• Nov 20, 2025

ट्रेकिंग के लिहाज से दिसम्बर का समय आदर्श समय होता है, जब ठंडी हवा और बर्फ से ढके पहाड़ परीकथा में तब्दील हो जाते हैं। शीतकालीन मौसम में देवदार के जंगल बर्फ की सफेद चादर में ढक जाते हैं। हिमालय की वादियां पहले से कहीं अधिक सुंदर हो जाती हैं। रोमांचक गतिविधियों के लिए ठंड का मौसम सबसे ज्यादा शानदार होता है। सर्दियों के समय एकांत और आकर्षक होता है जब गंतव्यों पर भारी भरकम भीड़ देखने को नहीं मिलती। सभी ट्रेकिंग शौकीनों के लिए यह समय वास्तव में प्रकृति का दिया अनमोल तोहफा है, जिसमें कठिन रास्तों की सैर भी स्वर्ग जैसा आनंद प्रदान करते हैं। यहां भारत के बेस्ट शीतकालीन ट्रेक दिए जा रहे हैं जिन्हें आप सर्दियों के मौसम में एक्सप्लोर कर सकते हैं। 

सर्दियों के समय बेस्ट ट्रेक कैसे चुनें 

दिसम्बर के समय जब आप ट्रेकिंग का मन बनाएं तब योजना बनाने में कुछ फैक्टर्स का ध्यान रखना जरूरी है। ऐसे में ये फैक्टर आपकी मदद कर सकते हैं। 

ट्रेक की ऊंचाई और कठिनाईः ट्रेकिग का मूड बनते ही सबसे पहला विचार मन में ट्रेकिंग पथ को लेकर आता है। ट्रेकिंग पथ का कठिनाई स्तर और ऊंचाई का स्तर कितना सही होना चाहिए। बहुत से ट्रेकिंग पथ लगभग 10,000 फीट की ऊंचाई पर होते हैं जहां पहुचना शुरूआती लोगों के लिए भी ज्यादा मुश्किल नहीं होता है। कुछ ट्रेकिंग पथ बहुत ऊंचाई पर होते हैं जहां पहुंचने के लिए ट्रेकिंग की बेहतर कुशलता होनी जरूरी होती है। 

मौसम का पूर्वानुमान और स्थितिः मौसम की पूर्वानुमान स्थिति की जांच कर ही ट्रेकिंग की शुरूआत करें जहां जाने के लिए शीतकालीन कपड़ो की समुचित व्यवस्था जरूरी है और अत्यधिक बर्फ के कारण जिन रास्तों पर रूकावट हो जाए तो वहां के प्रति सजग और सतर्क रहें 

ट्रेकिंग में लगने वाला समय और अवधिः दिसम्बर के दिनों में जब बर्फबारी के बीच ट्रेकिग करना हो तो ज्यादा लंबे समय अवधि की ट्रेकिंग करने की बजाए छोटे ट्रेक जैसे तीन से पांच दिन की योजना वाले ट्रेकिंग प्लान फॉलों करें। 

टै्रकिंग व्यवस्थाः ट्रेकिंग के लिए उचित और समुचित व्यवस्था बनाएं जिससे उस दौरान समस्या का सामना न करना पड़े। 

आसपास के दृश्य और परिवेशः ट्रैकिंग विशेष पथ पर विभिन्न तरह के नज़ारें आकर्षित करते हैं जिनके बीच भिन्न तरह की पृष्ठभूमियां होती हैं कहीं घास के मैदान या पहाड़ियां हैं तो कहीं घने जंगल और ऊंची चोटियां हैं। शीतकालीन समय मेंं इन भिन्न पृष्ठभूमियों की विशेषताएं अलग अलग होती हैं। 

सहायता सुविधा और बुनियादी आवश्यकताएंः ट्रेकिंग के लिए बेहतर पहुंच, गाइडेड और आपातकालीन सेवा जहां आसानी से उपलब्ध हो सकें वही क्षेत्र चुनना चाहिएं। 

