- Dec 12, 2025
शक्ति का स्थान श्री वैष्णो देवी मंदिर देवी के महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों मे से एक है जो हिंदू धर्म से जुड़ा परम पुनीत स्थान है। जम्मू और कश्मीर के पर्वतीय भागों में बसा यह स्थान त्रिकूट पर्वत की ऊंचाई पर स्थित है जो देवी शक्ति का प्रतीक और लाखों भक्तों के लिए दिव्य आस्था का केंद्र है। माता के दर्शनों को हर साल लाखों करोड़ो श्रद्धालु यहां आते हैं जो सिर्फ भक्ति या धार्मिक यात्रा ही नही बल्कि तन मन को शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक प्रसन्नता प्रदान करने वाला दिव्य सफर है। मंदिर जाते समय भक्तों को भक्ति समर्पण और अध्यात्म की शक्ति महसूस होने के साथ ही श्रद्धालु प्राकृतिक खूबसूरती, पर्वतीय आकर्षण और सामाजिक समरसता के मेलजोल की भावना से ओतप्रोत हो जाते हैं। पौराणिक और स्वाभाविक नजरिए से भी इस मंदिर की आध्यात्मिक जडेें अपनी गहराई में समाई हुई हैं। हिंदू धर्मग्रंथों में और शास्त्रों में देवी मां के शक्ति के इस अवतार के बारें में वर्णन मिलता है, जिनका यह स्वरूप मानव जाति के उत्थान और कल्याण के लिए ही जाना जाता है, मां वैष्णों के दर्शन भक्त के जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। आइए वैष्णों देवी मंदिर के बारें मे और भी ज्यादा विस्तार से जानते है।
वैष्णो देवी मंदिर का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व
वैष्णो देवी मंदिर जो त्रिकूट पर्वत पर स्थित है इसलिए वैष्णो देवी को मां त्रिकूटा या वैष्णवी भी कहते हैं जो देवी आदिशक्ति मां जगदंबा का शाश्वत स्वरूप हैं। देवी वैष्णो, त्रिमाताओं महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती के साथ विराजमान हैं, जहां आप सब पिंडी रूप में ही प्रतिष्ठित हैं। मान्यता हैं कि ये देवी शक्ति के 108 शक्तिपीठों में से एक है जो त्रेता युग से यहा विराजित हैं। लगभग 14 किमी की चढाई तय कर श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
वैष्णो देवी मंदिर का पौराणिक इतिहास
प्राचीन समय मे राजा रत्नाकर एक तपस्वी राजा थे जिन्होने अपनी भक्ति से देवी मां को प्रसन्न कर वर चाहा कि वे उनके यहां पुत्री रूप में जन्म लें, फलस्वरूप ऐसा ही हुआ। देवी वैष्णवी भगवान श्री राम की आराध्या हुईं, भगवान श्री राम ने त्रेता युग में एकपत्नी व्रत का पालन किया इसलिए उन्होंने देवी वैष्णवी को कलयुग के अंत तक भगवान कल्कि की प्रतीक्षा के लिए त्रिकूट पर्वत पर अन्य देवियों के साथ बसने का आदेश दिया। इसलिए ऐसा माना जाता है कि देवी वैष्णो भगवान के कल्कि अवतार की प्रतीक्षा में यहां आज भी तपस्या कर रही हैं।
वैष्णो देवी मंदिर का मौसम : ऋतु अनुसार
जम्मू कश्मीर मे स्थित यह शक्तिपीठ त्रिकूट पर्वत पर स्थापित अनोखा यह स्थान सभी के लिए शानदार तीर्थ है जहां जाने के लिए सारे समय उपयुक्त है लेकिन गर्मियों ( मार्च से जून ) में यहां जाना ज्यादा पसंद किया जाता है। वैसे देखा जाए तो दिन तो काफी गर्म होता है लेकिन शाम के समय वातावरण शीत और सुहावना हो जाता है। इस समय तापमान 14 से 34 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। ग्रीष्म ऋतु में रातें ठंडी होती हैं इसलिए कंबल का उपयोग जरूरी है।
