। इस स्थान कई जैन तीर्थंकरों के मंदिर व प्रतिमाएं अवस्थित हैं। बाहुबली की प्रतिमा दीर्घ ध्यान मुद्रा को दर्शाती है। यहां की खासियत है कि पृष्ठभूमि में दीमक का एक टीला है जो लगातार तपस्या और व्रत का प्रतीक माना जाता है, इसके अलावा टीले से सर्प और लता का चित्रण है जो अद्वितीय है।
प्रमुख आकर्षणः विंध्यगिरी पहाड़ी और चंद्रगिरी पहाड़ियों पर बने अन्य जैन मंदिरों का अवलोकन करें। पौराणिक इतिहास और दंतकथाओं को सुने व समझें। गोम्मतगिरी, बसदी, बावांगाजा और अन्य तीर्थंकरों की प्रतिमाओं के दर्शन आशीर्वाद प्राप्त करें। यहां जैन धर्म के अंतिम सर्वज्ञ गुरू भद्रबाहु स्वामी और चंद्रगुप्त मौर्य ने सांसारिक मोह त्याग कर समाधि ली थी। यहां लगभग 40 जैन मंदिर स्थित हैं।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- कर्नाटक श्रवणबेलगोला में नजदीकी एयरपोर्ट बेंगलुरू कैम्पेगोड़ा इंटरनेशनल है जहां से लगभग 3-4 घंटे का सफर कर पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग सेः
- नजदीकी रेलवे स्टेशन श्रवणबेलगोला या हसन रेलवे स्टेशन है जहां से स्थानीय वाहन से यहां तक पहुंच सकते हैं।
सड़क मार्ग से :
- कर्नाटक और प्रमुख शहरो से आसानी से श्रवणबेलगोला तक का सफर तय कर सकते हैं जहां हसन से करीब 52 किमी, मैसूर से 83 किमी और बेंगलुरू से 140 किमी दूरी तय कर पहुंच सकते हैं।
7. पावापुरी तीर्थ, बिहार
बिहार नालंदा में स्थित यह मंदिर राजगीर और बोधगया के समीप है जो जल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है इसके अलावा जैनियों का प्रमुख आध्यात्मिक और प्रसिद्ध गंतव्य स्थल है। भगवान महावीर ने अपने जीवन के अंतिम दिन इसी स्थान पर बिताए थे और यहीं से मोक्षधाम को गमन किया था। मान्यता है कि जिस स्थान पर उन्हें दफनाया गया, वहां की मात्र एक चुटकी पवित्र रज को उनके अनुयायी और उनके सभी शिष्य लेना चाहते थे, इस वजह से इस स्थान पर एक विशाल तालाब का निर्माण हो गया जो उनकी प्रसिद्धि और भक्तों में स्वामी के प्रेम का प्रतीक है। पावापुरी का यही स्थान जल मंदिर नाम से भी जाना जाता है, इसके अलावा यहां अन्य पांच मंदिर है जो गांव मंदिर, समोसरण, नव समोसरण और बीबी मेहताब कुमारी द्वारा बनवाया गया मंदिर है।
प्रमुख आकर्षणः यहां बने पवित्र तालाब और इसकी पवित्रता धार्मिक रूप से आकर्षित करती है, इसका नाम पद्म सरोवर है जहां बिखरे कमल फूल और केंद्र में बना संगमरमर का श्वेत मंदिर शांति और सुकून प्रदान करता है।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- पटना एयरपोर्ट नजदीक है जो 100 किमी दूरी पर है।
रेल मार्ग से
- पावापुरी रेलवे स्टेशन नजदीक है और बड़े स्टेशनों में राजगीर या बिहार शरीफ रेलवे स्टेशन हैं।
सड़क मार्ग से
- बिहार के प्रमुख शहर- पटना, राजगीर, नालंदा और बोधगया से पावापुरी के लिए स्थानीय बसें और कैब सीधे जाती हैं।
8. सोनागिरी, दतिया, मध्य प्रदेश