दिसम्बर 2025 में शीर्ष शीतकालीन ट्रेेक

1. केदारकांठा ट्रेकः भारत के लोकप्रिय शिखर ट्रेक में से एक शुरूआती लोगों के लिए रोमांचक आनंद प्रदान करता है। ट्रेक की शुरूआत में ही केदारकांठा शिखर के दर्शन हो जाते है, जहां तुरंत बाद रास्ता खूबसूरत जंगल की ओर जाता है। जहां से शिखर नहीं दिखता है। जंगल पार होने के बाद फिर से शिखर दिखना शुरू हो जाता है। सर्दियों में बर्फ के समय में भोजा दादी कैंपसाइट से शिखर की खड़ी चढाई शुरू हो जाती है जो इस समय कुछ कठिन भी लगती है। स्वर्गरोहिणी पर्वत, बंदरपूंछ पर्वतमाला, कालानाग पर्वत और गंगोत्री पर्वतमाला के भव्य दृश्य आकर्षक लगते हैं। अक्सर जब सर्दियों में भारी बर्फबारी के चलते हिमालयी चोटियां बंद हो जाती है उस समय भी यह केदारकांठा चोटी खुली रहती है, जो इसे भारत का सर्वश्रेष्ठ शीतकालीन ट्रेक बनाती है। 

यात्रा कार्यक्रम 

दिन 1ः देहरादून से कोटगांव तक जाएं जिसमें दूरी करीब 195 किमी और कम से कम 10 घंटे लग सकते है। 

दिन 2ः कोटगांव से खुजाई तक ट्रेक करें जो लगभग 6,400 फीट से 9,460 करीब ऊंचा हैं। इस की दूरी लगभग 5.3 किमी है जिसे तय करने में लगभग 5 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 3ः खुजाई से भोजा ढाडी तक ट्रेकिंग करें जिसकी दूरी लगभग 3 किमी है और अवधि 3.5 घंटे है। केदारकांठा शिखर होते हुए खुजाई तक वापसी करें। 

दिन 4ः खुजाई से कोटगांव और कोटगांव से देहरादून तक वापस आएं। 

2. कुआरी पास ट्रेकः गढवाल हिमालय के शानदार नजारों को दिखाता हुआ भव्यता के शिखर तक ले जाता है। उत्तराखंड के मनमोहक पर्वतीय दृश्यों जैसे नंदा देवी और देवदार, ओक के जंगलों और बर्फबारी के दृश्यों से ढके विशाल घास के मैदानों को दर्शाता है। मध्यम चढाई के दर्जे का यह ट्रेक जंगलो की सैर और इस दर्रे की रोमांचक चढाइ से परिचित कराता है। इस ट्रेक की दूरी लगभग 22 किमी है जो लगभग 12000 फीट से भी कुछ ज्यादा ऊंचाई पर है। इसे पूरा करने मेंं लगभग 6 दिनों का समय लग सकता है। पहले दिन चुनौती भरा होता हे जब 3000 फीट की चढाई करना होता है।

यात्रा कार्यक्रम 

दिन 1ः ऋषिकेश से कारची तक ड्राइव कर जाएं जो लगभग 255 किमी है और अवधि करीब 9-10 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 2ः करची से अखोतघेटा तक ट्रेंकंग करें जिसकी दूरी लगभग 2.75 किमी और समय लगभग 4-5 धंटे लग सकते हैं। 

दिन 3ः अखोतघेटा से खुल्लारा तक लगभग 2.5 ट्रेकिंग जिसके लिए लगभग 4-5 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 4ः कुआरी दर्रा होते हुए खुल्लारा से ताली तक ट्रेक जहां समय लगभग 8-9 घंटे और दूरी लगभग 7.65 किमी है। 