अगर आप बर्फबारी और फोटोग्राफी के बेहद शौकीन है तो ऐसे में शरद ऋतु उत्तम है। सर्दियों ( अक्टूबर से फरवरी ) में वैष्णों देवी में मां के भवन पर तापमान लगभग -3 से -4 डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है। ऐसे में यहा चट्टानों के खिसकने का डर भी रहता है। मंदिर में बर्फबारी के कारण यात्रा कुछ कठिन भी हो जाती है। शीत ऋतु में ऊनी कपड़े और शाल जरूर कैरी करें।
मानसून का समय जुलाई से सितम्बर के दौरान यात्रा के लिए उपयुक्त मौसम नहीं है। पहाड़ों पर बारिश की गति बहुत तेज होती है जिससे भूस्खलन और अन्य असुविधा का सामना करना पड़ता है। वैसे इस मौसम में यात्रा पर डिस्काउंट ज्यादा मिलता है। न्यूनतम 23 से 29 डिग्री सेल्सियस रहता है। बारिश से बचने के लिए छतरियां या रेनकोट साथ रखें, मां के भवन पर ज्यादातर बारिश होती रहती है इसलिए इनका प्रयोग करना आवश्यक हो जाता है।
वैष्णो देवी यात्रा का क्रम : विस्तार से
चरण पादुका मंदिरः माता वैष्णो देवी के चरण बिन्दु यहां प्रतीक स्वरूप में स्थापित है यहां उनके चरण चिन्हों का दर्शन कर मंदिर यात्रा की शुरूआत की जाती है, जो कटरा में स्थित है और यात्रा का पहला पड़ाव है। देवी ने जहां से भैरों बाबा को मुड़ कर देखा वह स्थान चरण पादुका नाम से स्थित है।
बाणगंगाः इस नदी को मां वैष्णों ने अपने बाण से उत्पन्न किया था और यहां अपने केशों को भी धोया था इसलिए इसे बाणगंगा या बालगंगा कहते हैं। गंगा जैसी पवित्र इस नदी को देवी वैष्णो ने भगवान हनुमान की प्यास बुझाने के लिए उनके अनुरोध पर प्रस्फुटरित किया था। यहां पर स्नान दान और मुंडन आदि कार्यों की महिमा बताई जाती है।
अर्द्धकुंवारीः इस स्थान पर देवी मां ने पूरे नौ माह तक गर्भनुमा गुफा में तपस्या की थी, इसलिए इसे गर्भ जून की गुफा भी कहते हैं। गुफा मे ंदर्शन करने के लिए रेंगकर जाना पड़ता है जो धार्मिक रूप से पवित्र होने और नवजीवन का संकेत प्रदान करता है। यह गुफा कटरा से वैष्णों देवी के मार्ग के आधे रास्तें में है। यहां से मां के भवन का रास्ता लगभग आधा रह जाता है।
वैष्णो देवी भवनः इस स्थान पर देवी वैष्णों मां महालक्ष्मी, महाकाली, मां सरस्वती के साथ पिण्डी स्वरूप मे प्रतिष्ठित हैं। यह एक दिव्य शक्तिपीठ है जहां यह भी मान्यता है कि देवी सती का यह कपाल भाग गिरा था। प्रमुख आध्यात्मिक स्थान देवी मां का प्रमुख यह जगह अपने भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण कर उन्हे दर्शन प्रदान करती हैं। त्रिकूट पर्वत पर यह भवन करीब 1500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
भैरों बाबा मंदिरः मां के भवन से करीब 1.5 किमी दूर इस स्थान पर भैरो बाबा के शीश की पूजा की जाती है। जहां भवन से यह अधिक ऊचाई पर स्थित यह मंदिर बेहद आकर्षक और प्राकृतिक सुदंरता की दिव्य अनुभूति का स्पर्श कराता है।