जैन प्रमुख तीर्थों का स्थान जहां श्वेत छवि बिखेरते इन मंदिरों की शोभा देखते बनती है, जिनकी गिनती लगभग 108 है, इनमे से 57वां मुख्य मंदिर अधिक प्रसिद्ध है जिसमें भगवान चंद्रप्रभु की लगभग 11 फीट की प्रतिमा स्थापित है। पास ही महास्तम्भ जिसकी ऊंचाई 43 फीट है स्थित है। सोनागिरी स्थान पर आचार्य भतृहरि और शुभचन्द्र ने अनेक ग्रंथो की रचना की साथ ही जीवन के अंतिम दिन यही बिताते हुए निर्वाण को पाया। मान्यता है कि यहां 8वे तीर्थंकर श्री चंदप्रभु ने 17 बार समवसरण लगाया था।
प्रमुख आकर्षणः पहाड़ी सोनागिरी पर अवस्थित इन मंदिरो की भव्य छवि दूर से ही अपना अलौकिक आकर्षण बिखरेती है। सिद्ध क्षेत्र सोनागिरी की तलहटी में श्रद्धालुओं के लिए 32 धर्मशालाओं का निर्माण कराया गया है। जहां बेड और निःशुल्क भोजन की भी व्यवस्था है।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- ग्वालियर एयरपोर्ट इस मंदिर से करीब 60 किमी दूरी पर है।
रेल मार्ग से
- सोनागिरी रेलवे स्टेशन जहां से मंदिर लगभग 2 किमी दूरी पर है।
सड़क मार्ग से
- मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के प्रमुख शहरों दतिया, झांसी व ग्वालियर होते हुए आसानी से सड़क मार्ग के माध्यम से सोनागिरी पहुंच सकते हैं।
9. सम्मेद शिखर तीर्थ, गिरिडीह, झारखंड
शिखरजी, पारसनाथ पहाड़ी के नाम से प्रचलित इस स्थान पर पहाड़ियों की एक शानदार श्रृंखला है जो लगभग 1350 मीटर की ऊंची चोटी पर स्थित है। सम्मेद शिखर बेहद पवित्र और पावन स्थल है जिसका नाम 23वें तीर्थंकर पारसनाथ के नाम पर विख्यात हो गया। मान्यता है कि यहां पारसनाथ के साथ ही 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने मुक्ति प्राप्त की थी। यहां बना मंदिर करीब 2,000 साल पुराना है जो बहुत प्राचीन है। झारखंड का सबसे ऊंचा स्थान है जहां पर्यटन और धार्मिक प्रसिद्धि के कारण श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
प्रमुख आकर्षणः पारसनाथ पर्वत बेहद पवित्र स्थान माना जाता है, जिसकी तुलना समयान्तर अयोध्या के समान बताया जाता है। पूरे मन वचन कर्म से सम्मेद शिखर की यात्रा करने से प्राणी को जन्म जन्मांतर के बंधनो से मुक्ति मिल जाती है।
कैसे पहुंचे
हवाई मार्ग से
- सम्मेद शिखर पहुंचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट रांची या देवघर हवाई अड्डा है जहां आप लगभग 100 किमी का सफर तय कर सम्मेद शिखर यात्रा संपूर्ण कर सकते हैं।
रेल मार्ग से
- पारसनाथ पर्वत से करीबी रेलवे स्टेशन पारसनाथ है जो लगभग 23 किमी ही दूरी पर है।
सड़क मार्ग से
- झारखंड और बिहार के प्रमुख शहरों से गिरिडीह, दुमका, मधुबनी से पारसनाथ के लिए सीधी बसें संचालित होती हैं।
निष्कर्ष
जैन धर्म भारत का प्रमुख और महत्वपूर्ण धर्म है जिनके आध्यात्मिक स्थल पूरे भारतवर्ष को अपनी आशीर्वादमय उपस्थिति से अभिसिंचित करते हैं। प्रत्येक जैन तीर्थस्थलों की धार्मिक मान्यताएं, वास्तुकला और किंवदंतियां जैनियों के साथ साथ सभी धर्म के लोगों को जीवन में सत्मार्ग और सतपथ पर चलने के साथ ही मानवता का गहरा संदेश प्रदान करते है। अहिंसा परमो धर्म का पाठ पढाते इन जैन तीर्थस्थलों पर दर्शन करना और समय बिताना जीवन में सुख और शांति की सच्ची पराकाष्ठा प्रदान करता है।
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