दिन 5ः ताली से औली तक ट्रेक करें और करची के लिए ड्राइव करें। 

दिन 6ः करची से ऋषिकेश की यात्रा कर वापसी करें 

3. दयारा बुग्याल ट्रेकः दयारा बुग्याल ट्रेक घास के मैदानों के लिए जाना जाता है जहां बुग्याल एक तरह की घास होती है। सर्दियों के दिनों मे सबकुछ बर्फमय हो जाता है। दयारा बुग्याल ट्रेकिंग को आप तीन दिनांं मेंं संपन्न कर सकते हैं। आसान और शानदार ट्रेंकिंग का यह संयोजन आगुंतको को खूब आकर्षित करता है। दयारा बुगयाल ट्रेकिंग के समय रायथल कैंपस यादगार अनुभव है जहां सामने श्रीकांत पर्वत दिखाई देता है इस कैंपस में लगभग 10-15 पक्षी प्रजातियो के सुंदर दर्शन कर सकते हैं। इस ट्रेक में घास के मैदानों की विशालता और समृद्ध जैव विविधता आकर्षित करती है। जंगल के बीचों बीच बनी कैंपसाइटे हिमालय के शानदार स्थलों में से एक है। जहां गुई, चिलापाड़ा और नयाता घने जंगलो के बीच बसे घास के मैदान हैं। दयारा बुगयाल प्रकृति के बेहतरीन परिदृश्यों की झलक प्रदान करता है। जहां आप ट्रेकिंग के लिए आसानी से पहुंच सकते हैं। 

यात्रा कार्यक्रम 

दिन 1ः देहरादून से रायथल तक ड्राइव करे जहां लगभग 185 किमी दूरी को लगभग 9 घंटे मे तय कर सकते हैं। 

दिन 2ः रायथल से गुई तक ट्रेक करें जिसकी दूरी 4.5 किमी और अवधि लगभग 6-7 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 3ः गुई से चिलापाड़ा तक ट्रेक करे, दूरी लगभग 2.5 है और समय 2-3 घंटे लग सकते हैं

दिन 4ः चिलापाड़ा से दयारा टॉप होते हुए नायता तक ट्रेक करें। 

दिन 5ः नयाता से रायथल तक ट्रेक करें।

दिन 6ः रायथल से देहरादून वापस ड्राइव करें। 

4. ब्रहमताल शीतकालीन ट्रेकः त्रिशूल पर्वत की छाया में उच्च ऊंचाई वाली झील की ट्रेकिंग का आनंद बेहतरीन अनुभवों में से एक है। यह एक ऐसा ट्रेक है जिसके नजारें अन्य ट्रेक्स मेंं मिलना दुर्लभ है इसीलिए इस ट्रेक को स्पेशल और भव्य कहते हैं। दरअसल इस ट्रेक पर जगमगाता त्रिशूल पर्वत और नंदा घुंटी पर्वतों के साये आकर्षित करते हैं। सुंदर जंगलों और घास के मैदानों से होता हुआ यह ट्रेक ऊंचाई पर स्थित झील तक ले जाते हैं इसके साथ ही आपके सामने चोटियों का एक नया समूह खुलता है जहां आप माउंट नीलकंठ और हाथी गौरी चोटियों को देखते हैं। यहां से त्रिशूल और नंदी पर्वत की अडिगता को करीब से महसूस कर सकते हैं। शाही अंदाज और शानदार मौसम की खासियत बयां करता यह ट्रेक सिर्फ हिमालयी पहाड़ों तक ही सीमित नहीं है वरन् जंगल, शांत झीलें और विशाल चोटियों से होकर गुजरते हुंए आकर्षित करते हैं। 

यात्रा कार्यक्रम 

दिन 1ः ऋषिकेश से लोहागंज तक ड्राइव करें जिसमें लगभग 270 किमी दूरी और 10 से 11 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 2ः लोहाजंग से गुजरेनी तक ट्रेक करें जो 4.5 किमी दूर है और अवधि तकरीबन 5 घंटे लग सकते हैं