वैष्णों देवी मंदिर जाने से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
वैष्णो देवी मंदिर की यात्रा एक समर्पण और आस्था की तैयारी है जहां जाने से पहले की तैयारी बहुत महत्वपूर्ण हैं। सफल यात्रा की नींव बनाने के लिए कुछ तैयारियों का होना जरूरी है।
- 1. कपड़ों का चयन वहां के मौसम के हिसाब से पहले से ही तय कर लें। वैसे ऊंचाई पर तापमान कम और मौसम सर्द ही रहता है इसलिए गर्म और सुविधाजनक कपड़े पहनना ही ठीक रहता हे। यात्रा के समय पैदल यात्रा करनी पड़ती है इसलिए आरामदायक फुटवियर कैरी करना जरूरी है।
- 2. आवश्यक दवाईयां साथ रखें, यदि कोई दवाएं खा रहे हैं तो उसे साथ अवश्य रखें और साथ ही शीत जगहों या उच्च दबाव वाले स्थान में स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। नियमित दवाओं को समय से लेते रहें।
- 3. चढाई करते समय यात्रा में धैर्य और हिम्मत बनाएं रखें जहां पैदल यात्रा लंबी हो सकती है और कहीं कहीं पर भीड़ होने की वजह से मानसिक शांति बनाए रखना बहुत जरूरी होता है।
- 4. पहाड़ी क्षेत्रों मे मौसम अप्रत्याशित रूप से बदल सकता है इसलिए तैयारी करते समय कपड़ों का चयन और पूर्व तैयारी होना जरूरी है।
वैष्णों देवी मंदिर में अपनाने योग्य आवश्यक बातें
वैष्णो देवी मंदिर जाने की योजना बनाते समय, आपको किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े इसके लिए आपको कुछ जरूरी बातों को ध्यान मे रखना आवश्यक है। आवश्यक बातों को समझने और उनके अनुसार जागरूक रहने के लिए यहां जानकारी दी जा रही है।
बुकिंगः आप चाहें तो यहां आने से पहले ही लंबी कतारो से बचने के लिए ऑनलाइन ही अपने प्रवेश पास और ठहरने के लिए कमरे वगैरह बुक कर सकते हैं। आरक्षण के बारें में आपको पहले से ही सजग रहना चाहिए जिससे कि आपको अनावश्यक असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए भक्तगणों के पास वैध मोबाइल नंबर होना जरूरी है। वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड दर्शन, हेलीकॉप्टर, बैटरी कार, आवास और अन्य सेवाओ के लिए स्वयं बुकिंग करता है। इसके लिए अन्य किसी भी एजेंट के बहकावे में न आएं, इससे जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए आपको वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर बताए गए नंबरों पर व्हाटसअप या कॉल कर लें या आप चाहें तो ई मेल भी कर सकते हैं।
पंजीकरणः वैष्णो देवी दर्शन के लिए पंजीकरण अनिवार्य रहता है इसके लिए आप कटरा में पंजीकरण काउंटर- बस स्टैंड, त्रिकुटा भवन, रेलवे स्टेशन और ताराकोट मार्ग में हैं या आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऑनलाइन माध्यम से पंजीकृत यात्री यात्रा शुरू करने से पहले ही कटरा बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, निहारिका कॉम्प्लेक्स, काउंटर नंबर 02, सेरली हैलीपैड ताराकोट, जम्मू हवाई अड्डे और वैष्णवी धाम जम्मू में स्थापित यात्रा पंजीकरण काउंटर वाईआरसी से ऑनलाइन बुकिंग पर्ची दिखाकर आरएफआईडी यात्रा एक्सेस कार्ड प्राप्त कर सकते हैं।