दिन 3ः गुजरेनी से तिलांडी तक लगभग 3 किमी और तय करने में लगभग 4 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 4ः तिलांडी से ब्रहमताल टॉप तक ट्रेक करें जो करीब 8 किमी दूर है और इसे तय करने में लगभग 8 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 5ः ब्रहमताल से लोहाजंग तक ट्रेक करें 

दिन 6ः लोहजंग से ऋषिकेश तक वापसी की ड्राइव करें। 

5. देवरियाताल चंद्रशिला शीतकालीन ट्रेकः चंद्रशिला ट्रेक से गढवाल और कुमाऊं दोनो प्रतिष्ठित चोटियों के विशाल और भव्य नजारे दिखते हैं। बाईं तरफ गंगोत्री शिखर समूह, केदारनाथ, केदार गुबंद, मंदानी पर्वत और जंहुकूट और सामने शानदार चौखंभा है। इनमें से कई पर्वत करीब 7,000 मीटर से भी ज्यादा ऊंचे हैं। चंद्रशिला शिखर पर चढाई का बेहतरीन संतुलन इसे अद्वितीय श्रेणी में शुमार करता है, जो बहुत ज्यादा कठिन नहीं है। देवरिया चंद्रशिला ट्रेक में पहुंचकर ऐसे लगता है कि आप दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर हैं, जहां से ठीक सामने चौखंभा पर्वतमाला के नजारों के साथ करीब 20 प्रतिष्ठित चोटियों के परिदृश्य दिखाई देते हैं। यह स्थान पक्षी प्रेमियों के लिए भी स्वर्ग समान है जहां आप एक से बढकर एक अद्वितीय पक्षियों की श्रृंखलाएं देख सकते हैं। 

यात्रा कार्यक्रम 

दिन 1ः ऋषिकेश से सारी बेस कैंप तक ड्राइव कर पहुंचे 

दिन 2ः सारी से देवरियाताल तक ट्रेक जिसकी दूरी 4.1 किमी और समय लगभग 2.5 घंटे लग सकता है। 

दिन 3ः देवरियाताल से रोहिणी बुग्याल के रास्ते होते हुए सियालमी तक ट्रेकिंग कर पहुंच सकते हैं जिसमें लगभग 7 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 4ः सियालमी से बनिया कुंड तक ट्रेकिग जिसमें 5 किमी की दूरी तय करने में लगभग 6 घंटे लग सकते हैं। 

दिन 5ः बनिया कुंड से चंद्रशिला तक वाया तुंगनाथ तक ट्रेक कर सारी तक की दूरी तय करना। 

दिन 6ः सारी से वापस ऋषिकेश तक पहुंचना। 

6. त्रिउंड ट्रेकः दिसम्बर के महीने में त्रिउंड ट्रेक पर जाकर बर्फबारी के शानदार नजारों का आनंद लेना बर्फ के पसंदीदा लोगों को खूब आकर्षित करती है। हिमाचल प्रदेश के धौलाधार पर्वतश्रेणियों में बसा यह प्रसिद्ध ट्रेकिंग मार्ग पहली बार ट्रेकिंग करने वालों के लिए भी आसान है। बर्फीले पहाड़ और शानदार घाटियां तिब्बती संस्कृति को प्रदर्शित करती हुई कुदरत के करिश्माई नजारों से अवगत कराती हैं। विभिन्न पक्षियो, वन्य प्राणियों के दर्शन कराता वातावरण जहां भीड़भाड़ कम ही होती है। बहुत ज्यादा समय न लगने के कारण इस ट्रेक पर सप्ताहांत में भी जाया जा सकता है जो इसकी एक खासियत है। करीब 2 दिन की अवधि में इस ट्रेक की लगभग 2,850 मीटर ऊंचाई लिए 18 किमी की दूरी को आसानी से तय किया जा सकता है। इस पर्वतीय ट्रेक में हरे भरे जंगलों के रास्ते, तारों के नीचे शिविर कैंप और पर्वत के चहुंओर से दुर्लभ नजारो का यादगार अनुभव ले सकते हैं। 

यात्रा कार्यक्रम

दिन 1 : मैक्लोडगंज या धर्मशाला से गल्लू देवी मंदिर तक अपनी यात्रा शुरू करें। इसके बाद जंगलो और पहाड़ियो से होकर त्रिउंड तक पैदल चलना शुरू करें जहां पैदल चलने में करीब 3-4 घंटे लग सकते हैं। त्रिउंड पहुंचने पर आराम करें, कैंपिग कर रहें है तो टेंट लगा कर रूकें। 

दिन 2ः सुबह जल्दी उठकर त्रिउंड से सूर्योदय के नजारें देखें और पहाड़ों के ऊपर आसमान के रंग बदलते देख सकते हैं। अब दोपहर में स्नोलाइन या लाहेश गुफा देखना है तो थोड़ा और पैदल चल सकते हैं। अब त्रिउंड से गल्लू देवी मंदिर के लिए वापसी यात्रा शुरू करें और मंदिर पहुंचकर आप मैक्लॉडगंज या धर्मशाला वापस जा सकते हैं। 

7. संदक्फु विंटर ट्रेकः भारतीय नेपाल सीमा पर साथ साथ चलने वाला यह ट्रेक पूर्वोत्तर भारत का सर्वोत्तम ट्रेक है। नेपाली संस्कृति और चाय घरों की रौनक इस ट्रेक को और भी ज्यादा खास बनाती है। दिसम्बर के महीने में भयंकर बर्फबारी और इस ट्रेक पर दुनिया की पांच सबसे ऊंची चोटियों को देखना वास्तव में आकर्षित करता है, जो स्लीपिंग बुद्धा की तरह दिखती हुई और भी दिलचस्प लगती है। यहां एवरेस्ट समूह बादलों से ऊपर प्रतीत होता हुआ दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत है, फिर चौथी ऊंची चोटी मकालू, पांचवी सबसे ऊंची चोटी ल्होत्से और छठी सबसे ऊंची चोटी चो ओयू है। एवरेस्ट, कंचनजंगा और मकालू पर्वत सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करते हैं। इस ट्रेक पर छिपे हुए रत्नों की तरह गांव मौजूद हैं जो यूरोपीय शैली के आकर्षण के साथ किसी सीनरी जैसे सुंदर दिखते हैं। 

यात्रा कार्यक्रम 

दिन 1ः आधार शिविर सेपी से समंदेन तक ट्रेक करें जो करीब 14 किमी दूरी के साथ लगभग 8 घंटों में पूरी की जा सकती है। 

दिन 2ः समंदेन से मोली तक ट्रेक करें जो लगभग 10 किमी है। अवधि लगभग 7 घंटे 

दिन 3ः मोली से फालुट होते हुए सबरग्राम तक ट्रेक करें जो 17.5 किमी दूरी पर 8-9 घंटे का सफर कर तय किया जा सकता है। 

दिन 4ः सबरग्राम से आल तक ट्रेक करें जो 13 किमी की दूरी और लगभग 8 घंटे का सफर है। 

दिन 5ः आल से संदकफू तक गुरूदम तक ट्रेक करें, दूरी लगभग 10 किमी और अवधि करीब 7 घंटे

दिन 6ः गुरदुम से आधार शिविर सेपी तक पैदल वापसी यात्रा संपन्न करें। 

8. आंचा टॉप शीतकालीन ट्रेकः उत्तराखंड की यमुनोत्री घाटी से शुरू हुआ ये ट्रेक बाली दर्रें के अलावा बहुत खोजा गया ट्रेक है। यह ट्रक मंत्रमुग्ध करते जंगलो से होकर जाता हुआ विशाल दिनाला बुग्याल तक तेजी से जाता है जिसका असली करिश्मा घास के मैदानों मे ही देखने को मिलता हे जो दिसम्बर महीने में बर्फबारी के शांत नजारो से सराबोर हो जाते हैं। आप यहां बंदरपूछ और स्वर्गरोहिणी पर्वतमालाओं से होकर ट्रेकिग का आनंद लेते हैं और बुग्याल में फैली तीन हिमनद झीलों को भी देख सकते हैं। 