अगर आप लाइन में नहीं लगना चाहते तो श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण न होने पर बाणगंगा चेक पोस्ट से आगे नहीं जाने दिया जाएगा। यात्रा संपन्न होने के बाद आरएफआईडी वापस जमा कर लिया जाता है।
आवश्यक सामान की लिस्ट तय करेंः वैष्णो देवी यात्रा की तैयारी करते समय मौसम अनुसार कपड़ों की तैयारी करें। शीत ऋतु के समय गर्म जैकेट, दस्ताने, आरामदायक जूते साथ रखें।
स्वास्थ्य संबंधीः ऊंचाई पर जाने से पहले शारीरिक रूप से फिटनेस जरूरी है इसलिए खुद को हाइड्रेटेड रहें और दोबारा इस्तेमाल योग्य पानी की बोतल साथ रखें। साथ ही फल, स्नैक्स लेते रहें इसके अलावा कोई समस्या होने पर यात्रा करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
नियमों का पालन करेंः मंदिर कार्यकर्ताओं और सुरक्षा कर्मियो द्वारा आदेशो का पालन करें क्योंकि नियमों का पालन सभी भक्तगणों को सुविधाजनक दर्शन कराने में सहूलियत प्रदान करता है।
यात्रा का उपयुक्त समयः मौसम अनुसार यात्रा के समय का चुनाव करें जब अनावश्यक समस्याओं का सामना न करना पड़े। ग्रीष्म ऋतु में ट्रेक सामान्य और सुहावना होता है जब अत्यधिक ठंड का प्रकोप कम रहता है।
सुविधाएं : वैष्णो देवी मंदिर से मिलने वाली सुविधाओं में श्राइन बोर्ड समिति मंदिर जाने के विभिन्न रास्तों में निःशुल्क कंबल भंडार स्थापित हैं जहां प्रबंधन रात के समय में कंबल के लिए तीर्थयात्रियो से नाममात्र के लिए सुरक्षा फीस जमा करवाता है जो कंबल वापसी के समय लौटा दिया जाता है। इसके लिए रसीद भी प्रदान की जाती है।
कटरा से वैष्णो देवी भवन तक की यात्रा करने के विकल्प
कटरा से वैष्णो मंदिर जाने के कई विकल्प है जैसे आप पैदल, घोड़े, खच्चर, पिट्ठू, पालकी, बैट्री कार या हेलीकॉप्टर विकल्प का चयन कर सकते हैं।
वैष्णो देवी मुख्य भवन से भैंरो बाबा मंदिर के लिए पैदल या रोपवे माध्यम से जाना उचित रहता है।
आप चाहें तो कटरा से अर्धकुंवारी तक और अर्धकुंवारी से भवन तक के लिए भी विकल्प का चयन कर सकते हैं।
हेलीकॉप्टर सेवा कटरा से सांझी छत तक ही रहती है। सांझी छत से भवन तक की लगभग 2.5 किमी यात्रा आपको स्वयं की तय करनी होगी।
वैष्णो देवी मंदिर कटरा के आसपास घूमने योग्य अन्य स्थल
1. सिहाड़ बाबा मंदिरः सिहाड़ बाबा आध्यात्मिक स्थल प्रकृति के खूबसूरत दृश्यों के साथ शानदार आकर्षण उत्पन्न करता है जहां झरने के मंत्रमुग्ध करते नजारें और सिहाड़ बाबा के दर्शन मन को लुभाते हैं। वैष्णो देवी मंदिर के पास पर्यटन तौर पर यह स्थान कटरा से करीब 18 किमी ही दूर है जहां तकरीबन 20 मीटर ऊंचा झरना जो चिनाब नदी के किनारे स्थित है, सिहाड़ बाबा के दर्शनों को और भी ज्यादा विशेष बनाता है। सिहाड़ बाबा मंदिर में भगवान शिव का छोटा सा मंदिर है जहां मौजूद हवन कुंड में रोजाना हवन आदि पूजा पाठ कार्य किया जाता है। कटरा से यहां बस/टैक्सी से पहुंचने में तकरीबन एक घंटे का समय लग सकता है।