यात्रा कार्यक्रम 

दिन 1ः बेस कैंप राणाचट्टी से बामसिंह तक ट्रेक कर लगभग 4 किमी दूरी को 3 घंटे में तय कर सकते हैं। 

दिन 2ः बामसिंह से दिनाला कैंप तक ट्रेक जिसे लगभग 4 घंटे में कर सकते हैं। 

दिन 3ः दिनाला से आंच टॉप होते हुए आंचा कैप तक ट्रेक करें, जिसकी दूरी लगभग 8 किमी और अवधि 7 घंटे है। 

दिन 4ः आंचा टॉप से राणाचट्टी आधार शिविर तक वापसी यात्रा संपन्न करें। 

9. करेरी लेक ट्रेकः हिमाचल प्रदेश के सबसे अद्भुत और शानदार ट्रेक में से एक यह करेरी झील ट्रेक करीब 9,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित है जहां करेरी झील एक हिमनदीय मीठे पानी की झील है। दिसम्बर के दिनों में यह झील जम जाती है जिसका आकर्षण देखते बनता है। धौलाधार पर्वतमाला पर बसा यह ट्रेक अपने सुंदरतम नजारों और मनोरम पर्वतीय रास्तों के लिए जाना जाता है। इस ट्रेक को पूरा होने में लगभग 3 दिन 2 रातों का समय लगता है जिसमें 4,750 फीट से लगभग 9,700 फीट की ऊंचाई चढी जाती है। 

यात्रा कार्यक्रम 

दिन 1ः बेस कैंप करेरी गांव से रेवती ब्रिज कैंपसाइट तक ट्रेकिंग जिसमें 4-5 घंटे तक का समय लग सकता है। दूरी लगभग 6 किमी। 

दिन 2ः करेरी झील तक ट्रेक और रेवती कैपंसाइट तक वापसी जिसकी दूरी लगभग 14 किमी है। 

दिन 3ः रेवती से करेरी गांव तक वापसी संपन्न कर सकते हैं। 

ट्रेक यात्रा सुझाव कार्यक्रम 

पैकिंग टिप्स 

  • ट्रेकिंग के दौरान इंसुलेटेड यानी वायु/जलरोधी कपड़ों को वरीयता दें जैसे गर्म जैकेट और पतलून 
  • कपड़े कई परतों में पहनें। इनरवियर गर्म और बीच में ऊनी कपड़े पहनें। 
  • फुटवियर्स इंसुलेटेड पहने विशेषकर जूतों को वरीयता दें यदि बर्फ पर चलने की योजना हो। 
  • दस्ताने, मफलर, वूलन कैप और इन सबके साथ ही बर्फ की चकाचौंध से बचने के लिए सन ग्लासेज का प्रयोग करना चाहिए 
  • हेड टॉर्च, बर्फ में चलने में मदद करते ट्रेकिंग पोल अवश्य साथ रखें।
  • ऊंचे स्थानों पर कैंपिग करने के लिए स्लीपिंग बैग का तापमान शून्य से भी नीचे होना चाहिए। 
  • अतिरिक्त कपड़ों कके साथ पानी, स्नैक्स और ड्राई नाश्ता भी अवश्य रखें। 
  • फर्स्ट एड किट, ऊचाई से होने वाली दिक्कतों के लिए दवा और पानी शुद्धिकरण टेबलैट रखना जरूरी है। 

मौसम संबंधित सुझाव

  • दिसम्बर के मौसम में राते बहुत ज्यादा सर्द हो सकती है इसलिए आराम करने के लिए उपयुक्त सामान की व्यवस्था जरूरी है। 
  • ट्रेकिंग के दौरान अधिक ऊंचाई पर धूप की रोशनी तेज फील हो सकती है, ऐसे में बेहतर होगा कि बचाव के लिए धूपरोधी लोशन या क्रीम का इस्तेमाल करें। 
  • शीत ऋतु के दौरान मौसम कभी भी अचानक तेजी से बदल सकता है तो ऐसे में यात्रा कार्यक्रम में लचीलापन बनाए रखें। बेहतर है कि बफर दिन की तैयारी पहले से ही रखें। 
  • दूरदराज के शिविर जो बहुत ऊंचाई की ओर है तो वहां जाने वाले रास्तों और वाहनों का अवलोकन करें।

स्वास्थ्य संबंधी सुझाव

  • स्वास्थ्य के संबंध में लापरवाही न बरतें। सर्दी के कारण मध्यम स्तर की ट्रेकिंग भी मुश्किल लग सकती है। 
  • यदि आप लगभग 10,000 फीट से भी ऊपर जा रहे हैं तो स्वयं को वहां मिलने वाले मौसम के अनुकूल बनाने की कोशिश करें। बेहतर रहेगा कि पानी खूब पिएं और अच्छे से आराम करें। 
  • ट्रेकिंग समूह में करने की कोशिश करें, बेहतर है कि स्थानीय गाइड की सहायता लें। 
  • अपना मार्ग और अनुमानित वापसी पहले से ही किसी को बता कर रखें। 
  • निकटतम स्वास्थ्य केंद्र की जानकारी और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर हमेशा साथ रखें। 

ट्रेकिंग के लिए भारत में सर्वोत्तम राज्य

उत्तराखंड शीतकालीन जगह : उत्तराखंड में सर्दियों के ट्रेक एक ऐसा रोमांचक सफर है जो पहले तो शायद कुछ घबराहट का एहसास कराए लेकिन अंत हमेशा करिश्माई अंदाज और ठंड के दिनों में मंत्रमुग्ध करते नजारों से रूबरू कराएगा। आप यहां नागटिब्बा, गुलाबी कांथा और खलिया टॉप ट्रेक की सैर भी कर सकते हैं। नागटिब्बा दोनो तरफ करीब 20 किमी का ट्रेकिंग सफर है जहां 2-3 दिन में आप पंतवारी आधार शिविर के साथ करीब 9,915 फीट की ऊंचाई की आसान ट्रेकिंग कर सकते हैं। उत्तराखंड में ही मौजूद गुलाबी कांथा ट्रेक की दूरी करीब 28 किमी है जिसकी ऊंचाई 13,000 फीट है। आसान से मध्यम स्तर की यह ट्रेकिंग मौसम और स्वास्थ्य स्तर को देख के ही शुरू करें। इसका आधार शिविर हनुमान चट्टी है। खलिया टॉप ट्रेक पर 4-5 दिन का समय निकालकर मुनिस्यारी आधार शिविर के माध्यम से करीब 6 किमी की दूरी तय कर लगभग 11,000 फीट ऊंचाई की आसान ट्रेकिंग का आनंद ले सकते हैं। 

हिमाचल और आसपासः विहंगम परिदृश्यां की सुंदरता के लिए हिमाचल प्रदेश सर्दियों के दिनों में और भी ज्यादा सुदंर हो जाता है। जब चारों ओर श्वेत बर्फ के शानदार नजारों के साथ यह खूबसूरत ट्रेकिंग स्थलो में बदल जाता है। सुंदरता और रोमांचकता का अद्भुत संयोग कराता हिमाचल अपने कई ट्रेकिग स्थलों के लिए जाना जाता है। इस समय यहां ब्यास कुंड ट्रेक, हम्टा दर्रा, मनाली शीतकालीन, कसोल, पराशर झील, पिन पार्वती, देव टिब्बा और किन्नौर किन्नर कैलाश ट्रेक की यात्रा भी कर सकते हैं। हिमाचल प्रदेश में हिमालय की पीरपंजाल और धौलाधार श्रेणियों पर अवस्थित इन ट्रेक्स की सुंदर मनोरम परिदृश्य से तन मन उल्लसित और उमंगों से परिपूर्ण हो जाता है। 