2. नौ देवी मंदिरः कटरा से लगभग 10 किमी दूरी पर एक शानदार प्राकृतिक गुफा है जहां नौ देवियों- शैलपुत्री, ब्रहमचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी मां, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिधात्री के एक साथ पिंडी रूपों में दर्शन मिलते हैं। यहां मंदिर में चुनरी और प्रसाद चढाया जाता है। नवरात्रि के समय यह मंदिर भक्तों से खचाखच भर जाता है। इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग की मानी जाती है, जहां विराजित देवियों की बनावट बिल्कुल वैष्णो माता की तरह ही है। नौ देवी मंदिर में पहाड़ों से निकलने वाला जल बेहद पवित्र माना जाता है जिसमें स्नान करने की परंपरा है और इसीलिए यहां कुंड भी स्थापित है।
3. बाबा धनसरः कटरा से लगभग 13 किमी की दूरी पर करूआ झील के पास करूआ गांव में बना यह मंदिर बाबा धनसर का धाम है जहां इनके दर्शन करीब 200 मीटर नीचे जाकर प्राप्त होते हैं। इनके पास ही भगवान शिव का प्राचीन मंदिर है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बाबा धनसर शेषनाग के पुत्र हैं जो पुरूष रूप में एक संत हुआ करते थे। इस गांव में एक अद्भुत परंपरा भी देखने को मिलती है कि जिस घर में पहले पुत्र का जन्म होता है तो उसकी मूर्ति को मंदिर में चढाया जाता है। किंवदंती है कि करूआ झील के पास एक राक्षस था जो करूआ गांव के लोगों को परेशान करता था, गांव के लोगो ने बाबा धनसर से मदद मांगी, जिसके फलस्वरूप उन्होने भगवान शंकर की आराधना और आव्हान किया, भगवान शिव ने आकर उस राक्षस का वध किया और गांव वालों को बचाया। हर साल महाशिवरात्रि पर यहां मेले का आयोजन होता है, इसके अलावा प्रत्येक सोमवार को भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस मंदिर में गुप्त गंगा प्रवाहित होती है, जिसका जल सद्रियों में गर्म और गर्मियो में शीतल रहता है। कटरा से यहां पहुंचने के लिए स्थानीय वाहन जैसे ऑटो रिक्शा और कैब आराम से मिल जाती है।
4. सनासरः वैष्णो देवी यात्रा के बाद यदि आप किसी हिल स्टेशन का दौरा करना चाहते हैं तो कटरा से लगभग 2 घंटे की दूरी पर स्थित सनासर हिल स्टेशन में बेहतर समय बिता सकते हैं जहां ऊंचे ऊंचे शंकुधारी पेड़ों की शोभा और हरीतिमा सजाए घास के मैदान रामबन जिले में स्थित है। यहां आप पैराग्लाइडिंग, माउंटेन क्लाइम्बिंग जैसी साहसिक गतिविधियों का भी लुत्फ ले सकते हैं।
5. बाबा जित्तो मंदिरः कटरा शहर से लगभग 5 किमी दूरी पर बाबा जित्तो का लगभग 500 साल पुराना मंदिर है जहां हर साल कार्तिक पूर्णिमा को भव्य दस दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। झिड़ी गांव के इस मंदिर में बाबा जित्तो एक साधारण किसान थे जो माता वैष्णो देवी के परम भक्त थे, जो रोज 12 साल तक 15 किमी तक पैदल चल कर माता के दर्शनों के लिए जाते थे। बाबा की तपस्या से वैष्णो माता ने जब प्रसन्न होकर कुछ मांगने को कहा तो उन्होने अपने लिए कुछ नही मांगा बल्कि गांव में सभी किसानों की सुविधा के लिए खेती में पानी के स्त्रोतों की मांग की, क्योंकि खेती में पानी की कमी के कारण सभी किसान परेशान थे। तब से माता वैष्णो देवी के आशीर्वाद से साल में सात बार अलग अलग मौसम में बारिश होती है, इसलिए आज भी यहां के किसान जब भी फसल उगाते हैं उससे पैदा होने वाले अनाज को सबसे पहले जित्तो बाबा को समर्पित करते हैं।