पश्चिमी घाट और कम ऊंचाई वाले ट्रेकः शीतकालीन समय में पश्चिमी घाट अपनी खूबसूरती और सुंदरता के लिए ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए खास जगह के रूप में जाना जाता है। शानदार पहाड़ी क्षेत्र जहां हरियाली, झरने, झीलें और पहाड़ ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए जन्नत से कम नहीं है। पश्चिमी घाट में अगुम्बे ट्रेक शानदार अनुभव प्रदान करता है जो करीब 9 किमी लंबा है। यहा का मौसम हमेशा बदलता ही रहता है जिस वजह से इसकी रोमाचंकता और भी ज्यादा बढ जाती है। कुडलदू रपिड्स ट्रेक नदी के किनारे से होकर गुजरने वाला ट्रेक है जो मध्यम कठिनाई लिए हुए है। माथेरान ट्रेक लोकप्रिय पर्यटन ट्रेक है जो घने जंगलों, पहाड़ियों और घाटियो से होकर निकलने वाला करीब 8 किमी है। कास पठार ट्रेक महाराष्ट्र में स्थित है जो अपने फूलों के मैदानों के लिए प्रसिद्ध है इसकी लंबाई 6 किमी और स्तर मध्यम कठिनाई वाला है। पश्चिमी घाट पर बसा केरल का वायनाड ट्रेक अपने जंगलो, झरनों और झीलों के लिए जाना जाता है जो लगभग 7 किमी लंबा है। यहां आप कई तरह के जानवर और पौधों को देख सकते हैं। 

अन्य यात्रा योजनाएं और ट्रेकिंगः भारत में ट्रेकिंग स्थलों के लिए कर्नाटक, सिक्किम, लेह लद्दाख, अरूणाचल प्रदेश और अन्य जगहें भी प्रसिद्ध हैं। जहां आप ट्रेकिंग के साथ ही अन्य रोमांचक गतिविधियों का भी आनंद ले सकते हैं। हिल स्टेशनो को घूमने के साथ ही दर्शनीय स्थलों के दर्शन कर सकते हैं। बर्फ में विभिन्न तरह के खेलों का आनंद लेने के साथ ही फोटोग्राफी का सुहावना अनुभव ले सकते हैं।

निष्कर्ष

दिसम्बर 2025 में सर्दियों का मौसम और इन ट्रेक्स की विशेषताएं अनोखे और आश्चर्यजनक अनुभव प्रदान करते हैं। बर्फ से ढकी पहाड़ियो की शांति, हिल स्टेशनों पर चलती तेज शीतल हवाएं जब पर्यटन स्थलो की शांति को और भी ज्यादा गहनता प्रदान करती हैं। घने जंगलों की खामोशी को भीतर तक महसूस करना हो या ऊंचाई पर मौजूद घास के मैदानों पर चल रहे हों। सर्दियों की सर्द रातें और दूर चोटियों के सुनहरे परिदृश्य ट्रेकिंग की खूबियों को और भी ज्यादा मोहकता देते हुए पर्यटकों को आकर्षित करती है। आप चाहें केदारकांठा चुने या चोपता, ब्रहमताल बर्फ की श्वेत छवि पर्यटन का आनंद और भी ज्यादा बढा देती है। पश्चिमी घाटों पर बसे ट्रेकिंग स्थलों की हरियाली और सुहावने मौसम के परिदृश्यों से परिपूर्ण रास्ते प्रकृति और रोमांचक प्रेमियों को आकर्षित करते हैं। 

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