6. झज्जर कोटलीः कटरा से तकरीबन 35 किमी दूरी पर स्थित यह स्थल श्रेष्ठ पिकनिक स्थल के रूप में जाना जाता है। वैष्णो देवी की यात्रा करने के बाद समय बचे तो आप यहां अपने परिवार या दोस्तों संग समय बिता सकते हैं। झज्जर नदी के किनारे बसा यह पिकनिक स्पॉट प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से परिपूर्ण है। इस स्थल के चारों ओर बहता स्वच्छ निर्मल जल और शीतल हवाओं की बयार कुदरत के शानदार करिश्मे से रूबरू कराता है।
7. शिवखोड़ीः इस स्थान को देवताओं का घर भी कहा जाता है। जम्मू कश्मीर के रणसू गांव में स्थित भगवान शिव की पवित्र गुफा है, इस को वैष्णो देवी कटरा यात्रा के साथ करना आसान है जहां लोग वैष्णो देवी के दर्शनों के बाद शिवखोड़ी की यात्रा करते हैं। कटरा से रनसू की दूरी लगभग 80 किमी है। रणसू बेस कैंप से गुफा तक जाने के लिए आप एक सुरक्षित पहाड़ी रास्ते पर चल सकते हैं जो लगभग 3-4 किमी लंबा है, रास्ते में कहीं कहीं रेलिंग और विश्राम स्थल बने हुए है। पहाड़ी यात्रा के लिए पालकी, घोड़े, खच्चर की सुविधा मिल जाती है। गुफा में कैमरे व फोन ले जाना मना है इसलिए दर्शनों से पहले उन्हें क्लॉक रूम में जमा कराना जरूरी है। महाशिवरात्रि पर यहां तीन दिनो का भव्य मेला लगता है।
वैष्णो देवी मंदिर यात्रा के दौरान क्या न करें
यात्रा पंजीकरण के बिना यात्रा न करें : बगैर पंजीकरण के आपको वैष्णो देवी मंदिर यात्रा करना मान्य नहीं है।
नशा एवं मादक पदार्थ प्रतिबंधितः तीर्थयात्रा के दौरान मार्ग में पूरी तरह निषेध है।
भीड़ के समय जल्दबाजी से बचेंः अनावश्यक धक्का मुक्की न करें, इससे कोई हानि भी हो सकती है।
अत्यधिक सामान ले जाने से बचेंः यात्रा चढाई के समय बहुत जरूरत का सामान ही लेकर जाएं क्योंकि भारी सामान के वजन की वजह से चढाई में कठिनाई हो सकती है।
अंजान लोगों से ज्यादा संपर्क न रखेंः यात्रा के समय ठगी से बचने के लिए अपरिचित लोगो से ज्यादा बातचीत न करें।
कैसे पहुंचे वैष्णो देवी मंदिर
वैष्णो देवी मंदिर पहुंचने के लिए सबसे शुरूआती आधार कटरा है जहां आप हवाई, रेल और सड़क माध्यमों सहित परिवहन के कई अन्य साधनों से पहुंच सकते हैं।
हवाई मार्ग से
- वैष्णो देवी मंदिर के पास निकटतम जम्मू हवाई अड्डा है जो कटरा से करीब 50 किमी की दूरी पर स्थित है। देश के प्रमुख शहरांं जैसे दिल्ली, मुबंई, चेन्नई और श्रीनगर से यहा के लिए कई उड़ानें संचालित की जाती हैं। जम्मू हवाई अड्डे से कटरा तक की दूरी तय करने के लिए आप टैक्सी/कैब या बस के माध्यम से कटरा तक का सफर तय कर सकते हैं।
- कटरा से वैष्णो देवी के भवन जाने के लिए भी आप चाहें तो हेलीकॉप्टर सेवा का विकल्प चुन सकते हैं जहां शारीरिक रूप से कमजोर व्यक्ति, सीनियर सिटीजन या अन्य कोई विशेष जरूरत वाले व्यक्तियों को यह सुविधा मिलती है। जिसके लिए पहले ही नियत तिथि में ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
रेल मार्ग से
- कटरा तक जाने के लिए नजदीकी रेलवे स्टेशन श्री वैष्णो देवी धाम कटरा है जहा से करीब 13 किमी की पैदल यात्रा करके आप माता के धाम पहुंच सकते हैं।
- रेल से जाने का अन्य विकल्प जम्मूतवी रेलवे स्टेशन हैं, जहां पहुंच कर आप बस या टैक्सी के माध्यम से कटरा तक का सफर तय कर सकते हैं। जम्मूतवी से कटरा पहुंचने में तकरीबन 60 मिनट तक का समय लग सकता है।
सड़क मार्ग से
- कटरा तक जाने के लिए सड़क मार्ग की स्थिति बेहतर है जहां आप कार या बस से भी सफर करके कटरा पहुंच सकते हैं। कटरा पहुंचकर आप पैदल या हेलिकाप्टर के माध्यम से मां के भवन की यात्रा आराम से कर सकते हैं। कटरा से भवन के लिए आप पालकी, घोड़े या खच्चरों के माध्यम से भी तय कर सकते हैं।
निष्कर्ष
वैष्णो देवी मंदिर यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि जीवन में आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान करता दिव्य अनुभव है। तन मन जीवन में नव ऊर्जा, नव लय और नव चिंतन प्रदान करती मां वैष्णों गहन शांति और शक्ति का भंडार हैं, जो भक्तों को आध्यात्मिक चेतना का साक्षात्कार कराती हैं। सकारात्मक दृष्टि और अपार शक्ति का संचार करती माता वैष्णो के पावन धाम की यात्रा करने का सौभाग्य हर किसी को नहीं मिलता है। यदि आप इस दिव्य धाम की यात्रा पर जा रहे हैं तो कुछ नियमों, जानकारियों और पौराणिक महत्व को समझकर तीर्थयात्रा के मर्म का आभास कर सकते हैं।
वैष्णो देवी मंदिर यात्रा करते समय अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न उत्तर
प्रश्नः वैष्णो देवी मंदिर किस राज्य में स्थित है?
उत्तरः जम्मू कश्मीर, कटरा
प्रश्नः वैष्णो देवी मंदिर में यात्रा के प्रमुख पड़ाव कौन कौन से हैं?
उत्तरः चरण पादुका, बाणगंगा, अर्द्धकुंवारी गुफा, मुख्य भवन और भैंरो बाबा मंदिर।
प्रश्नः वैष्णो देवी यात्रा कितने किमी है?
उत्तरः कटरा से वैष्णो माता मंदिर की चढाई यात्रा तकरीबन 14 किमी है।
प्रश्नः वैष्णो देवी मंदिर किस पर्वत पर स्थित है?
उत्तरः त्रिकूट पर्वत पर
प्रश्नः वैष्णो देवी मंदिर से निकटतम रेलवे स्टेशन कौन सा है?
उत्तरः वैष्णो देवी मंदिर से नजदीकी रेलवे स्टेशन श्री माता वैष्णो धाम कटरा है।
प्रश्नः वैष्णो देवी के मुख्य मंदिर में देवी वैष्णवी किन देवियों के साथ पिंडी स्वरूप में विराजित हैं?
उत्तरः महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती
प्रश्नः वैष्णो देवी मंदिर में दर्शन करने के लिए पंजीकरण सुविधा किन मोड में है?
उत्तरः ऑनलाइन व ऑफलाइन, किसी भी मोड में पंजीकरण सुविधा का लाभ ले सकते हैं।
प्रश्नः क्या, वैष्णो देवी मंदिर दर्शन के बाद भैंरो मंदिर दर्शन करने जाना चाहिए?
उत्तरः हां, वैष्णो देवी मंदिर दर्शन के बाद भैंरो मंदिर दर्शन करने से यात्रा सफल व पूर्ण मानी जाती है।
प्रश्नः वैष्णो देवी मंदिर की चढाई यात्रा संपन्न करने के कौन कौन से विकल्प हैं?
उत्तरः पैदल, पालकी, घोड़े, खच्चर, बैट्री कार और हेलीकॉप्टर।
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